12.विद्युत. Electricity :-
1.विद्युत धारा किसे कहते हैं?
उत्तर. किसी चालक के विद्युत आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं
2. विद्युत परिपथ किसे कहते हैं?
उत्तर. किसी विद्युत धारा के सतत तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं
3. विभव किसे कहते हैं?
उत्तर. चालक की वह विद्युतीय स्थिति जो किसी दूसरे चालक के साथ जुड़कर आवेश के प्रवाह की दिशा को बताए
4.विभवांतर किसे कहते हैं?
उत्तर. किसी चालक में वह ऊर्जा और उस में प्रवाहित आवेश के अनुपात को विभवांतर कहते हैं V=W/Q
5.धन विभव किसे कहते हैं?
उत्तर. जब धनावेश वस्तुओं से पृथ्वी की ओर या इलेक्ट्रॉन पृथ्वी से वस्तु से पृथ्वी की ओर प्रवाहित हो तो उस विभव को धन विभव कहते हैं
6.ऋण विभव किसे कहते हैं?
उत्तर.जब धन आवेश पृथ्वी से वस्तु या इलेक्ट्रॉन वस्तु से पृथ्वी की ओर प्रवाहित हो तो उस विभव को ऋण विभव कहते हैं
7.प्रतिरोध किसे कहते हैं?
उत्तर. प्रतिरोध चालक का वह गुण है जिससे चालक धारा के प्रवाह का विरोध करता है प्रतिरोध का SI मात्रक ओम है
8.ओहम किसे कहते हैं?
उत्तर.किसी चालक का प्रतिरोध एवं ओहम होता है यदि चालक के सिरों पर एक वोल्ट का विभवांतर होने से एक एंपियर विद्युत धारा प्रवाहित हो
9.वोल्टमीटर किसे कहते हैं?
उत्तर.वाल्टमीटर एक ऐसा यंत्र है जो भी विभवांतर को मापने के काम आता है
10.चालक किसे कहते हैं?
उत्तर. जिन पदार्थों में से विद्युत धारा प्रवाहित होती है उन्हें चालक कहते हैं.
11.कुचालक किसे कहते हैं?
उत्तर. वे पदार्थ जिनसे विद्युत धारा प्रवाहित नहीं हो पाती है उन्हें कुचालक कहते हैं
12.एमिटर किसे कहते हैं?
उत्तर. विद्युत धारा को मापने के लिए प्रयुक्त यंत्र को एमिटर कहते हैं
13.धारा नियंत्रक किसे कहते हैं?
उत्तर. यह वह यंत्र है जिसकी सहायता से विद्युत परिपथ में बहने वाली धारा के मान को बढ़ाया घटाया जा सकता है
14.एक वोल्ट किसे कहते हैं?
उत्तर. यदि किसी चालक से एक कूलाम आवेश प्रवाहित करने से एक जूल कार्य कराया जाए तो चालक के सिरों के बीच विभवांतर एवं वोल्ट होगा IV=IJ/IC
15.ओहम का नियम क्या हैं?
उत्तर. किसी चालक के सिरों के बीच में विद्युत और उसमें से बहने वाली विद्युत धारा का अनुपात सदा स्थिर रहता है यदि चालक की ताप आदि जैसी भौतिक स्थिति में अंतर न हो V∝ I या V= IR
16.विद्युत ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर. विद्युत धारा द्वारा किसी कार्य को करने की क्षमता को विद्युत ऊर्जा कहते हैं
17.विद्युत शक्ति किसे कहते हैं?
उत्तर. किसी चालक में विद्युत ऊर्जा के व्यय होने की दर को विद्युत शक्ति कहते हैं
18.वाट किसे कहते हैं?
उत्तर. वॉट विद्युत शक्ति का वह मात्रक है जिसमें एक जूल कार्य प्रति सेकंड पूर्ण होता है
19.किलोवाट किसे कहते हैं?
उत्तर. यह वह विद्युत शक्ति है जो1000 जूल सेकंड कार्य संपन्न करती है
20.किलो वाट घंटा किसे कहते हैं?
उत्तर.यह वह विद्युत ऊर्जा है जो 1 किलो वाट शक्ति वाले विद्युत पथ में 1 घंटे में व्यय होता है 1KWh=3.6x106J
21.विद्युत जनित्र किसे कहते हैं?
उत्तर. प्रत्यावर्ती विद्युत धारा उत्पन्न करने वाले उपकरण को विद्युत जनित्र कहते हैं
22. ट्रांसफार्मर किसे कहते हैं?
उत्तर. विद्युत की वोल्टता को बढ़ाने तथा घटाने वाले उपकरण को ट्रांसफार्मर कहते हैं
23.प्रत्यावर्ती धारा किसे कहते हैं?
उत्तर. यह वह धारा है जिस की दिशा निरंतर बदलती रहती है
24. दिष्ट धारा किसे कहते हैं?
उत्तर. यह वह धारा है जिसकी दिशा सदा एक ही रहती है
25.आवेश संरक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर. आवेश नया तो उत्पन्न किया जा सकता है और ना ही नष्ट किया जा सकता है
26. विद्युत लेपन किसे कहते हैं?
उत्तर. किसी धात्विक वस्तु पर विद्युत के द्वारा दूसरी धातु की तह जमाने की विधि को विद्युत लेपन कहते हैं
27.अतिचालक किसे कहते हैं?
उत्तर. जिन पदार्थों का प्रतिरोध निम्न ताप पर खत्म हो जाता है उन्हें अतिचालक कहते हैं
28. जूल का उष्मा नियम क्या है?
उत्तर. किसी प्रतिरोधक में विद्युत धारा के बहने से यदि उसमें उष्मा उत्पन्न होती है तो उष्मा की यह मात्रा विद्युत धारा का वर्ग के प्रति तथा समय के अनुक्रमानुपाती होती है
29.कुलाम किसे कहते हैं?
उत्तर. यह विद्युत आवेश 6×10-18इलेक्ट्रॉनों में निहित आवेश का SI मात्रक होता है इलेक्ट्रॉनों पर आवेश 1.6×10-19कुलाम होता है
30.अर्धचालक किसे कहते हैं?
उत्तर. जिन पदार्थों की चालकता चालक और कुचालक पदार्थों के बीच होती है उन्हें अर्धचालक कहते हैं.
पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (Textual Questions)
प्रश्न . विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है ?
उत्तर- किसी विद्युत् धारा के सतत् और बंद पथ को विद्युत् परिपथ कहते हैं।
प्रश्न . विद्युत् धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
उत्तर- विद्युत धारा का S.I. मात्रक Sहै एंपियर (A) और एक एंपियर विद्युत्धारा की रचना प्रति सेकंड एक कूलॉम आवेश के प्रवाह से होती है अर्थात् 1A = 1 Cs–1
प्रश्न . एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलैक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।
उत्तर- एक इलेक्ट्रॉन पर विद्युत् आवेश होता है ,E = 1.6 X 10–19 C
कुल आवेश, Q = 1 C
तो एक कूलॉम में इलेक्ट्रॉन होंगे –
प्रश्न . उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है ?
उत्तर- आवश्यक युक्ति सैल या सैलों से बनी बैटरी यह विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।या बैटरी वह उपकरण है जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।
प्रश्न . यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर IV है ?
उत्तर- किसी धारावाही विद्युत् परिपथ के दो बिंदुओं के बीच विद्युत् विभवांतर IV होगा यदि एक कुलाम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने में 1 जूल कार्य किया जाता है।
IV = 1J/1C
प्रश्न. 6V बैटरी से गुजरने वाले हर एक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है ?
उत्तर- ऊर्जा = आवेश X वोल्टेज
= 1 X 6 = 6 जूल।
प्रश्न . किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है ?
उत्तर- एक चालक का प्रतिरोध निम्न कारकों पर निर्भर करता है
(I) चालक की प्रकृति
(Ii) चालक की लम्बाई
(Iii) चालक के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
प्रश्न . समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो तो इनमें से किसमें विद्युत् धारा आसानी से प्रवाहित होगी जबकि उन्हें समान विद्युत् स्रोत से संयोजित किया जाता है ? क्यों ?
उत्तर- प्रतिरोध चालक तार की अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
विद्युत् धारा मोटे तार में से आसानी से प्रवाहित होगी क्योंकि मोटे तार का प्रतिरोध पतले तार के प्रतिरोध की अपेक्षा कम है।
प्रश्न . मान लीजिए किसी वैद्युत् अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत् धारा में क्या परिवर्तन होगा ?
उत्तर- यदि एक विद्युत् अवयव के दोनों सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में आधा कर देने पर उनमें प्रवाहित विद्युत् धारा भी घटकर आधी हो जाती है। क्योंकि I = V/R, विभवांतर के V/2 होने पर, विद्युत् धारा 1/2 हो जाएगी परंतु प्रतिरोध में कोई बदलाव नहीं होगा।
प्रश्न . विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रधातु के क्यों बनाए जाते हैं ?
उत्तर- विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत् इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर एक मिश्रधातु के बनाए। जाते हैं। इसके निम्नलिखित कारण हैं
(1) नाइक्रोम (Nichrome) मिश्रधातु (Ni + Cr + Mn + Fe) का प्रतिरोध अधिक होता है।
(2) इसका गलनांक अधिक होता है।
(3) मिश्रित धातु उच्च तापमान पर आसानी से ऑक्सीकरण (या जला) नहीं करते हैं।
प्रश्न . निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर तालिका 12.2 में दिए गए आँकड़ों के आधार पर दीजिए :
(A) आयरन (Fe) तथा मरकरी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत् चालक है ?
(B) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है ?
उत्तर- (A) आयरन मरकरी की अपेक्षा अच्छा विद्युत् चालक है क्योंकि आयरन की अवरोधकता मरकरी की अपेक्षा कम है।
(B) चाँदी सर्वश्रेष्ठ चालक है क्योंकि इसकी प्रतिरोधकता न्यूनतम 1.60 X 10-8 Ωm है।।
प्रश्न . किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए जिसमें 2v के तीन सैलों की बैटरी, एक 5Ω प्रतिरोधक, एक 8Ω प्रतिरोधक, एक 12Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
उत्तर-
प्रश्न . प्रश्न पिछले का परिपथ दुबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत्धारा को मापने के लिए ऐमीटर तथा 122 के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे ?
उत्तर-
तीनों प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में संयोजित हैं।
इसलिए कुल प्रतिरोधक होगा, R = 5-Ω + 8Ω + 12Ω = 25Ω
विद्युत परिपथ में विद्युत्धारा,12Ω प्रतिरोध में विभवांतर होगा ;
V = Ix R = 0.24 X 12 = 2.88 V.
प्रश्न . जब (A) 1Ω तथा 106 Ω (B) 1Ω, 103Ω तथा 106 Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे ?
उत्तर- (A) जब 1Ω तथा 106Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं तो-
[अत: कुल प्रतिरोध इन दोनों में से सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होगा ]
(B) यदि 1Ω, 103Ω तथा 106 Ω वाले प्रतिरोध पार्श्वक्रम में हैं तो कुल प्रतिरोध होगा
इसमें भी कुल प्रतिरोध वह लगभग 12 या 12 से कम होगा क्योंकि पार्श्वक्रम में लगाए हुए प्रतिरोधों का कुल प्रतिरोध उन सबमें से सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है। |
प्रश्न. 100Ω का एक विद्युत लैंप, 50Ω का एक विद्युत् टोस्टर तथा 500Ω का एक जल फिल्टर 220 V के विद्युत् स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत् इस्तरी का प्रतिरोध क्या है जिसे यदि समान स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत्धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं। यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत् इस्तरी से कितनी विद्युत्धारा प्रवाहित होती है ?
उत्तर- विद्युत् लैंप का प्रतिरोध = R1= 100Ω
विद्युत् टोस्टर का प्रतिरोध = R2=50Ω
विद्युत् जल फिल्टर का प्रतिरोध = R3 =500Ω
तीनों में से प्रवाहित विद्युत्धारा,
यदि विद्युत् इस्तरी को उसी स्रोत के साथ संयोजित कर दें तो उसमें से भी समान विद्युत् धारा I प्रवाहित होती है। इसलिए,
इस्तरी का प्रतिरोध = Rp =125/4 Ω = 31.25 Ω
तो विद्युत् इस्तरी में प्रवाहित होने वाली विद्युत्धारा = 7.04 A
प्रश्न . श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैदयतु यक्तियों को पार्ट्स क्रम में संयोजित करने के क्या । लाभ हैं ?
उत्तर- श्रेणीक्रम के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के लाभ
(1) पार्श्वक्रम में संयोजित उपकरणों में से किसी एक के खराब होने की स्थिति में भी अन्य उपकरण कुशलता से कार्य करते रहते हैं।
(2)पार्श्वक्रम में संयोजित सभी उपकरणों के लिए अलग अलग स्विच लगाया जा सकता है ताकि आवश्यकतानुसार किसी को भी ऑन या ऑफ किया जा सके।
(2) पार्श्वक्रम में संयोजित सभी उपकरण वोल्टेज के विभक्त नहीं होने के कारण सुचारू रूप से कार्य करते हैं।
प्रश्न . 2Ω, 3Ω तथा 6Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध (A) 4Ω, (B) 1Ω हो ?
उत्तर- A) कुल प्रतिरोध 4Ω के लिए उपरोक्त तीन प्रतिरोधों को इस प्रकार जोड़ना चाहिए 3Ω को 6Ω को पार्श्व क्रम में जोड़ने पर
प्रतिरोध =
अब इस कुल प्रतिरोध को 2Ω वाले प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में लगाने पर
कुल प्रतिरोध = 2Ω + 2Ω = 4Ω
(B) 12 का प्रतिरोध पाने के लिए 22, 32 तथा 692 को पावं क्रम में लगाना पड़ेगा। इससे कुल प्रतिरोध होगा
प्रश्न .4Ω, 8Ω, 12Ω तथा 24 Ω प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से (A) अधिकतम (B) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके ?
उत्तर- (A) यदि इन चारों प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में रखा जाए तो अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त होगा
Rs = 4 Ω + 8Ω + 12Ω+ 24 Ω = 48Ω
(B) न्यूनतम प्रतिरोध पाने के लिए उपरोक्त चारों प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम में रखा जाएगा।
प्रश्न . किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है ? |
उत्तर- विद्युत् हीटर की डोरी कॉपर के मोटे तार की बनी होती है, जिसका प्रतिरोध उसके अवयव की उपेक्षा बहुत कम होता है। इसलिए यदि इन दोनों में से विद्युत् धारा प्रवाहित हो तो अवयव को तापन ( H = I2RT) डोरी के तापन की अपेक्षा बहुत अधिक होगा, इस प्रकार अवयव अत्यधिक गर्म होकर उत्तप्त होता है परंतु डोरी उत्तप्त नहीं होती क्योंकि वह अधिक गर्म नहीं होती।
प्रश्न . एक घंटे में 50 W विभवांतर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
उत्तर- Q = 96000 C, T = 1h = 60 X 60 = 3600s, V = 50 V
उत्पन्न ऊष्मा = QV = 96000C X 50 V = 4.8 X 106 जूल (J)
प्रश्न .20 Ω प्रतिरोध की कोई विद्युत् इस्तरी 5 A विद्युत्धारा लेती है। 30 S में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित करें।
उत्तर- R = 20Ω, I = 5A, T = 30 S
ऊष्मा परिकलन = I2R/T= (5)2 X 20 X 30 = 15000 J (जूल) = 1.5 X 104 J
प्रश्न . विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है ?
उत्तर- P = I2R विद्युत् धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण विद्युतपथ के प्रतिरोध द्वारा किया जाता है।
प्रश्न . कोई विद्युत् मोटर 220 V के विद्युत् स्रोत से 5.0 A विद्युत्धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
उत्तर- I = 5 A, V = 220 V, 1 = 2h = 2 X 60 X 60 = 7200 S
शक्ति P = IV = 220 X 5 = 1100 W
2 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा = 1100 W X2h = 2200 Wh
= 2.2 KWh
अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न . प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R’ है तो R/R’ अनुपात का मान क्या है ?
(A) 1/25
(B) 1/5
(C) 5
(D) 25
उत्तर- एक टुकड़े का प्रतिरोध = R/5
पाँच टुकड़ों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने पर प्रतिरोध
इस प्रकार (D) सही उत्तर है।
प्रश्न . निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता ?
(A) I2R
(B) IR2
(C) VI
(D) V2/R
उत्तर- IR2
विद्युत् शक्ति
P = V = (IR)R = I2R
= V (V/R) = [V2/R]
केवल I2R विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता
विद्युत् शक्ति
P = V = (IR)R = I2R
= V (V/R) = [V2/R]
केवल I2R विद्युत् परिपथ में विद्युत् शक्ति को निरूपित नहीं करता
प्रश्न . किसी विद्युत बल्ब का अनुमंताक 220v; 100 W है। जब इसे 110 V पर प्रचालित करते हैं तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है ?
(A) 100 W
(B) 75 W
(C) 50 W
(D) 25 W
उत्तर- 25 W
विद्युत् बल्ब का प्रतिरोध,
110 V पर प्रचालित होने पर बल्ब द्वारा उपभुक्त शक्ति,
प्रश्न . दो चालक तार जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं किसी विद्युत् परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा ?
(A) 1:2
(B) 2:1
(C) 1:4
(D) 4:1
उत्तर : 1 : 4
प्रश्न . किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है ?
उत्तर- दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को दोनों बिंदुओं के बीच में पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।
प्रश्न . किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 Mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 X 10-8 S2 M है। 10 S2 प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी ? यदि इससे दो गुने व्यास का तार लें तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा ? ।
उत्तर- तार का व्यास, D = 0.5 Mm = 0.5 X 103 M
कॉपर की प्रतिरोधकता, P = 1.6 X 10-8 Ω M
इच्छित प्रतिरोधकता, R = 10 Ω
यदि इससे दोगुना व्यास की तार लें तो अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल चार गुणा हो जाएगा।
परंतु R ∝ L/A
.:. प्रतिरोध ¼ गुणा अर्थात् 10x ¼ =2.5Ω हो जाएगा।
प्रश्न . किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत् धाराओं I के संगत मान निम्न दिए गए हैं। I
( ऐंपियर) 0.5 1.0 2.0 3.0 4.0
(वोल्ट) 1.6 3.4 6.7 10.2 13.2
V तथा I के बीच ग्राफ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
उत्तर :
V = 13.2 – 1.6 = 11.6 V
I = 4 – 0.5 = 3.5 A
R = V/A = 11.6/3.5 = 3.2 Ω
प्रश्न . किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12 V की बैटरी को संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 MA विद्युत्धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
उत्तर- V = 12 V,
I = 2.5 MA = 2.5 X 10-3 A
प्रतिरोधक का प्रतिरोध =
प्रश्न . 9V की किसी बैटरी को 0.2 Ω , 0.3Ω , 0.4Ω , 0.5 Ω तथा 12Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम | में संयोजित किया गया है। 12Ω के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत्धारा प्रवाहित होगी ?
उत्तर- सभी प्रतिरोध श्रेणीक्रम में हैं इसलिए
Rs = 0.2 Ω + 0.3 Ω + 0.4Ω + 0.5 Ω + 12 Ω = 13.4 Ω
परिपथ में विद्युत्,
श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों में प्रवाहित विद्युत् समान होगी ।
इसलिए सभी 12Ω के प्रतिरोधक से प्रवाहित विद्युत् होगी = 0.67 A
प्रश्न . 176 Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत् स्रोत से संयोजन से 5 A विद्युत्धारा प्रवाहित हो ?
उत्तर- I = 5A, V = 220 V
परिपथ की प्रतिरोधकता,
प्रत्येक प्रतिरोधक का प्रतिरोध, R = 176 Ω
यदि N प्रतिरोधक, प्रत्येक की प्रतिरोधकता R को पार्श्वक्रम में संयोजित करें तो इच्छित प्रतिरोध हो R = R/N
प्रश्न . यह दर्शाइए कि आप 6 Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध (I) 9 Ω (Ii) 2 Ω हो।
उत्तर- (1) 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों से 9 Ω का प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए हमें दो प्रतिरोधकों को पाश्र्वक्रम तथा तीसरे प्रतिरोध को इनके श्रेणीक्रम में लगाना होगा।
RAB =RAc + RCB = 6 + (⅙ + ⅙ ) =6 + 3 = 9 Ω
(Ii) 2 Ω प्रतिरोधकता प्राप्त करने के लिए हमें तीनों प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम में लगाना होगा।
RAB = ⅙ + ⅙ +⅙ = 2
अत: RAB = 2 Ω
प्रश्न . 220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत से बल्बों का अनुमतांक 10 W है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत्धारा 5 A है, तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पाश्र्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?
उत्तर- प्रत्येक बल्ब का प्रतिरोध,
परिपथ की कुल प्रतिरोधकता,
मान लीजिए कि बल्बों की संख्या N है और प्रतिरोधकता R प्राप्त करने के लिए
1
प्रश्न . किसी विद्युत् भट्टी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियां A तथा B की बनी हैं जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 Ω है तथा इन्हें पृथक्-पृथक् श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्टी 220 V विद्युत् लाइन से संयोजित की जाती है तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत्धाराएँ क्या हैं ?
उत्तर- (I) विभवांतर = 220V, प्रत्येक कुंडली का प्रतिरोध, R = 24 Ω
(I) प्रत्येक कुंडली में प्रवाहित विद्युत्धारा, I = V/R = 9.16 A
(Ii) कुंडली A तथा B को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध, Rs = R+R = 2r = 48 Ω
श्रेणीकृत कुंडलियों में प्रवाहित विद्युत्धारा, Is =
(Ii) कुंडली A तथा B को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर प्रतिरोध, Rp=
पार्श्वक्रमित कुंडलियों में प्रवाहित विद्युत्धारा Ip=
प्रश्न . निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए ।
(I) 6 V की बैटरी से संयोजित 12 तथा 2 Ω श्रेणीक्रम संयोजन
(Ii) 4 V बैटरी से संयोजित 12 Ω तथा 2 Ω का पाश्र्वक्रम संयोजन।
उत्तर- (I) क्योंकि 6 V की बैटरी को 1 Ω तथा 2 Ω के प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है । इसलिए इसमें प्रवाहित विद्युत् है
R = R1 + R2
R = 1+2 = 3Ω
I = V/R
I = 6V /3Ω = 2A
2 Ω प्रतिरोध में प्रयोग हुई शक्ति, P = I2R = (2)2 X 2 = 8 W
(Ii) 4V की बैटरी को 12 Ω तथा 2 Ω के प्रतिरोध के साथ पार्श्वक्रम में जोड़ने पर प्रत्येक प्रतिरोधक दोनों सिरों में विभवांतर होगा, V = 4 V
2 Ω के प्रतिरोध में प्रयोग की गई शक्ति,
इस प्रकार ,
प्रश्न . दो विद्युत लैंप जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220 V है । विद्युत् मेंस के साथ पाश्र्वक्रम में संयोजित है। यदि विद्युत् आपूर्ति की वोल्टता 220 V है तो विद्युत् मेंस से । कितनी धारा ली जाती है ?
उत्तर- पहले लैंप की शक्ति (P1) = 100 वाट
पहले लैंप की विभवांतर (V) = 220 वोल्ट
पहले लैंप में प्रवाहित धारा (I1) = P1/V = 100/220 ऐपियर
दूसरे लैंप की शक्ति (P2) = 60 वाट
दूसरे लैंप का विभवांतर (V) = 220 वोल्ट
दूसरे लैंप में प्रवाहित धारा (I2) = P2/V= 60/220 ऐपियर
विद्युत मेंस से ली गई धारा,
I = I1 + I2 = 100/220 + 60/220 = 160/220 = 0.727 A
प्रश्न . किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है : 250 W का TV सेट जो एक घंटे तक चलाया जाता है अथवा 1200 W का विद्युत् टोस्टर जो 10 मिनट के लिये चलाया जाता है ?
उत्तर- 250 W के TV सेट द्वारा 1 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा,
= 250 W X 1 H = 250 Wh
1200 W के विद्युत् हीटर द्वारा 10 मिनट में उपभुक्त ऊर्जा,
= 1200 W ⅙ H = 200 Wh
अतः 250 W के T.V. सेट के द्वारा अधिक ऊर्जा उपभुक्त होगी।
प्रश्न .8 S2 प्रतिरोध का कोई विद्युत् हीटर विद्युत् मेंस से 2 घंटे तक 15 A विद्युत्धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
उत्तर- I = 15A, R = 8 Ω S2 , T =2h
विद्युत् शक्ति, P = I2R (15)2 X 8 = 1800 W अथवा 1800 J/S
प्रश्न . निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए
(A) विद्युत लैंपों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंग्स्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है ?
(B) विद्युत तापन युक्तियों जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत् इस्तरी के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रधातुओं के क्यों बनाए जाते हैं ?
(C) घरेलू विद्युत् परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता है ?(D) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है ? |(E) विद्युत् संचारण के लिए प्राय: कॉपर तथा एल्यूमीनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है ? |
उत्तर- (A) विद्युत लैंपों के तंतुओं के निर्माण में प्राय एकमात्र टंगस्टन का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि-
(I) टंगस्टन की प्रतिरोधकता उच्च है इसलिए यह विद्युत आवेश के कारण बिना अधिक गर्म हुए प्रकाश उत्पन्न कर सकता है अतः इनका उपयोग बल्बों में होता है।
(Ii) इसका गलनांक 3400 डिग्री सेल्सियस है। इसी कारण विद्युत् धारा प्रवाहित करने से यह पिघलता नहीं है।
(B)विद्युत टोस्टरो तथा विद्युत इस्तरियो के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्र धातु के बनाए जाते हैं इसके निम्न लिखित कारण हैं-
1. मिश्र धातुओं में अपने घटक धातुओं की तुलना में उच्च प्रतिरोधकता है
2. मिश्रित धातु उच्च तापमान पर आसानी से ऑक्सीकरण (या जला) नहीं करते हैं।
3.इसका गलनांक अधिक होता हैं।
(C) घरों में विद्युत् के लिए क्रमबद्ध व्यवस्था व्यवहारिक है। क्योंकि इससे विद्युत् पथ का प्रवाह अलग-अलग | जगह बंट जाता है और सभी में वोल्टेज़ बंट कर कम हो जाती है। ऐसी अवस्था में सारे घर के लिए बल्ब, पंखे आदि एक ही स्विच से चलेंगे। उन्हें स्वतंत्र रूप से नहीं जलाया-बुझाया जा सकता।
(D) तार की मोटाई के क्षेत्रफल से विद्युत् प्रवाह का सीधा संबंध होता है। यह प्रतिरोध का व्युत्क्रम होता है।
(E) कॉपर एवं एल्यूमीनियम के तारों का प्रतिरोध काफी कम है इसलिए यह अधिक गर्म नहीं होती और इनका प्रयोग विद्युत संचारण में किया जाता है।

