सुपरस्टार रजनीकांत को मिलेगा 51वां दादा साहब फाल्के पुरस्कार, जानें विस्तार से
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि सिनेमा में शानदार योगदान के लिए अभी तक ये अवार्ड 50 बार अलग-अलग हस्तियों को दिया जा चुका है. अब 51वां अवार्ड सुपरस्टार रजनीकांत को दिया जाएगा.
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 01 अप्रैल 2021 को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड का घोषणा किया. इस बार साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से नवाजा जाएगा. कोरोना वायरस की वजह से इस बार सभी पुरस्कारों को घोषणा देरी से हुई है.
प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज इस साल का दादा साहब फाल्के अवॉर्ड महान नायक रजनीकांत को घोषित करते हुए हमें बहुत खुशी है. रजनीकांत बीते 5 दशक से सिनेमा पर राज कर रहे हैं. ये सिलेक्शन इस साल ज्यूरी ने किया है. इस ज्यूरी में आशा भोंसले, मोहनलाल, विश्वजीत चटर्जी, शंकर महादेवन और सुभाष घई जैसे कलाकार शामिल रहे हैं.
51वां दादा साहब फाल्के अवार्ड
प्रकाश जावड़ेकर ने बताया है कि रजनीकांत को 51वां दादा साहब फाल्के अवार्ड 03 मई 2021 को दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने कहा कि सिनेमा में शानदार योगदान के लिए अभी तक ये अवार्ड 50 बार अलग-अलग हस्तियों को दिया जा चुका है. अब 51वां अवार्ड सुपरस्टार रजनीकांत को दिया जाएगा.
फिल्मी करियर की शुरूआत
रजनीकांत ने 25 साल की उम्र में अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की. उनकी पहली तमिल फिल्म ‘अपूर्वा रागनगाल’ थी. इस फिल्म में उनके साथ कमल हासन और श्रीविद्या भी थीं. उन्होंने 1975 से 1977 के बीच ज्यादातर फिल्मों में कमल हासन के साथ विलेन की भूमिका ही की. लीड रोल में उनकी पहली तमिल फिल्म 1978 में ‘भैरवी’ आई. ये फिल्म काफी हिट रही और रजनीकांत स्टार बन गए.
प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दादा साहेब फाल्के पुरुस्कार का सम्मान पाने वाले अभिनेता रजनीकांत को इस उपलब्धि की बधाई दी है. पीएम मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा है, 'कई पीढ़ियों तक लोकप्रिय रहे, एक ऐसे शख्स जो कई तरह की भूमिकाएं निभा सकते हैं और लोकप्रिय हैं. यह बेहद खुशी की बात है कि 'थलाइवा' को दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
रजनीकांत के बारे में
रजनीकांत का जन्म 12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरू के मराठी परिवार में हुआ था. रजनीकांत 12वें दक्षिण भारतीय हैं जिन्हें यह अवॉर्ड मिला है. इससे पहले डॉ. राजकुमार, अक्कीनेनी नागेश्वर राव, के बालाचंदर जैसे लोगों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है.
गरीब परिवार में जन्मे रजनीकांत ने अपनी मेहनत और कड़े संघर्ष के बाद टॉलिवुड में खास मुकाम हासिल किया. रजनीकांत को दक्षिण सिनेमा में ‘थलाइवा’ यानी भगवान का दर्जा दिया जाता है. रजनीकांत कई बॉलीवुड फिल्मों में भी नज़र आए हैं. जैसे-चालबाज, अंधा कानून, कबाली, द रोबोट, त्यागी, खून का कर्ज, दोस्ती दुश्मनी, इंसाफ कौन करेगा इत्यादि.
दादा साहब फाल्के पुरस्कार: एक नजर में
दादा साहब फाल्के पुरस्कार भारत सरकार की तरफ से दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है. यह पुरस्कार किसी व्यक्ति विशेष को भारतीय सिनेमा में उसके आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है. इस पुरस्कार का प्रारम्भ दादा साहब फाल्के के जन्म शताब्दि-वर्ष 1969 से हुआ था. उस वर्ष राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के लिए आयोजित 17वें समारोह में पहली बार यह सम्मान अभिनेत्री देविका रानी को प्रदान किया गया. तब से अब तक यह पुरस्कार लक्षित वर्ष के अंत में अथवा अगले वर्ष के आरम्भ में 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' के लिए आयोजित समारोह में प्रदान किया जाता है. वर्तमान में इस पुरस्कार में 10 लाख रुपये और स्वर्ण कमल दिये जाते हैं.
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस 02 अप्रैल को मनाया गया
यह एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों को ऑटिज्म से लड़ने तथा इसका निदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
02 अप्रैल: विश्व ऑटिज्म जागरुकता दिवस
विश्वभर में 02 अप्रैल 2021 को अंतरराष्ट्रीय ऑटिज्म जागरुकता दिवस मनाया गया. यह एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों को ऑटिज्म से लड़ने तथा इसका निदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
इस दिन उन बच्चों और बड़ों के जीवन में सुधार के कदम उठाए जाते हैं, जो ऑटिज्म ग्रस्त होते हैं और उन्हें सार्थक जीवन बिताने में सहायता दी जाती है. नीला रंग ऑटिज्म का प्रतीक माना गया है.
उद्देश्य:
इस दिवस का उद्देश्य ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों तथा बड़ों के जीवन में सुधार हेतु कदम उठाना और उन्हें सार्थक जीवन व्यतीत करने में मदद करना है. यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान के बिना अपनाया गया.
इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव अधिकारों में सुधार के लिए पूरक के रूप में अपनाया गया. विश्व ऑटिज्म दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वास्थ्य संबंधी मनाये जाने वाले चार दिवसों में से एक है.
आटिज्म क्या है?
• ऑटिज्म मस्तिष्क विकास में उत्पन्न बाधा संबंधी विकार है.
• ऑटिज्म से ग्रसित व्यक्ति दूसरों से अलग स्वयं में खोया रहता है.
• व्यक्ति के विकास संबंधी समस्याओं में ऑटिज्म तीसरे स्थान पर है. अर्थात् व्यक्ति के विकास में बाधा पहुंचाने वाले मुख्य कारणों में ऑटिज्म भी जिम्मेदार है.
• ऑटिज्म के रोगी को मिर्गी के दौरे भी पड़ सकते हैं.
• ऑटिज्म पूरी दुनिया में फैला हुआ है. एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 तक विश्व में तकरीबन 7 करोड़ लोग ऑटिज्म से प्रभावित थे.
• जिन बच्चों में यह रोग होता है उनका विकास अन्य बच्चों से असामान्य होता है, साथ ही इसकी वजह से उनके न्यूरोसिस्टम पर विपरीत प्रभाव पड़ता है.
पृष्ठभूमि:
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 62/139 प्रस्ताव के तहत इसका निर्धारण किया गया. इसे काउंसिल द्वारा 1 नवंबर 2007 को पारित किया गया जबकि 18 दिसंबर 2007 को अपनाया गया. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2007 में दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस घोषित किया था.

