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मल्टी टास्क वर्करों के 8000 पदों में से करुणामूलक जैसे आवेदनों में नियुक्ति आदेश जारी

 शिक्षा विभाग में भरे जा रहे मल्टी टास्क वर्करों के 8000 पदों में से करुणामूलक जैसे आवेदनों में नियुक्ति आदेश जारी हो गए हैं। राज्य सरकार ने पहले चरण में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को 700 केस भेजे थे, इनमें से 123 की फाइल क्लीयर हो गई है। इन्हें एलीमेंट्री स्कूलों में नियुक्ति मिली है। मुख्यमंत्री कार्यालय से यह अनुमति इस पॉलिसी के रूल 18 के तहत दी गई है। इसके साथ ही 8000 पदों को भरने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। कैबिनेट का फैसला है कि इन 8000 में से 4000 पद करुणामूलक जैसे आवेदनों से भरे जाएंगे। इसमें व्यक्ति का बीपीएल में होना जरूरी है या फिर वह बेहद गरीब होना चाहिए, जिसका प्रमाण पत्र उसके पास हो। इसके साथ अपंग, अनाथ, विधवा को भी इसी कैटेगरी में शामिल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय तक भाजपा विधायकों या अन्य माध्यमों से ऐसे आवेदन पहुंचे हैं और अब इन्हें विभाग को भेज कर स्क्रीन करवाया जा रहा है। जो आवेदक पात्रता रखते हैं, उनको फिर नियुक्तियां मिल रही हैं। सरकार ने यह फैसला लिया है कि जब तक करुणामूलक जैसे आवेदनों वाला कोटा पूरा नहीं हो जाता, तब तक सीधी भर्ती शुरू न की जाए। 4000 पदों की सीधी भर्ती के लिए स्कूल से घर की दूरी के अलावा स्कूल के लिए जमीन दान करने वाले परिवार भी पात्र हैं। इसके अलावा बीपीएल, एससी, एसटी, ओबीसी और अपंगता पर अलग से नंबर है। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता पांचवी या आठवीं पास रखी गई है, लेकिन सीधी भर्ती वाले पदों को एसडीएम की कमेटी भरेगी।

 गौरतलब है कि पिछली बार हुई कैबिनेट की बैठक में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को कैबिनेट में ही बुला लिया गया था, क्योंकि सरकार ऐसे आवेदनों पर होने वाले फैसलों में देरी से नाराज थी। अब इस प्रक्रिया में तेजी आई है। इसी भर्ती के केस में मंडी के बगस्याड ब्लॉक में हाई कोर्ट ने रूल 18 के तहत नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। हालांकि रूल 07 यानी सीधी भर्ती के तहत भर्ती करने को कहा था। इस मामले के बाद अब 16 और केस हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। इन सभी में रूल 18 के तहत नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की गई है। अब यह देखना होगा कि आने वाले समय में इस पॉलिसी को लेकर कोर्ट का रुख किया रहता है। (एचडीएम)

 शिक्षा विभाग में भरे जा रहे मल्टी टास्क वर्करों के 8000 पदों में से करुणामूलक जैसे आवेदनों में नियुक्ति आदेश जारी हो गए हैं। राज्य सरकार ने पहले चरण में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय को 700 केस भेजे थे, इनमें से 123 की फाइल क्लीयर हो गई है। इन्हें एलीमेंट्री स्कूलों में नियुक्ति मिली है। मुख्यमंत्री कार्यालय से यह अनुमति इस पॉलिसी के रूल 18 के तहत दी गई है। इसके साथ ही 8000 पदों को भरने की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। कैबिनेट का फैसला है कि इन 8000 में से 4000 पद करुणामूलक जैसे आवेदनों से भरे जाएंगे। इसमें व्यक्ति का बीपीएल में होना जरूरी है या फिर वह बेहद गरीब होना चाहिए, जिसका प्रमाण पत्र उसके पास हो। इसके साथ अपंग, अनाथ, विधवा को भी इसी कैटेगरी में शामिल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय तक भाजपा विधायकों या अन्य माध्यमों से ऐसे आवेदन पहुंचे हैं और अब इन्हें विभाग को भेज कर स्क्रीन करवाया जा रहा है। जो आवेदक पात्रता रखते हैं, उनको फिर नियुक्तियां मिल रही हैं। सरकार ने यह फैसला लिया है कि जब तक करुणामूलक जैसे आवेदनों वाला कोटा पूरा नहीं हो जाता, तब तक सीधी भर्ती शुरू न की जाए। 4000 पदों की सीधी भर्ती के लिए स्कूल से घर की दूरी के अलावा स्कूल के लिए जमीन दान करने वाले परिवार भी पात्र हैं। इसके अलावा बीपीएल, एससी, एसटी, ओबीसी और अपंगता पर अलग से नंबर है। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता पांचवी या आठवीं पास रखी गई है, लेकिन सीधी भर्ती वाले पदों को एसडीएम की कमेटी भरेगी।

 गौरतलब है कि पिछली बार हुई कैबिनेट की बैठक में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को कैबिनेट में ही बुला लिया गया था, क्योंकि सरकार ऐसे आवेदनों पर होने वाले फैसलों में देरी से नाराज थी। अब इस प्रक्रिया में तेजी आई है। इसी भर्ती के केस में मंडी के बगस्याड ब्लॉक में हाई कोर्ट ने रूल 18 के तहत नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। हालांकि रूल 07 यानी सीधी भर्ती के तहत भर्ती करने को कहा था। इस मामले के बाद अब 16 और केस हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। इन सभी में रूल 18 के तहत नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की गई है। अब यह देखना होगा कि आने वाले समय में इस पॉलिसी को लेकर कोर्ट का रुख किया रहता है। (एचडीएम)

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