Ads Area

16. Management of natural Resources, NCERT Solutions for Class 10 Science, 16.प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, 10th science chapter 16.

 16.प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन. 

Management of natural Resources.


पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (Textual Questions)

प्रश्न 1. पर्यावरण मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं ?

उत्तर-

व्यर्थ बहते जल की बर्बादी रोक कर।

सोच-समझ कर विद्युत् उपकरणों का इस्तेमाल करके। (

पॉलीथीन का इस्तेमाल न करना।

नालियों में रसायन तथा इस्तेमाल किया हुआ तेल न डाल कर।

जल संरक्षण को बढ़ावा देकर।

सीसा रहित पैट्रोल का प्रयोग करके।

ठोस कचरे का कम-से-कम उत्पादन कर।

धुआँ रहित वाहनों का प्रयोग करके।

पुन: चक्रण हो सकने वाली वस्तुओं का इस्तेमाल करके।

तेल से चालित वाहनों का कम-से-कम इस्तेमाल करके।

वनों की कटाई पर रोक लगाकर।

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मना कर।

वृक्षारोपण।

ऐसे ही कई तरीकों को अपनाकर हम पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं.


प्रश्न 2. संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य के परियोजना के क्या लाभ हैं ?

उत्तर- इसका सिर्फ एक ही लाभ होता है, मनुष्य की संतुष्टि. मनुष्य अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए पेड़ पौधों को काट रहा है और जिससे कि पर्यावरण असंतुलित हो रहा है.संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य की परियोजनाओं को कुछ सोच-समझ कर ही बनाना चाहिए।


प्रश्न 3. यह लाभ, लंबी अवधि को ध्यान में रखकर बनाए गए परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न हैं ?

उत्तर- प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए ताकि आगे आने वाली पीढ़ियां इन संसाधनों का इस्तेमाल कर पाए. कम अवधि के लाभ के लिए पेड़ों को काटा जाता है लेकिन लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए हमें दोबारा पेड़ों को लगाना चाहिए.वनों की कटाई से कृषि, आवासीय और औद्योगिक कार्यों के लिए भूमि प्राप्त हो सकती है लेकिन इससे भूमि कटाव की समस्या और पर्यावरण की सुरक्षा नहीं रह सकती।


प्रश्न 4. क्या आपके विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए ? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन सी ताकतें कार्य कर सकती हैं ?

उत्तर- आर्थिक विकास का पर्यावरण संरक्षण के साथ सीधा संबंध है। अगर संसाधनों का वितरण असमान होगा तो यह गरीबी का सबसे मुख्य कारण बनेगा. और अगर संसाधनों का वितरण समान होगा तो इससे एक शांतिपूर्ण समाज की स्थापना हो सकती है. कुछ स्वार्थी लोगों के कारण चोरी से वनों की कटाई की जाती है .जिससे कि हमारे पर्यावरण को बहुत ज्यादा नुकसान होता है.


प्रश्न 1. हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए ? अथवा पर्यावरण में वनों की क्या भूमिका हैं ?


उत्तर- वन एवं वन्य जीवन को निम्नलिखित कारणों से सुरक्षित रखना चाहिए


वन्य प्राणियों से ऊन, अस्थियाँ, सींग, दाँत, तेल, वसा, त्वचा आदि प्राप्त करने के लिए।

धन प्राप्ति के अच्छे स्रोत के रूप में।

मृदा अपरदन एवं बाढ़ पर नियंत्रण करने के लिए।

प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए।

वृक्षों के वायवीय भागों से पर्याप्त मात्रा में जल का वाष्पन होता है जो वर्षा के स्रोत का कार्य करते हैं।

स्थलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता के लिए।

फल, मेवे, सब्ज़ियाँ तथा औषधियाँ प्राप्त करने के लिए।

इमारती तथा जलाने वाली लकड़ी प्राप्त करने के लिए।

प्राणियों की प्रजाति को बनाये रखने के लिए।

पर्यावरण में गैसीय संतुलन बनाने के लिए।

वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करने के लिए।

वन्य जीवन का संरक्षण राष्ट्रीय पार्क तथा पशुओं और पक्षियों के लिए शरण स्थल बनाने से किया जा सकता है।पशुओं का शिकार करने की निषेध आज्ञा का कानून प्राप्त करके किया जा सकता है। |


प्रश्न 2. संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।

उत्तर- पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन्य जीवन का संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं


वनों को काटने से रोका जाना चाहिए.

पेड़ पौधों की सुरक्षा करनी चाहिए.

ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए.

शिकारियों के लिए कड़े से कड़े कानून बनाए जाने चाहिए ताकि वह किसी भी वन्य पशु का शिकार ना करें.

हर साल बहुत वन आग के कारण जल जाते हैं. वहां पर नए पेड़ लगाए जाने चाहिए और उनकी देखभाल की जानी चाहिए.

वनों की अधिक चराई से बचाना चाहिए.

प्रश्न 1. अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परंपरागत प्रणाली का पता लगाइए।

उत्तर-हमारे निवास क्षेत्र के आस-पास बारिश के पानी को जोहड़ तालाबों में इकट्ठा करने का प्रचलन है. भमिगत टैंकों में भी जल संग्रहण का प्रचलन था।


प्रश्न 2. इस प्रणाली का पेयजल व्यवस्था ( पर्वतीय क्षेत्रों में, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र) से तुलना करें।

उत्तर- पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था

(1) लद्दाख के क्षेत्रों में जिंग द्वारा जल संरक्षण किया जाता है, जिसमें बर्फ के ग्लेशियर को रखा जाता है जो दिन के समय पिघल कर जल की कमी को पूरा करता है।

(2) बाँस की नालियाँ-जल संरक्षण की यह प्रणाली मेघालय में सदियों पुरानी पद्धति है। इसमें जल को बॉस | की नालियों द्वारा संरक्षित करके उन्हें पहाड़ों के निचले भागों में उन्हीं बाँस की नालियों द्वारा लाया जाता है।


मैदानी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था


(1) तमिलनाडु क्षेत्र में बारिश के पानी को किसी टैंक में इकट्ठा किया जाता है और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है.

(2) बावरियाँ –ये राजस्थान में पाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे तालाब हैं जो प्राचीन काल में बंजारों द्वारा पीने के पानी की पूर्ति करने के लिए बनाए जाते थे.


पठारी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था

(1) भंडार – ये महाराष्ट्र में पाए जाते हैं, जिसमें नदियों के किनारे ऊंची दीवारें बनाकर बड़ी मात्रा में पानी को इकट्ठा किया जाता है.

(2) जोहड़ – ये पठारी क्षेत्रों की जमीन पर पाए जाने वाले प्राकृतिक छोटे खड्डे होते हैं। जो कि बारिश के पानी को इकट्ठा करने में के काम आता है.


प्रश्न 3, अपने क्षेत्र में जल के स्रोत का पता लगाइए, क्या इस स्रोत से जल क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है ?

उत्तर-नई दिल्ली शहर में जलापूर्ति का मुख्य साधन नदी है। यमुना नदी का पानी पाइपों के द्वारा दिल्ली शहर | में लाया जाता है। कुछ पानी शहर के अंदर ही बोर द्वारा जमीन से निकाला जाता है। सभी निवासियों के लिए जल की आपूर्ति नहीं हो पाती।


अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर:-


प्रश्न 1. अपने घर में पर्यानुकूलित बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं ?

उत्तर-


हमें पुनः चक्रण योग्य वस्तुओं को कूड़े के साथ नहीं फेंकना चाहिए।

हमें चीज़ों (जैसे लिफ़ाफ़े ) को फेंकने की अपेक्षा फिर से प्रयोग में लाना चाहिए।

पानी के व्यर्थ रिसाव को रोकना चाहिए।

आवासीय कूड़े-कचरे को कूड़ादान में इकट्ठा कर उसका निपटान करना चाहिए।

हम बिजली के पंखे तथा बल्ब के स्विच बंद करके विद्युत् का Wastage रोक सकते हैं।

हमें आहार को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

पानी को मितव्ययिता से प्रयोग करना चाहिए।

हमें अपने आवास के आस-पास कचरे और गंदे पानी को इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए।

टपकने वाले पानी के पाइप या नल की मुरम्मत करवा कर हम पानी की बचत कर सकते हैं।

प्रश्न 2. क्या आप अपने स्कूल में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके ?

उत्तर-निम्नलिखित परिवर्तनों द्वारा हम अपने स्कूल में पर्यानुकूलित वातावरण बना सकते हैं.


बच्चों को शिक्षा देनी चाहिए कि फूल तथा पत्तियों को न तोड़ें।

स्कूल का भवन साफ-सुथरा रखना चाहिए।

हमें कूड़ा-कचरा इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि चीज़ों का पुन: इस्तेमाल करना चाहिए।

स्कूल के आस-पास कचरे के ढेर और रुका हुआ गंदा जल नहीं होना चाहिए।

शौचालय और मूत्रालयों की नियमित सफाई-धुलाई की जानी चाहिए।

कमरों में ज्यादा-से-ज्यादा खिड़कियाँ बनानी चाहिए ताकि सूर्य की रोशनी अंदर आए और कम-से-कम बिजली खर्च हो.

विद्युत् Wastage को नियंत्रित करना चाहिए।

हमें स्कूल में ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने चाहिएं।

हमें जल का Wastage रोकना चाहिए।

प्रश्न 3. इस अध्याय में हमने देखा कि जब हम वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें से किसे वन उत्पाद प्रबंधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं ? आप ऐसा क्यों सोचते हैं ?

उत्तर-वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते समय सामने आने वाले चार मुख्य दावेदार हैं.


1. वन के अंदर और वनों के पास रहने वाले सभी लोग अपनी आवश्यकताओं के लिए वनों पर निर्भर रहते हैं.

2.सरकार का वन विभाग वनों से प्राप्त साधनों का नियंत्रण करता है।

3.बीड़ी उत्पादकों से लेकर कागज़ मिल वनों पर निर्भर रहते हैं. इसीलिए वनों की कटाई बहुत ज्यादा हो रही है।

4. वनों के उपयोग के लिए कानून बनाए जाने चाहिए ताकि वनों के पास रहने वाले लोग और वनों का इस्तेमाल करने वाले लोग वनों का इस्तेमाल ठीक प्रकार कर सकें .


प्रश्न 4. एक एकल व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबंधन में क्या योगदान दे सकते हैं।

1.वन एवं वन्य जंतु : वन एवं वन्य जंतु-दूसरे लोगों में वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता जगा सकते हैं, अपने क्षेत्र के उन क्रियाकलापों में भाग ले सकते हैं जो वन तथा वन्य जंतुओं के संरक्षण को महत्त्व देते हैं। संरक्षण के नियमों को अपनाकर तथा इन मसले पर काम कर रही कमेटियों की सहायता करके भी हम वन एवं वन्य जंतुओं के प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं।

2.जल संसाधन : जल संसाधन-अपने घर तथा कार्य स्थान पर जल का Wastage रोक कर तथा वर्षा के जल को अपने घरों में संग्रहण करके।

3.कोयला एवं पेट्रोलियम  : कोयला एवं पेट्रोलियम-विद्युत् के Wastage को रोक कर तथा कम-से-कम बिजली इस्तेमाल करके हम इनके प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं। निजी वाहन की अपेक्षा सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल कर पेट्रोल-डीजल की बचत कर सकते हैं।


प्रश्न 5. आप एक एकल व्यक्ति के रूप में विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए क्या कर सकते हैं ?

उत्तर-


खाना पकाने के लिए भी लकड़ी की जगह गैस का इस्तेमाल करना चाहिए।

जल को व्यर्थ होने से रोकना चाहिए।

हमें आहार को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

तीन ‘Rs’ के नियमों का पालन करके हम प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम कर सकते हैं।

विद्युत् को कम-से-कम इस्तेमाल कर सकते हैं तथा इसके Wastage को रोक सकते हैं।

प्रश्न 6. निम्न से संबंधित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं

1.अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।


पर्यावरण के संरक्षण से संबंधित जागरूकता अभियान में भाग लिया।

नहाने में कम-से-कम पानी का उपयोग किया।

रोशनी के लिए CFL’S का प्रयोग करके।

स्कूल आने-जाने के लिए अपने वाहन की जगह सरकारी वाहनों का प्रयोग करके।

विद्युत् उपकरणों का व्यर्थ उपयोग नहीं किया।

2.अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को और बढ़ाया है।


कंप्यूटर पर प्रिंटिंग के लिए अधिक कागजों का प्रयोग किया।

मोटर साइकिल का अत्यधिक प्रयोग करके।

पंखा चलते छोड़कर कमरे से बाहर गया।

दीवाली पर पटाखे जलाकर।

आहार को व्यर्थ किया।

प्रश्न 7. इस अध्याय में उठाए बिंदुओं ( समस्याओं) के आधार पर आप अपनी जीवन-शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के प्रदूषण को बढ़ावा मिल सके ?

उत्तर-


हमें निजी वाहनों की अपेक्षा सरकारी वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए।

हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम एक समाज में रहते हैं, अकेले नहीं।

हमें तीन (R’s) के नियमों का पालन करना चाहिए। (Reduce, Recycle, Reuse)

हमें अपने संसाधनों का कम-से-कम इस्तेमाल करना चाहिए तथा किसी भी तरह उन्हें व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

हमें अपने पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करना चाहिए।

इन सब बातों को अपने जीवन में महत्त्व देकर हम अपने संसाधनों के संप्रदूषण को बढ़ावा दे सकते हैं।

 16.प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन. 

Management of natural Resources.


पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (Textual Questions)

प्रश्न 1. पर्यावरण मित्र बनने के लिए आप अपनी आदतों में कौन-से परिवर्तन ला सकते हैं ?

उत्तर-

व्यर्थ बहते जल की बर्बादी रोक कर।

सोच-समझ कर विद्युत् उपकरणों का इस्तेमाल करके। (

पॉलीथीन का इस्तेमाल न करना।

नालियों में रसायन तथा इस्तेमाल किया हुआ तेल न डाल कर।

जल संरक्षण को बढ़ावा देकर।

सीसा रहित पैट्रोल का प्रयोग करके।

ठोस कचरे का कम-से-कम उत्पादन कर।

धुआँ रहित वाहनों का प्रयोग करके।

पुन: चक्रण हो सकने वाली वस्तुओं का इस्तेमाल करके।

तेल से चालित वाहनों का कम-से-कम इस्तेमाल करके।

वनों की कटाई पर रोक लगाकर।

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मना कर।

वृक्षारोपण।

ऐसे ही कई तरीकों को अपनाकर हम पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं.


प्रश्न 2. संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य के परियोजना के क्या लाभ हैं ?

उत्तर- इसका सिर्फ एक ही लाभ होता है, मनुष्य की संतुष्टि. मनुष्य अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए पेड़ पौधों को काट रहा है और जिससे कि पर्यावरण असंतुलित हो रहा है.संसाधनों के दोहन के लिए कम अवधि के उद्देश्य की परियोजनाओं को कुछ सोच-समझ कर ही बनाना चाहिए।


प्रश्न 3. यह लाभ, लंबी अवधि को ध्यान में रखकर बनाए गए परियोजनाओं के लाभ से किस प्रकार भिन्न हैं ?

उत्तर- प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए ताकि आगे आने वाली पीढ़ियां इन संसाधनों का इस्तेमाल कर पाए. कम अवधि के लाभ के लिए पेड़ों को काटा जाता है लेकिन लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए हमें दोबारा पेड़ों को लगाना चाहिए.वनों की कटाई से कृषि, आवासीय और औद्योगिक कार्यों के लिए भूमि प्राप्त हो सकती है लेकिन इससे भूमि कटाव की समस्या और पर्यावरण की सुरक्षा नहीं रह सकती।


प्रश्न 4. क्या आपके विचार में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए ? संसाधनों के समान वितरण के विरुद्ध कौन-कौन सी ताकतें कार्य कर सकती हैं ?

उत्तर- आर्थिक विकास का पर्यावरण संरक्षण के साथ सीधा संबंध है। अगर संसाधनों का वितरण असमान होगा तो यह गरीबी का सबसे मुख्य कारण बनेगा. और अगर संसाधनों का वितरण समान होगा तो इससे एक शांतिपूर्ण समाज की स्थापना हो सकती है. कुछ स्वार्थी लोगों के कारण चोरी से वनों की कटाई की जाती है .जिससे कि हमारे पर्यावरण को बहुत ज्यादा नुकसान होता है.


प्रश्न 1. हमें वन एवं वन्य जीवन का संरक्षण क्यों करना चाहिए ? अथवा पर्यावरण में वनों की क्या भूमिका हैं ?


उत्तर- वन एवं वन्य जीवन को निम्नलिखित कारणों से सुरक्षित रखना चाहिए


वन्य प्राणियों से ऊन, अस्थियाँ, सींग, दाँत, तेल, वसा, त्वचा आदि प्राप्त करने के लिए।

धन प्राप्ति के अच्छे स्रोत के रूप में।

मृदा अपरदन एवं बाढ़ पर नियंत्रण करने के लिए।

प्रकृति में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए।

वृक्षों के वायवीय भागों से पर्याप्त मात्रा में जल का वाष्पन होता है जो वर्षा के स्रोत का कार्य करते हैं।

स्थलीय खाद्य श्रृंखला की निरंतरता के लिए।

फल, मेवे, सब्ज़ियाँ तथा औषधियाँ प्राप्त करने के लिए।

इमारती तथा जलाने वाली लकड़ी प्राप्त करने के लिए।

प्राणियों की प्रजाति को बनाये रखने के लिए।

पर्यावरण में गैसीय संतुलन बनाने के लिए।

वन्य जीवों को आश्रय प्रदान करने के लिए।

वन्य जीवन का संरक्षण राष्ट्रीय पार्क तथा पशुओं और पक्षियों के लिए शरण स्थल बनाने से किया जा सकता है।पशुओं का शिकार करने की निषेध आज्ञा का कानून प्राप्त करके किया जा सकता है। |


प्रश्न 2. संरक्षण के लिए कुछ उपाय सुझाइए।

उत्तर- पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए वन्य जीवन का संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं


वनों को काटने से रोका जाना चाहिए.

पेड़ पौधों की सुरक्षा करनी चाहिए.

ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए.

शिकारियों के लिए कड़े से कड़े कानून बनाए जाने चाहिए ताकि वह किसी भी वन्य पशु का शिकार ना करें.

हर साल बहुत वन आग के कारण जल जाते हैं. वहां पर नए पेड़ लगाए जाने चाहिए और उनकी देखभाल की जानी चाहिए.

वनों की अधिक चराई से बचाना चाहिए.

प्रश्न 1. अपने निवास क्षेत्र के आस-पास जल संग्रहण की परंपरागत प्रणाली का पता लगाइए।

उत्तर-हमारे निवास क्षेत्र के आस-पास बारिश के पानी को जोहड़ तालाबों में इकट्ठा करने का प्रचलन है. भमिगत टैंकों में भी जल संग्रहण का प्रचलन था।


प्रश्न 2. इस प्रणाली का पेयजल व्यवस्था ( पर्वतीय क्षेत्रों में, मैदानी क्षेत्र अथवा पठार क्षेत्र) से तुलना करें।

उत्तर- पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था

(1) लद्दाख के क्षेत्रों में जिंग द्वारा जल संरक्षण किया जाता है, जिसमें बर्फ के ग्लेशियर को रखा जाता है जो दिन के समय पिघल कर जल की कमी को पूरा करता है।

(2) बाँस की नालियाँ-जल संरक्षण की यह प्रणाली मेघालय में सदियों पुरानी पद्धति है। इसमें जल को बॉस | की नालियों द्वारा संरक्षित करके उन्हें पहाड़ों के निचले भागों में उन्हीं बाँस की नालियों द्वारा लाया जाता है।


मैदानी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था


(1) तमिलनाडु क्षेत्र में बारिश के पानी को किसी टैंक में इकट्ठा किया जाता है और जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जाता है.

(2) बावरियाँ –ये राजस्थान में पाए जाते हैं। ये छोटे-छोटे तालाब हैं जो प्राचीन काल में बंजारों द्वारा पीने के पानी की पूर्ति करने के लिए बनाए जाते थे.


पठारी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था

(1) भंडार – ये महाराष्ट्र में पाए जाते हैं, जिसमें नदियों के किनारे ऊंची दीवारें बनाकर बड़ी मात्रा में पानी को इकट्ठा किया जाता है.

(2) जोहड़ – ये पठारी क्षेत्रों की जमीन पर पाए जाने वाले प्राकृतिक छोटे खड्डे होते हैं। जो कि बारिश के पानी को इकट्ठा करने में के काम आता है.


प्रश्न 3, अपने क्षेत्र में जल के स्रोत का पता लगाइए, क्या इस स्रोत से जल क्षेत्र के सभी निवासियों को उपलब्ध है ?

उत्तर-नई दिल्ली शहर में जलापूर्ति का मुख्य साधन नदी है। यमुना नदी का पानी पाइपों के द्वारा दिल्ली शहर | में लाया जाता है। कुछ पानी शहर के अंदर ही बोर द्वारा जमीन से निकाला जाता है। सभी निवासियों के लिए जल की आपूर्ति नहीं हो पाती।


अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर:-


प्रश्न 1. अपने घर में पर्यानुकूलित बनाने के लिए आप उसमें कौन-कौन से परिवर्तन सुझा सकते हैं ?

उत्तर-


हमें पुनः चक्रण योग्य वस्तुओं को कूड़े के साथ नहीं फेंकना चाहिए।

हमें चीज़ों (जैसे लिफ़ाफ़े ) को फेंकने की अपेक्षा फिर से प्रयोग में लाना चाहिए।

पानी के व्यर्थ रिसाव को रोकना चाहिए।

आवासीय कूड़े-कचरे को कूड़ादान में इकट्ठा कर उसका निपटान करना चाहिए।

हम बिजली के पंखे तथा बल्ब के स्विच बंद करके विद्युत् का Wastage रोक सकते हैं।

हमें आहार को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

पानी को मितव्ययिता से प्रयोग करना चाहिए।

हमें अपने आवास के आस-पास कचरे और गंदे पानी को इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए।

टपकने वाले पानी के पाइप या नल की मुरम्मत करवा कर हम पानी की बचत कर सकते हैं।

प्रश्न 2. क्या आप अपने स्कूल में कुछ परिवर्तन सुझा सकते हैं जिनसे इसे पर्यानुकूलित बनाया जा सके ?

उत्तर-निम्नलिखित परिवर्तनों द्वारा हम अपने स्कूल में पर्यानुकूलित वातावरण बना सकते हैं.


बच्चों को शिक्षा देनी चाहिए कि फूल तथा पत्तियों को न तोड़ें।

स्कूल का भवन साफ-सुथरा रखना चाहिए।

हमें कूड़ा-कचरा इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए, बल्कि चीज़ों का पुन: इस्तेमाल करना चाहिए।

स्कूल के आस-पास कचरे के ढेर और रुका हुआ गंदा जल नहीं होना चाहिए।

शौचालय और मूत्रालयों की नियमित सफाई-धुलाई की जानी चाहिए।

कमरों में ज्यादा-से-ज्यादा खिड़कियाँ बनानी चाहिए ताकि सूर्य की रोशनी अंदर आए और कम-से-कम बिजली खर्च हो.

विद्युत् Wastage को नियंत्रित करना चाहिए।

हमें स्कूल में ज्यादा से ज्यादा पेड़-पौधे लगाने चाहिएं।

हमें जल का Wastage रोकना चाहिए।

प्रश्न 3. इस अध्याय में हमने देखा कि जब हम वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते हैं तो चार मुख्य दावेदार सामने आते हैं। इनमें से किसे वन उत्पाद प्रबंधन हेतु निर्णय लेने के अधिकार दिए जा सकते हैं ? आप ऐसा क्यों सोचते हैं ?

उत्तर-वन एवं वन्य जंतुओं की बात करते समय सामने आने वाले चार मुख्य दावेदार हैं.


1. वन के अंदर और वनों के पास रहने वाले सभी लोग अपनी आवश्यकताओं के लिए वनों पर निर्भर रहते हैं.

2.सरकार का वन विभाग वनों से प्राप्त साधनों का नियंत्रण करता है।

3.बीड़ी उत्पादकों से लेकर कागज़ मिल वनों पर निर्भर रहते हैं. इसीलिए वनों की कटाई बहुत ज्यादा हो रही है।

4. वनों के उपयोग के लिए कानून बनाए जाने चाहिए ताकि वनों के पास रहने वाले लोग और वनों का इस्तेमाल करने वाले लोग वनों का इस्तेमाल ठीक प्रकार कर सकें .


प्रश्न 4. एक एकल व्यक्ति के रूप में आप निम्न के प्रबंधन में क्या योगदान दे सकते हैं।

1.वन एवं वन्य जंतु : वन एवं वन्य जंतु-दूसरे लोगों में वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता जगा सकते हैं, अपने क्षेत्र के उन क्रियाकलापों में भाग ले सकते हैं जो वन तथा वन्य जंतुओं के संरक्षण को महत्त्व देते हैं। संरक्षण के नियमों को अपनाकर तथा इन मसले पर काम कर रही कमेटियों की सहायता करके भी हम वन एवं वन्य जंतुओं के प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं।

2.जल संसाधन : जल संसाधन-अपने घर तथा कार्य स्थान पर जल का Wastage रोक कर तथा वर्षा के जल को अपने घरों में संग्रहण करके।

3.कोयला एवं पेट्रोलियम  : कोयला एवं पेट्रोलियम-विद्युत् के Wastage को रोक कर तथा कम-से-कम बिजली इस्तेमाल करके हम इनके प्रबंधन में योगदान दे सकते हैं। निजी वाहन की अपेक्षा सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल कर पेट्रोल-डीजल की बचत कर सकते हैं।


प्रश्न 5. आप एक एकल व्यक्ति के रूप में विभिन्न प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम करने के लिए क्या कर सकते हैं ?

उत्तर-


खाना पकाने के लिए भी लकड़ी की जगह गैस का इस्तेमाल करना चाहिए।

जल को व्यर्थ होने से रोकना चाहिए।

हमें आहार को व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

तीन ‘Rs’ के नियमों का पालन करके हम प्राकृतिक उत्पादों की खपत कम कर सकते हैं।

विद्युत् को कम-से-कम इस्तेमाल कर सकते हैं तथा इसके Wastage को रोक सकते हैं।

प्रश्न 6. निम्न से संबंधित ऐसे पाँच कार्य लिखिए जो आपने पिछले एक सप्ताह में किए हैं

1.अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।


पर्यावरण के संरक्षण से संबंधित जागरूकता अभियान में भाग लिया।

नहाने में कम-से-कम पानी का उपयोग किया।

रोशनी के लिए CFL’S का प्रयोग करके।

स्कूल आने-जाने के लिए अपने वाहन की जगह सरकारी वाहनों का प्रयोग करके।

विद्युत् उपकरणों का व्यर्थ उपयोग नहीं किया।

2.अपने प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव को और बढ़ाया है।


कंप्यूटर पर प्रिंटिंग के लिए अधिक कागजों का प्रयोग किया।

मोटर साइकिल का अत्यधिक प्रयोग करके।

पंखा चलते छोड़कर कमरे से बाहर गया।

दीवाली पर पटाखे जलाकर।

आहार को व्यर्थ किया।

प्रश्न 7. इस अध्याय में उठाए बिंदुओं ( समस्याओं) के आधार पर आप अपनी जीवन-शैली में क्या परिवर्तन लाना चाहेंगे जिससे हमारे संसाधनों के प्रदूषण को बढ़ावा मिल सके ?

उत्तर-


हमें निजी वाहनों की अपेक्षा सरकारी वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए।

हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम एक समाज में रहते हैं, अकेले नहीं।

हमें तीन (R’s) के नियमों का पालन करना चाहिए। (Reduce, Recycle, Reuse)

हमें अपने संसाधनों का कम-से-कम इस्तेमाल करना चाहिए तथा किसी भी तरह उन्हें व्यर्थ नहीं करना चाहिए।

हमें अपने पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करना चाहिए।

इन सब बातों को अपने जीवन में महत्त्व देकर हम अपने संसाधनों के संप्रदूषण को बढ़ावा दे सकते हैं।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Below Post Ad

Ads Area