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 6.जैव प्रक्रम Bio process


1. जैव प्रक्रम किसे कहते हैं?

उत्तर । यह सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षक का कार्य करते हैं। । उन्हें जैव प्रक्रम कहते हैं।

पोषण :- प्रत्येक जीवधारी को अनुरक्षण प्रक्रम के लिए उर्जा की आवश्यकता होती है जो उर्जा जीवधारी पोषक तत्वों के अंर्तग्रहण से प्राप्त करता है । इस उर्जा के स्रोत को शरीर के अंदर लेने और उपयोग के प्रक्रम को पोषण कहते है।

पोषण दो प्रकार के होते है :

1.स्वपोषी पोषण.

2.विषमपोषी पोषण|

हमारे शरीर में क्षति तथा टूट-फुट रोकने के लिए अनुरक्षण प्रक्रम की आवश्यकता होती है जिसके लिए उन्हें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा एकल जीव के शरीर के बाहर से आती है।

उपचयन-अपचयन अभिक्रियाएँ अणुओं के विघटन की कुछ सामान्य रासायनिक युक्तियाँ हैं। इसके लिए बहुत से जीव शरीर के बाहरी स्रोत से ऑक्सीजन प्रयुक्त करते हैं।

शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के विघटन में उसका उपयोग श्वसन कहलाता है।

एक एक-कोशिकीय जीव की पूरी सतह पर्यावरण के  संपर्क में रहती है। अतः इन्हें भोजन ग्रहण करने वेफ लिए, गैसों का आदान-प्रदान करने  लिए या वर्ज्य पदार्थ के निष्कासन के लिए किसी विशेष अंग की आवश्यकता नहीं होती है।

 जैव प्रक्रम के अंतर्गत आने वाले प्रक्रम हैं :

पोषण

श्वसन

वहन

उत्सर्जन

पोषण :

जीवों द्वारा जटिल कार्बन पदार्थों को जैव-रासायनिक प्रक्रिया द्वारा सरल अणुओं में परिवर्तित कर उपभोग करना पोषण कहलाता है |

श्वसन :

शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के विघटन में उसका उपयोग श्वसन कहलाता है।

वहन :

वहन एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाए जाते है जो शरीर के अनुरक्षण का कार्य करते हैं |

उत्सर्जन :

शरीर से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं |

जटिल पदार्थों के सरल पदार्थों में खंडित करने के लिए जीव कुछ जैव उत्प्रेरक का उपयोग करते हैं जिन्हें एंजाइम कहते हैं | 

सभी हरे पौधें स्वपोषी पोषणकरते हैं | 

विषमपोषी पोषणतीन प्रकार का होता है | 

मृतजीवी पोषण

परजीवी पोषण

प्राणी समभोजी पोषण|

हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में भोजन बनाने की प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं |

कुछ कोशिकाओं में हरे रंग के बिदु दिखाई देते हैं। ये हरे बिंदु कोशिकांग हैं जिन्हें क्लोरोप्लास्ट कहते हैं इनमें क्लोरोफिल होता है।

पौधों के पत्तियों पर छोटे-छोटे असंख्य छिद्र पाए जाते हैं जिन्हें रंध्र कहते हैं |

रंध्र का कार्य

गैसों का आदान-प्रदान भी इन्ही रंध्रों के द्वारा होता है |

वाष्पोत्सर्जन की क्रिया रंध्रों के द्वारा होती है |

स्थलीय पौधे प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक जल की पूर्ति जड़ों द्वारा मिटटी में उपस्थित जल के अवशोषण से करते हैं। नाइट्रोजन, फॉस्पफोरस, लोहा तथा मैग्नीशियम सरीखे अन्य पदार्थ भी मिट्टी से लिए जाते हैं।

नाइट्रोजन एक आवश्यक तत्व है जिसका उपयोग प्रोटीन तथा अन्य यौगिकों के संश्लेषण में किया जाता है।

3. पोषण किसे कहते हैं। ?

उत्तर । जैविक क्रियाओं का समायोजन जिनके द्वारा अपनी अपनी क्रियाशीलता को बनाए रखने के लिए और अंगों की वृद्धि और उनके पुन के लिए आवश्यक पदार्थों को ग्रहण कर उनका उपयोग करता है पोषण कहलाता है।

4. प्राणी संभोग प्राणियों को कहते हैं। ?

उत्तर .वे जीवों सहित पाचन तंत्र पाया जाता है और जो भष्म पदार्थ को लेकर कर के भोजन करते हैं। । और जो भक्षण का अवशोषण करके अप्च्यित भोजन को त्यागर्जित कर देते हैं। । प्राणी संभाजी चलाते हैं।

5।शाकाहारी किसे  किसे  कहते हैं ?

उत्तर .वह जीव जो पौधे या पौधों के उत्पादों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। शाकाहारी कहलाते हैं।


6मसाहारी किसे कहते हैं। ?

उत्तर । वह जीव जो अपना भोजन दूसरे जीवों के मांस से ग्रहण करते हैं। । उन्हें मांसाहारी कहते हैं।

7.सर्वाहारी किसे कहता है। ?

उत्तर । वह जीव जो कीड़े और जंतुओं दोनों को भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। । उन्हें सर्वाहारी कहते हैं।

8अंतरग्रहण kya कहलाता है। ?

उत्तर। जीवो द्वारा शरीर में ठोस भोजन को अंदर ले जाना अंतर्ग्रहण कहलाता है

9।मेहनत करने वाले कहते हैं। ?

उत्तर । वह क्रिया जिसके द्वारा भक्षण पदार्थों के बड़े जटिल और घनीकरण सूक्ष्म सरल और घनीकरण अनुओ में संशोधित हो जाते हैं। । चमक कहलाते हैं।

10 मिशनेपन किसे कहता है ?

उत्तर । अनपचे भोजन को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को बह मिशनेपन कहते हैं।

1 1।प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया किसे कहता है। ?

उत्तर । सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति मे कार्बन डाईऑक्साइड और जल की तरह सरल यौगिकों के हरे पौधों द्वारा क्लोरोफिल की सहायता से जटिल कार्बनिक भंजक पदार्थ के निर्माण की प्रक्रिया ही प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया कहलाती है।

12।संतुलन प्रकाश गहन बिंदु को कहते हैं। ?

उत्तर । छाया में प्रकाश संश्लेषण की दर कम हो जाती है उस समय श्वसन में निकली CO2 प्रकाश संश्लेषण में प्रयोग की गई CO2 के बराबर होती है इस अवस्था को जब पर्यावरण से CO2 का अवशोषण नहीं के बराबर होता है तो उसे संतुलन प्रकाश तीव्रता बिंदु कहते हैं।

13।क्लोरोफिल तू कहता है। ?

उत्तर । यह पत्तियों में पाए जाने वाला हरा वर्णक है

14।श्वसन पर्यंत कहते हैं। ?

उत्तर । जीवो में होने वाली वह जैव रासायनिक क्रिया जिसमें जटिल कार्बनिक भष्म पदार्थों का ऑक्सीकरण होता है जिसका फलस्वरुप CO2 और जल बनते हैं। । और ऊर्जा मुक्त होती है

15।आक्सीकरण करने के लिए कहते हैं। ?

उत्तर । ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाला श्वसन आक्सी श्वसन कहलाता है

16।बेचैनी को कहना है। ?

उत्तर । ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाला श्वसन अनाक्सी श्वसन कहलाता है

17।ऑक्सीजीव पर्य कहते हैं। ?

उत्तर । आक्सीकरण करने वाले जीवों को ऑक्सीजीव कहते हैं।

18।श्वसन पदार्थ किसे कहते हैं। ?

उत्तर .हसन क्रिया में ऑक्सीकृत या अपघटित होने वाले पदार्थ को शोषण पदार्थ कहते हैं।

19।ग्लाइकोलिसिस कहते हैं। ?

उत्तर .ग्लाइकोलिसिस कोशिका द्रव्य में होने वाली वह क्रिया है जिसमें ग्लूकोज का एक विषाणु अपघटित होकर अनु पाइरुविक कॉमन बनाता है।

20।एटीपी क्या है?

उत्तर .ATP अर्थार्थ एडिनोसिन ट्राइफास्फेट एक विशिष्ट योगिक है जो सभी सजीव कोशिका में ऊर्जा का वाहक एईएन है।

21।स्टोमेटा तू कहता है। ?

उत्तर। प्राधिकारियों कि सतह वायु और जल वाष्प के अंतःक्रिया-प्रदान के लिए विशेष प्रकार के अति सूक्ष्म छिटर पाए जाते हैं। । जिन्हें स्टोमेटा कहते हैं।

22।विसरण पर्यन्त कहते हैं। ?

उत्तर । पदार्थ के अणुओं का अधिक सांद्रता वाले स्थान से कम सांद्रता वाले स्थान की ओर गमन विसरण कहलाता है

23।ट्रेकिओल्स तू कहता है। ?

उत्तर । कीटो में पाए जाने वाली ट्रेकिया की सूक्ष्म शाखाओं को ट्रेकिओल्स कहते हैं।

25।ब्रोकिओल्स को कहते हैं। ?

उत्तर .स्तनियो के फेफड़े में पाए जाने वाली ब्रोक्स की सूक्ष्म शाखाओं को ब्रोकिओल्स कहते हैं।

26।श्वासोच्छवासों को कहते हैं। ?

उत्तर । वह सरल यांत्रिक प्रक्रम है जिसके अंतर्गत वायुमंडल से श्वसन अंगों में प्रवेश करती है और श्वसन के पश्चात वायु श्वसन अंगों से बाहर आकर वातावरण में पुनः वापस चली जाती है।

27।निवेशन तू कहता है। ?

उत्तर .वायुमंडलीय वायु का फेफड़ा भरने की क्रिया को निवेशन कहते हैं।

28।वाष्पोउत्सिर करने के लिए कहते हैं। ?

उत्तर .पेड़ पौधों के पत्तों के माध्यम में से अतिरिक्त पानी का वाष्पन वाष्पउत्सर्जन कहलाता है

29।जाइलम तू कहता है। ?

उत्तर । जो पौधे पाद्यात्मक उत्तक मिट्टी से पानी और खनिजों को पत्तों तक पहुंचता है उसे जाइलम कहते हैं।

30।फ्लोएम तू कहता है। ?

उत्तर .जो पादकीय उत्तक पत्तों से बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचता है उसे फ्लोएम कहते हैं।


31।स्थानांतरण करने वाले कहते हैं। ?

उत्तर .पसंद से योजक का किसी पौधे के अन्य भागों में पहुंचना स्थानांतरण कहलाता है

32।अरनी तू कहता है। ?

उत्तर .वे नलिया जो दिल से ऑक्सीकृत रक्त को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचती है उन्हें धनिया कहते हैं।

33।शिराये को कहते हैं। ?

उत्तर .वे नलिया जो शरीर के विभिन्न भागों से अशुद्ध रक्त को हृदय तक पहुँचती है उन्हें शिराये कहते हैं।

34।हीमोग्लोबिन किसे कहते हैं। ?

उत्तर । रक्त में ऑक्सीजन का संवहनी करने के लिए कोशिकाद्रव्य में लाल रंग का आयरन योगिक हिमोग्लोबिन कहलाता है।

35।थक्का तू कहता है। ?

उत्तर । शरीर में रक्त के जमने को थक्का कहते हैं।


36।महाराज आज कहते हैं। ?

उत्तर । शरीर में जीवाणुओं या रोंगेवायरसओ के द्वारा उत्पन्न किए गए विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करने वाले को कोज कहते हैं

37।डायलिसिस किसे कहते हैं। ?

उत्तर । शरीर के कृत्रिम तरीके से यूरिया आदि पदार्थों को बाहर निकालने की विधि को डायलिसिस कहते हैं।

38।प्रोजेक्शन नियमन किसे कहते हैं। । ?

उत्तर । शरीर में पानी की उचित मात्रा को बनाए रखने को प्रक्षेपण नियम कहते हैं।

39।लसिका तू कहता है। ?

उत्तर । यह पीले रंग का द्रव्य होता है जिसमें सफेद कणिकाएं ग्लूकोज खनिज लवण ऑक्सीजन आदि होते हैं।

40।संरक्षण कहते हैं। ?

उत्तर । शरीर में उपापचाई क्रियाओं के कारण उत्पन्न हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने की क्रिया को क्रिया कहते है


पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (Textual Questions)


प्रश्न . हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है ?

उत्तर– बहुकोशी जीवों में उनकी केवल बहरी त्वचा की कोशिकाएँ और रंध्र ही आस-पास के वातावरण से सीधे संबंधित होते हैं। बहुकोशीय जिव जैसे मनुष्य में शरीर का आकार बहुत बड़ा होता है तथा शरीर की संरचना जटिल होती है। बहुकोशीय जीवों में सभी कोशिकाएँ सीधे ही पर्यावरण के संपर्क में नहीं होती। अत: साधारण विसरण सभी कोशिकाओं की ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए अपर्याप्त है।


प्रश्न . कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?

उत्तर- सभी जीवित वस्तुएँ सजीव कहलाती हैं। वे रूप-रंग, आकार आदि में समान भी होते हैं तथा भिन्न भी। अत: कोई वस्तु सजीव है, इसके निर्धारण के लिए निम्नलिखित मापदंड हैं:

1. सजीवों की संरचना सुसंगठित होती है।

2. उनमें कोशिकाएँ और ऊतक होते हैं।

3. उनकी संगठित और सुव्यवस्थित संरचना समय के साथ पर्यावरण के प्रभाव से विघटित होने लगती है।

4. सजीवों की निश्चित रूप से मृत्यु होती है।

5. सजीव अपने शरीर की मरम्मत और अनुरक्षण करते हैं। उनकी संरचना अणुओं से हुई है और उन्हें अणुओं को लगातार गतिशील बनाए रखना चाहिए।

6. सजीवों में विशेष सीमा में वृद्धि होती है।

7. उनके शरीर में रासायनिक क्रियाओं की श्रृंखला चलती है। उनमें उपचय-अपचय अभिक्रियाएँ होती हैं।


प्रश्न . किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?

उत्तर– किसी जीव के द्वारा जिन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, वे हैं

1. ऊर्जा प्राप्ति के लिए उचित पोषण।

2. श्वसन के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन


प्रश्न  . जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रम को आवश्यक मानेंगे ?

उत्तर- जीवन के अनुरक्षण के लिए जो प्रक्रम आवश्यक माने जाने चाहिएं, वे हैं- पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन।


प्रश्न . स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर हैं?

उत्तर– स्वयंपोषी पोषण –

वे जीव जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सरल अकार्बनिक से जटिल कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करके अपना स्वयं पोषण करते हैं, स्वयंपोषी जीव (Autot Rophs) कहलाते हैं।

उदाहरण-सभी हरे पौधे, युग्लीना

विषमपोषी पोषण –

वे जीव जो कार्बनिक पदार्थ और ऊर्जा को अपनेभोज्य पदार्थ के रूप में अन्य जीवित या मृत पौधों या जंतुओं से ग्रहण करते हैं, विषमपोषी जीव (Heterotrophs) कहलाते हैं।

उदाहरण- युग्लीना को छोड़कर सभी जंतु। अमरबेल,जीवाणु, कवक आदि।


प्रश्न . प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?

उत्तर- प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री कार्बन-डाइऑक्साइड तथा जल है। पौधे कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण से प्राप्त करते है और जल भूमि से।


प्रश्न . हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?

उत्तर- हमारे आमाशय में हाईडरोक्लोरिक अम्ल उपस्थित होता है .यह अम्ल अमाशय में अम्लीय माध्यम का निर्माण करता है  . इसी की मदद से एंजाइम अपना कार्य करता है . HCl अम्ल हमारे भोजन में उपस्थित रोगाणुओं को नष्ट कर देता है.अम्ल आमाशय में भोजन को पचाने में सहायता करता है .


प्रश्न . पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?

उत्तर- एंजाइम वे जैव उत्प्रेरक होते हैं जो जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल ने  में सहायता प्रदान करते हैं। ये पाचन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन में सहायक बनते हैं।इस प्रकार से सरल पदार्थ छोटी आंत द्वारा अवशोषित कर लिए जाते है  


प्रश्न . पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?

उत्तर – क्षुद्रांत्र पाचित भोजन को अवशोषित करने का मुख स्थान है। क्षुद्रांत्र की आंतरिक भित्ति/अस्तर अंगुली जैसी संरचनाओं/प्रवर्ध में विकसित होते हैं जिन्हें दीर्घ रोम कहते हैं। ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। दीर्घ रोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है, जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाते हैं।


प्रश्न . श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद हैं?

उत्तर- जलीय जीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का श्वसन के लिए उपयोग करते हैं। जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है। इसलिए जलीय जीवों के श्वसन की दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा अधिक तेज़ होती है। मछलियाँ अपने मुँह के द्वारा जल लेती हैं और बल-पूर्वक इसे क्लोम तक पहुँचाती हैं। वहाँ जल में घुली हुई ऑक्सीजन को रुधिर प्राप्त कर लेता है।


प्रश्न . ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं?

उत्तर- ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त होती है और यह श्वसन प्रक्रिया के लिए प्रमुख कच्ची सामग्री के रूप में कार्य करता है। यह ऑक्सीजन की उपलब्ध मात्रा तथा जीव के प्रकार पर निर्भर करता है।

(I) सभी जीवों में ग्लाइकोलिसिस होती है जसिमें ग्लूकोज़ पाइरुवेट में बदलता है, जो तीन कार्बन वाला यौगिक है। यह प्रक्रिया जीवद्रव में होती है।

(II)  

(Ii) अवायवीय (अनॉक्सी) श्वसन जो ईस्ट में होता है पायरूवेट एथेनॉल तथा CO2 में परिवर्तित होता है तथा कुछ मात्रा में ऊर्जा भी उतसर्जित होती है।

(Iii) जब हम व्यायाम करते हैं या दौड़ लगाते हैं, तो माँसपेशियों में पायरूवेट लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित होता है तथा कुछ ऊर्जा उतसर्जित होती है।

(Iv) जब पाइरुवेट का ऑक्सीकरण, ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में होता है तो इससे CO2 तथा H2O बनता है तथा प्रचुर मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित होती है।

ग्लूकोज़ का पूर्ण ऑक्सीकरण माइटोकॉन्ड्रिया में होता है।


प्रश्न . मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बनडाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?

उत्तर- जब हम श्वास अंदर लेते हैं तब हमारी पसलियाँ ऊपर उठती हैं और डायाफ्राम चपटा हो जाता है। इस कारण वक्षगुहिका बढ़ी हो जाती है और वायु फुफ्फुस के भीतर चली जाती है। वह विस्तृत कूपिकाओं को भर लेती है। रुधिर सारे शरीरसे CO, को कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है। कुपिका रुधिर वाहिका का रुधिर कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर | की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है। श्वास चक्र के समय जब वायु अंदर और बाहर होती है तब फुफ्फुस वायु का अवशिष्ट आयतन रखते हैं। इससे ऑक्सीजन के अवशोषण और कार्बन डाइऑक्साइड के मोचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।


प्रश्न . गैसों के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अधिकाल्पित किया है?

उत्तर-  जब हम श्वांस अन्दर लेते हैं तब हमारी पशलियाँ ऊपर उठती हैं L वे बाहर की झुक जाती हैं L इसी समय डायफ्राम की पेसियां संकुचित तथा उदर पेशियाँ शिथिल हो जाती है इससे वक्षीय गुहा का क्षेत्रफल बढ़ता है और साथ हि फुफ्फुस का क्षेत्रफल भी बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप श्वसन पथ से वायु अन्दर आकर फेफड़े में भर जाती है L


प्रश्न . मानव में वहन तंत्र के घटक कौन-से हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?

उत्तर- मानव में वहन तंत्र के प्रमुख दो घटक हैं-रुधिर और लसीका।


 रुधिर के कार्य

1. फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन का परिवहन करना।

2.  रुधिर के श्वेत रक्त कणिकाएं हानिकारक बैक्टीरियाओ, मृतकोशिकाओं तथा रोगाणुओं का भक्षण करके उन्हें नष्ट कर देता है।

3. पहिकाएं तथा फाइब्रिनोजिन नामक प्रोटीन रक्त में उपस्थित होती है जो रक्त का थक्का जमने में सहायक होते हैं।

4. विभिन्न प्रकार के एंजाइमों का परिवहन करता है।

5. विभिन्न प्रकार के हॉर्मोनों का परिवहन करना।

6. छोटी आँतों से परिजय भोज्य पदार्थों का अवशोषण भी रक्त प्लाज्मा द्वारा होता है जिसे यकृत और विभिन्न ऊतकों में भेज दिया जाता है।

7. शरीर के तापक्रम को उष्मा वितरण द्वारा नियंत्रित रखना।

8. विभिन्न ऊतकों में कार्बन-डाइऑक्साइड को एकत्रित करके उसका फेफड़ों तक परिवहन करना।

9.  विभिन्न प्रकार के उत्सर्जी पदार्थों का उत्सर्जन हेतु वृक्कों तक पहुँचाना।

10.  उपाचय में बने विषैले एवं हानिकारक पदार्थों को एकत्रित करके अहानिकारक बनाने के लिए यकृत में भेजना।


 लसीका के कार्य

1. लसिका ऊतकों तक भोज्य पदार्थों का संवहन करती है।

2.  शरीर के घाव भरने में सहायक होती है।

3.  पचे वसा का अवशोषण करके शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती है।

4. ऊतकों से उत्सर्जी पदार्थों को एकत्रित करती है।

5. हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके शरीर की रक्षा करती है।


प्रश्न . स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सिजनित तथा विऑक्सिजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक हैं?

उत्तर- स्तनधारी तथा पक्षियों में उच्च तापमान को बनाए रखने के लिए अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को हृदय के दायें और बायें भाग से आपस में मिलने से रोकना परम आवश्यक है। इस प्रकार का बंटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति करता है।


प्रश्न . उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?

उत्तर-  उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के प्रमुख ऊतक दो प्रकार के हैं

(A) जाइलम ऊतक (दारू)- यह एक जटिल ऊतक है जो जड़ों द्वारा अवशोषित जल तथा खनिज लवणों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।

(B) फ्लोएम ऊतक – यह एक वहन ऊतक है जो खाद्य पदार्थों (शर्करा), जो पत्तों द्वारा संश्लेषित होती है तथा हार्मोन जो तने की चोटी में संश्लेषित होते हैं, को पौधे के उन भागों में स्थानांतरित करता है जहाँ उनकी आवश्यकता होती है।


प्रश्न . पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?

अथवा

पौधों में भोजन तथा दूसरे पदार्थों के स्थानांतरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर- पादप में जल और खनिज लवण का वाहन जाइलम ऊतक द्वारा होता है। जड़, तना तथा पत्तों में उपस्थित वाहिनिकाएँ तथा वाहिकाएँ आपस में जुड़कर जल संवहन वाहिकाओं का एक जाल बनाती हैं जो पादप के सभी भागों से जुड़ा होता है। जड़ों की कोशिकाएँ मृदा के संपर्क में होती हैं तथा वे सक्रिय रूप से जल तथा खनिजों को (आयन के रूप में) प्राप्त करती हैं। यह जड़ और मृदा के मध्य आयन सांद्रण में एक अंतर उतपन्न करता है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए मृदा से जल जड़ में प्रवेश कर जाता है। यह जल के स्तंभ का निर्माण करता है जो लगातार ऊपर की ओर धकेला जाता है।


प्रश्न . पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?

अथवा

पादपों में पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन का वहन किस प्रकार होता है ? समझाइए।

उत्तर- पादपों की पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण क्रिया से अपना भोजन तैयार करती हैं और वह वहाँ से पादप के अन्य भागों में भेजा जाता है। प्रकाश संश्लेषण के विलेय उत्पादों का वहन स्थानांतरण कहलाता है। यह कार्य संवहन ऊतक के फ्लोएम नामक भाग के द्वारा किया जाता है। पत्तिया भोजन तैयार करती है | फ्लोएम वाहिकाए के द्वारा पात्तियो से भोजन स्थानांतरण पूरे पौधे में होता है .


प्रश्न . वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि का वर्णन कीजिए।

अथवा

मानव वृक्क में मूत्र किस प्रकार बनता है ?

उत्तर-  वृक्काणु वृक्क की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इस प्रकार है।

(I) वृक्काणु की संरचना- प्रत्येक वृक्काणु में एक कप की आकृति की संरचना होती है, जिसे बोमन संपुट कहते हैं। यह रक्त कोशिकाओं के जाल को घेरे रखती है। इसे कोशिकागुच्छ कहते हैं। बोमन सपूत से एक नलिकाकार संरचना निकलती है जिसे कुंडलित नलिका कहते हैं। यह नलिका फिर एक की आकृति की संरचना बनती है जिसे हेनले का लूप कहते हैं, जो एक और कुंडलित संरचना बनाती है, जिसे (DCT) कहते हैं। यह वाहिनी में जाकर मिलती है।

 

(Ii) वृक्काणु का कार्य- वृक्क धमनी रक्त को बोमन संपुट के कोशिकागुच्छ में लेकर जाती है और रक्त को छाना जाता है। प्रारंभिक निस्यंद में कुछ पदार्थ; जैसे ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण आयन, प्रचुर मात्रा में जल रह जाता है। उसमें कुछ सुक्रोज़/ग्लूकोज़ तथा कुछ यूरिया भी होता है। जैसे-जैसे निस्यंद कुंडलित नलिका और हैनले के लूप में से गुज़रता है, इसमें से कुछ उपयोगी पदार्थों को दोबारा अवशोषित कर लिया जाता है तथा अधिक पानी, यूरिया और दूसरे व्यर्थ मूत्राशय में सूत्र के रुओ में एकत्रित कर लिए जाते हैं।


प्रश्न. उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं?

उत्तर– पादप उत्सृजन के लिए जंतुओं से बिलकुल भिन्न युक्तियाँ प्रयुक्त करते हैं।


पौधे कुछ पदार्थों को व्यर्थ के रूप में आस-पास की मृदा में उत्सर्जित कर देते हैं।

रात के समय पौधों के लिए O2 एक व्यर्थ पदार्थ नहीं है, जबकि CO2 एक व्यर्थ पदार्थ है।

व्यर्थ पदार्थों गोंद तथा रेजिन के रूप में पुराने जाइलम ऊतक में एकत्रित हो जाते हैं।

अनेक पादप व्यर्थ पदार्थ कोशिकाओं में रिक्तिकाओं में संचित हो जाते हैं। व्यर्थ पदार्थ पत्तों में भी एकत्रित हो जाते तो फिर गिर जाते हैं।

 यहाँ तक कि पौधे फालतू पानी को वाष्पोतसर्जन द्वारा वायु में छोड़ देते हैं।

दिन के समय पौधों की कोशिकाओं में श्वसन कारण उतपन्न CO2 एक व्यर्थ पदार्थ नहीं है, क्योंकि इसे प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रयुक्त कर लिया जाता है। दिन के समय अत्यधिक मात्रा में O2 उत्पादित होती है, जो उसके स्वयं के लिए एक व्यर्थ पदार्थ होता है। उसे वायुमंडल में मुक्त कर दिया जाता है।

प्रश्न. मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार है ?

उत्तर- मूत्र बनने की मात्रा इस प्रकार नियंत्रित की जाती है कि जल की मात्रा का शरीर में संतुलन बना रहे। जल की बाहर निकलने वाली मात्रा इस आधार पर निर्भर करती है कि उसे कितना विलेय वर्त्य पदार्थ उत्सर्जित करना है। अतिरिक्त जल का वृक्क में पुनरावशोषण कर लिया जाता है और उसका पुन: उपयोग हो जाता है।


अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न . मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है

(A) पोषण

(B) श्वसन

(C) उत्सर्जन

(D) परिवहन।

उत्तर- (C) उत्सर्जन।


प्रश्न . पादप में जाइलम उत्तरदायी है

(A) जल का वहन

(B) भोजन का वहन

(C) अमीनो अम्ल का वहन

(D) ऑक्सीजन का वहन।

उत्तर- (A) जल का वहन।


प्रश्न . स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है

(A) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल

(B) क्लोरोफिल

(C) सूर्य का प्रकाश

(D) उपरोक्त सभी।

उत्तर- (D) उपरोक्त सभी।


प्रश्न . पायवेट के विखंडन से यह कार्बनडाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती

(A) कोशिका द्रव्य

(B) माइटोकाँड्रिया

(C) हरित लवक

(D) केंद्रक।

उत्तर- (B) माइटोकॉड्रिया।


प्रश्न . हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?

उत्तर- वसा का पाचन आहारनाल के क्षुद्रांत में होता है | आमाशय में लाइपेज उन पर क्रिया करता है तथा वसा को खंडित कर देते है | इसके पश्चात क्षुद्रांत में यकृत द्वारा स्त्रावित बाइल रस वसा को इमल्सीफाई करता है | अग्नाशय रस इस खंडित वसा को वसीय अम्ल और गिल्सरोल में बदल देता है .इस प्रकार वसा क्षुद्रांत में पाचित हो जाती है  


प्रश्न . भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?

उत्तर- भोजन के पाचन में लार की अति महत्त्वपूर्ण भूमिका है। लार एक रस है जो तीन जोड़ी लाल ग्रंथियों से मुँह में उत्पन्न होता है। लार में एमिलेस नामक एक एंजाइम होता है जो मंड जटिल अणु को लार के साथ पूरी तरह मिला देता है। लार के प्रमुख कार्य हैं

(I) यह भोजन के स्वाद को बढ़ाती है।

(Ii) इसमें विद्यमान टायलिन नामक एंजाइम स्टार्च का पाचन कर उसे माल्टोज़ में बदल देता है।

(Iii) यह भोजन को चिकना एवं मुलायम बनाती है।

(Iv) यह भोजन को पचाने में भी मदद करती है।

(V) यह मुख के खोल को साफ़ रखती है।

(Vi) यह मुख खोल में चिकनाई पैदा करती है जिससे चबाते समय रगड़ कम होती है।


प्रश्न . स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन-सी हैं और उनके उपोत्पाद क्या हैं?

उत्तर –  स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं:


क्लोरोफिल की उपस्थिति

कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति

जल की उपस्थिति

प्रकाश संश्लेषी ऐंजाइम की उपस्थिति

सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति।

प्रकाश संश्लेषण के उत्पाद:


ऑक्सीजन

रासायनिक ऊर्जा।

प्रश्न . वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।

उत्तर-

वायवीय       अवायवीय

वायवीय क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है अवायवीय क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।


यह क्रिया कोशिका के जीव द्रव्य एवं माइटोकॉड्रिया दोनों में पूर्ण होती है। यह क्रिया केवल जीव द्रव्य में ही पूर्ण होती है।


इस क्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता इस क्रिया में ग्लूकोज़ का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है।

इस क्रिया से CO2, एवं H2O बनता है। इस क्रिया में एल्कोहल एवं CO2 बनती है।

इस क्रिया में ग्लूकोज़ के एक अणु में 38 ATP अणु मुक्त होते हैं। इस क्रिया में ग्लूकोज के एक अणु में 2 ATP अणु मुक्त होते हैं।


ग्लूकोज़ के एक अणु के पूर्ण ऑक्सीकरण से 673 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है। ग्लूकोज के अणु के अपूर्ण ऑक्सीकरण से 21 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है।


कुछ जीवों में अवायवीय श्वसन होता है, जैसे यीस्ट।


प्रश्न . गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?

उत्तर- श्वसन तंत्र में फुफ्फुस के अंदर अनेक छोटी-छोटी नालियों का विभाजित रूप होता है हो अंत में गुब्बारों जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है, जिसे कूपिका कहते हैं। यह एक सतह उपलब्ध करती हैं जिस से गैसों का विनियम हो सके। यदि कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए तो यह लगभग 80 वर्ग मीटर क्षेत्र को ढांप सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का बहुत विस्तृत जाल होता है। जब हम साँस अंदर लेते हैं तो पसलियाँ ऊपर उठ जाती हैं और हमारा डायफ्राम चपटा हो जाता है जिससे वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है। इस कारण वायु फिफ्फुस के भीतर चूस ली जाती है। रक्त शरीर से लाई गई CO2 कूपिकाओं को दे देता है। कूपिका रक्त वाहिका का रक्त कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचा देती हैं।


प्रश्न . हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर- हीमोग्लोबिन हमारे शरीर में आक्सीजन का वहन करता है .शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से रक्ताल्पता (Anaemia) हो जाता है। हमें श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की प्राप्ति नहीं होगी तो  हम शीघ्र थक जाएंगे। हमारा भार कम हो जाएगा। हमारा रंग पीला पड़ जाएगा। हम कमज़ोरी अनुभव करेंगे।


प्रश्न . मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?

उत्तर- दोहरा परिसंचरण- विऑक्सिजनित रक्त शरीर के विभिन्न भागों से महाशिराओं द्वारा दाएँ अलिंद में इकट्ठा किया जाता है। जब दायाँ अलिंद सिकुड़ता है तो यह दाएँ निलय में चला जाता है। जब दायाँ निलय सिकुड़ता है तो यह विऑक्सिजनित रक्त फुफ्फुस धमनी के माध्यम से फुस्फुस (फेफड़ों) में चला जाता है, जहाँ पर गैसों का विनिमय होता है। यह रक्त ऑक्सिजनित होकर फुफ्फुस शिराओं के द्वारा वापिस ह्दय में बाएँ अलिंद में आ जाता है। जब बायाँ अलिंद सिकुड़ता है तो यह ऑक्सिजनित रक्त बाएँ निलय में आता है। जब बायाँ निलय सिकुड़ता है तो यह रक्त शरीर के विभिन्न भागों में महाधमनी के माध्यम से वितरित किया जाता है।

 

अत: वही रक्त ह्दय चक्र में ह्दय में से दो बार गुज़रता है, एक बार ऑक्सिजनित तथा दूसरी बार विऑक्सिजनित रक्त के रूप में। इसी को दोहरा परिसंचरण कहते हैं।

महत्व- हमारा ह्दय चार कोष्ठकों से मिलकर बना है इसके ही कारण से हमारे शरीर के सभी भागों को ऑक्सिजनित रक्त वितरित किया जाता है। इसके कारण से ही कोशिकाओं व ऊतकों में ऑक्सीजन का वितरण सही आवश्यकता अनुसार बना रहता है।


प्रश्न . जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है?

उत्तर-  जाइलम निर्जीव ऊतक हैं। ये जड़ों से जल और घुले हुए लवणों को पत्तियों में पहुँचाते हैं। फ्लोएम सजीव ऊतक हैं। ये पत्तियों में तैयार शर्करा को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाते हैं। जाइलम ऊपर की तरह गति करने में सहायक होते हैं और फ्लोएम नीचे की तरफ गति कराते हैं।


प्रश्न . फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि की तुलना कीजिए।

उत्तर – 

 No.फुस्फुस में कूपिकाएँ No.वृक्क में वृक्काणु
1मानव शरीर में विद्यमान दोनों फेफड़ों में बहुत अधिक सख्यां में कूपिकाएँ होती है|1मानव शरीर में वृक्क संख्या में दो होते हैं। संख्या में कूपिकाएँ होती हैं। प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख वृक्काणु होते हैं।
2प्रत्येक कूपिका प्याले के आकार जैसी होती है।2प्रत्येक वृक्काणु महीन धागे की आकृति जैसा होता है।
3

कूपिका दोहरी दीवार से निर्मित होती है।3वृक्काणु के एक सिरे पर प्याले के आकार की मैल्पीघियन सम्पुट विद्यमान होती है।
4

कूपिका की दोनों दीवारों के बीच रुधिर कोशिकाओं का सघन जाल बिछा रहता है4बोमैन सम्पुट में रुधिर कोशिकाओं का गुच्छ उपस्थित होता है जिसे कोशिका गुच्छ कहते हैं।
5

कुपिकाएँ वायु भरने पर फैल जाती हैं।

5

वृक्काणु में ऐसी क्रिया नहीं होती।

6

यहाँ रुधिर की लाल रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन प्राप्त कर लेती है तथा प्लाज्मा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड कुपिका में चली जाती है।

6

कोशिका गुच्छ में रुधिर में उपस्थित वर्थ्य पदार्थ छन जाते हैं।

7

कूपिकाओं में गैसीय आदान-प्रदान के बाद फेफड़े के – संकुचन से कूपिकाओं में भरी वायु शरीर के बाहर निकल जाती है।

7

मूत्र निवाहिका से मूत्र बहकर मूत्राशय में इकट्ठा हो जाता है और वहाँ से मूत्रमार्ग द्वारा शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है।

 6.जैव प्रक्रम Bio process


1. जैव प्रक्रम किसे कहते हैं?

उत्तर । यह सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षक का कार्य करते हैं। । उन्हें जैव प्रक्रम कहते हैं।

पोषण :- प्रत्येक जीवधारी को अनुरक्षण प्रक्रम के लिए उर्जा की आवश्यकता होती है जो उर्जा जीवधारी पोषक तत्वों के अंर्तग्रहण से प्राप्त करता है । इस उर्जा के स्रोत को शरीर के अंदर लेने और उपयोग के प्रक्रम को पोषण कहते है।

पोषण दो प्रकार के होते है :

1.स्वपोषी पोषण.

2.विषमपोषी पोषण|

हमारे शरीर में क्षति तथा टूट-फुट रोकने के लिए अनुरक्षण प्रक्रम की आवश्यकता होती है जिसके लिए उन्हें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा एकल जीव के शरीर के बाहर से आती है।

उपचयन-अपचयन अभिक्रियाएँ अणुओं के विघटन की कुछ सामान्य रासायनिक युक्तियाँ हैं। इसके लिए बहुत से जीव शरीर के बाहरी स्रोत से ऑक्सीजन प्रयुक्त करते हैं।

शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के विघटन में उसका उपयोग श्वसन कहलाता है।

एक एक-कोशिकीय जीव की पूरी सतह पर्यावरण के  संपर्क में रहती है। अतः इन्हें भोजन ग्रहण करने वेफ लिए, गैसों का आदान-प्रदान करने  लिए या वर्ज्य पदार्थ के निष्कासन के लिए किसी विशेष अंग की आवश्यकता नहीं होती है।

 जैव प्रक्रम के अंतर्गत आने वाले प्रक्रम हैं :

पोषण

श्वसन

वहन

उत्सर्जन

पोषण :

जीवों द्वारा जटिल कार्बन पदार्थों को जैव-रासायनिक प्रक्रिया द्वारा सरल अणुओं में परिवर्तित कर उपभोग करना पोषण कहलाता है |

श्वसन :

शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के विघटन में उसका उपयोग श्वसन कहलाता है।

वहन :

वहन एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर के विभिन्न भागों में आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाए जाते है जो शरीर के अनुरक्षण का कार्य करते हैं |

उत्सर्जन :

शरीर से हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन के प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं |

जटिल पदार्थों के सरल पदार्थों में खंडित करने के लिए जीव कुछ जैव उत्प्रेरक का उपयोग करते हैं जिन्हें एंजाइम कहते हैं | 

सभी हरे पौधें स्वपोषी पोषणकरते हैं | 

विषमपोषी पोषणतीन प्रकार का होता है | 

मृतजीवी पोषण

परजीवी पोषण

प्राणी समभोजी पोषण|

हरे पौधों द्वारा सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की उपस्थिति में भोजन बनाने की प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं |

कुछ कोशिकाओं में हरे रंग के बिदु दिखाई देते हैं। ये हरे बिंदु कोशिकांग हैं जिन्हें क्लोरोप्लास्ट कहते हैं इनमें क्लोरोफिल होता है।

पौधों के पत्तियों पर छोटे-छोटे असंख्य छिद्र पाए जाते हैं जिन्हें रंध्र कहते हैं |

रंध्र का कार्य

गैसों का आदान-प्रदान भी इन्ही रंध्रों के द्वारा होता है |

वाष्पोत्सर्जन की क्रिया रंध्रों के द्वारा होती है |

स्थलीय पौधे प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक जल की पूर्ति जड़ों द्वारा मिटटी में उपस्थित जल के अवशोषण से करते हैं। नाइट्रोजन, फॉस्पफोरस, लोहा तथा मैग्नीशियम सरीखे अन्य पदार्थ भी मिट्टी से लिए जाते हैं।

नाइट्रोजन एक आवश्यक तत्व है जिसका उपयोग प्रोटीन तथा अन्य यौगिकों के संश्लेषण में किया जाता है।

3. पोषण किसे कहते हैं। ?

उत्तर । जैविक क्रियाओं का समायोजन जिनके द्वारा अपनी अपनी क्रियाशीलता को बनाए रखने के लिए और अंगों की वृद्धि और उनके पुन के लिए आवश्यक पदार्थों को ग्रहण कर उनका उपयोग करता है पोषण कहलाता है।

4. प्राणी संभोग प्राणियों को कहते हैं। ?

उत्तर .वे जीवों सहित पाचन तंत्र पाया जाता है और जो भष्म पदार्थ को लेकर कर के भोजन करते हैं। । और जो भक्षण का अवशोषण करके अप्च्यित भोजन को त्यागर्जित कर देते हैं। । प्राणी संभाजी चलाते हैं।

5।शाकाहारी किसे  किसे  कहते हैं ?

उत्तर .वह जीव जो पौधे या पौधों के उत्पादों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। शाकाहारी कहलाते हैं।


6मसाहारी किसे कहते हैं। ?

उत्तर । वह जीव जो अपना भोजन दूसरे जीवों के मांस से ग्रहण करते हैं। । उन्हें मांसाहारी कहते हैं।

7.सर्वाहारी किसे कहता है। ?

उत्तर । वह जीव जो कीड़े और जंतुओं दोनों को भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। । उन्हें सर्वाहारी कहते हैं।

8अंतरग्रहण kya कहलाता है। ?

उत्तर। जीवो द्वारा शरीर में ठोस भोजन को अंदर ले जाना अंतर्ग्रहण कहलाता है

9।मेहनत करने वाले कहते हैं। ?

उत्तर । वह क्रिया जिसके द्वारा भक्षण पदार्थों के बड़े जटिल और घनीकरण सूक्ष्म सरल और घनीकरण अनुओ में संशोधित हो जाते हैं। । चमक कहलाते हैं।

10 मिशनेपन किसे कहता है ?

उत्तर । अनपचे भोजन को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को बह मिशनेपन कहते हैं।

1 1।प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया किसे कहता है। ?

उत्तर । सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति मे कार्बन डाईऑक्साइड और जल की तरह सरल यौगिकों के हरे पौधों द्वारा क्लोरोफिल की सहायता से जटिल कार्बनिक भंजक पदार्थ के निर्माण की प्रक्रिया ही प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया कहलाती है।

12।संतुलन प्रकाश गहन बिंदु को कहते हैं। ?

उत्तर । छाया में प्रकाश संश्लेषण की दर कम हो जाती है उस समय श्वसन में निकली CO2 प्रकाश संश्लेषण में प्रयोग की गई CO2 के बराबर होती है इस अवस्था को जब पर्यावरण से CO2 का अवशोषण नहीं के बराबर होता है तो उसे संतुलन प्रकाश तीव्रता बिंदु कहते हैं।

13।क्लोरोफिल तू कहता है। ?

उत्तर । यह पत्तियों में पाए जाने वाला हरा वर्णक है

14।श्वसन पर्यंत कहते हैं। ?

उत्तर । जीवो में होने वाली वह जैव रासायनिक क्रिया जिसमें जटिल कार्बनिक भष्म पदार्थों का ऑक्सीकरण होता है जिसका फलस्वरुप CO2 और जल बनते हैं। । और ऊर्जा मुक्त होती है

15।आक्सीकरण करने के लिए कहते हैं। ?

उत्तर । ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाला श्वसन आक्सी श्वसन कहलाता है

16।बेचैनी को कहना है। ?

उत्तर । ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होने वाला श्वसन अनाक्सी श्वसन कहलाता है

17।ऑक्सीजीव पर्य कहते हैं। ?

उत्तर । आक्सीकरण करने वाले जीवों को ऑक्सीजीव कहते हैं।

18।श्वसन पदार्थ किसे कहते हैं। ?

उत्तर .हसन क्रिया में ऑक्सीकृत या अपघटित होने वाले पदार्थ को शोषण पदार्थ कहते हैं।

19।ग्लाइकोलिसिस कहते हैं। ?

उत्तर .ग्लाइकोलिसिस कोशिका द्रव्य में होने वाली वह क्रिया है जिसमें ग्लूकोज का एक विषाणु अपघटित होकर अनु पाइरुविक कॉमन बनाता है।

20।एटीपी क्या है?

उत्तर .ATP अर्थार्थ एडिनोसिन ट्राइफास्फेट एक विशिष्ट योगिक है जो सभी सजीव कोशिका में ऊर्जा का वाहक एईएन है।

21।स्टोमेटा तू कहता है। ?

उत्तर। प्राधिकारियों कि सतह वायु और जल वाष्प के अंतःक्रिया-प्रदान के लिए विशेष प्रकार के अति सूक्ष्म छिटर पाए जाते हैं। । जिन्हें स्टोमेटा कहते हैं।

22।विसरण पर्यन्त कहते हैं। ?

उत्तर । पदार्थ के अणुओं का अधिक सांद्रता वाले स्थान से कम सांद्रता वाले स्थान की ओर गमन विसरण कहलाता है

23।ट्रेकिओल्स तू कहता है। ?

उत्तर । कीटो में पाए जाने वाली ट्रेकिया की सूक्ष्म शाखाओं को ट्रेकिओल्स कहते हैं।

25।ब्रोकिओल्स को कहते हैं। ?

उत्तर .स्तनियो के फेफड़े में पाए जाने वाली ब्रोक्स की सूक्ष्म शाखाओं को ब्रोकिओल्स कहते हैं।

26।श्वासोच्छवासों को कहते हैं। ?

उत्तर । वह सरल यांत्रिक प्रक्रम है जिसके अंतर्गत वायुमंडल से श्वसन अंगों में प्रवेश करती है और श्वसन के पश्चात वायु श्वसन अंगों से बाहर आकर वातावरण में पुनः वापस चली जाती है।

27।निवेशन तू कहता है। ?

उत्तर .वायुमंडलीय वायु का फेफड़ा भरने की क्रिया को निवेशन कहते हैं।

28।वाष्पोउत्सिर करने के लिए कहते हैं। ?

उत्तर .पेड़ पौधों के पत्तों के माध्यम में से अतिरिक्त पानी का वाष्पन वाष्पउत्सर्जन कहलाता है

29।जाइलम तू कहता है। ?

उत्तर । जो पौधे पाद्यात्मक उत्तक मिट्टी से पानी और खनिजों को पत्तों तक पहुंचता है उसे जाइलम कहते हैं।

30।फ्लोएम तू कहता है। ?

उत्तर .जो पादकीय उत्तक पत्तों से बने भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचता है उसे फ्लोएम कहते हैं।


31।स्थानांतरण करने वाले कहते हैं। ?

उत्तर .पसंद से योजक का किसी पौधे के अन्य भागों में पहुंचना स्थानांतरण कहलाता है

32।अरनी तू कहता है। ?

उत्तर .वे नलिया जो दिल से ऑक्सीकृत रक्त को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचती है उन्हें धनिया कहते हैं।

33।शिराये को कहते हैं। ?

उत्तर .वे नलिया जो शरीर के विभिन्न भागों से अशुद्ध रक्त को हृदय तक पहुँचती है उन्हें शिराये कहते हैं।

34।हीमोग्लोबिन किसे कहते हैं। ?

उत्तर । रक्त में ऑक्सीजन का संवहनी करने के लिए कोशिकाद्रव्य में लाल रंग का आयरन योगिक हिमोग्लोबिन कहलाता है।

35।थक्का तू कहता है। ?

उत्तर । शरीर में रक्त के जमने को थक्का कहते हैं।


36।महाराज आज कहते हैं। ?

उत्तर । शरीर में जीवाणुओं या रोंगेवायरसओ के द्वारा उत्पन्न किए गए विषैले पदार्थों को निष्क्रिय करने वाले को कोज कहते हैं

37।डायलिसिस किसे कहते हैं। ?

उत्तर । शरीर के कृत्रिम तरीके से यूरिया आदि पदार्थों को बाहर निकालने की विधि को डायलिसिस कहते हैं।

38।प्रोजेक्शन नियमन किसे कहते हैं। । ?

उत्तर । शरीर में पानी की उचित मात्रा को बनाए रखने को प्रक्षेपण नियम कहते हैं।

39।लसिका तू कहता है। ?

उत्तर । यह पीले रंग का द्रव्य होता है जिसमें सफेद कणिकाएं ग्लूकोज खनिज लवण ऑक्सीजन आदि होते हैं।

40।संरक्षण कहते हैं। ?

उत्तर । शरीर में उपापचाई क्रियाओं के कारण उत्पन्न हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने की क्रिया को क्रिया कहते है


पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (Textual Questions)


प्रश्न . हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है ?

उत्तर– बहुकोशी जीवों में उनकी केवल बहरी त्वचा की कोशिकाएँ और रंध्र ही आस-पास के वातावरण से सीधे संबंधित होते हैं। बहुकोशीय जिव जैसे मनुष्य में शरीर का आकार बहुत बड़ा होता है तथा शरीर की संरचना जटिल होती है। बहुकोशीय जीवों में सभी कोशिकाएँ सीधे ही पर्यावरण के संपर्क में नहीं होती। अत: साधारण विसरण सभी कोशिकाओं की ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए अपर्याप्त है।


प्रश्न . कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?

उत्तर- सभी जीवित वस्तुएँ सजीव कहलाती हैं। वे रूप-रंग, आकार आदि में समान भी होते हैं तथा भिन्न भी। अत: कोई वस्तु सजीव है, इसके निर्धारण के लिए निम्नलिखित मापदंड हैं:

1. सजीवों की संरचना सुसंगठित होती है।

2. उनमें कोशिकाएँ और ऊतक होते हैं।

3. उनकी संगठित और सुव्यवस्थित संरचना समय के साथ पर्यावरण के प्रभाव से विघटित होने लगती है।

4. सजीवों की निश्चित रूप से मृत्यु होती है।

5. सजीव अपने शरीर की मरम्मत और अनुरक्षण करते हैं। उनकी संरचना अणुओं से हुई है और उन्हें अणुओं को लगातार गतिशील बनाए रखना चाहिए।

6. सजीवों में विशेष सीमा में वृद्धि होती है।

7. उनके शरीर में रासायनिक क्रियाओं की श्रृंखला चलती है। उनमें उपचय-अपचय अभिक्रियाएँ होती हैं।


प्रश्न . किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?

उत्तर– किसी जीव के द्वारा जिन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, वे हैं

1. ऊर्जा प्राप्ति के लिए उचित पोषण।

2. श्वसन के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन


प्रश्न  . जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रम को आवश्यक मानेंगे ?

उत्तर- जीवन के अनुरक्षण के लिए जो प्रक्रम आवश्यक माने जाने चाहिएं, वे हैं- पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन।


प्रश्न . स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर हैं?

उत्तर– स्वयंपोषी पोषण –

वे जीव जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सरल अकार्बनिक से जटिल कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करके अपना स्वयं पोषण करते हैं, स्वयंपोषी जीव (Autot Rophs) कहलाते हैं।

उदाहरण-सभी हरे पौधे, युग्लीना

विषमपोषी पोषण –

वे जीव जो कार्बनिक पदार्थ और ऊर्जा को अपनेभोज्य पदार्थ के रूप में अन्य जीवित या मृत पौधों या जंतुओं से ग्रहण करते हैं, विषमपोषी जीव (Heterotrophs) कहलाते हैं।

उदाहरण- युग्लीना को छोड़कर सभी जंतु। अमरबेल,जीवाणु, कवक आदि।


प्रश्न . प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?

उत्तर- प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री कार्बन-डाइऑक्साइड तथा जल है। पौधे कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण से प्राप्त करते है और जल भूमि से।


प्रश्न . हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?

उत्तर- हमारे आमाशय में हाईडरोक्लोरिक अम्ल उपस्थित होता है .यह अम्ल अमाशय में अम्लीय माध्यम का निर्माण करता है  . इसी की मदद से एंजाइम अपना कार्य करता है . HCl अम्ल हमारे भोजन में उपस्थित रोगाणुओं को नष्ट कर देता है.अम्ल आमाशय में भोजन को पचाने में सहायता करता है .


प्रश्न . पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?

उत्तर- एंजाइम वे जैव उत्प्रेरक होते हैं जो जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल ने  में सहायता प्रदान करते हैं। ये पाचन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन में सहायक बनते हैं।इस प्रकार से सरल पदार्थ छोटी आंत द्वारा अवशोषित कर लिए जाते है  


प्रश्न . पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?

उत्तर – क्षुद्रांत्र पाचित भोजन को अवशोषित करने का मुख स्थान है। क्षुद्रांत्र की आंतरिक भित्ति/अस्तर अंगुली जैसी संरचनाओं/प्रवर्ध में विकसित होते हैं जिन्हें दीर्घ रोम कहते हैं। ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। दीर्घ रोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है, जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाते हैं।


प्रश्न . श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद हैं?

उत्तर- जलीय जीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का श्वसन के लिए उपयोग करते हैं। जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है। इसलिए जलीय जीवों के श्वसन की दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा अधिक तेज़ होती है। मछलियाँ अपने मुँह के द्वारा जल लेती हैं और बल-पूर्वक इसे क्लोम तक पहुँचाती हैं। वहाँ जल में घुली हुई ऑक्सीजन को रुधिर प्राप्त कर लेता है।


प्रश्न . ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं?

उत्तर- ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त होती है और यह श्वसन प्रक्रिया के लिए प्रमुख कच्ची सामग्री के रूप में कार्य करता है। यह ऑक्सीजन की उपलब्ध मात्रा तथा जीव के प्रकार पर निर्भर करता है।

(I) सभी जीवों में ग्लाइकोलिसिस होती है जसिमें ग्लूकोज़ पाइरुवेट में बदलता है, जो तीन कार्बन वाला यौगिक है। यह प्रक्रिया जीवद्रव में होती है।

(II)  

(Ii) अवायवीय (अनॉक्सी) श्वसन जो ईस्ट में होता है पायरूवेट एथेनॉल तथा CO2 में परिवर्तित होता है तथा कुछ मात्रा में ऊर्जा भी उतसर्जित होती है।

(Iii) जब हम व्यायाम करते हैं या दौड़ लगाते हैं, तो माँसपेशियों में पायरूवेट लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित होता है तथा कुछ ऊर्जा उतसर्जित होती है।

(Iv) जब पाइरुवेट का ऑक्सीकरण, ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में होता है तो इससे CO2 तथा H2O बनता है तथा प्रचुर मात्रा में ऊर्जा उत्सर्जित होती है।

ग्लूकोज़ का पूर्ण ऑक्सीकरण माइटोकॉन्ड्रिया में होता है।


प्रश्न . मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बनडाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?

उत्तर- जब हम श्वास अंदर लेते हैं तब हमारी पसलियाँ ऊपर उठती हैं और डायाफ्राम चपटा हो जाता है। इस कारण वक्षगुहिका बढ़ी हो जाती है और वायु फुफ्फुस के भीतर चली जाती है। वह विस्तृत कूपिकाओं को भर लेती है। रुधिर सारे शरीरसे CO, को कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है। कुपिका रुधिर वाहिका का रुधिर कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर | की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है। श्वास चक्र के समय जब वायु अंदर और बाहर होती है तब फुफ्फुस वायु का अवशिष्ट आयतन रखते हैं। इससे ऑक्सीजन के अवशोषण और कार्बन डाइऑक्साइड के मोचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।


प्रश्न . गैसों के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अधिकाल्पित किया है?

उत्तर-  जब हम श्वांस अन्दर लेते हैं तब हमारी पशलियाँ ऊपर उठती हैं L वे बाहर की झुक जाती हैं L इसी समय डायफ्राम की पेसियां संकुचित तथा उदर पेशियाँ शिथिल हो जाती है इससे वक्षीय गुहा का क्षेत्रफल बढ़ता है और साथ हि फुफ्फुस का क्षेत्रफल भी बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप श्वसन पथ से वायु अन्दर आकर फेफड़े में भर जाती है L


प्रश्न . मानव में वहन तंत्र के घटक कौन-से हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?

उत्तर- मानव में वहन तंत्र के प्रमुख दो घटक हैं-रुधिर और लसीका।


 रुधिर के कार्य

1. फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन का परिवहन करना।

2.  रुधिर के श्वेत रक्त कणिकाएं हानिकारक बैक्टीरियाओ, मृतकोशिकाओं तथा रोगाणुओं का भक्षण करके उन्हें नष्ट कर देता है।

3. पहिकाएं तथा फाइब्रिनोजिन नामक प्रोटीन रक्त में उपस्थित होती है जो रक्त का थक्का जमने में सहायक होते हैं।

4. विभिन्न प्रकार के एंजाइमों का परिवहन करता है।

5. विभिन्न प्रकार के हॉर्मोनों का परिवहन करना।

6. छोटी आँतों से परिजय भोज्य पदार्थों का अवशोषण भी रक्त प्लाज्मा द्वारा होता है जिसे यकृत और विभिन्न ऊतकों में भेज दिया जाता है।

7. शरीर के तापक्रम को उष्मा वितरण द्वारा नियंत्रित रखना।

8. विभिन्न ऊतकों में कार्बन-डाइऑक्साइड को एकत्रित करके उसका फेफड़ों तक परिवहन करना।

9.  विभिन्न प्रकार के उत्सर्जी पदार्थों का उत्सर्जन हेतु वृक्कों तक पहुँचाना।

10.  उपाचय में बने विषैले एवं हानिकारक पदार्थों को एकत्रित करके अहानिकारक बनाने के लिए यकृत में भेजना।


 लसीका के कार्य

1. लसिका ऊतकों तक भोज्य पदार्थों का संवहन करती है।

2.  शरीर के घाव भरने में सहायक होती है।

3.  पचे वसा का अवशोषण करके शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती है।

4. ऊतकों से उत्सर्जी पदार्थों को एकत्रित करती है।

5. हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके शरीर की रक्षा करती है।


प्रश्न . स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सिजनित तथा विऑक्सिजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक हैं?

उत्तर- स्तनधारी तथा पक्षियों में उच्च तापमान को बनाए रखने के लिए अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को हृदय के दायें और बायें भाग से आपस में मिलने से रोकना परम आवश्यक है। इस प्रकार का बंटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति करता है।


प्रश्न . उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?

उत्तर-  उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के प्रमुख ऊतक दो प्रकार के हैं

(A) जाइलम ऊतक (दारू)- यह एक जटिल ऊतक है जो जड़ों द्वारा अवशोषित जल तथा खनिज लवणों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।

(B) फ्लोएम ऊतक – यह एक वहन ऊतक है जो खाद्य पदार्थों (शर्करा), जो पत्तों द्वारा संश्लेषित होती है तथा हार्मोन जो तने की चोटी में संश्लेषित होते हैं, को पौधे के उन भागों में स्थानांतरित करता है जहाँ उनकी आवश्यकता होती है।


प्रश्न . पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?

अथवा

पौधों में भोजन तथा दूसरे पदार्थों के स्थानांतरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर- पादप में जल और खनिज लवण का वाहन जाइलम ऊतक द्वारा होता है। जड़, तना तथा पत्तों में उपस्थित वाहिनिकाएँ तथा वाहिकाएँ आपस में जुड़कर जल संवहन वाहिकाओं का एक जाल बनाती हैं जो पादप के सभी भागों से जुड़ा होता है। जड़ों की कोशिकाएँ मृदा के संपर्क में होती हैं तथा वे सक्रिय रूप से जल तथा खनिजों को (आयन के रूप में) प्राप्त करती हैं। यह जड़ और मृदा के मध्य आयन सांद्रण में एक अंतर उतपन्न करता है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए मृदा से जल जड़ में प्रवेश कर जाता है। यह जल के स्तंभ का निर्माण करता है जो लगातार ऊपर की ओर धकेला जाता है।


प्रश्न . पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?

अथवा

पादपों में पत्तियों द्वारा निर्मित भोजन का वहन किस प्रकार होता है ? समझाइए।

उत्तर- पादपों की पत्तियाँ प्रकाश संश्लेषण क्रिया से अपना भोजन तैयार करती हैं और वह वहाँ से पादप के अन्य भागों में भेजा जाता है। प्रकाश संश्लेषण के विलेय उत्पादों का वहन स्थानांतरण कहलाता है। यह कार्य संवहन ऊतक के फ्लोएम नामक भाग के द्वारा किया जाता है। पत्तिया भोजन तैयार करती है | फ्लोएम वाहिकाए के द्वारा पात्तियो से भोजन स्थानांतरण पूरे पौधे में होता है .


प्रश्न . वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि का वर्णन कीजिए।

अथवा

मानव वृक्क में मूत्र किस प्रकार बनता है ?

उत्तर-  वृक्काणु वृक्क की संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इस प्रकार है।

(I) वृक्काणु की संरचना- प्रत्येक वृक्काणु में एक कप की आकृति की संरचना होती है, जिसे बोमन संपुट कहते हैं। यह रक्त कोशिकाओं के जाल को घेरे रखती है। इसे कोशिकागुच्छ कहते हैं। बोमन सपूत से एक नलिकाकार संरचना निकलती है जिसे कुंडलित नलिका कहते हैं। यह नलिका फिर एक की आकृति की संरचना बनती है जिसे हेनले का लूप कहते हैं, जो एक और कुंडलित संरचना बनाती है, जिसे (DCT) कहते हैं। यह वाहिनी में जाकर मिलती है।

 

(Ii) वृक्काणु का कार्य- वृक्क धमनी रक्त को बोमन संपुट के कोशिकागुच्छ में लेकर जाती है और रक्त को छाना जाता है। प्रारंभिक निस्यंद में कुछ पदार्थ; जैसे ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण आयन, प्रचुर मात्रा में जल रह जाता है। उसमें कुछ सुक्रोज़/ग्लूकोज़ तथा कुछ यूरिया भी होता है। जैसे-जैसे निस्यंद कुंडलित नलिका और हैनले के लूप में से गुज़रता है, इसमें से कुछ उपयोगी पदार्थों को दोबारा अवशोषित कर लिया जाता है तथा अधिक पानी, यूरिया और दूसरे व्यर्थ मूत्राशय में सूत्र के रुओ में एकत्रित कर लिए जाते हैं।


प्रश्न. उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं?

उत्तर– पादप उत्सृजन के लिए जंतुओं से बिलकुल भिन्न युक्तियाँ प्रयुक्त करते हैं।


पौधे कुछ पदार्थों को व्यर्थ के रूप में आस-पास की मृदा में उत्सर्जित कर देते हैं।

रात के समय पौधों के लिए O2 एक व्यर्थ पदार्थ नहीं है, जबकि CO2 एक व्यर्थ पदार्थ है।

व्यर्थ पदार्थों गोंद तथा रेजिन के रूप में पुराने जाइलम ऊतक में एकत्रित हो जाते हैं।

अनेक पादप व्यर्थ पदार्थ कोशिकाओं में रिक्तिकाओं में संचित हो जाते हैं। व्यर्थ पदार्थ पत्तों में भी एकत्रित हो जाते तो फिर गिर जाते हैं।

 यहाँ तक कि पौधे फालतू पानी को वाष्पोतसर्जन द्वारा वायु में छोड़ देते हैं।

दिन के समय पौधों की कोशिकाओं में श्वसन कारण उतपन्न CO2 एक व्यर्थ पदार्थ नहीं है, क्योंकि इसे प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रयुक्त कर लिया जाता है। दिन के समय अत्यधिक मात्रा में O2 उत्पादित होती है, जो उसके स्वयं के लिए एक व्यर्थ पदार्थ होता है। उसे वायुमंडल में मुक्त कर दिया जाता है।

प्रश्न. मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार है ?

उत्तर- मूत्र बनने की मात्रा इस प्रकार नियंत्रित की जाती है कि जल की मात्रा का शरीर में संतुलन बना रहे। जल की बाहर निकलने वाली मात्रा इस आधार पर निर्भर करती है कि उसे कितना विलेय वर्त्य पदार्थ उत्सर्जित करना है। अतिरिक्त जल का वृक्क में पुनरावशोषण कर लिया जाता है और उसका पुन: उपयोग हो जाता है।


अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न . मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है

(A) पोषण

(B) श्वसन

(C) उत्सर्जन

(D) परिवहन।

उत्तर- (C) उत्सर्जन।


प्रश्न . पादप में जाइलम उत्तरदायी है

(A) जल का वहन

(B) भोजन का वहन

(C) अमीनो अम्ल का वहन

(D) ऑक्सीजन का वहन।

उत्तर- (A) जल का वहन।


प्रश्न . स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है

(A) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल

(B) क्लोरोफिल

(C) सूर्य का प्रकाश

(D) उपरोक्त सभी।

उत्तर- (D) उपरोक्त सभी।


प्रश्न . पायवेट के विखंडन से यह कार्बनडाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती

(A) कोशिका द्रव्य

(B) माइटोकाँड्रिया

(C) हरित लवक

(D) केंद्रक।

उत्तर- (B) माइटोकॉड्रिया।


प्रश्न . हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?

उत्तर- वसा का पाचन आहारनाल के क्षुद्रांत में होता है | आमाशय में लाइपेज उन पर क्रिया करता है तथा वसा को खंडित कर देते है | इसके पश्चात क्षुद्रांत में यकृत द्वारा स्त्रावित बाइल रस वसा को इमल्सीफाई करता है | अग्नाशय रस इस खंडित वसा को वसीय अम्ल और गिल्सरोल में बदल देता है .इस प्रकार वसा क्षुद्रांत में पाचित हो जाती है  


प्रश्न . भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?

उत्तर- भोजन के पाचन में लार की अति महत्त्वपूर्ण भूमिका है। लार एक रस है जो तीन जोड़ी लाल ग्रंथियों से मुँह में उत्पन्न होता है। लार में एमिलेस नामक एक एंजाइम होता है जो मंड जटिल अणु को लार के साथ पूरी तरह मिला देता है। लार के प्रमुख कार्य हैं

(I) यह भोजन के स्वाद को बढ़ाती है।

(Ii) इसमें विद्यमान टायलिन नामक एंजाइम स्टार्च का पाचन कर उसे माल्टोज़ में बदल देता है।

(Iii) यह भोजन को चिकना एवं मुलायम बनाती है।

(Iv) यह भोजन को पचाने में भी मदद करती है।

(V) यह मुख के खोल को साफ़ रखती है।

(Vi) यह मुख खोल में चिकनाई पैदा करती है जिससे चबाते समय रगड़ कम होती है।


प्रश्न . स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन-सी हैं और उनके उपोत्पाद क्या हैं?

उत्तर –  स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं:


क्लोरोफिल की उपस्थिति

कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति

जल की उपस्थिति

प्रकाश संश्लेषी ऐंजाइम की उपस्थिति

सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति।

प्रकाश संश्लेषण के उत्पाद:


ऑक्सीजन

रासायनिक ऊर्जा।

प्रश्न . वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।

उत्तर-

वायवीय       अवायवीय

वायवीय क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है अवायवीय क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।


यह क्रिया कोशिका के जीव द्रव्य एवं माइटोकॉड्रिया दोनों में पूर्ण होती है। यह क्रिया केवल जीव द्रव्य में ही पूर्ण होती है।


इस क्रिया में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता इस क्रिया में ग्लूकोज़ का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है।

इस क्रिया से CO2, एवं H2O बनता है। इस क्रिया में एल्कोहल एवं CO2 बनती है।

इस क्रिया में ग्लूकोज़ के एक अणु में 38 ATP अणु मुक्त होते हैं। इस क्रिया में ग्लूकोज के एक अणु में 2 ATP अणु मुक्त होते हैं।


ग्लूकोज़ के एक अणु के पूर्ण ऑक्सीकरण से 673 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है। ग्लूकोज के अणु के अपूर्ण ऑक्सीकरण से 21 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है।


कुछ जीवों में अवायवीय श्वसन होता है, जैसे यीस्ट।


प्रश्न . गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?

उत्तर- श्वसन तंत्र में फुफ्फुस के अंदर अनेक छोटी-छोटी नालियों का विभाजित रूप होता है हो अंत में गुब्बारों जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है, जिसे कूपिका कहते हैं। यह एक सतह उपलब्ध करती हैं जिस से गैसों का विनियम हो सके। यदि कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए तो यह लगभग 80 वर्ग मीटर क्षेत्र को ढांप सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का बहुत विस्तृत जाल होता है। जब हम साँस अंदर लेते हैं तो पसलियाँ ऊपर उठ जाती हैं और हमारा डायफ्राम चपटा हो जाता है जिससे वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है। इस कारण वायु फिफ्फुस के भीतर चूस ली जाती है। रक्त शरीर से लाई गई CO2 कूपिकाओं को दे देता है। कूपिका रक्त वाहिका का रक्त कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचा देती हैं।


प्रश्न . हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर- हीमोग्लोबिन हमारे शरीर में आक्सीजन का वहन करता है .शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से रक्ताल्पता (Anaemia) हो जाता है। हमें श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की प्राप्ति नहीं होगी तो  हम शीघ्र थक जाएंगे। हमारा भार कम हो जाएगा। हमारा रंग पीला पड़ जाएगा। हम कमज़ोरी अनुभव करेंगे।


प्रश्न . मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?

उत्तर- दोहरा परिसंचरण- विऑक्सिजनित रक्त शरीर के विभिन्न भागों से महाशिराओं द्वारा दाएँ अलिंद में इकट्ठा किया जाता है। जब दायाँ अलिंद सिकुड़ता है तो यह दाएँ निलय में चला जाता है। जब दायाँ निलय सिकुड़ता है तो यह विऑक्सिजनित रक्त फुफ्फुस धमनी के माध्यम से फुस्फुस (फेफड़ों) में चला जाता है, जहाँ पर गैसों का विनिमय होता है। यह रक्त ऑक्सिजनित होकर फुफ्फुस शिराओं के द्वारा वापिस ह्दय में बाएँ अलिंद में आ जाता है। जब बायाँ अलिंद सिकुड़ता है तो यह ऑक्सिजनित रक्त बाएँ निलय में आता है। जब बायाँ निलय सिकुड़ता है तो यह रक्त शरीर के विभिन्न भागों में महाधमनी के माध्यम से वितरित किया जाता है।

 

अत: वही रक्त ह्दय चक्र में ह्दय में से दो बार गुज़रता है, एक बार ऑक्सिजनित तथा दूसरी बार विऑक्सिजनित रक्त के रूप में। इसी को दोहरा परिसंचरण कहते हैं।

महत्व- हमारा ह्दय चार कोष्ठकों से मिलकर बना है इसके ही कारण से हमारे शरीर के सभी भागों को ऑक्सिजनित रक्त वितरित किया जाता है। इसके कारण से ही कोशिकाओं व ऊतकों में ऑक्सीजन का वितरण सही आवश्यकता अनुसार बना रहता है।


प्रश्न . जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है?

उत्तर-  जाइलम निर्जीव ऊतक हैं। ये जड़ों से जल और घुले हुए लवणों को पत्तियों में पहुँचाते हैं। फ्लोएम सजीव ऊतक हैं। ये पत्तियों में तैयार शर्करा को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाते हैं। जाइलम ऊपर की तरह गति करने में सहायक होते हैं और फ्लोएम नीचे की तरफ गति कराते हैं।


प्रश्न . फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि की तुलना कीजिए।

उत्तर – 

 No.फुस्फुस में कूपिकाएँ No.वृक्क में वृक्काणु
1मानव शरीर में विद्यमान दोनों फेफड़ों में बहुत अधिक सख्यां में कूपिकाएँ होती है|1मानव शरीर में वृक्क संख्या में दो होते हैं। संख्या में कूपिकाएँ होती हैं। प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख वृक्काणु होते हैं।
2प्रत्येक कूपिका प्याले के आकार जैसी होती है।2प्रत्येक वृक्काणु महीन धागे की आकृति जैसा होता है।
3

कूपिका दोहरी दीवार से निर्मित होती है।3वृक्काणु के एक सिरे पर प्याले के आकार की मैल्पीघियन सम्पुट विद्यमान होती है।
4

कूपिका की दोनों दीवारों के बीच रुधिर कोशिकाओं का सघन जाल बिछा रहता है4बोमैन सम्पुट में रुधिर कोशिकाओं का गुच्छ उपस्थित होता है जिसे कोशिका गुच्छ कहते हैं।
5

कुपिकाएँ वायु भरने पर फैल जाती हैं।

5

वृक्काणु में ऐसी क्रिया नहीं होती।

6

यहाँ रुधिर की लाल रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन प्राप्त कर लेती है तथा प्लाज्मा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड कुपिका में चली जाती है।

6

कोशिका गुच्छ में रुधिर में उपस्थित वर्थ्य पदार्थ छन जाते हैं।

7

कूपिकाओं में गैसीय आदान-प्रदान के बाद फेफड़े के – संकुचन से कूपिकाओं में भरी वायु शरीर के बाहर निकल जाती है।

7

मूत्र निवाहिका से मूत्र बहकर मूत्राशय में इकट्ठा हो जाता है और वहाँ से मूत्रमार्ग द्वारा शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है।

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