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Class 10th social science complete Question & Answer

History

प्रश्न:1 राष्ट्रवाद का क्या मतलब होता है?

उत्तर: जो विचारधारा किसी भी राष्ट्र के सदस्यों में एक साझा पहचान को बढ़ावा देती है उसे राष्ट्रवाद कहते हैं। राष्ट्रवाद की भावनाओं की जड़ें जमाने के लिये कई प्रतीकों का सहारा लिया जाता है; जैसे राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रगान, आदि।

प्रश्न:2 यूरोप में राष्ट्रवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई?

उत्तर: यूरोप में नये राष्ट्रों के निर्माण की प्रक्रिया 1789 में शुरु होने वाली फ्रांस की क्रांति के साथ शुरु हो गई थी। लेकिन किसी भी नई विचारधारा की तरह राष्ट्रवाद को भी अपनी जड़ जमाने में लगभ एक सदी लग गया।

प्रश्न:3 राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति कब और कहाँ हुई?

उत्तर: राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति फ्रांस में 1789 में हुई।

प्रश्न:4 नेपोलियन ने प्रशासन के क्षेत्र में क्या बदलाव किये?

उत्तर: नेपोलियन ने प्रशासन के क्षेत्र में कई क्रांतिकारी बदलाव किये और प्रशासन व्यवस्था को बेहतर और कुशल बनाया। नेपोलियन ने 1804 में सिविल कोड लागू किया। इसे नेपोलियन कोड भी कहा जाता है। इस कोड ने जन्म के आधार पर मिलने वाली हर सुविधा को समाप्त कर दिया। हर नागरिक को समान हैसियत प्रदान की गई और संपत्ति के अधिकार को पुख्ता किया गया। नेपोलियन ने फ्रांस की तरह अपने नियंत्रण वाले हर इलाके में प्राशासनिक सुधार किये। उसने सामंती व्यवस्था को खत्म किया। किसानों को दासता और जागीर को अदा होने वाले शुल्कों से मुक्त किया। उसने शहरों में प्रचलित शिल्प मंडलियों द्वारा लगाई गई पाबंदियों को भी समाप्त किया। यातायात और संचार के साधनों में सुधार किये गये।

प्रश्न:5 नेपोलियन के बारे में यूरोप के अन्य इलाकों में क्या भावना थी?

उत्तर: फ्रांस ने जिन इलाकों पर कब्जा जमाया गया था, वहाँ के लोगों की फ्रांसीसी शासन के बारे में मिली जुली प्रतिक्रिया थी। शुरु शुरु में लोगों ने फ्रांस की सेना को आजादी के दूत के रूप में देखा। लेकिन जल्दी ही यह भावना बदल गई। लोगों को समझ में आने लगा कि इस नई शासन व्यवस्था से राजनैतिक आजादी की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। टैक्स में भारी बढ़ोतरी हुई। लोगों को जबरदस्ती फ्रांस की सेना में भर्ती कराया गया। इस सबके फलस्वरूप लोगों का शुरुआती जोश जल्दी ही विरोध में बदलने लगा।

प्रश्न:6 फ्रांसीसी क्रांति के पहले यूरोप की क्या स्थिति थी?

उत्तर: अठारहवीं सदी के मध्यकाल में यूरोप में वैसे राष्ट्र नहीं हुआ करते थे जैसा हम आज जानते और समझते हैं। आधुनिक जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैंड कई सूबों, प्रांतों और साम्राजयों में बँटे हुए थे। हर शासक अपने आप में स्वतंत्र हुआ करता था। पूर्वी और मध्य यूरोप में कई शक्तिशाली राजा थे जिनके अधीन विभिन्न प्रकार के लोग रहा करते थे। इन लोगों की कोई साझा पहचान नहीं होती थी। उनमें यदि कोई समानता थी तो वह थी किसी एक खास शासक के प्रति समर्पण।

प्रश्न:7 अठारहवीं सदी के यूरोप का कुलीन वर्ग कैसा था?

उत्तर: यूरोपीय महाद्वीप में जमीन से संपन्न कुलीन वर्ग हमेशा से ही सामाजिक और राजनैतिक तौर पर प्रभावशाली हुआ करता था। कुलीन वर्ग के लोगों की जीवन शैली एक जैसी होती थी जिसका इस बात से कोई लेना देना नहीं था कि वे किस क्षेत्र में रहते थे। शायद इसी जीवन शैली के कारण वे एक सूत्र में बंधे रहते थे। उनकी जागीरें ग्रामीण इलाकों में होती थीं और उनके आलीशान बंगले शहरी इलाकों में होते थे। आपस में संबंध बनाये रखने के लिये उनके परिवारों के बीच शादियाँ भी होती थीं। वे फ्रेंच भाषा बोलते थे ताकि अपनी एक खास पहचान बनाये रखें और कूटनीतिक संबंध जारी रखें।

प्रश्न:8 यूरोप में मध्यम वर्ग का उदय कैसे हुआ?

उत्तर: पश्चिमी और केंद्रीय यूरोप के कुछ भागों में उद्योग धंधे में वृद्धि होने लगी थी। इससे शहरों का विकास हुआ और उन शहरों में एक नये व्यावसायिक वर्ग का उदय हुआ। इस नये वर्ग का जन्म बाजार के लिये उत्पादन की मंशा से हुआ था। इस परिघटना ने समाज में नये समूहों और वर्गों को जन्म दिया। इस नये सामाजिक वर्ग में एक वर्ग मजदूरों का था और दूसरा मध्यम वर्ग का। उस मध्यम वर्ग के मुख्य हिस्सा थे उद्योगपति, व्यापारी और व्यवसायी। इसी मध्यम वर्ग ने राष्ट्रीय एकता की भावना को एक रूप प्रदान किया।

प्रश्न:9 यूरोप में उन्नीसवीं सदी में आर्थिक क्षेत्र में कौन से सुधार हुए?

उत्तर: 1834 में प्रसिया की पहल पर जोवरलिन के कस्टम यूनियन का गठन हुआ। बाद में अधिकाँश जर्मन राज्य भी इस यूनियन में शामिल हो गये। चुंगी की सीमाएँ समाप्त की गईं और मुद्राओं के प्रकार को तीस से घटाकर दो कर दिया गया। इसी बीच रेल नेटवर्क के विकास ने आवगमन को और सरल बना दिया। इससे एक तरह के आर्थिक राष्ट्रवाद का विकास हुआ।

प्रश्न:10 ग्रीस की आजादी पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: ग्रीस की आजादी का संघर्ष 1821 में शुरु हुआ था। ग्रीस के राष्ट्रवादियों को ग्रीस के ऐसे लोगों से भारी समर्थन मिला जिन्हे देशनिकाला दे दिया गया था। इसके अलावा उन्हें पश्चिमी यूरोप के अधिकाँश लोगों से भी समर्थन मिला जो प्राचीन ग्रीक संस्कृति का सम्मान करते थे। मुस्लिम साम्राज्य के विरोध करने वाले इस संघर्ष का समर्थन बढ़ाने के लिए कवियों और कलाकारों ने भी जन भावना को इसके पक्ष में लाने की भरपूर कोशिश की। यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि ग्रीस उस समय ऑटोमन साम्राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था। आखिरकार 1832 में कॉन्स्टैंटिनोपल की ट्रीटी के अनुसार ग्रीस को एक स्वतंत्र देश की मान्यता दे दी गई। ग्रीस की आजादी की लड़ाई ने पूरे यूरोप के पढ़े लिखे वर्ग में राष्ट्रवाद की भावना को और मजबूत कर दिया।

प्रश्न:11 इटली के एकीकरण में कैवर का क्या योगदान था?

उत्तर: इटली के विभिन्न क्षेत्रों को एक करने के आंदोलन की अगुवाई मुख्यमंत्री कैवर ने की थी। उसने फ्रांस से एक कूटनीतिक गठबंधन किया और इसलिए 1859 में ऑस्ट्रिया की सेना को हराने में कामयाब हो गया। उस लड़ाई में सेना के जवानों के अलावा, कई सशस्त्र स्वयंसेवकों ने भी भाग लिया था जिनकी अगुवाई जिउसेपे गैरीबाल्डी कर रहा था। 1860 के मार्च महीने में वे दक्षिण इटली और टू सिसली के राज्य की ओर बढ़ चले। उन्होंने स्थानीय किसानों का समर्थन जीत लिया और फिर स्पैनिश शासकों को उखाड़ फेंकने में कामयाब हो गए। 1861 में विक्टर इमैंयुएल (द्वितीय) को एक समग्र इटली का राजा घोषित किया गया।
प्रश्न 1: निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें:

(a) उपनिवेशकारों के ‘सभ्यता मिशन’ का क्या अर्थ था।

उत्तर: उपनिवेशकारों को लगता था कि वे ‘विकसित’ थे और अन्य देशों के लोग पिछ्ड़े थे। उन्हें अपनी संस्कृति सबसे उत्तम लगती थी और अन्य संस्कृतियों को वे हेय दृष्टि से देखते थे। उपनिवेशकारों का ऐसा मानना था कि ‘विकसित’ होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी बनती थी कि पिछड़े लोगों को सभ्यता के पाठ पढ़ाएँ। यही उनके सभ्यता मिशन का अर्थ था।
(b) हुइन फू सो

उत्तर: इसी तरह के आंदोलनों में से एक था होआ हाओ, जिसकी शुरुआत 1939 में हुई थी और जो मेकॉन्ग डेल्टा के क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हुआ था। इस आंदोलन के जनक का नाम था हुइन फू सो, जो कई तरह के चमत्कार किया करते थे और गरीबों की मदद करते थे। हुइन फू सो अनाप शनाप खर्चे की आलोचना करते थे और बहुत लोकप्रिय थे। उन्होंने कई सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाया; जैसे बाल विवाह, जुआ, शराब और अफीम।

फ्रेच शासकों ने हुइन फू सो के आंदोलन को कुचलने की कोशिश की। हुइन फू सो को पागल करार कर दिया और उसे पागल बोन्ये का नाम दिया गया। उसे एक पागलखाने में डाल दिया गया। लेकिन जो डॉक्टर उसे पागल होने का सर्टिफिकेट देने पहुँचा वही उसका प्रशंसक बन गया। अंत में उसे देशनिकाला देकर लाओस भेज दिया गया। उसके कई अनुयायियों को कॉन्संट्रेशन कैंपों में डाल दिया गया।

प्रश्न 2: निम्नलिखित की व्याख्या करें:

(a) वियतनाम के केवल एक तिहाई विद्यार्थी ही स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे।

उत्तर: फ्रांसीसी अफसरों की नीति थी कि जानबूझकर फ्रेंच के फाइनल इम्तिहान में वियतनाम के छात्रों को फेल कर दिया जाता था। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि वियतनाम के लोग ऊँचे पदों पर न पहुँच पाएँ। इसलिए वियतनाम के एक तिहाई विद्यार्थी ही स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे।

(b) फ्रांसीसियों ने मेकॉंग डेल्टा क्षेत्र में नहरें बनवाना और जमीनों को सुखाना शुरु किया।

उत्तर: फ्रांसीसियों ने फसल की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से मेकांग डेल्टा की जमीन को सींचने के लिये नहर बनाने शुरु कर दिये। इन नहरों से चावल की पैदावार बढ़ाने में काफी मदद मिली। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि 1900 में कुल 274,000 हेक्टेअर के मुकाबले 1930 में 11 लाख हेक्टेअर पर धान की खेती होने लगी थी। 1931 आते-आते वियतनाम में होने वाली धान की कुल उपज का दो तिहाई हिस्सा निर्यात होने लगा, और वियतनाम धान निर्यात करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया था।
(c) सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले, जिसे स्कूल से निकाल दिया गया था।

उत्तर: एक लड़की ने वियतनामी संस्कृति के मखौल उड़ाए जाने का विरोध किया। उसके बदले में उस लड़की को स्कूल से निकाल दिया गया। लड़की को मिलने वाली सजा के विरोध में भारी विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया। आखिरकार, सरकार को लोगों के विरोध के आगे झुकना पड़ा। सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले।

(d) हनोई के आधुनिक नवनिर्मित इलाकों में चूहे बहुत थे।

उत्तर: हनोई शहर के निर्माण में अत्याधुनिक अभियंत्रण और वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया था। उपनिवेशी शासकों के लिए बने सुंदर शहर में चौड़ी सड़कें और नालियाँ थीं। लेकिन स्वच्छता के मिसाल के तौर पर बड़ी नालियों में चूहों की जनसंख्या तेजी से बढ़ने लगी। इसका नतीजा यह हुआ कि हनोई शहर में प्लेग की महामारी फैल गई।

प्रश्न 3: टोंकिन फ्री स्कूल की स्थापना के पीछे कौन से विचार थे? वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों के लिहाज से यह उदाहरण कितना सटीक है?

उत्तर: वियतनाम के लोगों को फ्रेंच भाषा और संस्कृति की शिक्षा देने के उद्देश्य से टोंकिन फ्री स्कूल की स्थापना हुई थी। दरअसल, उपनिवेशकारी यह चाहते थे कि क्लर्कों की एक फौज तैयार की जा सके जिसको छोटे-मोटे काम पर लगाया जा सके। फ्रेंच शासक वियतनाम के लोगों पर फ्रेंच संस्कृति को भी थोपना चाहते थे।

प्रश्न 4: वियतनाम के बारे में फान यू त्रिन्ह का उद्देश्य क्या था? फान बोई चाक और उनके विचारों में क्या भिन्नता थी?

उत्तर: फान यू त्रिन्ह और फान बोई चाउ के बीच काफी मतभेद थे। फान बोई चाक राजतंत्र के पक्षधर थे जबकि फान यू त्रिन्ह प्रजातंत्र की वकालत करते थे। फान बोई चाउ पुरानी व्यवस्था की ओर लौटना चाहते थे, जबकि फान यू त्रिन्ह उदारवाद और लोगों की स्वच्छंदता पर बल देते थे। लेकिन दोनों का उद्देश्य एक ही था, “वियतनाम को गुलामी से मुक्ति दिलाना।“


 
प्रश्न 5: इस अध्याय में आपने जो पढ़ा है, उसके हवाले से वियतनाम की संस्कृति और जीवन पर चीन के प्रभावों की चर्चा करें।

उत्तर: वियतनाम और चीन के तार प्राचीन काल से ही आपस में जुड़े हुए रहे हैं। वियतनाम सिल्क रूट के जलीय मार्ग पर स्थित है, इसलिए यहाँ हमेशा से चीनी संस्कृति का आयात होता रहा है। इसे समझने के लिए वियतनाम की धार्मिक मान्यताओं को देखने पर पता चलता है कि इसपर बौद्ध धर्म, कंफ्यूशियस और स्थानीय परंपराओं का प्रभाव है। हम जानते हैं बौद्ध धर्म भारत से आया था, और कंफ्यूशियस के विचार चीन से आये थे। वियतनाम के अभिजात वर्ग की कामकाज की भाषा चीनी थी।

प्रश्न 6: वियतनाम में उपनिवेशवाद-विरोधी भावनाओं के विकास में धार्मिक संगठन की भूमिका क्या थी?

उत्तर: इस अध्याय में हमने देखा कि वियतनाम की धार्मिक मान्यताओं पर बौद्ध धर्म, कंफ्यूशियस और स्थानीय परंपराओं का प्रभाव है। फ्रांस से आई मिशनरियों द्वारा वहाँ इसाई धर्म के प्रचार प्रसार की कोशिश की जा रही थी जो स्थानीय लोगों को पसंद नहीं आया। अठारहवीं सदी से ही पश्चिमी मान्यताओं के विरोध में कई धार्मिक आंदोलन शुरु हो चुके थे। इसाई धर्म के खिलाफ होने वाले आंदोलनों का एक उदाहरण है 1868 का स्कॉलर रिवोल्ट।

प्रश्न 7: वियतनाम युद्ध में अमेरिकी हिस्सेदारी के कारणों की व्याख्या करें। अमेरिका के इस कृत्य से अमेरिका में जीवन पर क्या असर पड़े?

उत्तर: वियतनाम में कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार बनने से अमेरिकी सरकार को यह डर सताने लगा कि आसपास के क्षेत्रों में भी वैसी ही सरकारें बनेंगी। अमेरिका हर हाल में कम्युनिज्म को फैलने से रोकना चाहता था, इसलिए उसने वियतनाम पर आक्रमण कर दिया। अमेरिका में अधिकतर लोग वियतनाम में अमेरिकी दखल का विरोध कर रहे थे। कई तत्कालीन विचारकों को लगता था कि ऐसे युद्ध में पड़ना ही नहीं चाहिए जिसमें जीत की संभावना नगण्य हो। अमेरिकी मीडिया दो धड़ों में बँटी हुई थी। कुछ उस युद्ध की तारीफ कर रहे थे तो कुछ आलोचना।


 
प्रश्न 8: अमेरिका के खिलाफ वियतनामी युद्ध का निम्नलिखित दृष्टिकोण से मूल्यांकन कीजिए:

(a) हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग पर माल ढ़ोने वाला कुली।

उत्तर: हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग पर माल ढ़ोने वाले कुली के लिए अमेरिका ऐसा दुश्मन लगता होगा जिसे हर हाल में परास्त करना जरूरी था। वह अपनी जान पर खेलकर वियतनाम के लिए लड़ने वाले सैनिकों के लिए रसद पहुँचाने में जुट जाता था। जब अमेरिका के बमवर्षक विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई देती होगी तो उस कुली को झटपट छुपने के लिए भागना पड़ता होगा। विमानों के गुजर जाने के बाद वह एक नये जोश के साथ अपने रास्ते पर आगे बढ़ता होगा।

(b) एक महिला सिपाही

उत्तर: महिलाओं के लिए वह युद्ध अतिरिक्त जिम्मेदारी लेकर आया होगा। पहले तो महिलाओं पर केवल परिवार पालने की जिम्मेदारी थी। लेकिन युद्ध के दौरान अपनी मातृभूमि की रक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल गई होगी। यह युद्ध उनके लिये वह मौका था जिसमें वह सार्वजनिक जीवन में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले सकें।

प्रश्न 9: वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की क्या भूमिका थी? इसकी तुलना भारतीय राष्ट्रवादी संघर्ष में महिलाओं की भूमिका से कीजिए।

उत्तर: महिलाओं ने हो ची मिन्ह मार्ग में सप्लाई को सुचारु रूप से चलाने में अहम योगदान दिया। युद्ध में भी इन महिलाओं की सक्रिय भूमिका थी। शांति काल में महिलाओं ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में पूरी जिम्मेदारी उठाई। भारत के स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक महत्ता के लिये हुआ था। हम कह सकते हैं कि भारत में महिलाओं की भूमिका केवल नेपथ्य से उचित समर्थन देने भर की थी।
प्रश्न:1 सत्याग्रह का सिद्धांत क्या कहता है?

उत्तर: सत्याग्रह का सिद्धांत कहता है कि यदि कोई सही मकसद के लिये लड़ाई लड़ रहा हो तो उसे अपने ऊपर अत्याचार करने वाले से लड़ने के लिये ताकत की जरूरत नहीं होती है।

प्रश्न:2 रॉलैट ऐक्ट ने अंग्रेजी सरकार को क्या शक्तियाँ प्रदान की?

उत्तर: इस ऐक्ट ने सरकार को राजनैतिक गतिविधियों को कुचलने के लिये असीम शक्ति दे दी थी। इस ऐक्ट के मुताबिक बिना ट्रायल के ही राजनैतिक कैदियों को दो साल तक के लिये बंदी बनाया जा सकता था।

प्रश्न:3 असहयोग से गांधीजी का मतलब था?

उत्तर: महात्मा गांधी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक स्वराज (1909) में लिखा कि भारत में अंग्रेजी राज इसलिए स्थापित हो पाया क्योंकि भारत के लोगों ने उनके साथ सहयोग किया। भारतीय लोगों के सहयोग के कारण अंग्रेज यहाँ पर हुकूमत करते रहे। यदि भारत के लोग सहयोग करना बंद कर दें, तो अंग्रेजी राज एक साल के अंदर चरमरा जायेगा और स्वराज आ जायेगा। गांधीजी को पूरा विश्वास था कि यदि भारतीय लोग अंग्रेजों से सहयोग करना बंद कर देंगे तो अंग्रेजों के पास भारत को छोड़कर जाने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचेगा।

प्रश्न:4 असहयोग आंदोलन के कुछ प्रस्तावों को लिखें।

उत्तर: असहयोग आंदोलंके कुछ प्रस्ताव निम्नलिखित हैं:

अंग्रेजी सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियों को वापस करना।
सिविल सर्विस, सेना, पुलिस, कोर्ट, लेजिस्लेटिव काउंसिल और स्कूलों का बहिष्कार।
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
यदि सरकार अपनी दमनकारी नीतियों से बाज न आये, तो संपूर्ण अवज्ञा आंदोलन शुरु करना।
प्रश्न:5 असहयोग आंदोलन ठंढ़ा क्यों पड़ गया?

उत्तर: असहयोग आंदोलन निम्नलिखित कारणों से ठंढ़ा पड़ गया:

मिल में बने कपड़ों की तुलना में खादी महँगी पड़ती थी। गरीब लोग खादी को खरीदने में समर्थ नहीं थे।
अंग्रेजी संस्थानों के बहिष्कार से विकल्प के तौर पर भारतीय संस्थानों की कमी की समस्या उत्पन्न हो गई। ऐसे संस्थान बहुत धीरे-धीरे पनप पा रहे थे। शिक्षक और छात्र दोबारा स्कूलों में जाने लगे। इसी तरह वकील भी अपने काम पर लौटने लगे।
प्रश्न:6 साइमन कमीशन बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: इस कमीशन को भारत में संवैधानिक सिस्टम के कार्य का मूल्यांकन करने और जरूरी बदलाव के सुझाव देने के लिए बनाया गया था।

प्रश्न:7साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ?

उत्तर: इस कमीशन में केवल अंग्रेज सदस्य ही थे, एक भी भारतीय सदस्य नहीं था। इसलिए भारतीय नेताओं ने इसका विरोध किया।

प्रश्न:8 दांडी मार्च का देश में क्या असर हुआ?

उत्तर: दांडी मार्च ने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। देश के विभिन्न भागों में हजारों लोगों ने नमक कानून को तोड़ा। लोगों ने सरकारी नमक कारखानों के सामने धरना प्रदर्शन किया। विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया। किसानों ने लगान देने से मना कर दिया। आदिवासियों ने जंगल संबंधी कानूनों का उल्लंघन किया।

प्रश्न:9 किसानों के लिये स्वराज की लड़ाई का क्या मतलब था?

उत्तर: किसानों के लिए स्वराज की लड़ाई का मतलब था अधिक लगान के विरुद्ध लड़ाई। जब 1931 में लगान दरों में सुधार के बगैर ही आंदोलन बंद कर दिया गया तो किसान अत्यधिक निराश थे। जब 1932 में आंदोलन को दोबारा शुरु किया गया तो अधिकांश किसानों ने इसमें भाग लेने से मना कर दिया।
प्रश्न:a) उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी?

उत्तर: उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन ने लोगों को एक प्रबल मुद्दा दिया जिससे वे आसानी से जुड़ सके और एक ही प्लेटफॉर्म पर आ सके। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई थी।

प्रश्न:b) पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?

उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने भारत के लोगों के लिए भारी आर्थिक समस्या खड़ी कर दी। इसके अलावा, भारतीय लोगों की ब्रिटिश सेना में जबरन भर्ती ने भी लोगों को उपनिवेशी शासकों के खिलाफ कर दिया। यह राष्ट्रवादी नेताओं के लिए बड़ा ही अनुकूल समय था जब वे लोगों को उपनिवेशी शासकों के विरोध में जाने के लिए उकसा सकते थे। इस तरह से प्रथम विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में अच्छा योगदान किया।

प्रश्न:c) भारत के लोग रॉलट एक्ट के विरोध में क्यों थे?

उत्तर: रॉलट एक्ट ने उपनिवेशी शासकों अकूत ताकत प्रदान की। यह कानून राजनीतिक दलों के निर्माण और विरोध के खिलाफ काम करने वाला था। इसलिए भारत के लोग रॉलट एक्ट के खिलाफ थे।

प्रश्न:d) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?

उत्तर: 1921 आते आते यह आंदोलन कई जगह हिंसक होने लगा था। गांधीजी किसी भी प्रकार की हिंसा के सख्त खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला लिया।

प्रश्न:2 सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?

उत्तर: महात्मा गांधी ने जन आंदोलन का एक नायाब तरीका निकाला जिसे सत्याग्रह का नाम दिया गया। यह इस सिद्धांत पर आधारित था कि यदि कोई सही मुद्दे के लिए लड़ रहा है तो फिर उस लड़ाई के लिए लाठी या गोली की ताकत की जरूरत नहीं है। गांधीजी का मानना था कि एक सत्याग्रही किसी भी लड़ाई को अहिंसा से जीत सकता है। इसके लिए बदले की भावना या हिंसा की भावना की कोई जरूरत नहीं है।

प्रश्न:3 निम्नलिखित पर अखबार के लिए रिपोर्ट लिखें:

प्रश्न:a) जलियाँवाला बाग हत्याकांड

उत्तर: अमृतसर, 13 अप्रैल 1919: अंग्रेजी जेनरल डायर ने जलियाँवाला बाग में मेला देखने आये निर्दोष लोगों पर गोली चलाने के आदेश दिये। बाहर जाने के सारे रास्ते बंद कर दिये गये थे ताकि अंग्रेजी ताकत के गुस्से से कोई न बच सके। इस गोलीकांड में कई लोगों की जान चली गई और उनसे कई गुना अधिक लोग घायल हो गये।

प्रश्न:b) साइमन कमिशन

उत्तर: लंदन 1928: भारत में संवैधानिक सिस्टम की कार्यप्रणाली को सुचारु करने के लिए अंग्रेजी सरकार ने साइमन कमीशन का गठन किया है। ऐसा कहा गया है कि यह कमीशन कुछ नये बदलाव लेकर आयेगी ताकि भारत में एक नये प्रशासनिक तंत्र को बनाया जाएगा। इस कमीशन की सबसे बड़ी विडंबना है कि इसमें एक भी भारतीय नहीं है। ज्यादातर विचारकों को यह बात समझ में नहीं आ रही है कि केवल अंग्रेजों से भरी हुई यह टीम भारत के मामलों में सही निर्णय कैसे लेगी। कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने इस कमिशन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

प्रश्न:4 इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए।

उत्तर: दोनों मामलों में मातृभूमि को एक महिला के रूप में दिखाया गया है। दोनों आकृतियो6 को पारंपरिक परिधानों से सजाया गया है और उनके हाथों में कुछ रूपक तत्व दिये गये हैं। ये रूपक स्वतंत्रता, उदारवाद, शांति और ऊर्जा के प्रतीक हैं।

प्रश्न:5 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक समूहों की सूची बनाइए। इसके बाद उनमें से किन्हीं तीन को चुन कर उनकी आशाओं और संघर्षों के बारे में लिखए हुए यह दर्शाइए कि वे आंदोलन में शामिल क्यों हुए।

उत्तर: असहयोग आंदोलन में किसान, आदिवासी, बागान मजदूर, छात्र, वकील, सरकारी कर्मचारी, महिलाएँ, आदि शामिल हुई थीं। इनमे से तीन का विवरण नीचे दिया गया है:

किसान: किसानों का विरोध अधिक मालगुजारी और तालुकदार और जमींदारों द्वारा लगाये गये अन्य शुल्कों के खिलाफ था। किसानों की माँग थी कि मालगुजारी को कम किया जाए, बेगार को समाप्त किया जाए और जमींदारों का बहिष्कार किया जाए।

आदिवासी: आदिवासियों ने महात्मा गांधी के स्वराज का अपना ही अर्थ निकाला था। आदिवासियों को जंगल में पशु चराने और वहाँ से फल और जलावन लेने की मनाही थी। इस तरह से जंगल के नए कानून उनकी आजीविका के लिए खतरा साबित हो रहे थे। सरकार उन्हें सड़क निर्माण में बेगार करने के लिए बाधित कर रही थी। आदिवासी मानते थे कि इस आंदोलन से उन्हें उन सब समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

बागान मजदूर: इंडियन एमिग्रेशन एक्ट 1859 के अनुसार बागान में काम करने वाले मजदूरों को बिना अनुमति के बागान छोड़ने की मनाही थी। जब असहयोग आंदोलन की खबर चारों ओर फैलने लगी तो बादान के कई मजदूरों ने वहाँ के अफसरों की आज्ञा मानने से इनकार कर दिया।

प्रश्न:6 नमक यात्रा की चर्चा करते हुए स्पष्ट करें कि यह उपनिवेशव्बाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था।

उत्तर: नमक एक शक्तिशाली प्रतीक था जिसे हर व्यक्ति से जोड़ा जा सकता था। नमक का इस्तेमाल हर तबके का आदमी समान रूप से करता था। गरीबों के लिए नमक कर को समाप्त करने का मतलब था दाम में गिरावट। किसी व्यवसायी के लिए इसका मतलब था कि वे ऐसे कई अन्य करों की समाप्ति की उम्मीद कर सकते थे जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा था।

प्रश्न:7 कल्पना कीजिए कि आप सिविल नाफरमानी आंदोलन में हिस्सा लेने वाली महिला हैं। बताइए कि इस अनुभव का आपके जीवन में क्या अर्थ होता।

उत्तर: पारंपरिक तौर पर एक महिला की भूमिका घर चलाने की मानी जाती है। लेकिन असहयोग आंदोलन में भाग लेकर मैं राष्ट्र निर्माण में भागीदारी कर सकूंगी। यह मेरे लिए किसी प्रोत्साहन से कम नहीं था। जब मैंने लाठी चार्ज में घायल व्यक्तियों की सेवा की तो मेरा हृदय उल्लास से भर गया। ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपने ही भाई बंधुओं की सेवा कर रही थी।

प्रश्न:8 राजनीतिक नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर क्यों बँटे हुए थे?

उत्तर: जिन्ना जैसे कई नेता मानते थे कि हिंदु बहुल देश में मुसलमानों का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा। वह अपने समुदाय के लिए अधिक शक्ति की इच्छा रखते थे। अंबेदकर जैसे दलित नेताओं की स्थिति भी कमोबेश वैसी ही थी। दलितों के खिलाफ उत्पीड़न के एक लंबे इतिहास के कारण उन्हें यह डर था कि सवर्णों के हाथों में राजनीतिक सत्ता आने से दलितों की स्थिति और भी खराब हो जाएगी। दूसरी ओर, महात्मा गांधी का मानना था कि पृथक निर्वाचिका बनाने से वैसे लोग मुख्य धारा से और भी दूर चले जाएँगे। उन्हें लगता था कि पृथक निर्वाचिका बनाने से हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना और भी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए विभिन्न नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर बँटे हुए थे।
प्रश्न:1 सत्रहवीं सदी से पहले होने वाले आदान प्रदान के दो उदाहरण दीजिए। एक उदाहरण एशिया से और एक उदाहरण अमेरिका महाद्वीपों के बारे में चुनें।

उत्तर: सत्रहवीं सदी से पहले होने वाले आदान प्रदान के दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:

एशिया से उदाहरण: नूडल चीन से आया है और भारत, इटली और दुनिया के अन्य देशों तक पहुँचा है।

अमेरिका से उदाहरण: आलू अमेरिका से आया है और आयरलैंड तक पहुँचा।

प्रश्न:2 बताएँ कि पूर्व आधुनिक विश्व में बीमारियों के वैश्विक प्रसार ने अमेरिकी भूभागों के उपनिवेशीकरण में किस प्रकार मदद की।

उत्तर: सोलहवीं सदी के मध्य तक अमेरिका में पुर्तगाली और स्पैनिश उपनिवेशों की शुरुआत ठोस रूप से हो चुकी थी। लेकिन यह जीत हथियारों की बदौलत नहीं हुई बल्कि बीमारियों की वजह से हुई। यूरोप के लोग पहले ही चेचक से प्रभावित हो चुके थे इसलिए उनमे इस बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधन क्षमता विकसित हो चुकी थी। लेकिन अमेरिकी लोग दुनिया के अन्य भागों से कटे हुए थे इसलिए उनमें इस बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधन क्षमता नहीं थी। जब यूरोप के लोग अमेरिका पहुँचे तो अपने साथ इस बीमारी के रोगाणु भी लेकर आए। अमेरिका के कुछ हिस्सों में इस बीमारी ने पूरी आबादी को नष्ट कर दिया। इस प्रकार से यूरोपियन आसानी से अमेरिका पर कब्जा कर सके।

प्रश्न:3 निम्नलिखित के प्रभावों की व्याख्या करते हुए संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखें:

प्रश्न:a) कॉर्न लॉ के समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार का फैसला।

उत्तर: कॉर्न लॉ समाप्त होने के निम्नलिखित प्रभाव पड़े:

ब्रिटेन में उपजने वाले खाद्य पदार्थों के मुकाबले आयात होने वाले खाद्य पदार्थ सस्ते हो गये।
इस कारण से जमीन का एक बड़ा हिस्सा कृषि से विहीन हो गया और लोग भारी संख्या में बेरोजगार हो गये। काम की तलाश में लोग बड़ी संख्या में शहरों की ओर पलायन करने लगे। कई लोग देश के बाहर भी पलायन कर गये।
खाद्य पदार्थों की घटी हुई कीमतों के कारण ब्रिटेन में उनकी मांग तेजी से बढ़ी। इस माँग को पूरा करने के लिए पूर्वी यूरोप, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर जमीन को साफ किया गया ताकि खेती हो सके।
खाद्यान्नों को बंदरगाहों तक ले जाने की जरूरत भी महसूस हुई। इसके लिए रेल लाइनें बिछाई गईं ताकि कृषि उत्पादन के क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ा जा सके। कृषि उत्पादन क्षेत्रों में नई आबादी भी बसने लगी। इन सब कामों के लिए लंदन जैसे वित्तीय केंद्रों से पूँजी का प्रवाह होने लगा।
प्रश्न:b) अफ्रीका में रिंडरपेस्ट का आना।

उत्तर: रिंडरपेस्ट का अफ्रिका में आगमन 1880 के दशक के आखिर में हुआ था। यह बीमारी उन घो‌ड़ों के साथ आई थी जो ब्रिटिश एशिया से लाए गए थे। ऐसा उन इटैलियन सैनिकों की मदद के लिए किया गया था जो पूर्वी अफ्रिका में एरिट्रिया पर आक्रमण कर रहे थे। रिंडरपेस्ट पूरे अफ्रिका में किसी जंगल की आग की तरह फैल गई। 1892 आते आते यह बीमारी अफ्रिका के पश्चिमी तट तक पहुँच चुकी थी। इस दौरान रिंडरपेस्ट ने अफ्रिका के मवेशियों की आबादी का 90% हिस्सा साफ कर दिया।

अफ्रिकियों के लिए मवेशियों का नुकसान होने का मतलब था रोजी रोटी पर खतरा। अब उनके पास खानों और बागानों में मजदूरी करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। इस तरह से मवेशियों की एक बीमारी ने यूरोपियन को अफ्रिका में अपना उपनिवेश फैलाने में मदद की।

प्रश्न:c) विश्वयुद्ध के कारण यूरोप में कामकाजी उम्र के पुरुषों की मौत।

उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने पूरी दुनिया को कई मायनों में झकझोर कर रख दिया था। लगभग 90 लाख लोग मारे गए और 2 करोड़ लोग घायल हो गये।

मरने वाले या अपाहिज होने वालों में ज्यादातर लोग उस उम्र के थे जब आदमी आर्थिक उत्पादन करता है। इससे यूरोप में सक्षम शरीर वाले कामगारों की भारी कमी हो गई। परिवारों में कमाने वालों की संख्या कम हो जाने के कारण पूरे यूरोप में लोगों की आमदनी घट गई।

ज्यादातर पुरुषों को युद्ध में शामिल होने के लिए बाध्य होना पड़ा लिहाजा कारखानों में महिलाएँ काम करने लगीं। जो काम पारंपरिक रूप से पुरुषों के काम माने जाते थे उन्हें अब महिलाएँ कर रहीं थीं।

प्रश्न:d) भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामंदी का प्रभाव।

उत्तर: आर्थिक मंदी से भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा। 1928 से 1934 के बीच भारत का आयात और निर्यात घटकर आधा हो गया। इसी दौरान भारत में गेहूँ की कीमतों में 50% की कमी आई।

कृषि उत्पादों की घटती कीमतों के बावजूद सरकार किसानों से पहले दर पर ही लगान वसूलना चाहती थी। इस तरह से इस स्थिति में किसानों की हालत सबसे ज्यादा खराब थी। कई किसानों को अपनी जमापूँजी निकालना पड़ा और जमीन और जेवर भी बेचने पड़े। इस तरह से भारत महँगी धातुओं का निर्यातक बन गया।

भारत के शहरी क्षेत्रों में आर्थिक मंदी का उतना असर नहीं पड़ा। कीमतें घटने के कारण शहर में रहने वाले लोगों का जीवन पहले से आसान हो गया था। भारत के राष्ट्रवादी नेताओं के दवाब के कारण उद्योगों को अधिक संरक्षण मिलने लगा जिससे उद्योग में अधिक निवेश हुआ।

प्रश्न:e) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानांतरित करने का फैसला।

उत्तर: पिछले दो दशकों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानांतरित कर लिया है। इसका मुख्य कारण है इन देशों में कम मजदूरी दर का होना। इस नये प्रचलन के कारण भारत, चीन, ब्राजी, फिलिपींस और मलेशिया जैसे देशों में रोजगार के नये अवसर पैदा हुए हैं। इससे इन देशों के लोगों की आमदनी भी बढ़ी है और चीजों की माँग भी बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप भारत, चीन और जापान जैसे देश विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्तियों के रूप में उभरे हैं।

प्रश्न:4 खाद्य उपाब्धता पर तकनीक के प्रभाव को दर्शाने के लिए इतिहास से दो उदाहरण दें।

उत्तर: रेल के प्रसार के कारण विभिन्न देशों से यूरोप तक खाद्यान्न पहुँचाना आसान हो गया। खाद्य पदार्थों के ब‌ड़े पैमाने पर ढ़ुलाई के कारण भोजन सस्ता और सुलभ हो गया। इससे यूरोप में खाना अच्छी क्वालिटी का हो गया और लोगों की जेब की पहुँच में आ गया।

स्टीम से चलने वाले जहाजों और रेफ्रिजरेशन टेक्नॉलोजी के कारण मीट को तैयार करके अमेरिका से यूरोप तक ले जाना संभव हो गया। अब ब्रिटेन के लोगों के लिए मीट सस्ता हो गया जिससे उनका खान पान बेहतर हो सका।

प्रश्न:5 ब्रेटन वुड्स समझौते का क्या अर्थ है।

उत्तर: 1944 की जुलाई में अमेरिका के न्यू हैंपशायर के ब्रेटन वुड्स नामक जगह पर यूनाइटेड नेशंस मॉनिटरी ऐंड फिनांशियल कॉन्फ्रेंस हुआ। इस कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड की स्थापना हुई। आइएमएफ और वर्ल्ड बैंक को ब्रेटन वुड्स इंस्टिच्यूशन भी कहा जाता है।

प्रश्न:6 कल्पना कीजिए कि आप कैरीबियाई क्षेत्र में काम करने वाले गिरमिटिया मजदूर हैं। इस अध्यय में दिए गए विवरणों के आधार पर अपने हालात और अपनी भावनाओं का वर्णन करते हुए अपने परिवार के नाम एक पत्र लिखें।

उत्तर: इस चिट्ठी के कुछ अंश इस तरह से हो सकते हैं:

हमें लगातार कई घंटों तक काम करना पड़ता है जिससे कठिनाई होती है। हमें यहाँ से वापस जाने की इजाजत भी नहीं मिलती है। कोई थोड़ा भी विरोध करे तो उसके साथ लोग सख्ती से पेश आते हैं। हमलोगों ने इस जिंदगी से समझौता करना सीख लिया है और सारी तकलीफों के बीच खुशी के कुछ पल ढ़ूँढ़ ही लेते हैं। हमलोग होली और मुहर्रम मिलजुलकर मनाते हैं। हम नई नई चीजें पकाने की कोशिश भी करते हैं। हममें से कई तो अपने गाँव की बोली तक भूल चुके हैं।

प्रश्न:7 अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन तरह की गतियों या प्रवाहों की व्याख्या करें। तीनों प्रकार की गतियों के भारत और भारतीयों से संबंधित एक एक उदाहरण दें और उनके बारे में संक्षेप में लिखें।

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन तरह के प्रवाह निम्नलिखित हैं:

व्यापार का आदान प्रदान: भारत सदियों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का अभिन्न हिस्सा रहा है। अंग्रेजी शासन शुरु होने के पहले भारते के मसाले सुदूर देशों तक जाते थे और बाहर से जवाहरात यहाँ आते थे।

श्रम का आदान प्रदान: आधुनिक भारत से सॉफ्टवेयर के ज्ञाता अमेरिका में जाकर काम करते हैं।

पूँजी का आदान प्रदान: आयात और निर्यात के कारण पूँजी का प्रवाह दोनों दिशाओं में होता रहता है।

प्रश्न:8 महामंदी के कारणों की व्याख्या करें।

उत्तर: महामंदी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

जरूरत से ज्यादा कृषि उत्पादन: 1920 के दशक में कृषि क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा उत्पादन एक अहम समस्या थी। कृषि उत्पादों की अत्यधिक सप्लाई के कारण कीमतें गिर रही थीं। किसानों ने इसकी भरपाई के लिए और भी अधिक उत्पादन करना शुरु किया। इसके कारण बाजार में कृषि उत्पादों की बाढ़ आ गई; जिससे कीमतें और नीचे गिरीं। खरीददारों की कमी के कारण कृषि उत्पाद सड़ने लगे।

अमेरिका द्वारा कर्ज में कमी: कई यूरोपीय देश कर्जे के लिए अमेरिका पर बुरी तरह से निर्भर थे। लेकिन अमेरिका के साहूकार थोड़ी ही बात पर घबराहट दिखाने लगते थे। 1928 के शुरुआती छ: महीने में अमेरिका द्वारा दिये गये कर्ज की राशि थी 100 करोड़ डॉलर। लेकिन एक साल के भीतर यह राशि घटकर 24 करोड़ रह गई। अमेरिका द्वारा हाथ खींच लिए जाने के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा।

प्रश्न:9 जी-77 देशों से आप क्या समझते हैं? जी-77 को किस आधार पर ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संतानों की प्रतिक्रिया कहा जा सकता है, व्याख्या करें।

उत्तर: ये संस्थाएँ पुरानी उपनिवेशी ताकतों के नियंत्रण में थी। इसलिए ज्यादातर विकासशील देशों पर अभी भी इस बात का खतरा था कि पुरानी उपनिवेशी ताकतें उनका शोषण कर सकती हैं। एक नए आर्थिक ढ़ाँचे की माँग रखने के लिए इन देशों ने G – 77 (77 देशों का समूह) बनाया। चूँकि इस संगठन का निर्माण उन देशों द्वारा किया गया था जो ब्रेटन वुड्स के संस्थापक देशों में से कुछ के गुलाम थे इसलिए जी-77 को ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतानों की प्रतिक्रिया कहा जा सकता है।
प्रश्न:1 सिल्क रूट का क्या मतलब है?

उत्तर: जो व्यापार मार्ग चीन को पश्चिमी देशों और अन्य देशों से जोड़ता था उसे सिल्क रूट कहते हैं। उस जमाने में कई सिल्क रूट थे। सिल्क रूट ईसा युग की शुरुआत के पहले से ही अस्तित्व में था और पंद्रहवीं सदी तक बरकरार था।

प्रश्न:2 किस तरह चेचक की बीमारी ने यूरोपीय लोगों के लिये अमेरिका में रास्ता आसान बना दिया?

उत्तर: चेचक की बीमारी ने यूरोप के लोगों पर पहले ही आक्रमण किया था। इसलिये यूरोप के लोगों के शरीर में इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधन क्षमता विकसित हो चुकी थी। लेकिन तब तक अमेरिका दुनिया के अन्य भागों से अलग थलग था। इसलिये अमेरिकी लोगों के शरीर में चेचक से लड़ने के लिये प्रतिरोधन क्षमता विकसित नहीं हुई थी। जब यूरोप के लोग अमेरिका पहुँचे तो वे अपने साथ चेचक के जीवाणु भी ले गये। इससे अमेरिका के लोगों में चेचक की बीमारी फैलने लगी। इस बीमारी ने अमेरिका के कुछ भागों की पूरी आबादी साफ कर दी। इस तरह से यूरोपियन लोगों को अमेरिका पर आसानी से जीत हासिल हो गई।

प्रश्न:3 उन्नीसवीं सदी के आखिरी दशक तक किस तरह से कृषि क्षेत्र में एक वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण हो गया?

उत्तर: औद्योगीकरण के कारण ब्रिटेन में भोजन की माँग बढ़ने लगी थी। इस माँग को पूरा करने के लिये पूर्वी यूरोप, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया में जोर शोर से खेती होने लगी। कृषि कार्य में मजदूरों की माँग को पूरा करने के लिये लोगों का भारी संख्या में पलायन हुआ। रेल लाइनें बिछाकर खेतों को बंदरगाहों से जोड़ा गया। इस तरह से अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में उन्नीसवीं सदी के अंत तक कृषि क्षेत्र में एक वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण हो गया।

प्रश्न:4 उन्नीसवीं सदी की मुख्य तकनीकी खोजें क्या हैं? इन खोजों ने किस तरह से अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण में मदद की?

उत्तर: इस युग के कुछ मुख्य तकनीकी खोज हैं रेलवे, स्टीम शिप और टेलिग्राफ।

रेलवे ने बंदरगाहों और आंतरिक भूभागों को आपस में जोड़ दिया।
स्टीम शिप के कारण माल को भारी मात्रा में अतलांतिक के पार ले जाना आसान हो गया।
टेलीग्राफ की मदद से संचार व्यवस्था में तेजी आई और इससे आर्थिक लेन देन बेहतर रूप से होने लगे।
प्रश्न:5 बंधुआ मजदूर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे मजदूर जो किसी खास मालिक के लिए किसी खास अवधि के लिए काम करने को प्रतिबद्ध होते हैं बंधुआ मजदूर कहलाते हैं।

प्रश्न:6 उन्नीसवीं सदी में औद्योगीकरण का भारतीय व्यापार पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: भारत से उम्दा कॉटन के कपड़े वर्षों से यूरोप निर्यात हो रहे थे। लेकिन औद्योगीकरण के बाद स्थानीय उत्पादकों ने ब्रिटिश सरकार को भारत से आने वाले कॉटन के कपड़ों पर प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य किया। इससे ब्रिटेन में बने कपड़े भारत के बाजारों में भारी मात्रा में आने लगे। 1800 में भारत के निर्यात में 30% हिस्सा कॉटन के कपड़ों का था। 1815 में यह गिरकर 15% हो गया और 1870 आते आते यह 3% ही रह गया। लेकिन 1812 से 1871 तक कच्चे कॉटन का निर्यात 5% से बढ़कर 35% हो गया। इस दौरान निर्यात किए गए सामानों में नील (इंडिगो) में तेजी से बढ़ोतरी हुई। भारत से सबसे ज्यादा निर्यात होने वाला सामान था अफीम जो मुख्य रूप से चीन जाता था।

प्रश्न:7 आर्थिक मंदी का भारत के शहरों पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: भारत के शहरी क्षेत्रों में आर्थिक मंदी का उतना असर नहीं पड़ा। कीमतें घटने के कारण शहर में रहने वाले लोगों का जीवन पहले से आसान हो गया था।

प्रश्न:8 आइएएफ और वर्ल्ड बैंक को ब्रेटन वुड्स इंस्टिच्यूशन क्यों कहते हैं?

उत्तर: दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1944 की जुलाई में अमेरिका के न्यू हैंपशायर के बेटन वुड्स नामक जगह पर यूनाइटेड नेशंस मॉनिटरी ऐंड फिनांशियल कॉन्फ्रेंस हुआ था। इस कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशन मॉनिटरी फंड की स्थापना हुई। उसके बाद इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन ऐंड डेवलपमेंट की स्थापना हुई जिसे वर्ल्ड बैंक के नाम से भी जाना जाता है। इसलिये इन दो संस्थानों को ब्रेटन वुड्स इंस्टिच्यूशन भी कहते हैं।
प्रश्न:1 निम्नलिखित की व्याख्या करें:

प्रश्न:a) ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किये।

उत्तर: स्पिनिंग जेनी के आविष्कार के बाद ब्रिटेन के हथकरघा कारीगरों को लगने लगा कि इस नई मशीन से उनका रोजगार छिन जायेगा। इस मशीन को वे अपने अस्तित्व के लिये खतरा समझने लगे। इसलिए ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किये और तोड़-फोड़ किया।

प्रश्न:b) सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय शहरों के सौदागर गाँवों में किसानों और कारीगरों से काम करवाने लगे।

उत्तर: शहरी क्षेत्रों में गिल्ड हुआ करते थे जो बहुत प्रभावशाली थे। उनके कारण किसी भी नये व्यवसायी के लिए व्यवसाय में शुरुआत करना बहुत मुश्किल होता था। ऐसे गिल्ड किसी भी क्षेत्र में उत्पादन और कीमत दोनों को नियंत्रित करने का काम करते थे। इसलिए जो व्यापारी अपनी शुरुआत करना चाहते थे उन्होंने गाँवों से सामान बनवाना बेहतर समझा। इसलिए सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय शहरों के सौदागर गाँवों में किसानों और कारीगरों से काम करवाने लगे।

प्रश्न:c) सूरत बंदरगाह अठारहवीं सदी के अंत तक हाशिये पर पहुँच गया था।

उत्तर: इस अवधि में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने कई अन्य शहरों में अपने व्यापार का केंद्र विकसित कर लिया था। इसके कारण सूरत का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ था और अठारहवीं सदी के अंत तक सूरत हाशिये पर पहुँच चुका था।

प्रश्न:d) ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए गुमाश्तों को नियुक्त किया था।

उत्तर: ईस्ट इंडिया कम्पनी परंपरागत बिचौलियों और व्यवसायियों को समाप्त करना चाहती थी। इसके पीछे कम्पनी का उद्देश्य था कि व्यापार पर सीधा नियंत्रण बनाया जा सके। इसलिए कम्पनी ने भारत में बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए गुमाश्तों को नियुक्त किया था।

प्रश्न:2 प्रत्येक के आगे ‘सही’ या ‘गलत’ लिखें:

प्रश्न:a) उन्नीसवीं सदी के आखिर में यूरोप की कुल श्रम शक्ति का 80 प्रतिशत तकनीकी रूप से विकसित औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रहा था।

उत्तर: गलत

प्रश्न:b) अठारहवीं सदी तक महीन कपड़े के अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर भारत का दबदबा था।

उत्तर: सही

प्रश्न:c) अमेरिकी गृहयुद्ध के फलस्वरूप भारत के कपास निर्यात में कमी आई।

उत्तर: गलत

प्रश्न:d) फ्लाई शटल के आने से हथकरघा कामगारों की उत्पादकता में सुधार हुआ।

उत्तर: सही

प्रश्न:3 पूर्व औद्योगीकरण का मतलब बताएँ।

उत्तर: ब्रिटेन में औद्योगीकरण से ठीक पहले के दौर को पूर्व औद्योगीकरण कहते हैं। यह वह समय था जब ब्रिटेन में कारखाने नहीं खुले थे। इस अवधि के व्यवसाय का नेटवर्क अनूठे किस्म का था जिसे व्यापारी नियंत्रित करते थे। व्यापारी गाँव के लोगों से चीजें बनवाते थे। लोग अपने गाँव में रहते हुए ही काम किया करते थे। उन उत्पादों को गाँवों से लंदन जैसे शहरों तक लाया जाता था और फिर वहाँ से दुनिया के अन्य भागों में निर्यात किया जाता था।

प्रश्न:4 उन्नीसवीं सदी के यूरोप में कुछ उद्योगपति मशीनों की बजाय हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता क्यों देते थे?

उत्तर: इस अवधि में मजदूरों की कोई कमी नहीं थी। मजदूरों की प्रचुर संख्या होने के कारण मजदूरों की कमी का डर नहीं था और अधिक मजदूरी देने की चिंता भी नहीं थी। नई मशीनों को खरीदने के लिए अधिक खर्च करने की बजाय उद्योगपतियों ने हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता दी।

प्रश्न:5 ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारतीय बुनकरों से सूती और रेशमी कपड़े की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या किया?

उत्तर: ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारतीय बुनकरों से सूती और रेशमी कपड़े की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाये। कम्पनी ने बुनकरों पर सीधा नियंत्रण बनाना शुरु किया। ऐसा करने के लिए एडवांस का सिस्टम शुरु किया गया। बुनकरों को एडवांस पैसे दिये जाते थे ताकि वे कच्चा माल और उपकरण खरीद सकें। लेकिन जो बुनकर एडवांस ले लेता था उसे किसी अन्य को अपने उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं दी जाती थी।

प्रश्न:6 पहले विश्व युद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन क्यों बढ़ा?

उत्तर: पहले विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन की मिलें सेना की जरूरतों का सामान बनाने में व्यस्त हो गईं। इससे ब्रिटेन से भारत को आने वाला आयात घट गया। इसके कारण घरेलू बाजार की माँग को पूरा करने के लिए भारत के उद्योगों को अधिक उत्पादन करना पड़ा। भारत के उद्योगों से भी ब्रिटेन की सेना के लिए सामान बनाने के लिये कहा गया। इस तरह से भारत के उत्पादों की माँग बढ़ गई और भारत का औद्योगिक उत्पादन बढ़ गया।
प्रश्न:1 पूर्व औद्योगीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: यूरोप में औद्योगीकरण के पहले के काल को पूर्व औद्योगीकरण का काल कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो यूरोप में सबसे पहले कारखाने लगने के पहले के काल को पूर्व औद्योगीकरण का काल कहते हैं।

प्रश्न:2 पूर्व औद्योगीकरण के दौरान व्यापारियों ने गाँव पर अधिक ध्यान क्यों दिया?

उत्तर: शहरों में ट्रेड और क्राफ्ट गिल्ड बहुत शक्तिशाली होते थे। इस प्रकार के संगठन प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर अपना नियंत्रण रखते थे। वे नये लोगों को बाजार में काम शुरु करने से भी रोकते थे। इसलिये किसी भी व्यापारी के लिये शहर में नया व्यवसाय शुरु करना मुश्किल होता था। इसलिये वे गाँवों की ओर मुँह करना पसंद करते थे।

प्रश्न:3 कारखाने खुलने से क्या लाभ हुए?

उत्तर: कारखानों के खुलने से कई फायदे हुए। श्रमिकों की कार्यकुशलता बढ़ गई। अब नई मशीनों की सहायता से प्रति श्रमिक आधिक मात्रा में और बेहतर उत्पाद बनने लगे। औद्योगीकरण की शुरुआत मुख्य रूप से सूती कपड़ा उद्योग में हुई। कारखानों में श्रमिकों की निगरानी और उनसे काम लेना अधिक आसान हो गया।

प्रश्न:4 औद्योगीकरण के शुरुआती दौर में व्यापारी मशीनों से दूर ही रहना पसंद करते थे। क्यों?

उत्तर: औद्योगीकरण के शुरुआती दौर में व्यापारी मशीनों से दूर ही रहना पसंद करते थे। इसके कारण निम्नलिखित हैं:

मशीनें महंगी होती थीं और उनके मरम्मत में भी काफी खर्च लगता था।
आविष्कारकों या निर्माताओं के दावों के विपरीत नई मशीनें बहुत कुशल भी नहीं थीं।
उस जमाने में श्रमिकों की किल्लत या अधिक पारिश्रमिक जैसी कोई समस्या नहीं थी।
मशीनों से बनि चीजें हाथ से बनी चीजों की गुणवत्ता और सुंदरता का मुकाबला नहीं कर पाती थीं।
प्रश्न:5 औद्योगीकरण के शुरुआती दौर में शहर में आने वाले श्रमिकों का जीवन कैसा होता था?

उत्तर: शहर में नौकरी मिलना बहुत कठिन होता था। अधिकतर लोगों को साल के कुछ महीने ही काम मिल पाता था। ऐसे लोगों को अक्सर रैन बसेरों या फुटपाथ पर रात गुजारनी होती थी।

प्रश्न:6 महिलाओं ने स्पिनिंग जेनी का विरोध क्यों किया?

उत्तर: महिलाएँ हाथ से कपड़े बुनती थीं। उन्हें डर था कि स्पिनिंग जेनी के आने से उनका रोजगार छिन जायेगा। इसलिये महिलाओं ने स्पिनिंग जेनी का विरोध किया।

प्रश्न:7 गुमाश्ता कौन थे?

उत्तर: गुमाश्ता ईस्ट इंडिया कम्पनी के एजेंट होते थे। गुमाश्ता का काम होता था बुनकरों के काम की निगरानी करना, आने वाले माल का संग्रहण करना और कपड़े की क्वालिटी की जाँच करना। गुमाश्ता किसी भी गाँव के लिये बाहरी आदमी होता था जो सिपाहियों और चपरासियों के साथ आता था और अपनी अकड़ दिखाता था। गुमाश्ता और बुनकरों के बीच अक्सर टकराव होते रहते थे।

प्रश्न:8 जॉबर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: उद्योगपति अक्सर लोगों को काम पर रखने के लिए जॉबर की मदद लेते थे जो किसी प्लेसमेंट कंसल्टेंट की तरह काम करता था। अक्सर कोई पुराना और भरोसेमंद मजदूर जॉबर बन जाता था। जॉबर अक्सर अपने गाँव के लोगों को प्रश्रय देता था। वह उन्हें शहर में बसने में मदद करता था और जरूरत के समय कर्ज भी देता था। इस तरह से जॉबर एक प्रभावशाली व्यक्ति बन गया था। वह लोगों से बदले में पैसे और उपहार माँगता था और मजदूरों के जीवन में भी दखल देता था।

प्रश्न:9 भारत के व्यवसायी सूत के मोटे कपड़े ही क्यों बनाते थे?

उत्तर: भारत के व्यवसायी यहाँ के बाजार में मैनचेस्टर के सामानों से प्रतिस्पर्धा से बचना चाहते थे। इसलिये वे सूत के मोटे कपड़े ही बनाते थे।

प्रश्न:10 पहले विश्व युद्ध का भारत के व्यवसाय पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने स्थिति बदल दी। ब्रिटेन की मिलें सेना की जरूरतें पूरा करने में व्यस्त हो गईं। इससे भारत में आयात घट गया। भारत की मिलों के सामने एक बड़ा घरेलू बाजार तैयार था। भारत की मिलों को ब्रिटेन की सेना के लिए सामान बनाने के लिए भी कहा गया। इस तरह से घरेलू और विदेशी बाजारों में माँग बढ़ गई। इससे उद्योग धंधे में तेजी आ गई।
प्रश्न:1 अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी क्यों फैलने लगी? कारण बताइए।

उत्तर: लंदन में कोई बड़ी फैक्टरी न होने के बावजूद यह शहर पलायन करने वालों की मुख्य मंजिल हुआ करता था। लंदन के डॉकयार्ड में रोजगार के काफी अवसर थे। इसके अलावा कपड़ा, जूते, लकड़ी, फर्नीचर, मेटल, इंजीनियरिंग, प्रिंटिंग और प्रेसिजन इंस्ट्रूमेंट में काफी लोगों को काम मिलता था। इसलिए अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी बढ़ने लगी।

प्रश्न:2 उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के बीच लंदन में औरतों के लिए उपलब्ध कामों में किस तरह के बदलाव आए? ये बदलाव किन कारणों से आए?

उत्तर: युद्ध के दौरान अधिकतर पुरुष युद्ध लड़ने चले गये। इसलिए महिलाओं को कारखानों में काम मिलने लगा। जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ, महिलाओं की नौकरियाँ जाने लगीं। अब अधिकाँश महिलाओं को घरों में काम करना पड़ा। इनमें से कई महिलाओं ने कपड़े सिलने, कपड़े धोने और माचिस बनाने का काम भी शुरु कर दिया।

प्रश्न:3 विशाल शहरी आबादी के होने से निम्नलिखित पर क्या असर पड़ता है? ऐतिहासिक उदाहरणों के साथ समझाइए।

प्रश्न:a) जमींदार

उत्तर: एक जमींदार मकान को किराये पर लगा कर अपनी आय बढ़ा सकता है। उन्नीसवीं सदी के आखिर और बीसवीं सदी की शुरुआत में लंदन में ऐसी ही स्थिति थी। बीसवीं सदी के शुरु में बम्बई में भी यही हुआ था।

प्रश्न:b) कानून व्यवस्था सँभालने वाला पुलिस अधीक्षक

उत्तर: शहर में जब आबादी बढ़ जाती है तो समाज में कई विसंगतियाँ आती हैं। जिन लोगों को सही रोजगार नहीं मिल पाता है वे छोटे मोटे अपराध करना शुरु कर देते हैं। आवास की किल्लत के कारण भी लोगों में रोष जमा होने लगता है। इससे अपराध में वृद्धि होती है। किसी पुलिस अधीक्षक के लिए यह एक चुनौतीभरा अवसर होता है क्योंकि उसे अपराध को नियंत्रण में रखना होता है।

प्रश्न:c) राजनीतिक दल का नेता

उत्तर: किसी राजनीतिक दल के नेता के लिए एक बड़ी आबादी से चुनौती भी मिलती है और उसके लिए अवसर भी होते हैं। एक बड़ी आबादी में रोष की भावना को रोकना एक चुनौती होती है। लेकिन यदि कोई नेता इसका सही हल निकाल लेता है तो फिर उसके लिए अपार जन समर्थन तैयार हो जाता है।

प्रश्न:4 निम्नलिखित की व्याख्या करें:

प्रश्न:a) उन्नीसवीं सदी में धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की जरूरत का समर्थन क्यों किया?

उत्तर: एक कमरे के मकानों में व्याप्त गंदगी से महामारी फैलने का खतरा रहता था। ऐसे घरों में आग का खतरा भी बना रहता था। अपराध के बढ़ने की भी आशंका रहती थी। इन सब दुष्परिणामों को रोकने के लिए धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की जरूरत का समर्थन किया।

प्रश्न:b) बंबई की बहुत सारी फिल्में शहर में बाहर से आने वाली जिंदगी पर आधारित क्यों होती थीं?

उत्तर: बम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर लोग बाहर से पलायन करके आये थे। इसलिए वे उन आप्रवासियों की समस्या को बेहतर ढ़ंग से समझते थे। इसलिए बंबई की बहुत सारी फिल्में शहर में बाहर से आने वाली जिंदगी पर आधारित होती थीं।

प्रश्न:c) उन्नीसवीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि क्यों हुई?

उत्तर: उन्नीसवीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं:

अफीम और कपास के व्यापार में वृद्धि
कपड़ा मिलों का बड़ी संख्या में शुरु होना
रेल का विस्तार
प्रश्न:5 लोगों को मनोरंजन के अवसर उपलब्ध करने के लिए इंग्लैंड में उन्नीसवीं सदी में मनोरंजन के कौन कौन से साधन सामने आए।

उत्तर: लोगों को मनोरंजन के अवसर उपलब्ध करने के लिए इंग्लैंड में उन्नीसवीं सदी में मनोरंजन के निम्नलिखित साधन सामने आए:

लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी और म्यूजियम
प्रश्न:6 लंदन में आए उन सामाजिक परिवर्तनों की व्याख्या करें जिनके कारण भूमिगत रेलवे की जरूरत पैदा हुई। भूमिगत रेलवे के निर्माण की आलोचना क्यों हुई?

उत्तर: जब शहर का विस्तार होने लगा तो लोग काम की जगह से दूर रहने लगे। शहर से भीड़भाड़ कम करने के लिए भी यह जरूरी था कि आबादी के एक बड़े हिस्से को शहर से दूर भेज दिया जाये। लेकिन इसके लिए यातायात के एक ऐसे साधन की जरूरत थी जिससे लोग कम समय में अपने घर से काम करने की जगह तक पहुँच सकें। इसलिए लंदन में भूमिगत रेलवे की जरूरत महसूस हुई। शुरु शुरु में भूमिगत रेलवे के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया नकारात्मक थी। कई लोग इस बात से दुखी थे कि भूमिगत रेलवे के निर्माण के लिए कई मकानों को गिरा दिया गया था। कई लोगों को धुँए से भरे भूमिगत रेल में सफर करने में परेशानी होती थी।

प्रश्न:7 पेरिस के हॉसमानीकरण का क्या अर्थ है? इस तरह के विकास को आप किस हद तक सही या गलत मानते हैं? इस बात का समर्थन या विरोध करते हुए अखबार के संपादक को पत्र लिखिए और उसमें अपने दृष्टिकोण के पक्ष में कारण दीजिए।

उत्तर: बैरन हॉसमैन एक टाउन प्लानर थे जिन्होंने पेरिस को एक आदर्श शहर बनाने की कोशिश की। इस प्रक्रिया में लोगों को भारी संख्या में विस्थापित किया गया। इसके बाद एक सुंदर शहर तो बनकर तैयार हो गया लेकिन इससे ज्यादातर लोग परेशान हो गये।

कोई भी शहर सिर्फ आलीशान भवनों और यातायात की दक्ष व्यवस्था से ही विकसित नहीं होता है। एक शहर अपने लोगों के कारण भी विकसित होता है। हर शहर नाना प्रकार के लोगों का एक सुंदर मिश्रण होता है जिसमें हर व्यक्ति का अपना योगदान होता है। लोगों से ही शहर की आत्मा बनती है। हॉसमानीकरण के बाद पेरिस में हर सड़क, हर गली और हर भवन एक ही जैसा दिखता था। वह बिलकुल कृत्रिम शहर लगता था। किसी भी मुहल्ले की अपनी अलग पहचान ही नहीं थी।

प्रश्न:8 सरकारी नियमन और नए कानूनों ने प्रदूषण की समस्या को किस हद तक हल किया? निम्नलिखित के स्तर में परिवर्तन के लिए बने कानूनों की सफलता और विफलता का एक एक उदाहरण दीजिए:

प्रश्न:a) सार्वजनिक जीवन

उत्तर: दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सीएनजी के इस्तेमाल पर कोर्ट का आदेश इसका एक अच्छा उदाहरण हो सकता है। जब से दिल्ली में सीएनजी का इस्तेमाल होने लगा है तब से यहाँ की हवा बेहतर हुई है। इससे आम जन जीवन की जिंदगी बेहतर हुई है।

प्रश्न:b) निजी जीवन

उत्तर: निजी जीवन को ठीक करने के लिए सरकार को कानून के साथ साथ नागरिकों को अधिकार और सुविधाएँ भी देनी पड़ती हैं। हम सभी जानते हैं कि कोयले या उपले की तुलना में एलपीजी एक बेहतर ईंधन है। ज्यादातर शहरी इलाकों में सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता को बेहतर किया है। इससे लोगों को भी इस स्वच्छ ईंधन को अपनाने में मदद मिली है। इससे गृहिणियों का जीवन पहले से बेहतर हुआ है। इससे वायु प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिली है।
प्रश्न:1 शहर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: शहर उस स्थान को कहते हैं जहाँ प्रमुख आर्थिक क्रियाओं में कृषि का कोई स्थान नहीं होता है। जब भोजन का उत्पादन इतना अधिक होने लगा कि उससे अन्य आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने लगा तो शहरों का विकास हुआ।

प्रश्न:2 अठारहवीं सदी में अधिकतर लोग लंदन की तरफ पलायन क्यों करते थे?

उत्तर: लंदन में कोई बड़ी फैक्टरी नहीं थी। इसके बावजूद लंदन पलायन करने वालों की मुख्य मंजिल हुआ करता था। लंदन के डॉकयार्ड में रोजगार के काफी अवसर थे। इसके अलावा लोगों को कपड़ा, जूते, लकड़ी, फर्नीचर, मेटल, इंजीनियरिंग, प्रिंटिंग और प्रेसिजन इंस्ट्रूमेंट में भी काम मिलता था। इसलिये अठारहवीं सदी में अधिकतर लोग लंदन की तरफ पलायन करते थे।

प्रश्न:3 छोटे बच्चों को लंदन के कारखानों में काम करने से रोकने के लिये ब्रिटिश सरकार ने क्या कदम उठाये?

उत्तर: 1870 में कम्पल्सरी एजुकेशन एक्ट पास हुआ और 1902 में फैक्टरी एक्ट पास हुआ। इन कानूनों की मदद से यह सुनिश्चित किया गया कि छोटे बच्चों को कारखानों में काम न करना पड़े।

प्रश्न:4 लंदन में गरीब लोग किस तरह के मकान में रहते थे? इससे क्या समस्या थी?

उत्तर: गरीब लोग एक कमरे के मकानों में रहते थे। ऐसे मकानों की अधिक संख्या को जनता के स्वास्थ्य के लिये खतरा माना जाने लगा। ऐसे मकानों हवा आने जाने की समुचित व्यवस्था नहीं थी। ऐसे मकानों में सफाई का प्रावधान भी नहीं था। इन मकानों में हमेशा आग लगने का खतरा भी बना रहता था। कठिन परिस्थिति में रहने वाले लोग समाज में लड़ाई झगड़े के लिये अनुकूल परिस्थिति प्रदान करते थे।

प्रश्न:5 औद्योगीकरण से शहर में किस तरह के सामाजिक बदलाव हुए?

उत्तर: औद्योगीकरण के कारण शहर में सामाजिक बदलाव भी हुए। परिवार का आकार छोटा होता जा रहा था और व्यक्तिवाद बढ़ता जा रहा था। कामगार वर्ग में शादियाँ टूटने भी लगीं थीं। उच्च मध्य वर्ग की महिलाओं का अकेलापन बढ़ने लगा था।

प्रश्न:6 ब्रिटेन में श्रमिक वर्ग के लोग मनोरंजन के लिये क्या करते थे?

उत्तर: श्रमिक वर्ग के लोग पब में मिलते थे। उनके लिये एक दूसरे की खबर जानने और विचारों का आदान प्रदान करने के लिये पब एक अच्छी जगह थी। उन्नीसवीं सदी में लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी और म्यूजियम बनाये गये ताकि लोग ब्रिटेन के इतिहास और उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर सकें। म्यूजिक हॉल निम्न वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय थे। बीसवीं सदी की शुरुआत से ही सिनेमा हर वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय हो चुका था।

प्रश्न:7 बम्बई कैसे ब्रिटिश हुकूमत के कब्जे में आया?

उत्तर: सत्रहवीं सदी में बम्बई पुर्तगाल के अधीन था। यह सात द्वीपों का एक समूह था। 1661 में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय की शादी पुर्तगाल की राजकुमारी के साथ हुई और बम्बई शहर को उपहार स्वरूप चार्ल्स द्वितीय को दे दिया गया। इस तरह से बम्बई का नियंत्रण ब्रिटिश हुकूमत के हाथों में आ गया।

प्रश्न:8 बम्बई की चाल का वर्णन करें।

उत्तर: एक चाल एक बहुमंजिला इमारत होती थी। इस तरह के मकान निजी मालिकों की संपत्ति हुआ करते थे। हर चाल में एक कमरे के कई मकान होते थे। इनमें कोई प्राइवेट टॉयलेट नहीं होता था और कई लोगों को एक ही टॉयलेट से काम चलाना पड़ता था। किराया इतना अधिक होता था कि लोगों को किसी रिश्तेदार या स्वजातीय लोगों के साथ एक कमरा शेअर करना पड़ता था।
प्रश्न:1 निम्नलिखित के कारण दें:

प्रश्न:a) वुडब्लॉक प्रिंट या तख्ती की छ्पाई यूरोप में 1295 के बाद आई।

उत्तर: मार्को पोलो 1295 में जब चीन से वापस लौटा तो अपने साथ वुडब्लॉक प्रिंटिंग की जानकारी लेकर आया। इसलिए यूरोप में वुडब्लॉक प्रिंटिंग 1295 के बाद आई।

प्रश्न:b) मार्टिन लूथर मुद्रण के पक्ष में था और उसने इसकी खुलेआम प्रशंसा की।

उत्तर: मार्टिन लूथर ने रोमन कैथलिक चर्च की जो आलोचना की थी वह प्रिंट के जरिये ही जनमानस के एक बड़े हिस्से तक पहुँच पाई। इसलिए मार्टिन लूथर मुद्रण के पक्ष में था और उसने इसकी खुलेआम प्रशंसा की।

प्रश्न:c) रोमन कैथलिक चर्च ने सोलहवीं सदी के मध्य से प्रतिबंधित किताबों की सूची रखनी शुरु कर दी।

उत्तर: प्रिंट के कारण बाइबिल की नई व्याख्या लोगों तक पहुँची और लोग चर्च की शक्ति पर सवाल उठाने लगे। इसलिए रोमन कैथलिक चर्च ने सोलहवीं सदी के मध्य से प्रतिबंधित किताबों की सूची रखनी शुरु कर दी।

प्रश्न:d) महात्मा गांधी ने कहा कि स्वराज की लड़ाई दरअसल अभिव्यक्ति, प्रेस, और सामूहिकता के लिए लड़ाई है।

उत्तर: सरकारें जिस तरह से प्रिंट को नियंत्रित करने और कुचलने की कोशिश करती हैं उससे प्रिंट की शक्ति का अंदाजा हो जाता है। अंग्रेजी हुकूमत ने भारत में छपने वाली किताबों और अखबारों पर लगातार नजर रखनी शुरु कर दी और प्रेस को नियंत्रण में लाने के लिए कई कानून भी बनाए। इसलिए गांधी जी ने कहा कि स्वराज की लड़ाई दरअसल अभिव्यक्ति, प्रेस, और सामूहिकता के लिए लड़ाई है।

प्रश्न:2 छोटी टिप्पणी में इनके बारे में बताएँ:

प्रश्न:a) गुटेंबर्ग प्रेस

उत्तर: गुटेनबर्ग किसी व्यापारी के बेटे थे। अपने बचपन से ही उन्होंने जैतून और शराब की प्रेस देखी थी। उसने पत्थरों पर पॉलिस करने की कला भी सीखी थी। उसे सोने के जेवर बनाने में भी महारत हासिल थी और वह लेड के साँचे भी बनाता था जिनका इस्तेमाल सस्ते जेवरों को ढ़ालने के लिए किया जाता था।

इस तरह से गुटेनबर्ग के पास हर वह जरूरी ज्ञान था जिसका इस्तेमाल करके उसने प्रिंटिंग टेक्नॉलोजी को और बेहतर बनाया। उसने जैतून के प्रेस को अपने प्रिंटिंग प्रेस का मॉडल बनाया और अपने साँचों का इस्तेमाल करके छापने के लिए अक्षर बनाये। 1448 इसवी तक गुटेनबर्ग ने अपने प्रिंटिंग प्रेस को दुरुस्त बना लिया था। उसने अपने प्रेस में सबसे पहले बाइबिल को छापा।

प्रश्न:b) छपी किताब को लेकर इरैस्मस के विचार

उत्तर: इरैस्मस का मानना था कि बौद्धिक ज्ञान की अस्मिता के लिए किताबों का छपना अच्छी बात नहीं थी। उसका सोचना था कि प्रिंट के कारण बाजार में घटिया किताबें भर जाएँगी जिससे समाज को लाभ के स्थान पर घाटा अधिक होगा। घटिया किताबों की भीड़ में अच्छी रचना का अस्तित्व ही मिट जायेगा।

प्रश्न:c) वर्नाकुलर या देसी प्रेस एक्ट

उत्तर: वर्नाकुलर प्रेस एक्ट को 1878 में पारित किया गया। इस कानून ने सरकार को वर्नाकुलर प्रेस में समाचार और संपादकीय पर सेंसर लगाने के लिए अकूत शक्ति प्रदान की। राजद्रोही रिपोर्ट छपने पर अखबार को चेतावनी दी जाती थी। यदि उस चेतावनी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता हा तो फिर ऐसी भी संभावना होती थी कि प्रेस को बंद कर दिया जाये और प्रिंटिंग मशीनों को जब्त कर लिया जाये।

प्रश्न:3 उन्नीसवीं सदी में भारत में मुद्रण संस्कृति के प्रसार का इनके लिए क्या मतलब था:

प्रश्न:a) महिलाएँ

उत्तर: महिलाओं के जीवन और संवेदनाओं पर कई लेखकों ने लिखना शुरु किया। इसके कारण मध्यम वर्ग की महिलाओं में पढ़ने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी। कई ऐसे पिता या पति आगे आये जो स्त्री शिक्षा पर जोर देते थे। कुछ महिलाओं ने घर पर रहकर ही शिक्षा प्राप्त की, जबकि कुछ अन्य महिलाओं ने स्कूल जाना भी शुरु किया।

लेकिन पुरातनपंथी हिंदू और मुसलमान अभी भी स्त्री शिक्षा के खिलाफ थे। उनका मानना था कि शिक्षा से लड़कियों के दिमाग पर बुरे प्रभाव पड़ेंगे। लोग चाहते थे कि उनकी बेटियाँ धार्मिक ग्रंथ पढ़ें लेकिन उसके अलावा और कुछ न पढ़ें।

प्रश्न:b) गरीब जनता

उत्तर: मद्रास के शहरों में उन्नीसवीं सदी में सस्ती और छोटी किताबें आ चुकी थीं। इन किताबों को चौराहों पर बेचा जाता था ताकि गरीब लोग भी उन्हें खरीद सकें। बीसवीं सदी के शुरुआत से सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना शुरु हुई जिसके कारण लोगों तक किताबों की पहुँच बढ़ने लगी। कई अमीर लोग अपने क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के उद्देश्य से पुस्तकालय बनाने लगे। इससे गरीब लोग भी किताबें पढ़ने लगे और बदलती दुनिया के बारे में जानने लगे। इससे इतना फायदा हुआ कि कई मजदूरों ने भी किताबें लिखीं।

प्रश्न:c) सुधारक

उत्तर: प्रिंट ने समाज सुधारकों का काम आसान कर दिया। उनके नये विचार अब आसानी से जन मानस तक पहुँच सकते थे। पुरानी मान्यताओं पर खुल कर बहस संभव हो गया। इससे समाज को काफी फायदा हुआ।

प्रश्न:4अठारहवीं सदी के यूरोप में कुछ लोगों को क्यों ऐसा लगता था कि मुद्रण संस्कृति से निरंकुशवाद का अंत, और ज्ञानोदय होगा?

उत्तर: प्रिंट के कारण ज्ञानोदय के विचारकों के विचार लोकप्रिय हुए। इन विचारकों ने परंपरा, अंधविश्वास और निरंकुशवाद की कड़ी आलोचना की। प्रिंट के कारण संवाद और वाद-विवाद की नई संस्कृति का जन्म हुआ। अब आम आदमी भी मूल्यों, संस्थाओं और प्रचलनों पर विवाद करने लगा और स्थापित मान्यताओं पर सवाल करने लगा। इन सब बदलावों से कुछ लोगों को लगने लगा त्था कि मुद्रण संस्कृति से निरंकुशवाद का अंत, और ज्ञानोदय होगा।

प्रश्न:5 कुछ लोग किताबों की सुलभता को लेकर चिंतित क्यों थे? यूरोप और भारत से एक एक उदाहरण लेकर समझाएँ।

उत्तर: रूढ़िवादी लोगों को लगता था कि किताबें पढ़ने से लोगों के दिमाग फिर जाएँगे। यूरोप के कैथलिक चर्च को लगता था कि लोग उसकी अवहेलना करना शुरु कर देंगे। भारत के रूढ़िवादियों को लगता था कि लोग पारंपरिक मान्यताओं को तोड़ने लगेंगे और उससे सामाजिक विध्वंस हो जायेगा। इसलिए ऐसे लोग किताबों की सुलभता को लेकर चिंतित थे।

प्रश्न:6 उन्नीसवीं सदी में भारत में गरीब जनता पर मुद्रण संस्कृति का क्या असर हुआ?

उत्तर: मद्रास के शहरों में उन्नीसवीं सदी में सस्ती और छोटी किताबें आ चुकी थीं। इन किताबों को चौराहों पर बेचा जाता था ताकि गरीब लोग भी उन्हें खरीद सकें। बीसवीं सदी के शुरुआत से सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना शुरु हुई जिसके कारण लोगों तक किताबों की पहुँच बढ़ने लगी। कई अमीर लोग अपने क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के उद्देश्य से पुस्तकालय बनाने लगे। इससे गरीब लोग भी किताबें पढ़ने लगे और बदलती दुनिया के बारे में जानने लगे। इससे इतना फायदा हुआ कि कई मजदूरों ने भी किताबें लिखीं।

प्रश्न:7 मुद्रण संस्कृति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में क्या मदद की?

उत्तर: प्रिंट संस्कृति से लोगों में संवाद की संस्कृति का विकास हुआ। समाज सुधार के नये विचारों को अब बेहतर तरीके से लोगों तक पहुँचाया जा सकता था। गांधीजी ने अखबारों के माध्यम से स्वदेशी के अर्थ को अधिक शक्तिशाली तरीके से व्यक्त करना शुरु किया। भारत में स्थानीय बोलचाल की भाषाओं में कई अखबार प्रकाशित होने लगे। इससे भारत के जनमानस में राष्ट्रवाद की भावना को फैलाने में काफी मदद मिली। कई दमनकारी नीतियों के बावजूद प्रिंट संस्कृति एक ऐसा आंदोलन था जिसे रोका नहीं जा सकता था।
प्रश्न:1 प्रिंट टेक्नॉलोजी का विकास सबसे पहले कहाँ हुआ था?

उत्तर: प्रिंट टेक्नॉलोजी का विकास सबसे पहले चीन, जापान और कोरिया में हुआ।

प्रश्न:2 एकॉर्डियन बुक से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: शुरुआत में कागज पतले और झिर्रीदार होते थे। ऐसे कागज पर दोनों तरफ छपाई करना संभव नहीं था। कागज के दोनों सिरों को टाँके लगाकर फिर बाकी कागज को मोड़कर एकॉर्डियन बुक बनाई जाती थी।

प्रश्न:3 यूरोप में प्रिंट टेक्नॉलोजी कैसे आई?

उत्तर: मार्को पोलो जब 1295 में चीन से लौटा तो अपने साथ ब्लॉक प्रिंटिंग की जानकारी लेकर आया। इस तरह इटली में प्रिंटिंग की शुरुआत हुई। उसके बाद प्रिंट टेक्नॉलोजी यूरोप के अन्य भागों में भी फैल गई।

प्रश्न:4 गुटेनबर्ग में क्या विशेषता थी कि उसने प्रिंटिंग प्रेस बनाया?

उत्तर: गुटेनबर्ग किसी व्यापारी के बेटे थे। अपने बचपन से ही उन्होंने जैतून और शराब की प्रेस देखी थी। उसने पत्थरों पर पॉलिस करने की कला भी सीखी थी। उसे सोने के जेवर बनाने में भी महारत हासिल थी और वह लेड के साँचे भी बनाता था जिनका इस्तेमाल सस्ते जेवरों को ढ़ालने के लिए किया जाता था। इस तरह से गुटेनबर्ग के पास हर वह जरूरी ज्ञान था जिसका इस्तेमाल करके उसने प्रिंटिंग टेक्नॉलोजी को और बेहतर बनाया।

प्रश्न:5 प्रिंट टेक्नॉलोजी ने किस तरह से धार्मिक विवाद को जन्म दिया?

उत्तर: प्रिंट के आने से नये तरह के बहस और विवाद को अवसर मिलने लगे। धर्म के कुछ स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठने लगे। पुरातनपंथी लोगों को लगता था कि इससे पुरानी व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी हो रही थी। ईसाई धर्म की प्रोटेस्टैंट क्राँति भी प्रिंट संस्कृति के कारण ही संभव हो पाई थी। धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाने वाले नये विचारों से रोम के चर्च को परेशानी होने लगी।

प्रश्न:6 प्रिंट टेक्नॉलोजी आने से भारत में क्या असर हुआ?

उत्तर: प्रिंट संस्कृति से भारत में धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों पर बहस शुरु करने में मदद मिली। लोग कई धार्मिक रिवाजों के प्रचलन की आलोचना करने लगे। इससे नई राजनैतिक बहस की रूपरेखा निर्धारित होने लगी। प्रिंट के कारण भारत के एक हिस्से का समाचार दूसरे हिस्से के लोगों तक भी पहुँचने लगा। इससे लोग एक दूसरे के करीब भी आने लगे।

प्रश्न:7 भारतीय उपन्यासकारों का उदय कैसे हुआ?

उत्तर: शुरु शुरु में भारत के लोगों को यूरोप के लेखकों के उपन्यास ही पढ़ने को मिलते थे। वे उपन्यास यूरोप के परिवेश में लिखे होते थे। इसलिए यहाँ के लोग उन उपन्यासों से तारतम्य नहीं बिठा पाते थे। बाद में भारतीय परिवेश पर लिखने वाले लेखक भी उदित हुए। ऐसे उपन्यासों के चरित्र और भाव से पाठक बेहतर ढ़ंग से अपने आप को जोड़ सकते थे।

प्रश्न:8 भारत में सेंसर की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर: 1857 के विद्रोह के बाद प्रेस की स्वतंत्रत के प्रति अंग्रेजी हुकूमत का रवैया बदलने लगा। वर्नाकुलर प्रेस एक्ट को 1878 में पारित किया गया। इस कानून ने सरकार को वर्नाकुलर प्रेस में समाचार और संपादकीय पर सेंसर लगाने के लिए अकूत शक्ति प्रदान की। राजद्रोही रिपोर्ट छपने पर अखबार को चेतावनी दी जाती थी। यदि उस चेतावनी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था तो फिर ऐसी भी संभावना होती थी कि प्रेस को बंद कर दिया जाये और प्रिंटिंग मशीनों को जब्त कर लिया जाये।
प्रश्न:1 इनकी व्याख्या करें:

प्रश्न:a) ब्रिटेन में आए सामाजिक बदलावों से पाठिकाओं की संख्या में इजाफा हुआ।

उत्तर: औद्योगिक क्राँति के बाद ब्रिटेन की महिलाओं के पास खाली समय बचने लगा। इस दौरान महिलाओं में साक्षरता भी बढ़ गई। इसलिए अब अधिक से अधिक महिलाएँ अपने खाली समय का उपयोग पढ़ने के लिए करती थीं। इसलिए पाठिकाओं की संख्या में इजाफा हुआ।

प्रश्न:b) राबिंसन क्रूसो के वे कौन से कृत्य हैं, जिनके कारण वह हमें ठेठ उपनिवेशकार दिखाई देने लगता है।

उत्तर: राबिंसन क्रूसो ने अश्वेत लोगों को मनुष्यों की तरह नहीं बल्कि नीच प्राणियों की तरह चित्रित किया है। वह उन्हें गुलाम बना लेता है। वह उनके नाम नहीं पूछता बल्कि किसी का नाम फ्राइडे रख देता है। उसकी इन हरकतों से पता चलता है कि रॉबिन्सन क्रूसो एक ठेठ उपनिवेशकार था।

प्रश्न:c) 1740 के बाद गरीब लोग भी उपन्यास पढ़ने लगे।

उत्तर: उस जमाने में उपन्यास महंगे हुआ करते थे। 1740 के बाद किराये पर किताबें देने वाले पुस्तकालयों का प्रचलन शुरु हुआ। इसलिए उसके बाद गरीब लोग भी उपन्यास पढ़ने लगे।

प्रश्न:d) औपनिवेशिक भारत के उपन्यासकार एक राजनैतिक उद्देश्य के लिए लिख रहे थे।

उत्तर: जिस तरीके से औपनिवेशी शासक भारत के इतिहास और वर्तमान की व्याख्या करते थे उससे कई उपन्यासकार सहमत नहीं थे। वह भारत की अपनी एक अलग तसवीर बनाना चाहते थे। कई उपन्यासकार भारतीय साहित्य और भारतीय जनता को अन्य से बेहतर दिखाना चाहते थे। इसलिए औपनिवेशिक भारत के उपन्यासकार एक राजनैतिक उद्देश्य के लिए लिख रहे थे।

प्रश्न:2 तकनीक और समाज में आए उन बदलावों के बारे में बतलाइए जिनके चलते अठारहवीं सदी के यूरोप में उपन्यास पढ़ने वालों की संख्या में वृद्धि हुई।

उत्तर: प्रिंट टेक्नॉलोजी में कई ऐसे सुधार आये जिनके किसी किताब की असंख्य कॉपियाँ छापना संभव हो गया था। इस दौरान यूरोप में साक्षरता दर भी बढ़ गई थी। लोग पहले अधिक अमीर हो चुके थे और उनके पास खाली समय भी रहने लगा था। प्रकाशकों की सटीक मार्केटिंग से भी उपन्यासों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिली। अब लेखक किसी रईस के संरक्षण से स्वतंत्र हो चुके थे और अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता का भरपूर इस्तेमाल कर सकते थे। इन सब कारणों से अठारहवीं सदी के यूरोप में उपन्यास पढ़ने वालों की संख्या में वृद्धि हुई।

प्रश्न:3 निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें:

प्रश्न:a) उड़िया उपन्यास

उत्तर: नाटककार रामाशंकर रे ने 1877 – 78 में पहले उड़िया उपन्यास को धारावाहिक के रूप में पेश करना शुरु किया। लेकिन वह इस काम को पूरा नहीं कर पाये। उसके तीस साल के भीतर उड़ीसा से एक प्रमुख उपन्यासकार उभरा जिसका नाम था फकीर मोहन सेनापति (1843 – 1918)। उनके उपन्यास का शीर्षक है छ: माणौ आठौ गुंठो (1902)(1902) जिसका मतलब है छ: एकड़ और बत्तीस गट्ठे जमीन। इस उपन्यास में जमीन हड़पने की समस्या का जिक्र है।

प्रश्न:b) जेन ऑस्टिन द्वारा औरतों का चित्रण

उत्तर: जेन ऑस्टिन ने अपने जमाने की ग्रामीण औरतों के बारे में लिखा था। उनके उपन्यास की ग्रामीण महिला हमेशा अपने लिए एक योग्य वर की तलाश में लगी रहती है और कोई धनी आदमी ही योग्य वर हो सकता है।

प्रश्न:c) उपन्यास परीक्षा गुरु में दर्शाई गई नए मध्यवर्ग की तसवीर

उत्तर: उपन्यास ‘परीक्षा गुरु’ में मध्यवर्ग को ऐसी स्थिति में दिखाया गया है जहाँ परंपरा और आधुनिक जीवन शैली के बीच होने वाले टकराव को दिखाया गया है। इस उपन्यास के पात्र अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हैं फिर भी संस्कृत के अच्छे जानकार हैं। वे पाश्चात्य ड्रेस पहनते हैं लेकिन लंबे बाल भी रखते हैं। यह उपन्यास पाश्चात्य संस्कृति की अंधी नकल की समस्या को उजागर करता है।

प्रश्न:4 उन्नीसवीं सदी के ब्रिटेन में आए ऐसे कुछ सामाजिक बदलावों की चर्चा करें जिनके बारे में टॉमस हार्डी और चार्ल्स डिकेंस ने लिखा है।

उत्तर: उन्नीसवीं सदी में यूरोप में औद्योगिक युग आ चुका था। औद्योगीकरण से एक ओर नई उम्मीदें जगी थीं वहीं दूसरी ओर मजदूरों और शहरी जीवन की समस्याएँ भी खड़ी हुई थीं। मुनाफे की होड़ में हमेशा साधारण मजदूर ही मार खाता था। कई उपन्यासकारों ने नये शहरों में रहने वाले साधारण लोगों के इर्द गिर्द कहानी बुनी थी।

प्रश्न:5 उन्नीसवीं सदी के यूरोप और भारत दोनों जगह उपन्यास पढ़ने वाली औरतों के बारे में जो चिंता पैदा हुई उसे संक्षेप में लिखें।

उत्तर: महिलाएँ अक्सर चारदीवारी के अंदर रहती थीं। उपन्यास ने उनके लिए बाहरी दुनिया की ओर खुलने वाली खिड़की का काम किया। उपन्यास ने उन्हें अपने निजी दुनिया में पढ़ने का आनंद उठाने की आजादी दी। लेकिन महिलाओं को पढ़ने की आजादी नहीं थी। यह बात भारत में खासकर से लागू होती थी। इससे महिलाओं के प्रति भेदभाव का पता चलता है।

प्रश्न:6 औपनिवेशिक भारत में उपन्यास किस तरह उपनिवेशकारों और राष्ट्रवादियों, दोनों के लिए लाभदायक था?

उत्तर: उपनिवेशकारों के लिये उपन्यास से भारत के समाज और संस्कृति के बारे में अच्छी जानकारी मिल जाती थी। इससे भारत के बारे में उनकी समझ बेहतर हो पाती थी। उपन्यास के जरिये राष्ट्रवादी लोगों में राष्ट्रवादी भावनाओं का संचार कर सकते थे। कई राष्ट्रवादी नेता स्वयं भी कई उपन्यासों से गहरे तौर पर प्रभावित हुए थे।

प्रश्न:7 इस बारे में बताएँ कि हमारे देश में उपन्यासों में जाति के मुद्दे को किस तरह उठाया गया। किन्हीं दो उपन्यासों का उदाहरण दें और बताएँ कि उन्होंने पाठकों को मौजूदा सामाजिक मुद्दों के बारे में सोचने को प्रेरित करने के लिए क्या प्रयास किए।

उत्तर: कई लेखकों ने नीची जाति के लोगों के बारे में लिखना शुरु किया। उदाहरण के लिए सरस्वतीविजयम एक उपन्यास है जिसमें नम्बूदिरी और नायर जाति के बीच के टकराव को दिखाया गया है। केरल में नम्बूदिरी जाति के लोग जमींदार होते थे और उनके खेतों में नायर जाति के लोग काश्तकारी करते थे। इस उपन्यास में एक नायर लड़की की कहानी है। इस कहानी में वह एक रईस लेकिन मूर्ख नम्बूदिरी से शादी करने से मना कर देती है और बदले में एक पढ़े लिखे नायर से शादी करती है। फिर नव दंपति मद्रास चले जाते हैं जहाँ पति सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर लेता है। इस उपन्यास में इस बात के महत्व को बताया गया है कि कैसे शिक्षा के सहारे कोई सामाजिक व्यवस्था में ऊपर उठ सकता है। इसी तरह बंगाली उपन्यास तीताश एकटी नदीर नाम में मल्लाहों के जीवन के बारे में लिखा गया है।

प्रश्न:8 बताइए कि भारतीय उपन्यासों में एक अखिल भारतीय जुड़ाव का अहसास पैदा करने के लिए किस तरह की कोशिशें की गई।

उत्तर: जीवन के हर क्षेत्र के लोग उपन्यास पढ़ सकते थे। इससे किसी की भाषा के आधार पर लोगों में साझा पहचान की भावना घर करने लगी। उपन्यास से लोगों को देश के दूसरे हिस्सों की संस्कृति को समझने का मौका भी मिला। इस तरह से उपन्यास से एक अखिल भारतीय जुड़ाव का अहसास पैदा करने में काफी मदद मिली।
प्रश्न:1 उपन्यासों के आने से लेखकों को क्या फायदा हुआ?

उत्तर: पाठकों की बढ़ती संख्या के साथ लेखकों की आमदनी भी बढ़ने लगी। इससे लेखकों को अभिजात और कुलीन वर्ग के संरक्षण से आजादी मिली। लेखक अब अधिक स्वतंत्र होकर लिखने लगे। अब लेखक को इस बात की पूरी छूट थी कि वह अपनी लेखन शैली में मनचाहे बदलाव कर सकता था।

प्रश्न:2 उपन्यासों की लोकप्रियता क्यों बढ़ी?

उत्तर: उपन्यासों में चित्रित दुनिया अधिक वास्तविक होती थी और इसलिए विश्वसनीयता की सीमा में आती थी। उपन्यास पढ़ते समय पाठक आसानी से उपन्यास के पात्रों की दुनिया में चला जाता था। उपन्यास ने लोगों को एकांत में पढ़ने की आजादी दी। उपन्यास ने लोगों को इस बात की आजादी भी दी कि वे सार्वजनिक परिवेश में पढ़ सकें और कहानी पर चर्चा कर सकें। लोग अक्सर उपन्यास के चरित्रों के जीवन से अपने आप को आत्मसात कर लेते थे। इसलिये उपन्यास लोकप्रिय होने लगे।

प्रश्न:3 उपन्यासकारों ने महिलाओं के जीवन पर लिखना क्यों शुरु किया?

उत्तर: अठारहवीं सदी में मध्यम वर्ग अधिक संपन्न हो चुका था। महिलाओं को अब खाली समय मिलने लगा जिसका इस्तेमाल वे उपन्यास पढ़ने या लिखने में कर सकती थीं। इसलिये उपन्यासकारों ने महिलाओं के जीवन पर लिखना शुरु किया।

प्रश्न:4 हिंदी में उपन्यास की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर: भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का अग्रणी लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने संपर्क में रहने वाले कई लेखकों और कवियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया था कि वे अन्य भाषाओं के उपन्यासों का अनुवाद करें। देवकी नंदन खत्री की रचनाओं ने हिंदी में पाठकों का एक बड़ा वर्ग तैयार कर दिया। प्रेमचंद की रचनाओं के साथ ही हिंदी उपन्यास अपने सबसे अच्छे दौर में पहुँच चुका था। प्रेमचंद ने उर्दू में लिखना शुरु किया था और बाद में वे हिंदी पर आ गये।

प्रश्न:5 भारत में महिलाओं और युवाओं को उपन्यास पढ़ने से क्यों रोका जाता था?

उत्तर: कई लोग ऐसा मानते थे कि उपन्यास से लोगों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसलिये महिलाओं और बच्चों को अक्सर उपन्यास पढ़ने से रोका जाता था। कई लोग उपन्यास को छुपा कर रखते थे ताकि वे बच्चों के हाथों में न पड़ जाएँ। युवाओं को उपन्यास छुपकर पढ़ना पड़ता था। बूढ़ी औरतें अपने नाती पोतों की मदद से उपन्यास को सुनने का मजा लेती थीं।

Geography

प्रश्न:1संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु संसाधन कहलाती है जिसका इस्तेमाल हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये कर सकते हैं, जिसे बनाने के लिये हमारे पास प्रौद्योगिकी है और जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से मान्य है।

प्रश्न:2उत्पत्ति के आधार पर संसाधन के कौन कौन से प्रकार हैं?

उत्तर: जैव संसाधन और अजैव संसाधन

प्रश्न:3जैव संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन जैव संसाधन कहलाते हैं जो जैव मंडल से मिलते हैं। उदाहरण: मनुष्य, वनस्पति, मछलियाँ, प्राणिजात, पशुधन, आदि।

प्रश्न:4अजैव संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन अजैव संसाधन कहलाते है जो निर्जीव पदार्थों से मिलते हैं। उदाहरण: मिट्टी, हवा, पानी, धातु, पत्थर, आदि।

प्रश्न:5नवीकरण योग्य संसाधन का क्या मतलब है?

उत्तर: कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रिया द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को नवीकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, जीव जंतु, आदि।

प्रश्न:6अनवीकरण योग्य संसाधन का क्या मतलब है?

उत्तर: कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम किसी भी तरीके से नवीकृत या पुन: उत्पन्न नहीं कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को अनीवकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: जीवाष्म ईंधन, धातु, आदि।

प्रश्न:7अंतर्राष्ट्रीय संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन अंतर्राष्ट्रीय संसाधन कहलाते हैं जिनका नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है। इसे समझने के लिये समुद्री क्षेत्र का उदाहरण लेते हैं। किसी भी देश की तट रेखा से 200 किमी तक के समुद्री क्षेत्र पर ही उस देश का नियंत्रण होता है। उसके आगे के समुद्री क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय संसाधन की श्रेणी में आता है।

प्रश्न:8संभावी संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी भी देश या क्षेत्र में कुछ ऐसे संसाधन होते हैं जिनका उपयोग वर्तमान में नहीं हो रहा होता है। इन्हें संभावी संसाधन कहते हैं। उदाहरण: गुजरात और राजस्थान में उपलब्ध सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा।

प्रश्न:9भंडार से क्या समझते हैं?

उत्तर: कुछ ऐसे संसाधन होते हैं जो उपलब्ध तो हैं लेकिन उनके सही इस्तेमाल के लिये हमारे पास उचित टेक्नॉलोजी का अभाव है। ऐसे संसाधन को भंडार कहते हैं। उदाहरण: हाइड्रोजन ईंधन। अभी हमारे पास हाईड्रोजन ईंधन के इस्तेमाल लिये उचित टेक्नॉलोजी नहीं है।

प्रश्न:10सतत पोषणीय विकास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब विकास होने के क्रम में पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे और भविष्य की जरूरतों की अनदेखी न हो तो ऐसे विकास को सतत पोषणीय विकास कहते हैं।

प्रश्न:11भारत में संसाधन नियोजन के मुख्य बिंदु क्या हैं?

उत्तर: भारत में संसाधन नियोजन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

पूरे देश के विभिन्न प्रदेशों के संसाधनों की पहचान कर उनकी तालिका बनाना।
उपयुक कौशल, टेक्नॉलोजी और संस्थागत ढाँचे का सही इस्तेमाल करते हुए नियोजन ढ़ाँचा तैयार करना।
संसाधन नियोजन और विकास नियोजन के बीच सही तालमेल बैठाना।
प्रश्न:12संसाधनों का संरक्षण क्यों जरूरी है?

उत्तर: पृथ्वी पर संसाधन सीमित मात्रा में ही हैं। यदि उनके अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक नहीं लगती है तो भविष्य में मानव जाति के लिये कुछ भी नहीं बचेगा। फिर हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि हम संसाधनों का संरक्षण करें।

प्रश्न:13भू संसाधन के तौर पर पहाड़ पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भारत की कुल भूमि का 30% पहाड़ों के रूप में है। भारत की कई नदियों का उद्गम इन्हीं पहाड़ों में है। पहाड़ों के कारण ही बारहमासी नदियों में जल का प्रवाह बना रहता है। ये नदियाँ अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लाती हैं और मैदानों का निर्माण करती हैं। इन नदियों से मिलने वाला पानी हमारे खेतों की सिंचाई करता है। इन्हीं नदियों से हमें पीने का पानी भी मिलता है।

प्रश्न:14भू संसाधन के रूप में मैदान पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भारत की कुल भूमि का 43% मैदान के रूप में है। मैदान की भूमि समतल होती है और इसलिए अधिकतर आर्थिक क्रियाओं के लिये अनुकूल होती है। मैदान की जमीन खेती के लायक होती है इसलिये मैदानों में घनी आबादी होती है। मकान और कल कारखाने भी समतल भूमि में आसानी से बनाये जा सकते हैं।

प्रश्न:15भू उपयोग के प्रारूप को प्रभावित करने वाले भौतिक कारण कौन कौन से हैं?

उत्तर: जलवायु, भू आकृति, मृदा के प्रकार, आदि।

प्रश्न:16भू निम्नीकरण के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: भू निम्नीकरण के कुछ मुख्य कारण हैं, वनोन्मूलन, अति पशुचारण, खनन, जमीन का छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजन, आदि।

प्रश्न:17जलोढ़ मृदा के गुणों का वर्णन करें।

उत्तर: जलोढ़ मृदा में सिल्ट, रेत और मृत्तिका विभिन्न अनुपातों में पाई जाती है। जब हम नदी के मुहाने से ऊपर घाटी की ओर बढ़ते हैं तो जलोढ़ मृदा के कणों का आकार बढ़ता जाता है। जलोढ़ मृदा बहुत उपजाऊ होती है।

प्रश्न:18काली मृदा के गुणों का वर्णन करें।

उत्तर: काली मृदा में सूक्ष्म कणों की प्रचुरता होती है। इसलिए इस मृदा में नमी को लम्बे समय तक रोकने की क्षमता होती है। इस मृदा में कैल्सियम, पोटाशियम, मैग्नीशियम और चूना होता है। काली मृदा कपास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त होती है। इस मृदा में कई अन्य फसल भी उगाये जा सकते हैं।

प्रश्न:19मृदा अपरदन क्या है? यह किन कारणों से होता है?

उत्तर: मृदा के कटाव और उसके बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहते हैं। मृदा अपरदन के मुख्य कारण हैं; वनोन्मूलन, सघन कृषि, अति पशुचारण, भवन निर्माण और अन्य मानव क्रियाएँ।

प्रश्न:20मृदा अपरदन की रोकथाम कैसे हो सकती है?

उत्तर: मृदा अपरदन को रोकने के लिए मृदा संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए कई उपाय किये जा सकते हैं। पेड़ों की जड़ें मृदा की ऊपरी परत को बचाए रखती हैं। इसलिये वनरोपण से मृदा संरक्षण किया जा सकता है। ढ़ाल वाली जगहों पर समोच्च जुताई से मृदा के अपरदन को रोका जा सकता है। पेड़ों को लगाकर रक्षक मेखला बनाने से भी मृदा अपरदन की रोकथाम हो सकती है।
प्रश्न:1भारत में भूमि उपयोग के प्रारूप का वर्णन करें। वर्ष 1960 – 61 से वन के अंतर्गत क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई, इसका क्या कारण है?

उत्तर:भारत में भू उपयोग का प्रारूप:

स्थाई चारागाहों के अंतर्गत भूमि कम हो रही है, जिससे पशुओं के चरने में समस्या उत्पन्न होगी। शुद्ध बोये गये क्षेत्र का हिस्सा 54% से अधिक नहीं; यदि हम परती भूमि के अलावे भी अन्य भूमि शामिल कर लें।

शुद्ध बोये जाने वाले क्षेत्र का प्रारूप एक राज्य से दूसरे राज्य में बदल जाता है। पंजाब में 80% क्षेत्र शुद्ध बोये जाने वाले क्षेत्र के अंतर्गत आता है, वहीं अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और अंदमान निकोबार द्वीप समूह में यह घटकर 10% रह जाता है।

गैरकानूनी ढ़ंग से जंगल की कटाई और अन्य गतिविधियों (सड़क और भवन निर्माण), आदि के कारण वन क्षेत्र बढ़ने की बजाय कम हो रहा है। दूसरी ओर जंगल के आस पास एक बड़ी आबादी रहती है जो वन संपदा पर निर्भर रहती है। इन सब कारणों से वनों में ह्रास हो रहा है।

प्रश्न:22. प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का अधिक उपभोग कैसे हुआ है?

उत्तर: प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास के कारण भारत के लोगों की आमदनी बढ़ी है। इससे हर चीज की मांग भी बढ़ी है। उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए और भी अधिक संसाधनों की जरूरत पड़ती है। इसलिए संसाधनों की मांग भी बढ़ी है।
प्रश्न:11. जैव विविधता क्या है? यह मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाले जंतुओं और पादपों की विविधता को उस क्षेत्र की जैव विविधता कहते हैं। जैव विविधता किसी भी पारितंत्र को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक होती है। स्वस्थ पारितंत्र के अभाव में मानव जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसलिए जैव विविधता मानव जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रश्न:2विस्तारपूर्वक बताएँ कि मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास के कारक हैं?

उत्तर: मनुष्यों ने कृषि के प्रसार के लिए तेजी से जंगलों को कम किया है। इससे वनों का ह्रास हुआ है। संवर्धन वृक्षारोपण से एक ही तरह की प्रजाति को बढ़ावा दिया गया है जो पारितंत्र के लिए ठीक नहीं है। विकास परियोजनाओं के कारण भी वनों का ह्रास हुआ है। वनों के ह्रास होने से प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात की संख्या में भारी कमी आई है।
प्रश्न:1जैव विविधता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाले जंतुओं और पादपों की विविधता को उस क्षेत्र की जैव विविधता कहते हैं।

प्रश्न:2सामान्य प्रजाति किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस प्रजाति की जनसंख्या जीवित रहने के लिये सामान्य हो तो उस प्रजाति को सामान्य प्रजाति कहते हैं।

प्रश्न:3संकटग्रस्त प्रजाति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो प्रजाति लुप्त होने के कगार पर हो उसे संकटग्रस्त प्रजाति कहते हैं। उदाहरण: काला हिरण, मगरमच्छ, भारतीय जंगली गधा, भारतीय गैंडा, शेर-पूँछ वाला बंदर, संगाई (मणिपुरी हिरण), आदि।

प्रश्न:4सुभेद्य प्रजाति का क्या मतलब है?

उत्तर: जब किसी प्रजाति की जनसंख्या इतनी कम हो जाये कि उसके लुप्त होने की प्रबल संभावना हो जाये तो उसे सुभेद्य प्रजाति कहते हैं। उदाहरण: नीली भेड़, एशियाई हाथी, गंगा की डॉल्फिन, आदि।

प्रश्न:5संवर्धन वृक्षारोपण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब व्यावसायिक महत्व के किसी एक प्रजाति के पादपों का वृक्षारोपण किया जाता है तो इसे संवर्धन वृक्षारोपण कहते हैं।

प्रश्न:6संसाधनों के कम होने से समाज पर क्या प्रभाव पड़ते हैं?

उत्तर: संसाधनों के कम होने से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। कुछ चीजें इकट्ठा करने के लिये महिलाओं पर अधिक बोझ होता है; जैसे ईंधन, चारा, पेयजल और अन्य मूलभूत चीजें। इन संसाधनों की कमी होने से महिलाओं को अधिक काम करना पड़ता है। कुछ गाँवों में पीने का पानी लाने के लिये महिलाओं को कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना होता है।

प्रश्न:7भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: सरकार ने भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम 1972 को लागू किया। इस अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों की एक अखिल भारतीय सूची तैयार की गई। बची हुई संकटग्रस्त प्रजातियों के शिकार पर पाबंदी लगा दी गई। वन्यजीवन के व्यापार पर रोक लगाया गया। वन्यजीवन के आवास को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई। कई राज्य सरकारों और केंद्र सरकारों ने नेशनल पार्क और वन्यजीवन अभयारण्य बनाए। कुछ खास जानवरों की सुरक्षा के लिए कई प्रोजेक्ट शुरु किये गये, जैसे प्रोजेक्ट टाइगर।

प्रश्न:8आरक्षित वन से क्या समझते हैं?

उत्तर: जिस वन में शिकार और मानव गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध हो उसे आरक्षित वन कहते हैं।

प्रश्न:9रक्षित वन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जिस वन में शिकार और मानव गतिविधियों पर प्रतिबंध हो लेकिन उस वन पर निर्भर रहने वाले आदिवासियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होती हो ऐसे वन को रक्षित वन कहते हैं।

प्रश्न:10ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: स्थानीय समुदाय द्वारा संरक्षण में भागीदारी का एक और उदाहरण है ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट। यह कार्यक्रम उड़ीसा में 1988 से चल रहा है। इस कार्यक्रम के तहत गाँव के लोग अपनी संस्था का निर्माण करते हैं और संरक्षण संबंधी क्रियाकलापों पर काम करते हैं। उसके बदले में सरकार द्वारा उन्हें कुछ वन संसाधनों के इस्तेमाल का अधिकार मिल जाता है।
प्रश्न:1नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को ‘जल की कमी से प्रभावित’ या ‘जल की कमी से अप्रभावित’ में वर्गीकृत कीजिए।

प्रश्न:a)अधिक वर्षा वाले क्षेत्र

उत्तर: जल की कमी से अप्रभावित

प्रश्न:b)अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र

उत्तर:जल की कमी से अप्रभावित

प्रश्न:c)अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र

उत्तर: जल की कमी से प्रभावित

प्रश्न:d)कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र

उत्तर: जल की कमी से प्रभावित

प्रश्न:2निम्नलिखित में से कौन सा वक्तव्य बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिया गया तर्क नहीं है?

बहुउद्देशीय परियोजनाएँ उन क्षेत्रों में जल लाती हैं जहाँ जल की कमी होती है।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जल बहाव को नियंत्रित करके बाढ़ पर काबू पाती है।
बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ हमारे उद्योग और घरों के लिए विद्युत पैदा करती हैं।
उत्तर:बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

प्रश्न:3यहाँ कुछ गलत वक्तव्य दिए गए हैं। इसमें गलती पहचानें और दोबारा लिखें।

प्रश्न:a)शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है।

उत्तर: शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों का दोहन किया है।

प्रश्न:b)नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछ्ट बहाव प्रभावित नहीं होता।

उत्तर:नदियों पर बांध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव बुरे तरीके से प्रभावित होता है।

प्रश्न:c)गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर भी किसान नहीं भड़के।

उत्तर: गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर किसान भड़क गये।

प्रश्न:d)आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।

उत्तर:आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के कारण छत वर्षा जल संग्रहण की लोकप्रियता घट रही है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न:1व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है?

उत्तर:जल अपने तीन रूपों; ठोस, द्रव और गैस; में बदलता रहता है। इसलिए जो जल भाप बनकर उड़ जाता है वही फिर वर्षा के रूप में वापस आ जाता है। इस प्रकार से जल एक नवीकरण योग्य संसाधन है।

प्रश्न:2जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: किसी स्थान पर लंबे समय तक जल की कमी को जल दुर्लभता कहते हैं। बढ़ती हुई जनसंख्या, अतिदोहन और असमान वितरण जल दुर्लभता के मुख्य कारण हैं।
प्रश्न:2परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपना कर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है।

उत्तर:आधुनिक काल में छत वर्षा जल संग्रहण काफी लोकप्रिय हो रहा है। छत की नालियों को जमीन पर या जमीन के नीचे रखी टंकी से जोड़ा जाता है। इससे वर्षा का जल नालियों द्वारा टंकियों में जमा होता है। टंकी के जल को परिष्कृत करने का बाद इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग टंकी के जल को जमीन में रिसने देते हैं ताकि भौमजल का नवीकरण हो सके। इस तरह से सालों भर जल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।
प्रश्न:1जल की दुर्लभता के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: जल का अत्यधिक दोहन, अत्यधिक इस्तेमाल और विभिन्न सामाजिक समूहों में असमान वितरण।

प्रश्न:2आज अधिकांश नदियों और तालाबों का पानी प्रदूषित क्यों हो गया है?

उत्तर: नाले का पानी अक्सर बिना सुचारु उपचार किये ही नदियों और तालाबों में बहा दिया जाता है। इससे नदियों और तालाबों का पानी प्रदूषित हो चुका है।

प्रश्न:3बहुद्देशीय बांध परियोजनाओं से क्या लाभ हैं?

उत्तर: इस तरह की परियोजनाएँ कई जरूरतों को पूरा करती हैं। ये पानी के बहाव को काबू में करती हैं और बाढ़ की रोकथाम करती हैं। इन बांधों के पानी को नहरों के तंत्र के द्वारा दूर दराज के गांवों में भेजा जाता है ताकि वहाँ खेतों की सिंचाई हो सके। इनसे पीने के पानी की आपूर्ति भी की जाती है।

प्रश्न:4बहुद्देशीय बांध परियोजनाओं से क्या हानि है?

उत्तर: बड़े बांध बनाने के लिये कई एकड़ जमीन खाली करानी पड़ती है। बांध के बहाव क्षेत्र में आने वाली जमीन का एक बडा हिस्सा डूब जाता है। ऐसे क्षेत्र के लोगों को अपने जमीन से बेदखल होने को बाध्य होना पड़ता है। जमीन के जलमग्न होने से पर्यावरण पर भीषण समस्या आ जाती है।

प्रश्न:5वर्षाजल संग्रहण से जमा हुए जल से क्या किया जा सकता है?

उत्तर: वर्षाजल संग्रहण से जमा हुए जल को भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे भूमिगत जल को रिचार्ज करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रश्न:1एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।

उत्तर: चाय एक पेय फसल है। चाय की पैदावार उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में अच्छी होती है और इसके लिए गहरी मिट्टी और सुगम जल निकास वाले ढ़लुवा क्षेत्रों की जरूरत पड़ती है। चाय के उत्पादन में गहन श्रम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न:2भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें।

उत्तर: गेहूँ एक खाद्य फसल है। पश्चिम उत्तर के गंगा सतलज के मैदान और दक्कन के काली मृदा वाले क्षेत्र भारत के मुख्य गेहूँ उत्पादक क्षेत्र हैं। गेहूँ के मुख्य उत्पादक हैं पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ भाग।

प्रश्न:3सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ।

उत्तर: सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:

हरित क्रांति
श्वेत क्रांति
भूमि सुधार
प्रश्न:4दिन प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है। क्या आप इसके परिणामों की कल्पना कर सकते हैं?

उत्तर: दिन प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम होने से खाद्यान्न की कमी हो जाएगी। भोजन एक मूलभूत आवश्यकता है जिसके बिना हमारी उत्तरजीविता संकट में पड़ जाएगी। भोजन की कमी से समाज और अर्थव्यवस्था पर बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न:1कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइए।

उत्तर: कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार को निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

पूरे देश में भूमि सुधार करना चाहिए।
वैज्ञानिकों को अधिक यील्ड वाले बीज विकसित करने चाहिए।
नहरों, सड़कों और कोल्ड स्टोरेज को अच्छी तरह से विकसित करना चाहिए।
मोबाइल फोन के जरिए किसानों तक समय रहते मौसम की जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रश्न:22. भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर: वर्तमान में पश्चिमी देशों के किसानों को अत्यधिक सहायिकी मिलने के कारण भारत के किसान उनसे प्रतिस्पर्धा करने में अक्षम साबित हो रहे हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत के कृषि उत्पाद की मांग बहुत कम है। साथ में रासायनिक उर्वरक और सिंचाई के अत्यधिक इस्तेमाल ने नई समस्याएँ खड़ी कर दी है जिससे कृषि उत्पाद घट रहा है। भारत में कृषि पर बहुत अधिक लोग निर्भर हैं इसलिए प्रति व्यक्ति कृषि उत्पाद और भी कम होने वाली है। कई विशेषज्ञों की राय में कार्बनिक कृषि से इस समस्या से निदान पाया जा सकता है।

प्रश्न:3चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

उत्तर: धान की खेती के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक की सालाना वर्षा की जरूरत होती है। लेकिन कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी इसे सिंचाई की समुचित व्यवस्था करके उगाया जा सकता है। चावल की खेती उत्तर के मैदानों, पूर्वोत्तर भारत, तटीय इलाकों और डेल्टा के क्षेत्रों में होती है। जलोढ़ मृदा वाले क्षेत्रों में चावल की पैदावार अच्छी होती है। लेकिन सिंचाई की समुचित व्यवस्था विकसित करने से चावल की खेती अन्य भागों में भी संभव है।


प्रश्न:1प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस प्रकार की खेती से केवल इतनी उपज होती हो कि उससे परिवार का पेट भर सके तो उसे प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि कहते हैं।

प्रश्न:2कर्तन दहन खेती से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि को कर्तन दहन खेती भी कहते हैं। ऐसा करने के लिये सबसे पहले जमीन के किसी टुकड़े की वनस्पति को काटा जाता और फिर उसे जला दिया जाता है। वनस्पति के जलाने से राख बनती है उसे मिट्टी में मिला दिया जाता है। उसके बाद फसल उगाई जाती है।

प्रश्न:3गहन जीविका कृषि क्या है?

उत्तर: जब कृषि बड़े भूभाग पर होती है और सघन आबादी वाले क्षेत्रों में होती है तो उसे गहन जीविका कृषि कहते हैं। इस प्रकार की कृषि में जैव रासायनिक निवेशों और सिंचाई का अत्यधिक इस्तेमाल होता है।

प्रश्न:4वाणिज्यिक कृषि क्या है?

उत्तर: जब खेती का मुख्य उद्देश्य पैदावार की बिक्री करना हो तो उसे वाणिज्यिक कृषि कहते हैं।

प्रश्न:5रोपण कृषि क्या है?

उत्तर: जब किसी एक फसल को एक बड़े क्षेत्र में उपजाया जाता है तो उसे रोपण कृषि कहते हैं।

प्रश्न:6भारत की मुख्य शस्य ऋतुओं के नाम लिखें।

उत्तर: भारत में तीन शस्य ऋतुएँ हैं; रबी, खरीफ और जायद।

प्रश्न:7रबी की फसल पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: रबी की फसल जाड़े में उगायी जाती है इसलिये इसे जा‌ड़े की फसल भी कहते हैं। रबी की बुआई अक्तूबर से दिसंबर की बीच होती है। इसकी कटाई अप्रिल से जून के बीच होती है। रबी की मुख्य फसलें हैं गेहूँ, बार्ली, मटर, चना और सरसों। पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश रबी की फसल के मुख्य उत्पादक हैं।

प्रश्न:8खरीफ की फसल पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: खरीफ की फसल गरमी में उगायी जाती है इसलिये इसे गरमी की फसल भी कहते हैं। खरीफ की बुआई जुलाई में होती है और कटाई सितंबर अक्तूबर में होती है। खरीफ की मुख्य फसलें हैं धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुअर, मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीं। धान के मुख्य उत्पादक हैं असम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा के तटवर्ती इलाके, आंध्र प्रदेश, तमिल नाडु, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार। असम, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में एक साल में धान की तीन फसलें उगाई जाती हैं; जिन्हें ऑस, अमन और बोरो कहते हैं।

प्रश्न:9चावल की खेती के लिये कैसी जलवायु की आवश्यक्ता होती है?

उत्तर: धान की खेती के लिए जरूरी होते हैं उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक की सालाना वर्षा।

प्रश्न:10गन्ने की फसल के लिये कैसी जलवायु की जरूरत होती है।

उत्तर: गन्ने की फसल के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु, 21°-27°C के बीच का तापमान और 75 cm से 100 cm की वर्षा की जरूरत होती है।

प्रश्न:11भारत में रबर की खेती पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भूमध्यरेखीय क्षेत्र रबर की फसल के लिये सबसे उपयुक्त है। लेकिन उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में भी रबर की खेती होती है। रबर की खेती के लिए आर्द्र और नम जलवायु की जरूरत होती है जहाँ 200 सेमी से अधिक वर्षा होती हो और 25°C से अधिक तापमान रहता हो। भारत में रबर की खेती मुख्य रूप से केरल, तमिल नाडु, कर्णाटक, अंदमान निकोबार द्वीप समूह और मेघालय की गारो पहाड़ियों में होती है। रबर के उत्पादन में भारत का विश्व में पाँचवां स्थान है।

प्रश्न:12भूमि सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

उत्तर: जब जोत छोटी होती है तो कृषि प्रबंधन सही ढ़ंग से नहीं हो पाता है। पीढ़ी दर पीढ़ी जमीन के बँटवारे के कारण किसानों की जमीन छोटी होती चली गई। इसलिये भूमि सुधार की जरूरत महसूस की गई।

प्रश्न:13हरित क्रांति पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: हरित क्रांति की शुरुआत 1960 और 1970 के दशक में हुई। इस क्रांति का मुख्य उद्देश्य था कृषि उपज को बढ़ाना। इस क्रांति में नई टेक्नॉलोजी और अधिक उपज देने वाली बीजों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। हरित क्रांति के परिणाम सुखद आये; खासकर पंजाब और हरियाणा में।
प्रश्न:1लौह और अलौह खनिज में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: वैसे धात्विक खनिज जिनमें लोहा होता है लौह खनिज कहलाते हैं। उदाहरण: लौह अयस्क, मैगनीज, निकेल, कोबाल्ट, आदि। जिन धात्विक खनिजों में लोहा नहीं होता है उन्हें अलौह खनिज कहते हैं। उदाहरण: ताँबा, बॉक्साइट, टिन, आदि।

प्रश्न:2परंपरागत तथा गैर परंपरागत ऊर्जा साधन में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: ऊर्जा के जिन साधनों का इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है उन्हें परंपरागत ऊर्जा साधन कहते हैं। उदाहरण: कोयला, जलावन की लकड़ी, पेट्रोलियम, पनबिजली, आदि। ऊर्जा के जिन साधनों का इस्तेमाल अभी हाल ही में शुरु हुआ है उन्हें गैर परंपरागत ऊर्जा साधन कहते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, आदि।

प्रश्न:3खनिज क्या है?

उत्तर: खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप पदार्थ है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है।

प्रश्न:4आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर: आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में छोटे जमाव शिराओं के रूप में और बड़े जमाव परत के रूप में पाये जाते हैं। इन शैलों में खनिजों का निर्माण तब होता है जब खनिज पिघली हुई अवस्था या गैसीय अवस्था में होता है। ऐसे में खनिज दरारों से होकर भूमि की ऊपरी सतह तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण: टिन, जस्ता, लेड, आदि।

प्रश्न:5हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है?

उत्तर: खनिजों के बनने में करोड़ों वर्ष लग जाते हैं। जिस तेजी से हम खनिजों का इस्तेमाल कर रहे हैं उसकी तुलना में खनिजों का पुनर्रभरण की प्रक्रिया अत्यंत धीमी होती है। इसलिए खनिज संसाधन सीमित हैं और अनवीकरण योग्य हैं। इसलिए खनिजों का संरक्षन महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रश्न:1भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत में पाया जाने वाला कोयला दो मुख्य भूगर्भी युगों की चट्टानों की परतों में मिलता है। गोंडवाना कोयले का निर्माण बीस करोड़ साल पहले हुआ था। टरशियरी निक्षेप के कोयले का निर्माण लगभग साढ़े पाँच करोड़ साल पहले हुआ था। गोंडवाना कोयले के मुख्य स्रोत दामोदर घाटी में हैं। इस बेल्ट में झरिया, रानीगंज और बोकारो में कोयले की मुख्य खदाने हैं। गोदावरी, महानदी, सोन और वर्धा की घाटियों में भी कोयले के भंडार हैं। टरशियरी कोयला पूर्वोत्तर के मेघालय, असम, अरुणाचल और नागालैंड में पाया जाता है।

प्रश्न:2भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों?

उत्तर: सौर ऊर्जा भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगाता है। इससे ग्रामीण इलाकों में जलावन और उपलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे जीवाष्म ईंधन के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। भारत दुनिया के उन देशों में से है जहाँ साल के अधिकतर महीनों में प्रचुर मात्रा में धूप मिलती है। इसलिए भारत में सौर ऊर्जा से बिजली का निर्माण आसानी से संभव हो सकता है। जब टेक्नॉलोजी सस्ती हो जाएगी तो यह संभव है कि सौर ऊर्जा ही हमारे लिए ऊर्जा का मुख्य साधन बन जाए।
प्रश्न:1 खनिज की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: प्राकृतिक रूप में उपलब्ध एक समरूप पदार्थ जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है उसे खनिज कहते हैं।

प्रश्न:2 धात्विक खनिज से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जिन खनिजों से धातु प्राप्त होती है उन्हें धात्विक खनिज कहते हैं; जैसे लौह अयस्क, बॉक्साइट, आदि।

प्रश्न:3 अधात्विक खनिज से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:जिन खनिजों से अधातु प्राप्त होते हैं उन्हें अधात्विक खनिज कहते हैं; जैसे अभ्रक, चूना पत्थर, आदि।

प्रश्न:4 आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में खनिज किस रूप में मौजूद रहते हैं?

उत्तर: आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में खनिजों के छोटे जमाव शिराओं के रूप में पाये जाते हैं। इन चट्टानों में खनिजों के बड़े जमाव परत के रूप में पाये जाते हैं। जब खनिज पिघली हुई अवस्था या गैसीय अवस्था में होती है तो खनिजों का निर्माण आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में होता है। इस अवस्था में खनिज दरारों से होते हुए भूमि की ऊपरी सतह तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण: टिन, जस्ता, लेड, आदि।

प्रश्न:5 अवसादी चट्टानों में खनिज किस रूप में पाये जाते हैं?

उत्तर: इस प्रकार की चट्टानों में खनिज परतों में पाये जाते है। उदाहरण: कोयला, लौह अयस्क, जिप्सम, पोटाश लवण और सोडियम लवण, आदि।

प्रश्न:6 कुछ ऐसे खनिज के उदाहरण दें जो जलोढ़ जमाव के रूप में पाये जाते हैं।

उत्तर: सोना, चाँदी, टिन, प्लैटिनम, आदि।

प्रश्न:7 लौह अयस्क के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: अच्छी क्वालिटी के लौह अयस्क में लोहे की अच्छी मात्रा होती है। मैग्नेटाइट में 70% लोहा होता है इसलिए इसे सबसे अच्छी क्वालिटी का लौह अयस्क माना जाता है। अपने उत्तम चुम्बकीय गुण के कारण यह लोहा विद्युत उद्योग के लिये अच्छा माना जाता है। हेमाटाइट में 50 से 60% लोहा होता है। इसे मुख्य औद्योगिक लौह अयस्क माना जाता है।
प्रश्न:9 तांबा अयस्क पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: तांबा एक महत्वपूर्ण अयस्क है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक और रसायन उद्योग में होता है। मध्यप्रदेश की बालाघाट की खानों में भारत का 52% तांबा निकलता है। 48% शेअर के साथ राजास्थान तांबे का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। तांबे का उत्पादन झारखंड के सिंहभूम जिले में भी होता है।

प्रश्न:10 अलमुनियम अयस्क पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: अलमुनियम का इस्तेमाल कई चीजें बनाने में किया जाता है क्योंकि यह हल्का और मजबूत होता है। अलमुनियम के अयस्क को बॉक्साइट कहते हैं। बॉक्साइट के मुख्य भंडार अमरकंटक के पठार, मैकाल पहाड़ी और बिलासपुर कटनी के पठारी क्षेत्रों में हैं। बॉक्साइट का मुख्य उत्पादक उड़ीसा है जहाँ 45% बॉक्साइट का उत्पादन होता है। उड़ीसा में बॉक्साइट के मुख्य भंडार पंचपतमाली और कोरापुट जिले में हैं।

प्रश्न:11 खनन के दुष्प्रभाव का वर्णन करें।

उत्तर: खानों में काम करने वाले मजदूरों और आस पास रहेन वाले लोगों के लिये खनन एक घातक उद्योग है। खनिकों को कठिन परिस्थिति में काम करना पड़ता है। खान के अंदर नैसर्गित रोशनी नहीं मिल पाती है। खानों में हमेशा खान की छत गिरने, पानी भरने और आग लगने का खतरा रहता है। खान के आस पास के इलाकों में धूल की भारी समस्या होती है। खान से निकलने वाली स्लरी से सड़कों और खेतों को नुकसान पहुँचता है। इन इलाकों में घर और कपड़े ज्यादा जल्दी गंदे हो जाते हैं। खनिकों को सांस की बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। खनन वाले क्षेत्रों में सांस की बीमारी के केस अधिक होते हैं।

प्रश्न:12 बिटुमिनस कोयले पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: जो कोयला उच्च तापमान के कारण बना था और अधिक गहराई में दब गया था उसे बिटुमिनस कोयला कहते हैं। वाणिज्यिक इस्तेमाल के दृष्टिकोण से यह सबसे लोकप्रिय कोयला माना जाता है। बिटुमिनस कोयले को लोहा उद्योग के लिये आदर्श माना जाता है।

प्रश्न:13 पेट्रोलियम के क्या इस्तेमाल हैं?

उत्तर: कोयले के बाद, भारत का मुख्य ऊर्ज संसाधन है पेट्रोलियम। पेट्रोलियम का इस्तेमाल कई कार्यों में ऊर्जा के स्रोत के रूप में होता है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में कई उद्योगों में होता है। उदाहरण: प्लास्टिक, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आदि।

प्रश्न:14 परमाणु ऊर्जा से बिजली कैसे बनाई जाती है?

उत्तर: परमाणु की संरचना में बदलाव करके परमाणु ऊर्जा प्राप्त की जाती है। जब किसी परमाणु की संरचना में बदलाव किया जाता है तो इससे बहुत भारी मात्रा में ताप ऊर्जा निकलती है। इस ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली पैदा करने में किया जाता है। इस ऊर्जा से भाप बनाई जाती है जिससे टरबाइन चलाकर बिजली पैदा की जाती है।
प्रश्न:1 विनिर्माण क्या है?

उत्तर: कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद में बनाकर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहते हैं।

प्रश्न:2 उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक बताएँ।

उत्तर: आधारभूत ढ़ाँचा, कच्चा माल और जल की उपलब्धता

प्रश्न:3 औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक बताएँ।

उत्तर: श्रम, पूँजी और बाजार

प्रश्न:4 आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण देकर बताएँ।

उत्तर: ये उद्योग दूसरे उद्योगों को कच्चे माल और अन्य सामान की आपूर्ति करते हैं। उदाहरण: लोहा इस्पात, तांबा प्रगलन, अलमुनियम प्रगलन, आदि।
प्रश्न:2 उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं?

उत्तर: उद्योग पर्यावरण को निम्न तरीकों से प्रदूषित करते हैं:

वायु प्रदूषण: कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के बढ़ते स्तर के कारण वायु प्रदूषण होता है। वायु में निलंबित कणनुमा पदार्थों से भी समस्या होती है। कारखानों की चिमनियों से धुँआ निकलता है। कुछ उद्योगों से हानिकारक रसायन भी निकलने का खतरा रहता है।

जल प्रदूषण: उद्योग से निकलने वाला कार्बनिक और अकार्बनिक कचरा और अपशिष्ट से जल प्रदूषण होता है। जल प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार उद्योग हैं; कागज, लुगदी, रसायन, कपड़ा, डाई, पेट्रोलियम रिफाइनरी, चमड़ा उद्योग, आदि।

जल का तापीय प्रदूषण: जब थर्मल प्लांट से गरम पानी सीधा नदियों और तालाबों में छोड़ दिया जाता है तो जल का तापीय प्रदूषण होता है। इससे जल में रहने वाले सजीवों को बहुत नुकसान होता है।

रेडियोऐक्टिव अपशिष्ट: परमाणु ऊर्जा संयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट में रेडियोऐक्टिव पदार्थ होते हैं जिन्हें सही ढ़ंग से रखने की जरूरत होती है। रेडियोऐक्टिव पदार्थों में हल्की सी भी लीकेज होने से इंसानों और अन्य सजीवों को होने वाले नुकसान दूरगामी होते हैं।

ध्वनि प्रदूषण: ध्वनि प्रदूषण से बेचैनी, उच्च रक्तचाप और बहरापन की समस्या होती है। कारखाने के मशीन, जेनरेटर, इलेक्ट्रिक ड्रिल, आदि से काफी ध्वनि प्रदूषण होता है।
प्रश्न:1 विनिर्माण उद्योग क्या है?

उत्तर: जब कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद में बनाकर अधिक मात्रा में वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है तो उस प्रक्रिया को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहते हैं।

प्रश्न:2 विनिर्माण उद्योग के महत्व क्या क्या हैं?

उत्तर: विनिर्माण उद्योग के महत्व निम्नलिखित हैं:

विनिर्माण उद्योग से कृषि को आधुनिक बनाने में मदद मिलती है।
विनिर्माण उद्योग से लोगों की आय के लिये कृषि पर से निर्भरता कम होती है।
विनिर्माण से प्राइमरी और सेकंडरी सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलती है।
इससे बेरोजगारी और गरीबी दूर करने में मदद मिलती है।
विनिर्माण द्वारा उत्पादित वस्तुओं से निर्यात बढ़ता है जिससे विदेशी मुद्रा देश में आती है।
किसी देश में बड़े पैमाने पर विनिर्माण होने से देश में संपन्नता आती है।
प्रश्न:3 उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक कौन कौन से हैं?

उत्तर: उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कुछ कारक निम्नलिखित हैं:

कच्चे माल की उपलब्धता
श्रम की उपलब्धता
पूंजी की उपलब्धता
ऊर्जा की उपलब्धता
बाजार की उपलब्धता
आधारभूत ढ़ाँचे की उपलब्धता
प्रश्न:4 कृषि पर आधारित उद्योगों के उदाहरण दें।

उत्तर: कपास, ऊन, जूट, सिल्क, रबर, चीनी, चाय, कॉफी, आदि।

प्रश्न:5 खनिज पर आधारित उद्योगों के उदाहरण दें।

उत्तर: लोहा इस्पात, सीमेंट, अलमुनियम, पेट्रोकेमिकल्स, आदि।

प्रश्न:6 आधारभूत उद्योग से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो उद्योग अन्य उद्योगों को कच्चे माल और अन्य सामान की आपूर्ति करते हैं उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं। उदाहरण: लोहा इस्पात, तांबा प्रगलन, अलमुनियम प्रगलन, आदि।

प्रश्न:7 सार्वजनिक उद्योग से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो उद्योग सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित होते हैं उन्हें पब्लिक सेक्टर कहते हैं। उदाहरण: SAIL, BHEL, ONGC, आदि।

प्रश्न:8 को-ऑपरेटिव सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जिन उद्योगों का प्रबंधन कच्चे माल के निर्माता या सप्लायर या कामगार या दोनों द्वारा किया जाता है उन्हें को-ऑपरेटिव सेक्टर कहते हैं। इस प्रकार के उद्योग में संसाधनों को संयुक्त रूप से इकट्ठा किया जाता। इस सिस्टम में लाभ या हानि को अनुपातिक रूप से वितरित किया जाता है। मशहूर दूध को‌-ऑपरेटिव अमूल इसका बेहतरीन उदाहरण है। महाराष्ट्र का चीनी उद्योग इसका एक और उदाहरण है। लिज्जत पापड़ भी को-ऑपरेटिव सेक्टर का एक अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न:9 सूती कपड़ा उद्योग की क्या समस्याएँ हैं?

उत्तर: इस उद्योग की मुख्य समस्याएँ हैं बिजली की अनियमित सप्लाई और पुरानी मशीनें। इसके अलावा अन्य समस्याएँ हैं; श्रमिकों की कम उत्पादकता और सिंथेटिक रेशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा।

प्रश्न:10 जूट उद्योग मुख्य रूप से हुगली नदी के आस पास ही क्यों स्थित है?

उत्तर: हुगली घाटी के मुख्य गुण हैं; जूट उत्पादक क्षेत्रों से निकटता, सस्ता जल यातायात, रेल और सड़क का अच्छा जाल, जूट के परिष्करण के लिये प्रचुर मात्रा में जल और पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश से मिलने वाले सस्ते मजदूर। इसलिये जूट उद्योग मुख्य रूप से हुगली नदी के आस पास स्थित है।

प्रश्न:11 भारत का चीनी उद्योग दक्षिण की तरफ क्यों शिफ्ट कर रहा है?

उत्तर: हाल के वर्षों में चीनी उद्योग दक्षिण की ओर शिफ्ट कर रहा है। ऐसा विशेष रूप से महाराष्ट्र में हो रहा है। इस क्षेत्र में पैदा होने वाले गन्ने में शर्करा की मात्रा अधिक होती है। इस क्षेत्र की ठंडी जलवायु से गन्ने की पेराई के लिये अधिक समय मिल जाता है।

प्रश्न:12 स्टील के उत्पादन और खपत को किसी देश के विकास के सूचक के रूप में क्यों लिया जाता है?

उत्तर: लोहा इस्त्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है क्योंकि लोहे का इस्तेमाल मशीनों को बनाने में होता है। इस कारण से स्टील के उत्पादन और खपत को किसी भी देश के विकास के सूचक के रूप में लिया जाता है।

प्रश्न:13 भारत के मोटरगाड़ी उद्योग पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: आज भारत में लगभग हर प्रकार की मोटरगाड़ी बनती है। 1991 की उदारवादी नीतियों के बाद कई मोटरगाड़ी कम्पनियों ने भारत में काम शुरु कर दिया। आज का भारत मोटरगाड़ी के लिए अच्छा बाजार बन गया है। अभी भारत में कार और मल्टी यूटिलिटी वेहिकल के 15 निर्माता, कॉमर्सियल वेहिकल के 9 निर्माता और दोपहिया वाहन के 15 निर्माता हैं। मोटरगाड़ी उद्योग के मुख्य केंद्र हैं दिल्ली, गुड़गाँव, मुम्बई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर, हैदराबाद, जमशेदपुर, बंगलोर, सानंद, पंतनगर, आदि।
प्रश्न:2 रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है तथा क्यों?

उत्तर: रेल परिवहन पूरे देश के लिये परिवहन का सुविधाजनक साधन है। लम्बी दूरी की यात्रा और बड़ी मात्रा में माल ढ़ोने के लिए रेल परिवहन बहुत उपयुक्त साबित होता है। एक रेलगाड़ी से एक ही बार में हजारों लोगों और भारी मात्रा में सामान को ढ़ोया जा सकता है। इससे प्रति इकाई संवहन का खर्च भी कम आता है।

प्रश्न:3 सीमांत सड़कों का महत्व बताएँ।

उत्तर: भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के दुर्गम इलाकों को जोड़ने में सीमांत सड़के अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांत सड़कों का सामरिक महत्व भी होता है क्योंकि इनके द्वारा सैनिकों और आयुधों को जरूरत पड़ने पर सीमा तक पहुँचाया जाता है।

प्रश्न:4 व्यापार से आप क्या समझते हैं? स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: दो या अधिक पक्षों के बीच के व्यावसायिक गतिविधियों को व्यापार कहते हैं। देश के अंदर होने वाले व्यापार को स्थानीय व्यापार कहते हैं। दो देशों के बीच के व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं।
प्रश्न:3 राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: राष्ट्रीय राजमार्ग भारत के सुदूर हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग देश की मुख्य सड़क प्रणाली बनाते हैं। इन्हें सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट द्वारा बनाया और मेंटेन किया जाता है।

प्रश्न:4 पाइपलाइन से क्या क्या सप्लाई हो सकता है?

उत्तर: पानी, पेट्रोलियम उत्पाद, प्राकृतिक गैस, स्लरी

प्रश्न:5 जल परिवहन किस तरह से लाभदायक है?

उत्तर: यह परिवहन का सबसे सस्ता साधन है। जल परिवहन भारी और विशाल सामान को ले जाने के लिये अत्यंत उपयुक्त है। इसमें ईंधन की कम खपत होती है और यह पर्यावरण हितैषी भी है।

प्रश्न:6 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को किसी देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाता है। क्यों?

उत्तर: किसी भी देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से उस देश की समृद्धि का आकलन किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर भी माना जाता है।

प्रश्न:7 व्यापार संतुलन से क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी भी देश के निर्यात और आयात में अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। व्यापार संतुलन अनुकूल होने की स्थिति में आयात की तुलना में निर्यात अधिक होता है। व्यापार संतुलन प्रतिकूल होने की स्थिति में निर्यात की तुलना में आयात अधिक होता है।

Rajnnitik shashtra
प्रश्न 8: निम्नलिखित में किस देश को धार्मिक और जातीय पहचान के आधार पर विखंडन का सामना करना पड़ा? (बेल्जियम, भारत, यूगोस्लाविया, नीदरलैंड)

उत्तर: यूगोस्लाविया
प्रश्न 1: सामाजिक विभाजनों की राजनीति के परिणाम तय करने वाले तीन कारकों की चर्चा करें।

उत्तर: सामाजिक विभाजनों की राजनीति के परिणाम तीन कारकों पर निर्भर करते हैं जो निम्नलिखित हैं:

यह इस बात पर निर्भर करता है कि लोग अपनी सामाजिक पहचान को किस रूप में लेते हैं। यदि लोग अपने आप को विशिष्ट मानने लगते हैं तो ऐसे में सामाजिक विविधता को पचा पाना मुश्किल हो जाता है।

राजनेता किसी समुदाय की मांगों को किस तरह से पेश करते हैं।

किसी समुदाय की मांग पर सरकार की कैसी प्रतिक्रिया होती है। यदि किसी समुदाय की मांग को सही तरीके से माना जाता है तो इससे राजनीति सबल बनती है।

प्रश्न 2: सामाजिक अंतर कब और कैसे सामाजिक विभाजनों का रूप ले लेते हैं?

उत्तर: जब सामाजिक अंतर से लोगों में विशेष होने की भावना भरने लगती है तो इससे सामाजिक विभाजन का जन्म होता है। भारत में पुराने समय से ही सभी संसाधनों पर ऊँची जाति के लोगों का नियंत्रण रहा है। इसके अलावा सवर्णों ने दलितों और पिछड़ी जाति के लोगों को आर्थिक विकास का फायदा उठाने से रोक कर रखा। इससे देश में सामाजिक विभाजन बढ़ता चला गया।
प्रश्न 1: सामाजिक विविधता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी भी समाज में विविधता तभी आती है जब उस समाज में विभिन्न आर्थिक तबके, धार्मिक समुदायों, विभिन्न भाषाई समूहों, विभिन्न संस्कृतियों और जातियों के लोग रहते हैं।

प्रश्न 2: भारत एक विविधतापूर्ण देश है। स्पष्ट करें।

उत्तर: भारत देश विविधताओं का एक जीता जागता उदाहरण है। इस देश में दुनिया के लगभग सभी मुख्य धर्मों के अनुयायी रहते हैं। यहाँ हजारों भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग खान पान है, अलग-अलग पोशाक और तरह तरह की संस्कृति दिखाई देती है।

प्रश्न 3: यदि किसी सामाजिक समूह के लोग अपने आप को विशिष्ट मानने लगें तो इसका क्या परिणाम होता है?

उत्तर: लोग अपनी सामाजिक पहचान को किस रूप में लेते हैं इससे सामाजिक विविधता का राजनीति पर परिणाम तय होता है। यदि किसी खास समूह के लोग अपने को विशिष्ट मानने लगते हैं तो फिर वे सामाजिक विविधता को गले नहीं उतार पाते हैं।

प्रश्न 4: किसी समुदाय की मांग पर सरकार की प्रतिक्रिया का राजनीति पर क्या असर होता है?

उत्तर: यह इस पर भी निर्भर करता है कि किसी समुदाय की मांग पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है। यदि सरकार किसी समुदाय की मांग को उचित तरीके से मान लेती है तो फिर उस समुदाय की राजनीति सबल हो जाती है।
प्रश्न 1: आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग अलग तरीके क्या हैं? इनमें से प्रत्येक का एक उदाहरण भी दें।

उत्तर:आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के निम्न तरीके हैं”

सरकार विभिन्न अंगों के बीच सत्ता की साझेदारी: उदाहरण: विधायिका और कार्यपालिका के बीच सत्ता की साझेदारी।
सरकार के विभिन्न स्तरों में सत्ता की साझेदारी: उदाहरण: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता की साझेदारी।
सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी: उदाहरण: सरकारी नौकरियों में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षण।
दबाव समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी: नये श्रम कानून के निर्माण के समय ट्रेड यूनियन के रिप्रेजेंटेटिव से सलाह लेना।
प्रश्न 2: भारतीय संदर्भ में सत्ता की हिस्सेदारी का एक उदाहरण देते हुए इसका एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण बताएँ।

उत्तर:युक्तिपरक कारण: सत्ता की साझेदारी से विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव कम करने में मदद मिलती है। इसलिये सामाजिक सौहार्द्र और शांति बनाए रखने के लिए सत्ता की साझेदारी जरूरी है। नैतिक कारण: लोकतंत्र की आत्मा को अक्षुण्ण रखना।
प्रश्न 1: सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब किसी शासन व्यवस्था में हर सामाजिक समूह और समुदाय की भागीदारी सरकार में होती है तो इसे सत्ता की साझेदारी कहते हैं।

प्रश्न 2: लोकतंत्र का मूलमंत्र क्या है?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी

प्रश्न 3: भारत में सरकार का चुनाव कैसे होता है?

उत्तर: भारत के नागरिक सीधे मताधिकार के माध्यम से अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं। लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि एक सरकार को चुनते हैं।

प्रश्न 4: भारत में चुनी हुई सरकार के मुख्य कार्य क्या होते हैं?

उत्तर: भारत में एक चुनी हुई सरकार रोजमर्रा का शासन चलाती है और नये नियम बनाती है या पुराने नियमों और कानूनों में संशोधन करती है।

प्रश्न 5: लोकतंत्र में यह क्यों आवश्यक होता है कि सत्ता का बँटवारा अधिक से अधिक लोगों के बीच हो?

उत्तर: किसी भी लोकतंत्र में हर प्रकार की राजनैतिक शक्ति का स्रोत प्रजा होती है। यह लोकतंत्र का एक मूलभूत सिद्धांत है। ऐसी शासन व्यवस्था में लोग स्वराज की संस्थाओं के माध्यम से अपने आप पर शासन करते हैं। एक समुचित लोकतांत्रिक सरकार में समाज के विविध समूहों और मतों को उचित सम्मान दिया जाता है। जन नीतियों के निर्माण में हर नागरिक की आवाज सुनी जाती है। इसलिए लोकतंत्र में यह जरूरी हो जाता है कि राजनैतिक सत्ता का बँटवारा अधिक से अधिक नागरिकों के बीच हो।

प्रश्न 6: समाज में सौहार्द्र और शांति बनाये रखने में सत्ता की साझेदारी की क्या भूमिका है?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी से विभिन्न सामाजिक समूहों में टकराव को कम करने में मदद मिलती है।

प्रश्न 7: सत्ता की साझेदारी के दो कारण कौन कौन से हैं?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी के दो कारण होते हैं। एक है समझदारी भरा कारण और दूसरा है नैतिक कारण।

प्रश्न 8: सत्ता की साझेदारी के मुख्य रूप क्या हैं?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी के मुख्य रूप निम्नलिखित हैं:

शासन के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा
शासन के विभिन्न स्तरों पर सत्ता का बँटवारा
सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा
विभिन्न प्रकार के दबाव समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा
प्रश्न 9: न्यायपालिका का मुख्य कार्य क्या होता है?

उत्तर: न्यायपालिका का काम होता है यह देखना कि विधायिका और कार्यपालिका सभी नियमों का सही ढ़ंग से पालन कर रही है या नहीं।

प्रश्न 10: संसद का मुख्य काम क्या होता है?

उत्तर: नये कानून बनाना और पुराने कानूनों में संशोधन करना
प्रश्न 1: भारत की संघीय व्यवस्था में बेल्जियम से मिलती जुलती एक विशेषता और उससे अलग एक विशेषता को बताएँ।
उत्तर: बेल्जियम से मिलती जुलती विशेषता: सबको जोड़कर संघ बनाना।

बेल्जियम से अलग विशेषता: भारतीय संघ में राज्यों को कम स्वायत्तता मिली हुई है।

प्रश्न 2: शासन के संघीय और एकात्मक स्वरूपों में क्या-क्या मुख्य अंतर है? इसे उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करें।

उत्तर: शासन के एकात्मक स्वरूप में केंद्र सरकार बहुत शक्तिशाली होती है और शासन के निचले स्तरों को सही मायने में शक्ति नहीं मिलती। इस तरह के उदाहरण कई तानाशाही शासनों और राजतंत्रों में देखे जा सकते हैं; जैसे लीबिया, सउदी अरब, आदि।

प्रश्न 3: 1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के दो महत्वपूर्ण अंतरों को बताएँ।

उत्तर: 1992 के संविधान संशोधन के पहले स्थानीय शासन निकायों के पास संवैधानिक शक्ति नहीं होती थी। उस समय स्थानीय निकायों के चुनाव भी नियमित रूप से नहीं हो पाते थे। लेकिन 1992 के संशोधन के बाद चीजें बदल गई हैं।
प्रश्न 1: संघवाद किसे कहते हैं?

उत्तर: शासन की वह व्यवस्था जिसमें किसी देश की अवयव इकाइयों और एक केंद्रीय शक्ति के बीच सत्ता की साझेदारी हो उसे संघवाद कहते हैं।

प्रश्न 2: किसी भी संघीय व्यवस्था में सामान्य तौर पर सरकार के कितने स्तर होते हैं?

उत्तर: किसी भी संघीय व्यवस्था में सामान्य तौर पर सरकार के दो स्तर होते हैं। एक स्तर पर पूरे देश के लिये एक सरकार होती है और दूसरे स्तर पर राज्य की सरकारें होती हैं।

प्रश्न 3: संघीय व्यवस्था के मुख्य लक्षण क्या हैं?

उत्तर: संघीय व्यवस्था के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

इस प्रकार की शासन व्यवस्था में दो या दो से अधिक स्तर होते हैं।

शासन के विभिन्न स्तरों द्वारा नागरिकों के एक ही समूह पर शासन किया जाता है। हर स्तर का अधिकार क्षेत्र अलग होता है।

संविधान में सरकार के विभिन्न स्तरों के अधिकार क्षेत्रों के बारे में साफ साफ उल्लेख किया गया है। हर स्तर की सरकार का अस्तित्व और अधिकार क्षेत्र को संविधान से गारंटी मिली होती है।

प्रश्न 4: संघीय ढ़ाँचे के उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर: संघीय ढ़ाँचे के दो उद्देश्य होते हैं। पहला उद्देश्य है देश की एकता को बल देना। दूसरा उद्देश्य है क्षेत्रीय विविधता को सम्मान देना।

प्रश्न 5: किसी आदर्श संघीय व्यवस्था के दो पहलू क्या हैं?

उत्तर: किसी भी आदर्श संघीय व्यवस्था के दो पहलू होते हैं; पारस्परिक विश्वास और साथ रहने पर सहमति।

प्रश्न 6: सबको साथ लाकर संघ बनाने से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: इस प्रकार की व्यवस्था में स्वतंत्र राज्य स्वत: एक दूसरे से मिलकर एक संघ का निर्माण करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि वैसे राज्य अपनी स्वायत्तता बनाये रखने के साथ साथ अपनी सुरक्षा बढ़ा सकें। इस प्रकार की व्यवस्था में केंद्र की तुलना में राज्यों के पास अधिक शक्ति होती है। इस प्रकार की संघीय व्यवस्था के उदाहरण हैं; संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया।

प्रश्न 7: सबको जोड़कर संघ बनाने से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: इस प्रकार की संघीय व्यवस्था में एक बहुत बड़ी विविधता वाले क्षेत्रों को एक साथ रखने के लिए सत्ता की साझेदारी होती है। इस प्रकार की व्यवस्था में राज्यों की तुलना में केंद्र अधिक शक्तिशाली होता है। हो सकता है कुछ इकाइयों को अन्यों के मुकाबले अधिक शक्ति मिली हुई हो। उदाहरण के लिए; भारत में जम्मू कश्मीर को अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक शक्ति मिली हुई है। इस प्रकार की संघीय व्यवस्था के उदाहरण हैं: भारत, स्पेन, बेल्जियम, आदि।

प्रश्न 8: यूनियन लिस्ट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: इस लिस्ट में राष्ट्रीय महत्व के विषय आते हैं। कुछ विषयों पर पूरे देश में एक जैसी नीति की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें यूनियन लिस्ट में रखा जाता है। ऐसे विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास होता है। यूनियन लिस्ट के कुछ विषय हैं; देश की सुरक्षा, विदेश नीति, बैंकिंग, सूचना प्रसारण और मुद्रा।

प्रश्न 9: स्टेट लिस्ट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो विषय स्थानीय महत्व के होते हैं उन्हें स्टेट लिस्ट में रखा जाता है। ऐसे विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य के पास होता है। उदाहरण; पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि और सिंचाई।

प्रश्न 10: साझा लिस्ट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: इस लिस्ट को कॉनकरेंट लिस्ट भी कहते हैं। वैसे विषय जो साझा महत्व के होते हैं, इस लिस्ट में आते हैं। साझा लिस्ट के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र और राज्य दोनों के पास होता है। यदि केंद्र और राज्य द्वारा बनाये गये नियमों में टकराव की स्थिति होती है तो केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होता है। उदाहरण; शिक्षा, वन, ट्रेड यूनियन, विवाह, दत्तक अभिग्रहण, उत्तराधिकार, आदि।

प्रश्न 11: केंद्र शासित प्रदेश का मतलब समझाएँ।

उत्तर: भारतीय गणराज्य की कुछ इकाइयों का क्षेत्रफल इतना कम है कि उन्हें एक राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। कुछ अन्य कारणों से इन्हें किसी अन्य राज्य में मिलाया भी नहीं जा सकता है। इन इकाइयों के पास बहुत ही कम शक्ति होती है। इन्हें केंद्र शाषित प्रदेश कहते हैं। ऐसे क्षेत्रों के प्रशासन के लिए केंद्र सरकार के पास विशेष अधिकार होते हैं। उदाहरण; दिल्ली, चंडीगढ़, अंडमान निकोबार, आदि।

प्रश्न 1: एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।

उत्तर: चाय एक पेय फसल है। चाय की पैदावार उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में अच्छी होती है और इसके लिए गहरी मिट्टी और सुगम जल निकास वाले ढ़लुवा क्षेत्रों की जरूरत पड़ती है। चाय के उत्पादन में गहन श्रम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2: भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें।

>उत्तर: गेहूँ एक खाद्य फसल है। पश्चिम उत्तर के गंगा सतलज के मैदान और दक्कन के काली मृदा वाले क्षेत्र भारत के मुख्य गेहूँ उत्पादक क्षेत्र हैं। गेहूँ के मुख्य उत्पादक हैं पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ भाग।
प्रश्न 2: भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर: वर्तमान में पश्चिमी देशों के किसानों को अत्यधिक सहायिकी मिलने के कारण भारत के किसान उनसे प्रतिस्पर्धा करने में अक्षम साबित हो रहे हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत के कृषि उत्पाद की मांग बहुत कम है। साथ में रासायनिक उर्वरक और सिंचाई के अत्यधिक इस्तेमाल ने नई समस्याएँ खड़ी कर दी है जिससे कृषि उत्पाद घट रहा है। भारत में कृषि पर बहुत अधिक लोग निर्भर हैं इसलिए प्रति व्यक्ति कृषि उत्पाद और भी कम होने वाली है। कई विशेषज्ञों की राय में कार्बनिक कृषि से इस समस्या से निदान पाया जा सकता है।

प्रश्न 3: चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

उत्तर: धान की खेती के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक की सालाना वर्षा की जरूरत होती है। लेकिन कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी इसे सिंचाई की समुचित व्यवस्था करके उगाया जा सकता है। चावल की खेती उत्तर के मैदानों, पूर्वोत्तर भारत, तटीय इलाकों और डेल्टा के क्षेत्रों में होती है। जलोढ़ मृदा वाले क्षेत्रों में चावल की पैदावार अच्छी होती है। लेकिन सिंचाई की समुचित व्यवस्था विकसित करने से चावल की खेती अन्य भागों में भी संभव है।
प्रश्न 1: श्रम के लैंगिक विभाजन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब ऐसा माना जाता है कि कुछ कार्य महिलाओं के लिये और कुछ पुरुषों के लिये ही बने हैं तो ऐसी स्थिति को श्रम का लैंगिक विभाजन कहते हैं।

प्रश्न 2: नारीवादी आंदोलन का क्या मतलब है?

उत्तर: महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के उद्देश्य से होने वाले आंदोलन को नारीवादी आंदोलन कहते हैं।

प्रश्न 3: आधुनिक भारत में नौकरियों में महिलाओं की क्या स्थिति है?

उत्तर: आधुनिक भारत में नौकरियों में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। ऊँचे पदों पर महिलाओं की संख्या काफी कम है। कई मामलों में ये भी देखा गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम वेतन मिलता है। जबकि पुरुषों की तुलना में महिलाएँ प्रतिदिन अधिक घंटे काम करती हैं।

प्रश्न 4: भारत की राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कैसा है?

उत्तर: भारत की राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। विधायिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत खराब है। महिला मंत्रियों की संख्या भी बहुत कम है।

प्रश्न 5: सांप्रदायिकता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब राजनैतिक वर्ग द्वारा एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़वाया जाता है तो इसे सांप्रदायिकता या सांप्रदायिक राजनीति कहते हैं।

प्रश्न 6: धर्मनिरपेक्ष शासन का क्या मतलब है?

उत्तर: जिस शासन व्यवस्था में सभी धर्म को समान दर्जा दिया जाता है उसे धर्मनिरपेक्ष शासन कहते हैं।

प्रश्न 7: भारत सरकार किस स्थिति में धार्मिक मुद्दों में हस्तक्षेप करती है?

उत्तर: भारत का संविधान सरकार को धार्मिक मुद्दों में तब हस्तक्षेप करने की इजाजत देता है जब विभिन्न समुदायों में समानता बनाये रखने के लिये यह जरूरी हो जाये।

प्रश्न 8: जातिगत विभाजन किन कारणों से कम होते जा रहे हैं?

उत्तर: कई सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के कारण जातिगत विभाजन धूमिल पड़ते जा रहे हैं। आर्थिक विकास, तेजी से होता शहरीकरण, साक्षरता, पेशा चुनने की आजादी और गाँवों में जमींदारों की कमजोर स्थिति के कारण जातिगत विभाजन कम होते जा रहे हैं।

प्रश्न 9: भारत की राजनीति में जाति का क्या महत्व है?

उत्तर: भारत की राजनीति में जाति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। किसी भी चुनाव क्षेत्र में उम्मीदवार का चयन उस क्षेत्र की जातीय समीकरण के आधार पर होता है।

प्रश्न 10: जाति के आधार पर आर्थिक विषमता पर टिप्पणी करें।

उत्तर: जाति के आधार पर आर्थिक विषमता अभी भी देखने को मिलती है। उँची जाति के लोग सामन्यतया संपन्न होते है। पिछड़ी जाति के लोग बीच में आते हैं, और दलित तथा आदिवासी सबसे नीचे आते हैं। सबसे निम्न जातियों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक है।
प्रश्न 1:दबाव समूह और आंदोलन राजनीति को किस तरह प्रभावित करते हैं?

उत्तर: दबाव समूह और आंदोलन निम्न तरीकों से राजनीति को प्रभावित करते हैं:

अपने मुद्दे के लिए जन समर्थन जुटाकर।
विरोध प्रदर्शन द्वारा सरकार पर दबाव बनाकर।
लॉबी बनाकर।
प्रश्न 2:दबाव समूहों और राजनीतिक दलों के आपसी संबंधों का स्वरूप कैसा होता है, वर्णन करें।

उत्तर: सामान्यतया दबाव समूहों और राजनीतिक दलों के बीच कोई प्रत्यक्ष रिश्ता नहीं होता है। वे अक्सर एक दूसरे के विपरीत मान्यता रखते हैं। लेकिन दोनों के बीच संवाद और मोलभाव चलता रहता है। राजनीतिक दलों के कई नए नेता दबाव समूहों से आते हैं।

प्रश्न 3:दबाव समूहों कि गतिविधियाँ लोकतांत्रिक सरकार के कामकाज में कैसे उपयोगी होती हैं?

उत्तर: दबाव समूहों की गतिविधियों से लोकतंत्र की जड़े मजबूत करने में मदद मिलती है। ऐसे समूह शक्तिशाली बिजनेस लॉबी के खिलाफ आम जनता की आवाज बुलंद करने में मदद करते हैं। कई बार दबाव समूहों का क्रियाकलाप विध्वंसकारी लगता है लेकिन इन क्रियाकलापों से शक्तिशाली शासक वर्ग और व्यवसायी वर्ग तथा शक्तिहीन आम नागरिक के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलती है।

प्रश्न 4:दबाव समूह क्या हैं? कुछ उदाहरण बताइए।

उत्तर: वैसे संगठन जो सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं उन्हें हम दबाव समूह कहते हैं। एक दबाव समूह किसी राजनीतिक दल से भिन्न होता है क्योंकि यह जनता के लिए जवाबदेह नहीं होता। दबाव समूह की शासन में कोई भागीदारी नहीं होती है। नर्मदा बचाओ आंदोलन, ट्रेड यूनियन, वकीलों का संगठन, आदि दबाव समूह के उदाहरण हैं।

प्रश्न 5:दबाव समूह और राजनीतिक दल में क्या अंतर है?

उत्तर: राजनीतिक दल सीधे रूप से जनता के लिए जवाबदेह होते हैं जबकि दबाव समूह के साथ ऐसा नहीं है। एक राजनीतिक दल या तो सत्ता में होता है या सत्ता हासिल करने के लिए काम करता है, लेकिन दबाव समूह के साथ ऐसा नहीं है।

प्रश्न 6:जो संगठन विशिष्ट सामाजिक वर्ग जैसे मजदूर, कर्मचारी, शिक्षक और वकील आदि के हितों को बढ़ावा देने की गतिविधियाँ चलाते हैं उन्हें ..................कहा जाता है।

उत्तर: वर्ग विशेष के हित समूह
प्रश्न 1:राजनैतिक पार्टी से क्या समझते हैं?

उत्तर: जो संगठन राजनैतिक प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी करते हैं उन्हें राजनैतिक पार्टी कहते हैं। राजनैतिक पार्टियाँ चुनाव लड़ती हैं ताकि सरकार बना सकें।

प्रश्न 2:दबाव समूह की परिभाषा बतायें।

उत्तर: जो संगठन राजनैतिक प्रक्रिया में परोक्ष रूप से भागीदारी करते हैं उन्हें दबाव समूह कहते हैं। सरकार बनाना या सरकार चलाना कभी भी दबाव समूह का लक्ष्य नहीं होता है।

प्रश्न 3:दबाव समूह का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर: दबाव समूह का निर्माण तब होता है जब समान पेशे, रुचि, महात्वाकांछा या मतों वाले लोग किसी समान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये एक मंच पर आते हैं।

प्रश्न 4:जन आंदोलन के कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तर: नर्मदा बचाओ आंदोलन, सूचना के अधिकार के लिये आंदोलन, शराबबंदी के लिये आंदोलन, नारी आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन।

प्रश्न 5:वर्ग विशेष के हित समूह पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: जो दबाव समूह किसी खास वर्ग या समूह के हितों के लिये काम करते हैं उन्हें वर्ग विशेष के समूह कहते हैं। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, बिजनेस एसोसियेशन, प्रोफेशनल (वकील, डॉक्टर, शिक्षक, आदि) के एसोसियेशन। ऐसे समूह किसी खास वर्ग की बात करते हैं; जैसे मजदूर, शिक्षक, कामगार, व्यवसायी, उद्योगपति, किसी धर्म के अनुयायी, आदि। ऐसे समूहों का मुख्य उद्देश्य होता है अपने सदस्यों के हितों को बढ़ावा देना और उनके हितों की रक्षा करना।

प्रश्न 6:जन सामान्य के हित समूह पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: जो दबाव समूह सर्व सामान्य जन के हितों की रक्षा करते हैं उन्हें जन सामान्य के हित समूह कहते हैं। ऐसे दबाव समूह का उद्देश्य होता है पूरे समाज के हितों की रक्षा करना। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, स्टूडेंट यूनियन, एक्स आर्मीमेन एसोसियेशन, आदि।

प्रश्न 7:दबाव समूह अपने लिये जन समर्थन जुटाने के लिये क्या-क्या करते हैं?

उत्तर: इसके लिये वे तरह तरह के रास्ते अपनाते हैं, जैसे कि जागरूकता अभियान, जनसभा, पेटीशन, आदि। कई दबाव समूह जनता का ध्यान खींचने के लिए मीडिया को भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 8:दबाव समूह का राजनैतिक पार्टियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: दबाव समूह और आंदोलन राजनैतिक पार्टियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। किसी भी ज्वलंत मुद्दे पर उनका एक खास राजनैतिक मत और सिद्धांत होता है। हो सकता है कि कोई दबाव समूह किसी राजनैतिक पार्टी से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भी जुड़ा हुआ हो।

प्रश्न 9:दबाव समूह के समर्थन में कुछ तर्क लिखिए।

उत्तर: कुछ विचारकों का मानना है कि लोकतंत्र की जड़ें जमाने के लिये सरकार पार दबाव डालना उचित होता है। ऐसा माना जाता है कि राजनैतिक पार्टियाँ सत्ता हथियाने के चक्कर में अक्सर जनता के असली मुद्दों की अवहेलना करती हैं। उनको नींद से जगाने का काम दबाव समूह का ही होता है।

प्रश्न 10:दबाव समूह के विरोध में तर्क लिखिए।

उत्तर: कई विचारक ऐसा मानते हैं कि दबाव समूह को सुनने में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ऐसे समूह समाज के एक छोटे से वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि लोकतंत्र किसी छोटे वर्ग के संकीर्ण हितों के लिये काम नहीं करता बल्कि पूरे समाज के हितों के लिये काम करता है। राजनैतिक पार्टी को तो जनता को जवाब देना होता है लेकिन दबाव समूह पर यह बात लागू नहीं होती है। इसलिए कुछ विचारकों का मानना है कि दबाव समूह की सोच का दायरा बड़ा नहीं हो सकता है।

part 4 economics
प्रश्न:4 विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिये किस प्रमुख मापदण्ड का प्रयोग करता है? इस मापदण्ड की, अगर कोई हैं, तो सीमाएँ क्या हैं?

उत्तर: विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिये प्रति व्यक्ति आय का प्रयोग करता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जीवन के स्तर को ऊँचा उठाने के लिये केवल आय ही काफी नहीं है। कई अन्य कारक विकास को प्रभावित करते हैं; जैसे शिशु मृत्यु दर, साक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाएँ, आदि। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि विश्व बैंक द्वारा प्रयोग किये गये मापदण्ड की अपनी सीमाएँ हैं।

प्रश्न:5 विकास मापने का यू.एन.डी.पी. का मापदण्ड किन पहलुओं में विश्व बैंक के मापदण्ड से अलग है?

उत्तर: यू.एन.डी.पी. जीवन स्तर को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों का प्रयोग भी करता है। यह अन्य कारको; जैसे शिशु मृत्यु दर, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्कूल में नामांकण, आदि को उनका महत्व देता है। इस तरह से यू.एन.डी.पी. उन सभी कारकों की विवेचना करता है जिससे लोगों के जीवन स्तर पर प्रभाव पड़ता है और लोगों की उत्पादकता बढ़ती है।

प्रश्न:6 हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं? इनके प्रयोग करने की क्या कोई सीमाएँ हैं? विकास से जुड़े अपने उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जब भी हमें एक बड़े सैम्पल का आकलन करना होता है तो एक एक आँकड़े का आकलन मुश्किल होता है। इसलिए ऐसी स्थिति में औसत का प्रयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। औसत की अपनी सीमाएँ भी होती हैं। कई बार औसत से सही चित्र सामने नहीं आता है। उदाहरण के लिए; प्रति व्यक्ति आय से आय के वितरण का पता नहीं चल पाता है। इससे जनसंख्या में गरीबों के अनुपात का पता नहीं चलता है। भारत में पिछले दो दशकों में प्रति व्यक्ति आय में जबरदस्त वृद्धि हुई है लेकिन इसके साथ ही गरीबों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है।

प्रश्न:7 प्रतिव्यक्ति आय कम होने पर भी केरल का मानव विकास क्रमांक पंजाब से ऊँचा है। इसलिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिलकुल नहीं है। राज्यों की तुलना के लिये इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए।

उत्तर: सबसे धनी राज्य होने के बावजूद पंजाब में केरल की तुलना में शिशु मृत्यु दर अधिक है। पंजाब की तुलना में केरल में कक्षा 1 से 4 में निवल उपस्थिति दर अधिक है। इससे पता चलता है कि मानव विकास सूचकांक में केरल एक बेहतर राज्य है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिलकुल नहीं है। राज्यों की तुलना के लिये इसका उपयोग करना चाहिए लेकिन इसे अन्य मापदण्डों के परिप्रेक्ष्य में देखना जरूरी है।

प्रश्न:8 भारत के लोगों द्वारा ऊर्जा के किन स्रोतों का प्रयोग किया जाता है? ज्ञात कीजिए। अब से 50 वर्ष पश्चात क्या संभावनाएँ हो सकती हैं?

उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में जलावन की लकड़ी ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। शहरी क्षेत्रों में रसोई के ईंधन के रूप में एलपीजी का इस्तेमाल अधिकतर घरों में होता है। इसके अलावा वाहनों के लिये पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल होता है। आज से पचास वर्ष बाद जलावन की लकड़ी मिलना कठिन हो जायेगा क्योंकि तेजी से वनोन्मूलन हो रहा है। जीवाश्म ईंधन भी तेजी से घट रहा है। इसलिए हमें किसी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत को जल्दी ही विकसित करना होगा। गाँवों में गोबर गैस इसका एक अच्छा समाधान हो सकता है। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा से पूरे देश की ऊर्जा की जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

प्रश्न:9 धारणीयता का विषय विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: विकास का मतलब केवल वर्तमान को खुशहाल बनाना ही नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिये एक बेहतर भविष्य बनाना भी है। धारणीयता का मतलब होता है ऐसा विकास करना जो आने वाले कई वर्षों तक सतत चलता रहे। यह तभी संभव होता है जब हम संसाधन का दोहन करने की बजाय उनका विवेकपूर्ण इस्तेमाल करते हैं।

प्रश्न:10 धरती के पास सब लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन एक भी व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह कथन विकास की चर्चा में कैसे प्रासंगिक है? चर्चा कीजिए।

उत्तर: यह मशहूर कथन महात्मा गांधी का है। हम जानते हैं कि धरती के पास इतने संसाधन हैं कि वे हमारे जीवन में कम नहीं पड़ने वाले। लेकिन हमें अपनी जिंदगी के आगे भी सोचना होगा और भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिये सोचना होगा। यदि हम प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिये कुछ नहीं बचेगा। इसलिए हमें अपने लोभ पर काबू पाना होगा और प्रकृति से केवल उतना ही लेने की आदत डालनी होगी जितना जरूरी है।

प्रश्न:11 पर्यावरण में गिरावट के कुछ ऐसे उदाहरणों की सूची बनाइए जो आपने अपने आसपास देखे हों।

उत्तर: मेरे शहर में हरियाली का नामोनिशान नहीं है। यहाँ की हवा इतनी प्रदूषित है कि मेरे आस पड़ोस में रहने वाले अधिकतर लोगों को सांस की बीमारी है। मेरे शहर से होकर बहने वाली नदी किसी गंदे नाले की तरह लगती है। इससे पता चलता है कि मेरे शहर के पर्यावरण में कितनी गिरावट आई है।
प्रश्न:1 विकास के लक्ष्य भिन्न भिन्न लोगों के लिये कैसे भिन्न भिन्न हो सकते हैं?

उत्तर: विकास के लक्ष्य विभिन्न लोगों के लिये विभिन्न हो सकते हैं। हो सकता है कि कोई बात किसी एक व्यक्ति के लिये विकास हो लेकिन दूसरे के लिये नहीं। उदाहरण के लिये किसी नये हाइवे का निर्माण कई लोगों के लिये विकास हो सकता है। लेकिन जिस किसान की जमीन उस हाइवे निर्माण के लिये छिन गई हो उसके लिये तो वह विकास कतई नहीं हो सकता।

प्रश्न:2 प्रति व्यक्ति आय से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रति व्यक्ति आय: जब देश की कुल आय को उस देश की जनसंख्या से भाग दिया जाता है तो जो राशि मिलती है उसे हम प्रति व्यक्ति आय कहते हैं।

प्रश्न:3 सकल राष्ट्रीय उत्पाद का क्या मतलब है?

उत्तर: किसी देश में उत्पादित कुल आय को सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहते हैं। सकल राष्ट्रीय उत्पाद में हर प्रकार की आर्थिक क्रिया से होने वाली आय की गणना की जाती है।

प्रश्न:4 सकल घरेलू उत्पाद का क्या मतलब है?

उत्तर: किसी देश में उत्पादित कुल आय में से निर्यात से होने वाली आय को घटाने के बाद जो बचता है उसे सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी कहते हैं।

प्रश्न:5 शिशु मृत्यु दर से आप क्या समझते हैं? इसे विकास के लक्ष्य में क्यों रखा जाता है?

उत्तर: हर 1000 जन्म में एक साल की उम्र से पहले मरने वाले बच्चों की संख्या को शिशु मृत्यु दर कहते हैं। यह आँकड़ा जितना कम होगा वह विकास के दृष्टिकोण से उतना ही बेहतर माना जायेगा। शिशु मृत्यु दर एक महत्वपूर्ण पैमाना है। इससे किसी भी क्षेत्र में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता का पता चलता है।

प्रश्न:6 प्रच्छन्न बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं? शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।

उत्तर: जब एक श्रमिक काम तो कर रहा होता है लेकिन उसकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति को प्रच्छन्न बेरोजगारी कहते हैं। ऐसी स्थिति में एक श्रमिक किसी खास काम में इसलिये लगा रहता है क्योंकि उसके पास उससे बेहतर करने को कुछ भी नहीं होता। इस स्थिति में श्रमिक के पास कोई विकल्प नहीं होता बल्कि किसी खास काम को करने की मजबूरी होती है। गाँवों में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि जिस खेत पर काम करने के लिए एक दो लोग काफी होते हैं उसी खेत पर कई लोग काम करते रहते हैं। अतिरिक्त लोग उस खेत पर इसलिए काम कर रहे होते हैं क्योंकि उनके पास करने को कोई बेहतर विकल्प नहीं होता है। यह छुपी हुई बेरोजगारी का एक जीवंत उदाहरण है। शहरी क्षेत्रों में किसी दुकान पर आपको कई भाई काम करते मिल जाएँगे। उनको अलग अलग दुकान चलाना चाहिए लेकिन सही अवसर के अभाव में उन्हें एक ही दुकान पर काम करने को बाध्य होना पड़ता है।

प्रश्न:7 खुली बेरोजगारी और प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच विभेद कीजिए।

उत्तर: जब किसी आदमी के पास कोई काम नहीं होता है तो इसे बेरोजगारी कहते हैं। जब कोई आदमी काम तो कर रहा होता है लेकिन अपनी क्षमता का सदुपयोग नहीं कर पाता है तो इसे प्रच्छन्न बेरोजगारी कहते हैं। लेकिन जब किसी आदमी को काम बिल्कुल भी नहीं मिलता तो इसे खुली बेरोजगारी कहते हैं।

प्रश्न:8 “भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में तृतीयक क्षेत्रक कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा रहा है।“ क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।

उत्तर: यह कथन आंशिक रूप से सही है। जब हम 1973 से 2000 तक तृतीय सेक्टर की वृद्धि को देखते हैं तो कह सकते हैं कि इस सेक्टर में वृद्धि हुई है। 2003 के जीडीपी में तृतीयक सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक है; जो इस सेक्टर के अच्छे पहलू को दिखाता है। लेकिन जब हम रोजगार के अवसरों के आँकड़े देखते हैं तो पता चलता है कि तृतीयक सेक्टर ने रोजगार के उतने अवसर नहीं बनाए जो जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी से मैच कर पाये। इसलिए हम कह सकते हैं कि रोजगार मुहैया कराने के मामले में तृतीयक सेक्टर में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

प्रश्न:9 “भारत में सेवा क्षेत्रक दो विभिन्न प्रकार के लोग नियोजित करते हैं।“ ये लोग कौन हैं?

उत्तर: सर्विस सेक्टर में नियमित और अनियमित श्रमिक काम करते हैं। जो श्रमिक अपने हुनर और मानसिक क्षमताओं का प्रयोग करता है और सामान्यत: सीधे रूप से नियोजित होता है उसे नियमित श्रमिक कहते हैं। जो श्रमिक ऐसी सेवा प्रदान करता है जिसमें मानसिक क्षमताओं की खास भूमिका न हो उसे अनियमित या अनौपचारिक श्रमिक कहते हैं। अंशकालीन रूप से नियोजित श्रमिकों को भी अनियमित श्रमिक की श्रेणी में रखा जाता है। उदाहरण: एक ठेले का मालिक जो किसी प्रकाशक के यहाँ कागज पहुँचाता है एक अनियमित श्रमिक होता है।

प्रश्न:10 “असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का शोषण किया जाता है।“ क्या आप इस विचार से सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।

उत्तर: यह सही है कि असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का शोषण किया जाता है। असंगठत क्षेत्रक में काम करने वालों को कम मेहनताना मिलता है और उन्हें लंबे समय के लिये काम करना पड़ता है। उन्हें छुट्टियाँ शायद ही मिलती हैं। उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी नहीं मिलती है।

प्रश्न:11 आर्थिक गतिविधियाँ रोजगार की परिस्थितियों के आधार पर कैसे वर्गीकृत की जाती हैं?

उत्तर: रोजगार की परिस्थितियों के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को संगठित और असंगठित क्षेत्रक में बाँटा गया है।
प्रश्न:13 नरेगा 2005 के उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: ‘काम के अधिकार’ के लक्ष्यों को पूरा करने के उद्देश्य से नरेगा 2005 को लागू किया गया था। इस प्रोग्राम के तहत ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के एक व्यक्ति को साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है। यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के लिये प्रतिबद्ध है। इस कार्यक्रम का एक और उद्देश्य है गाँवों से महानगरों की ओर होने वाले भारी पलायन को रोकना।
प्रश्न:1 किसी भी अर्थव्यवस्था को किन किन क्षेत्रक या सेक्टर में बाँटा जाता है?

उत्तर: किसी भी अर्थव्यवस्था को तीन सेक्टर में बाँटा जाता है:

प्राथमिक या प्राइमरी सेक्टर
द्वितीयक या सेकंडरी सेक्टर
तृतीयक या टरशियरी सेक्टर
प्रश्न:2 प्राइमरी सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्राइमरी सेक्टर में होने वाली आर्थिक क्रियाओं में मुख्य रूप से प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से उत्पादन किया जाता है। उदाहरण: कृषि और कृषि से संबंधित क्रियाकलाप, खनन, आदि।

प्रश्न:3 सेकंडरी सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: सेकंडरी सेक्टर में प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के द्वारा अन्य रूपों में बदला जाता है। उदाहरण: लोहा इस्पात उद्योग, ऑटोमोबाइल, आदि।

प्रश्न:4 टरशियरी सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: टरशियरी सेक्टर में होने वाली आर्थिक क्रियाओं के द्वारा अमूर्त वस्तुएँ प्रदान की जाती हैं। उदाहरण: यातायात, वित्तीय सेवाएँ, प्रबंधन सलाह, सूचना प्रौद्योगिकी, आदि।

प्रश्न:5 विभिन्न सेक्टर की पारस्परिक निर्भरता को समझाइए।

उत्तर: इस पारस्परिक निर्भरता को समझने के लिए बिस्किट का उदाहरण लेते हैं। एक बिस्किट का निर्माण मैदा, पानी, चीनी और कृत्रिम फ्लेवर से होता है। मैदा के उत्पादन के लिये गेहूँ की खेती जरूरी है। चीनी के लिये गन्ने का उत्पादन जरूरी है। मैदा और चीनी को बिस्किट फैक्ट्री तक पहुँचाने के लिये ट्रकों की जरूरत पड़ती है। खेतों और कारखानों में मजदूरों और मैनेजरों की जरूरत होती है। किसान को गेहूँ और गन्ना उपजाने के लिये खाद और बीज की जरूरत पड़ती है। इस उत्पादन के हर चरण पर पैसे का लेनदेन होता है। उस लेनदेन का हिसाब रखने के लिये एकाउंटेंट की जरूरत होती है। इस उदाहरण से विभिन्न सेक्टर की पारस्परिक निर्भरता का पता चलता है।

प्रश्न:6 संगठित सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: संगठित सेक्टर में सारी गतिविधियाँ एक सिस्टम से होती हैं, और यहाँ कानून का पालन होता है। संगठित सेक्टर में श्रमिकों के अधिकारों को महत्व दिया जाता है।

प्रश्न:7 श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर: सामाजिक सुरक्षा की जरूरत को समझने के लिये एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए कि किसी परिवार के कमाने वाले मुखिया की मृत्यु हो जाती है या वह काम करने में अक्षम हो जाता है। ऐसे में उसके परिवार पर यह संकट आ जाता है कि उसका आगे का गुजारा कैसे होगा। यदि ऐसे श्रमिक के परिवार को सरकार की नीतियों के अनुसार प्रोविडेंट फंड और बीमे की रकम मिल जाती है तो फिर उस परिवार को इतना सहारा मिल जाता है कि वह दोबारा अपनी जिंदगी शुरु कर सके। यदि ऐसे श्रमिक के परिवार को उसके हाल पर छोड़ दिया जाये तो उसका भविष्य अंधेरे में पड़ जायेगा।

प्रश्न:8 असंगठित सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: असंगठित सेक्टर में कोई सिस्टम नहीं होता है और ज्यादातर कानून की अवहेलना की जाती है। छोटे दुकानदार, छोटे कारखाने वाले अक्सर इस श्रेणी में आते हैं। ऐसे संस्थानों में काम करने वाले श्रमिकों को मूलभूत अधिकार भी नहीं मिलते हैं।

प्रश्न:9 पब्लिक सेक्टर का क्या मतलब है?

उत्तर: जो कम्पनियाँ सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चलाई जाती हैं वे सार्वजनिक सेक्टर या पब्लिक सेक्टर में आती हैं।

प्रश्न:10 प्राइवेट सेक्टर का क्या मतलब है?

उत्तर: जिन कम्पनियों को निजी लोगों द्वारा चलाया जाता है वे प्राइवेट सेक्टर में आती हैं। उदाहरण: टाटा, इंफोसिस, गोदरेज, मारुति, आदि।
प्रश्न:9 विकास में ऋण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: विकास में ऋण की अहम भूमिका होती है। ज्यादातर व्यवसायों को आगे बढ़ाने के लिये कभी न कभी ऋण की आवश्यकता पड़ती है। ऋण के बिना किसी छोटी कम्पनी को एक बड़ी कम्पनी में नहीं बदला जा सकता है। ऋण के अभाव में किसान खेती को बड़े पैमाने पर नहीं कर सकते हैं। ज्यादातर लोग ऋण के बिना घर या कार नहीं खरीद सकते हैं। घर और कार की मांग का अर्थव्यवस्था के विकास पर बड़ा असर पड़ता है।
प्रश्न:1 वस्तु विनिमय प्रणाली से क्या समझते हैं?

उत्तर: विनिमय की वह प्रणाली जिसमें लोग एक चीज के बदले दूसरी चीज की लेन देन करते हैं, वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाती है।

प्रश्न:2 वस्तु विनिमय प्रणाली के लिये जरूरी शर्त क्या होती है? समझाईए।

उत्तर: वस्तु विनिमय के लिये जरूरी शर्त है ‘आवश्यकताओं का दोहरा संयोग’। यह वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी भी होती है। मान लीजिए कि आप अपने गिटार के बदले एक बैंजो चाहते हैं। ऐसी स्थिति में आपको किसी ऐसे व्यक्ति को ढ़ूँढ़ना होगा जिसे अपने बैंजो के बदले एक गिटार चाहिए। ऐसे दो लोगों को ढ़ूँढ़ना; जो एक दूसरे की चीज की अदल बदल करना चाहते हैं; आसान काम नहीं है।

प्रश्न:3 मुद्रा से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: मुद्रा एक माध्यम है जिसके जरिये हम किसी भी चीज को विनिमय द्वारा प्राप्त कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में मुद्रा के बदले में हम जो चाहें खरीद सकते हैं।

प्रश्न:4 भारत में करेंसी नोट कौन सी संस्था जारी करती है?

उत्तर: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

प्रश्न:5 मुद्रा से क्या लाभ हैं?

उत्तर: मुद्रा के लाभ निम्नलिखित हैं:

यह आवश्यकताओं के दोहरे संयोग से छुटकारा दिलाती है।
यह कम जगह लेती है और इसे कहीं भी लाना ले जाना आसान होता है।
मुद्रा को आसानी से कहीं भी और कभी भी विनिमय के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रश्न:6 बैंक में जमा को डिमांड डिपॉजिट क्यों कहते हैं?

उत्तर: बैंक खाते में जमा राशि को जरूरत (डिमांड) के हिसाब से निकाला जा सकता है इसलिए इन खातों के निक्षेप (डिपॉजिट) को डिमांड डिपॉजिट कहते हैं।

प्रश्न:7 चेक पर क्या क्या लिखा होता है?

उत्तर: चेक पर भुगतान पाने वाले व्यक्ति या संस्था का नाम और भुगतान की जाने वाली राशि को लिखना होता है। उसके बाद चेक जारी करने वाले व्यक्ति को चेक के नीचे हस्ताक्षर करना होता है।

प्रश्न:8 केडिट का क्या मतलब होता है?

उत्तर: बैंक द्वारा कर्ज में जो राशि दी जाती है उसे क्रेडिट कहते हैं।

प्रश्न:9 डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर: क्रेडिट और डेबिट कार्ड आधुनिक जमाने में काफी प्रचलित हैं। डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड एक जैसे दिखते हैं। डेबिट कार्ड द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने खाते में जमा राशि में पेमेंट कर सकता है। क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करते समय आप बैंक से कर्ज लेते हैं। दोनों तरह के कार्डों से भुगतान इलेक्ट्रानिक रूप में होता है और किसी को कैश ढ़ोने की जरूरत नहीं होती है।

प्रश्न:10 कोलैटरल या समर्थक ऋणाधार से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: अधिकतर मामलों में कर्ज लेने के लिये किसी चल या अचल सम्पत्ति को बैंक के पास गिरवी रखना होता है। इसे कोलैटरल कहते हैं। कोलैटरल के कुछ उदाहरण हैं; जमीन, घर, गाड़ी, मवेशी, बैंक में जमा राहि, बीमा पॉलिसी, सोना, आदि। यदि कोई व्यक्ति कर्ज का भुगतान समय पर नहीं कर पाता है तो कर्ज देने वाले संस्थान को यह अधिकार होता है कि वह कोलैटरल को बेचकर कर्ज की राशि वसूल ले।

प्रश्न:11 कर्ज के मुख्य स्रोत कौन कौन से हैं?

उत्तर: कर्ज के दो मुख्य स्रोत हैं:

औपचारिक सेक्टर: इस सेक्टर में बैंक और को-ऑपरेटिव सोसाइटी आती है।
अनौपचारिक सेक्टर: इस सेक्टर में साहुकार, दोस्त, रिश्तेदार, व्यापारी और जमींदार आते हैं।
प्रश्न:12 सेल्फ हेल्प ग्रुप पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: सेल्फ हेल्प ग्रुप का प्रचलन अभी नया नया है। इस प्रकार के ग्रुप में लोगों का एक छोटा समूह होता है; जैसे 15 से 20 सदस्य। सभी सदस्य अपने जमा किये हुए पैसे को इकट्ठा करते हैं। उस जमा रकम में से किसी भी सदस्य को छोटी राशि का कर्ज दिया जाता है। फिर वह सेल्फ हेल्प ग्रुप उस राशि पर ब्याज लेता है। इस तरह के कर्ज के सिस्टम को माइक्रोफिनांस कहते हैं।
प्रश्न:1 वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: आधुनिक काल में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था जिस तरह आपस में जुड़ी हुई हैं उसे वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन कहते हैं। उदाहरण के लिये माइक्रोसॉफ्ट को लीजिए। माइक्रोसॉफ्ट का हेडक्वार्टर अमेरिका में है। इस कंपनी के सॉफ्टवेअर के कुछ अंश भारत और अन्य कई देशों में बनते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेअर पूरी दुनिया में इस्तेमाल किये जाते हैं।

प्रश्न:2 भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?

उत्तर: जब भारत आजाद हुआ था तब यह एक गरीब देश था और यहाँ पर निजी पूँजी न के बराबर थी। उस समय स्थानीय उद्योग को संरक्षण की जरूरत थी ताकि वह पनप सके। इसलिए भारत में विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाये गये थे। जब स्थितियों में सुधार हुआ और भारत एक अच्छे बाजार में बदल गया तब सरकार ने अवरोधकों को हटाने का निर्णय लिया।

प्रश्न:3 श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को कैसे मदद करेगा?

उत्तर: श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को श्रमिकों की संख्या पर नियंत्रण रखने में मदद करेगा। फिर कोई भी कम्पनी श्रमिकों की मौसमी माँग के हिसाब से नियोजन कर सकती है या उन्हें काम से हटा सकती है। कम माँग की स्थिति में किसी भी कम्पनी को अतिरिक्त श्रमिकों को ढ़ोने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे कम्पनियों के मुनाफे में भी सुधार होगा।
प्रश्न:4 वैश्वीकरण ने किस तरह रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद की है?

उत्तर: वैश्वीकरण से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। नई नई कम्पनियों के आने से रोजगार के नये नये अवसर उत्पन्न हुए हैं। इसके कारण कई नये आर्थिक केंद्रों का विकास हुआ है, जैसे; गुड़गाँव, चंडीगढ़, पुणे, हैदराबाद, आदि।

प्रश्न:5 वैश्वीकरण से हमारी जीवनशैली पर क्या असर पड़ा है?

उत्तर: वैश्वीकरण का प्रभाव लोगों की जीवनशैली पर भी पड़ा है। 1990 के पहले तक लोग दो जोड़ी पैंट शर्ट में गुजारा कर लेते थे। अब तो लोगों के पास हर मौके के लिये अलग अलग ड्रेस होते हैं। पहले जींस की पैंट बहुत कम लोगों के पास हुआ करती थी। अब अधिकांश लोग जींस की पैंट का इस्तेमाल करने लगे हैं। लोगों का खान पान भी बदल गया है। अब मैगी के नूडल्स इस तरह से खरीदे जाते हैं जैसे महीने का राशन खरीदा जाता हो।
प्रश्न:1 वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: आधुनिक समय में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था आपस में जुड़ी हुई है। विश्व की अर्थव्यवस्था के इस परस्पर जुड़ाव को वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन कहते हैं।

प्रश्न:2 सिल्क रूट क्या है?

उत्तर: चीन का रेशम जिस रास्ते से अरब और फिर पश्चिम के देशों और अन्य देशों में जाता था उस रास्ते को सिल्क रूट कहा जाता था।
प्रश्न 1: बाजार में नियमों तथा विनियमों की आवश्यकता क्यों पड़ती है? कुछ उदाहरणों के द्वारा समझाएँ।

उत्तर: नियमों तथा विनियमों की मदद से बाजार सही ढ़ंग से काम करता है। किसी भी व्यवसाय का मुख्य लक्ष्य होता है मुनाफे को अधिक से अधिक करना। नियम और कानून से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मुनाफे के फेर में ग्राहक के जीवन स्तर से कोई समझौता न हो। हम अपने चारों ओर खाने की चीजों में मिलावट के कई उदाहरण देख सकते हैं। दूधवाला, मिठाईवाला, आदि अक्सर मिलावटी सामान बेचते हैं। सही नियम को लागू करके ही इस गलत आदत को रोका जा सकता है।

प्रश्न 2: भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत किन कारणों से हुई? इसके विकास के बारे में पता लगाएँ।

उत्तर: भारत के व्यवसायियों में गलत काम करने की पुरानी परंपरा रही है; जैसे मिलावट करना, जमाखोरी और कम वजन तौलना। 1960 के दशक से ही कई उपभोक्ता संघों का जन्म हुआ। उन्होंने जागरूकता अभियान चलाया और ग्राहकों की सुरक्षा के लिये लड़ाई लड़ी। इस लंबे संघर्ष के परिणामस्वरूप 1986 में कोपरा को लागू किया गया।

प्रश्न 3: दो उदाहरण देकर उपभोक्ता जागरूकता की जरूरत का वर्णन करें।

उत्तर: ज्यादातर लोग न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को देखने की जहमत भी नहीं उठाते और दुकानदार जितनी रकम माँगता है उतनी दे देते हैं। अपने पड़ोस के दुकानदार पर विश्वास करना एक अच्छी आदत हो सकती है लेकिन एमआरपी को चेक करना भी उतना ही जरूरी होता है। कई लोग तो दवा के पैक पर एक्सपायरी डेट भी नहीं देखते हैं। इससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि उपभोक्ता में जागरूकता की जरूरत है।
प्रश्न 5: उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी?

उत्तर: शोषण के खिलाफ उपभोक्ताओं की सुरक्षा के कारण ही कोपरा 1986 को लागू किया गया।

प्रश्न 6: अपने क्षेत्र के बाजार में जाने पर उपभोक्ता के रूप में अपने कुछ कर्तव्यों का वर्णन करें।

उत्तर: किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में जाने से पहले मुझे वहाँ यह देखना चाहिए कि पार्किंग की सुविधा है या नहीं। मुझे वहाँ पर अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता के बारे में भी पता करना चाहिए। मुझे यह देखना चाहिए कि एक्सपायरी डेट के बाद वाला कोई उत्पाद शेल्फ पर तो नहीं रखा है। बिल अदा करने से पहले उसके सही होने की जाँच करनी चाहिए।

प्रश्न 7: मान लीजिए, आप शहद की एक बोतल और बिस्किट का एक पैकेट खरीदते हैं। खरीदते समय आप कौन सा लोगो या शब्द चिह्न देखेंगे और क्यों?

उत्तर: शहद की बोतल पर मैं एगमार्क का लोगो देखूँगा। इस निशान से यह पता चलता है कि शहद को पैक करने से पहले खाद्य पदार्थ से संबंधित सुरक्षा के नियमों का पालन किया गया था।

प्रश्न 8: भारत में उपभोक्ताओं को समर्थ बनाने के लिये सरकार द्वारा किन कानूनी मानदंडों को लागू करना चाहिए?

उत्तर: भारत में उपभोक्ताओं को समर्थ बनाने के लिये सरकार ने 1986 में कोपरा को लागू किया। उसके बाद भारत ने कई स्तरों पर उपभोक्ता कोर्ट की स्थापना की ताकि लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।



History

प्रश्न:1 राष्ट्रवाद का क्या मतलब होता है?

उत्तर: जो विचारधारा किसी भी राष्ट्र के सदस्यों में एक साझा पहचान को बढ़ावा देती है उसे राष्ट्रवाद कहते हैं। राष्ट्रवाद की भावनाओं की जड़ें जमाने के लिये कई प्रतीकों का सहारा लिया जाता है; जैसे राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रगान, आदि।

प्रश्न:2 यूरोप में राष्ट्रवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई?

उत्तर: यूरोप में नये राष्ट्रों के निर्माण की प्रक्रिया 1789 में शुरु होने वाली फ्रांस की क्रांति के साथ शुरु हो गई थी। लेकिन किसी भी नई विचारधारा की तरह राष्ट्रवाद को भी अपनी जड़ जमाने में लगभ एक सदी लग गया।

प्रश्न:3 राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति कब और कहाँ हुई?

उत्तर: राष्ट्रवाद की पहली अभिव्यक्ति फ्रांस में 1789 में हुई।

प्रश्न:4 नेपोलियन ने प्रशासन के क्षेत्र में क्या बदलाव किये?

उत्तर: नेपोलियन ने प्रशासन के क्षेत्र में कई क्रांतिकारी बदलाव किये और प्रशासन व्यवस्था को बेहतर और कुशल बनाया। नेपोलियन ने 1804 में सिविल कोड लागू किया। इसे नेपोलियन कोड भी कहा जाता है। इस कोड ने जन्म के आधार पर मिलने वाली हर सुविधा को समाप्त कर दिया। हर नागरिक को समान हैसियत प्रदान की गई और संपत्ति के अधिकार को पुख्ता किया गया। नेपोलियन ने फ्रांस की तरह अपने नियंत्रण वाले हर इलाके में प्राशासनिक सुधार किये। उसने सामंती व्यवस्था को खत्म किया। किसानों को दासता और जागीर को अदा होने वाले शुल्कों से मुक्त किया। उसने शहरों में प्रचलित शिल्प मंडलियों द्वारा लगाई गई पाबंदियों को भी समाप्त किया। यातायात और संचार के साधनों में सुधार किये गये।

प्रश्न:5 नेपोलियन के बारे में यूरोप के अन्य इलाकों में क्या भावना थी?

उत्तर: फ्रांस ने जिन इलाकों पर कब्जा जमाया गया था, वहाँ के लोगों की फ्रांसीसी शासन के बारे में मिली जुली प्रतिक्रिया थी। शुरु शुरु में लोगों ने फ्रांस की सेना को आजादी के दूत के रूप में देखा। लेकिन जल्दी ही यह भावना बदल गई। लोगों को समझ में आने लगा कि इस नई शासन व्यवस्था से राजनैतिक आजादी की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। टैक्स में भारी बढ़ोतरी हुई। लोगों को जबरदस्ती फ्रांस की सेना में भर्ती कराया गया। इस सबके फलस्वरूप लोगों का शुरुआती जोश जल्दी ही विरोध में बदलने लगा।

प्रश्न:6 फ्रांसीसी क्रांति के पहले यूरोप की क्या स्थिति थी?

उत्तर: अठारहवीं सदी के मध्यकाल में यूरोप में वैसे राष्ट्र नहीं हुआ करते थे जैसा हम आज जानते और समझते हैं। आधुनिक जर्मनी, इटली और स्विट्जरलैंड कई सूबों, प्रांतों और साम्राजयों में बँटे हुए थे। हर शासक अपने आप में स्वतंत्र हुआ करता था। पूर्वी और मध्य यूरोप में कई शक्तिशाली राजा थे जिनके अधीन विभिन्न प्रकार के लोग रहा करते थे। इन लोगों की कोई साझा पहचान नहीं होती थी। उनमें यदि कोई समानता थी तो वह थी किसी एक खास शासक के प्रति समर्पण।

प्रश्न:7 अठारहवीं सदी के यूरोप का कुलीन वर्ग कैसा था?

उत्तर: यूरोपीय महाद्वीप में जमीन से संपन्न कुलीन वर्ग हमेशा से ही सामाजिक और राजनैतिक तौर पर प्रभावशाली हुआ करता था। कुलीन वर्ग के लोगों की जीवन शैली एक जैसी होती थी जिसका इस बात से कोई लेना देना नहीं था कि वे किस क्षेत्र में रहते थे। शायद इसी जीवन शैली के कारण वे एक सूत्र में बंधे रहते थे। उनकी जागीरें ग्रामीण इलाकों में होती थीं और उनके आलीशान बंगले शहरी इलाकों में होते थे। आपस में संबंध बनाये रखने के लिये उनके परिवारों के बीच शादियाँ भी होती थीं। वे फ्रेंच भाषा बोलते थे ताकि अपनी एक खास पहचान बनाये रखें और कूटनीतिक संबंध जारी रखें।

प्रश्न:8 यूरोप में मध्यम वर्ग का उदय कैसे हुआ?

उत्तर: पश्चिमी और केंद्रीय यूरोप के कुछ भागों में उद्योग धंधे में वृद्धि होने लगी थी। इससे शहरों का विकास हुआ और उन शहरों में एक नये व्यावसायिक वर्ग का उदय हुआ। इस नये वर्ग का जन्म बाजार के लिये उत्पादन की मंशा से हुआ था। इस परिघटना ने समाज में नये समूहों और वर्गों को जन्म दिया। इस नये सामाजिक वर्ग में एक वर्ग मजदूरों का था और दूसरा मध्यम वर्ग का। उस मध्यम वर्ग के मुख्य हिस्सा थे उद्योगपति, व्यापारी और व्यवसायी। इसी मध्यम वर्ग ने राष्ट्रीय एकता की भावना को एक रूप प्रदान किया।

प्रश्न:9 यूरोप में उन्नीसवीं सदी में आर्थिक क्षेत्र में कौन से सुधार हुए?

उत्तर: 1834 में प्रसिया की पहल पर जोवरलिन के कस्टम यूनियन का गठन हुआ। बाद में अधिकाँश जर्मन राज्य भी इस यूनियन में शामिल हो गये। चुंगी की सीमाएँ समाप्त की गईं और मुद्राओं के प्रकार को तीस से घटाकर दो कर दिया गया। इसी बीच रेल नेटवर्क के विकास ने आवगमन को और सरल बना दिया। इससे एक तरह के आर्थिक राष्ट्रवाद का विकास हुआ।

प्रश्न:10 ग्रीस की आजादी पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: ग्रीस की आजादी का संघर्ष 1821 में शुरु हुआ था। ग्रीस के राष्ट्रवादियों को ग्रीस के ऐसे लोगों से भारी समर्थन मिला जिन्हे देशनिकाला दे दिया गया था। इसके अलावा उन्हें पश्चिमी यूरोप के अधिकाँश लोगों से भी समर्थन मिला जो प्राचीन ग्रीक संस्कृति का सम्मान करते थे। मुस्लिम साम्राज्य के विरोध करने वाले इस संघर्ष का समर्थन बढ़ाने के लिए कवियों और कलाकारों ने भी जन भावना को इसके पक्ष में लाने की भरपूर कोशिश की। यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि ग्रीस उस समय ऑटोमन साम्राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था। आखिरकार 1832 में कॉन्स्टैंटिनोपल की ट्रीटी के अनुसार ग्रीस को एक स्वतंत्र देश की मान्यता दे दी गई। ग्रीस की आजादी की लड़ाई ने पूरे यूरोप के पढ़े लिखे वर्ग में राष्ट्रवाद की भावना को और मजबूत कर दिया।

प्रश्न:11 इटली के एकीकरण में कैवर का क्या योगदान था?

उत्तर: इटली के विभिन्न क्षेत्रों को एक करने के आंदोलन की अगुवाई मुख्यमंत्री कैवर ने की थी। उसने फ्रांस से एक कूटनीतिक गठबंधन किया और इसलिए 1859 में ऑस्ट्रिया की सेना को हराने में कामयाब हो गया। उस लड़ाई में सेना के जवानों के अलावा, कई सशस्त्र स्वयंसेवकों ने भी भाग लिया था जिनकी अगुवाई जिउसेपे गैरीबाल्डी कर रहा था। 1860 के मार्च महीने में वे दक्षिण इटली और टू सिसली के राज्य की ओर बढ़ चले। उन्होंने स्थानीय किसानों का समर्थन जीत लिया और फिर स्पैनिश शासकों को उखाड़ फेंकने में कामयाब हो गए। 1861 में विक्टर इमैंयुएल (द्वितीय) को एक समग्र इटली का राजा घोषित किया गया।
प्रश्न 1: निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें:

(a) उपनिवेशकारों के ‘सभ्यता मिशन’ का क्या अर्थ था।

उत्तर: उपनिवेशकारों को लगता था कि वे ‘विकसित’ थे और अन्य देशों के लोग पिछ्ड़े थे। उन्हें अपनी संस्कृति सबसे उत्तम लगती थी और अन्य संस्कृतियों को वे हेय दृष्टि से देखते थे। उपनिवेशकारों का ऐसा मानना था कि ‘विकसित’ होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी बनती थी कि पिछड़े लोगों को सभ्यता के पाठ पढ़ाएँ। यही उनके सभ्यता मिशन का अर्थ था।
(b) हुइन फू सो

उत्तर: इसी तरह के आंदोलनों में से एक था होआ हाओ, जिसकी शुरुआत 1939 में हुई थी और जो मेकॉन्ग डेल्टा के क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हुआ था। इस आंदोलन के जनक का नाम था हुइन फू सो, जो कई तरह के चमत्कार किया करते थे और गरीबों की मदद करते थे। हुइन फू सो अनाप शनाप खर्चे की आलोचना करते थे और बहुत लोकप्रिय थे। उन्होंने कई सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाया; जैसे बाल विवाह, जुआ, शराब और अफीम।

फ्रेच शासकों ने हुइन फू सो के आंदोलन को कुचलने की कोशिश की। हुइन फू सो को पागल करार कर दिया और उसे पागल बोन्ये का नाम दिया गया। उसे एक पागलखाने में डाल दिया गया। लेकिन जो डॉक्टर उसे पागल होने का सर्टिफिकेट देने पहुँचा वही उसका प्रशंसक बन गया। अंत में उसे देशनिकाला देकर लाओस भेज दिया गया। उसके कई अनुयायियों को कॉन्संट्रेशन कैंपों में डाल दिया गया।

प्रश्न 2: निम्नलिखित की व्याख्या करें:

(a) वियतनाम के केवल एक तिहाई विद्यार्थी ही स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे।

उत्तर: फ्रांसीसी अफसरों की नीति थी कि जानबूझकर फ्रेंच के फाइनल इम्तिहान में वियतनाम के छात्रों को फेल कर दिया जाता था। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि वियतनाम के लोग ऊँचे पदों पर न पहुँच पाएँ। इसलिए वियतनाम के एक तिहाई विद्यार्थी ही स्कूली पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी कर पाते थे।

(b) फ्रांसीसियों ने मेकॉंग डेल्टा क्षेत्र में नहरें बनवाना और जमीनों को सुखाना शुरु किया।

उत्तर: फ्रांसीसियों ने फसल की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से मेकांग डेल्टा की जमीन को सींचने के लिये नहर बनाने शुरु कर दिये। इन नहरों से चावल की पैदावार बढ़ाने में काफी मदद मिली। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि 1900 में कुल 274,000 हेक्टेअर के मुकाबले 1930 में 11 लाख हेक्टेअर पर धान की खेती होने लगी थी। 1931 आते-आते वियतनाम में होने वाली धान की कुल उपज का दो तिहाई हिस्सा निर्यात होने लगा, और वियतनाम धान निर्यात करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया था।
(c) सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले, जिसे स्कूल से निकाल दिया गया था।

उत्तर: एक लड़की ने वियतनामी संस्कृति के मखौल उड़ाए जाने का विरोध किया। उसके बदले में उस लड़की को स्कूल से निकाल दिया गया। लड़की को मिलने वाली सजा के विरोध में भारी विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया। आखिरकार, सरकार को लोगों के विरोध के आगे झुकना पड़ा। सरकार ने आदेश दिया कि साइगॉन नेटिव गर्ल्स स्कूल उस लड़की को वापस कक्षा में ले।

(d) हनोई के आधुनिक नवनिर्मित इलाकों में चूहे बहुत थे।

उत्तर: हनोई शहर के निर्माण में अत्याधुनिक अभियंत्रण और वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया था। उपनिवेशी शासकों के लिए बने सुंदर शहर में चौड़ी सड़कें और नालियाँ थीं। लेकिन स्वच्छता के मिसाल के तौर पर बड़ी नालियों में चूहों की जनसंख्या तेजी से बढ़ने लगी। इसका नतीजा यह हुआ कि हनोई शहर में प्लेग की महामारी फैल गई।

प्रश्न 3: टोंकिन फ्री स्कूल की स्थापना के पीछे कौन से विचार थे? वियतनाम में औपनिवेशिक विचारों के लिहाज से यह उदाहरण कितना सटीक है?

उत्तर: वियतनाम के लोगों को फ्रेंच भाषा और संस्कृति की शिक्षा देने के उद्देश्य से टोंकिन फ्री स्कूल की स्थापना हुई थी। दरअसल, उपनिवेशकारी यह चाहते थे कि क्लर्कों की एक फौज तैयार की जा सके जिसको छोटे-मोटे काम पर लगाया जा सके। फ्रेंच शासक वियतनाम के लोगों पर फ्रेंच संस्कृति को भी थोपना चाहते थे।

प्रश्न 4: वियतनाम के बारे में फान यू त्रिन्ह का उद्देश्य क्या था? फान बोई चाक और उनके विचारों में क्या भिन्नता थी?

उत्तर: फान यू त्रिन्ह और फान बोई चाउ के बीच काफी मतभेद थे। फान बोई चाक राजतंत्र के पक्षधर थे जबकि फान यू त्रिन्ह प्रजातंत्र की वकालत करते थे। फान बोई चाउ पुरानी व्यवस्था की ओर लौटना चाहते थे, जबकि फान यू त्रिन्ह उदारवाद और लोगों की स्वच्छंदता पर बल देते थे। लेकिन दोनों का उद्देश्य एक ही था, “वियतनाम को गुलामी से मुक्ति दिलाना।“


 
प्रश्न 5: इस अध्याय में आपने जो पढ़ा है, उसके हवाले से वियतनाम की संस्कृति और जीवन पर चीन के प्रभावों की चर्चा करें।

उत्तर: वियतनाम और चीन के तार प्राचीन काल से ही आपस में जुड़े हुए रहे हैं। वियतनाम सिल्क रूट के जलीय मार्ग पर स्थित है, इसलिए यहाँ हमेशा से चीनी संस्कृति का आयात होता रहा है। इसे समझने के लिए वियतनाम की धार्मिक मान्यताओं को देखने पर पता चलता है कि इसपर बौद्ध धर्म, कंफ्यूशियस और स्थानीय परंपराओं का प्रभाव है। हम जानते हैं बौद्ध धर्म भारत से आया था, और कंफ्यूशियस के विचार चीन से आये थे। वियतनाम के अभिजात वर्ग की कामकाज की भाषा चीनी थी।

प्रश्न 6: वियतनाम में उपनिवेशवाद-विरोधी भावनाओं के विकास में धार्मिक संगठन की भूमिका क्या थी?

उत्तर: इस अध्याय में हमने देखा कि वियतनाम की धार्मिक मान्यताओं पर बौद्ध धर्म, कंफ्यूशियस और स्थानीय परंपराओं का प्रभाव है। फ्रांस से आई मिशनरियों द्वारा वहाँ इसाई धर्म के प्रचार प्रसार की कोशिश की जा रही थी जो स्थानीय लोगों को पसंद नहीं आया। अठारहवीं सदी से ही पश्चिमी मान्यताओं के विरोध में कई धार्मिक आंदोलन शुरु हो चुके थे। इसाई धर्म के खिलाफ होने वाले आंदोलनों का एक उदाहरण है 1868 का स्कॉलर रिवोल्ट।

प्रश्न 7: वियतनाम युद्ध में अमेरिकी हिस्सेदारी के कारणों की व्याख्या करें। अमेरिका के इस कृत्य से अमेरिका में जीवन पर क्या असर पड़े?

उत्तर: वियतनाम में कम्यूनिस्ट पार्टी की सरकार बनने से अमेरिकी सरकार को यह डर सताने लगा कि आसपास के क्षेत्रों में भी वैसी ही सरकारें बनेंगी। अमेरिका हर हाल में कम्युनिज्म को फैलने से रोकना चाहता था, इसलिए उसने वियतनाम पर आक्रमण कर दिया। अमेरिका में अधिकतर लोग वियतनाम में अमेरिकी दखल का विरोध कर रहे थे। कई तत्कालीन विचारकों को लगता था कि ऐसे युद्ध में पड़ना ही नहीं चाहिए जिसमें जीत की संभावना नगण्य हो। अमेरिकी मीडिया दो धड़ों में बँटी हुई थी। कुछ उस युद्ध की तारीफ कर रहे थे तो कुछ आलोचना।


 
प्रश्न 8: अमेरिका के खिलाफ वियतनामी युद्ध का निम्नलिखित दृष्टिकोण से मूल्यांकन कीजिए:

(a) हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग पर माल ढ़ोने वाला कुली।

उत्तर: हो ची मिन्ह भूलभुलैया मार्ग पर माल ढ़ोने वाले कुली के लिए अमेरिका ऐसा दुश्मन लगता होगा जिसे हर हाल में परास्त करना जरूरी था। वह अपनी जान पर खेलकर वियतनाम के लिए लड़ने वाले सैनिकों के लिए रसद पहुँचाने में जुट जाता था। जब अमेरिका के बमवर्षक विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई देती होगी तो उस कुली को झटपट छुपने के लिए भागना पड़ता होगा। विमानों के गुजर जाने के बाद वह एक नये जोश के साथ अपने रास्ते पर आगे बढ़ता होगा।

(b) एक महिला सिपाही

उत्तर: महिलाओं के लिए वह युद्ध अतिरिक्त जिम्मेदारी लेकर आया होगा। पहले तो महिलाओं पर केवल परिवार पालने की जिम्मेदारी थी। लेकिन युद्ध के दौरान अपनी मातृभूमि की रक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिल गई होगी। यह युद्ध उनके लिये वह मौका था जिसमें वह सार्वजनिक जीवन में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले सकें।

प्रश्न 9: वियतनाम में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष में महिलाओं की क्या भूमिका थी? इसकी तुलना भारतीय राष्ट्रवादी संघर्ष में महिलाओं की भूमिका से कीजिए।

उत्तर: महिलाओं ने हो ची मिन्ह मार्ग में सप्लाई को सुचारु रूप से चलाने में अहम योगदान दिया। युद्ध में भी इन महिलाओं की सक्रिय भूमिका थी। शांति काल में महिलाओं ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में पूरी जिम्मेदारी उठाई। भारत के स्वाधीनता संग्राम में महिलाओं का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक महत्ता के लिये हुआ था। हम कह सकते हैं कि भारत में महिलाओं की भूमिका केवल नेपथ्य से उचित समर्थन देने भर की थी।
प्रश्न:1 सत्याग्रह का सिद्धांत क्या कहता है?

उत्तर: सत्याग्रह का सिद्धांत कहता है कि यदि कोई सही मकसद के लिये लड़ाई लड़ रहा हो तो उसे अपने ऊपर अत्याचार करने वाले से लड़ने के लिये ताकत की जरूरत नहीं होती है।

प्रश्न:2 रॉलैट ऐक्ट ने अंग्रेजी सरकार को क्या शक्तियाँ प्रदान की?

उत्तर: इस ऐक्ट ने सरकार को राजनैतिक गतिविधियों को कुचलने के लिये असीम शक्ति दे दी थी। इस ऐक्ट के मुताबिक बिना ट्रायल के ही राजनैतिक कैदियों को दो साल तक के लिये बंदी बनाया जा सकता था।

प्रश्न:3 असहयोग से गांधीजी का मतलब था?

उत्तर: महात्मा गांधी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक स्वराज (1909) में लिखा कि भारत में अंग्रेजी राज इसलिए स्थापित हो पाया क्योंकि भारत के लोगों ने उनके साथ सहयोग किया। भारतीय लोगों के सहयोग के कारण अंग्रेज यहाँ पर हुकूमत करते रहे। यदि भारत के लोग सहयोग करना बंद कर दें, तो अंग्रेजी राज एक साल के अंदर चरमरा जायेगा और स्वराज आ जायेगा। गांधीजी को पूरा विश्वास था कि यदि भारतीय लोग अंग्रेजों से सहयोग करना बंद कर देंगे तो अंग्रेजों के पास भारत को छोड़कर जाने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचेगा।

प्रश्न:4 असहयोग आंदोलन के कुछ प्रस्तावों को लिखें।

उत्तर: असहयोग आंदोलंके कुछ प्रस्ताव निम्नलिखित हैं:

अंग्रेजी सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियों को वापस करना।
सिविल सर्विस, सेना, पुलिस, कोर्ट, लेजिस्लेटिव काउंसिल और स्कूलों का बहिष्कार।
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
यदि सरकार अपनी दमनकारी नीतियों से बाज न आये, तो संपूर्ण अवज्ञा आंदोलन शुरु करना।
प्रश्न:5 असहयोग आंदोलन ठंढ़ा क्यों पड़ गया?

उत्तर: असहयोग आंदोलन निम्नलिखित कारणों से ठंढ़ा पड़ गया:

मिल में बने कपड़ों की तुलना में खादी महँगी पड़ती थी। गरीब लोग खादी को खरीदने में समर्थ नहीं थे।
अंग्रेजी संस्थानों के बहिष्कार से विकल्प के तौर पर भारतीय संस्थानों की कमी की समस्या उत्पन्न हो गई। ऐसे संस्थान बहुत धीरे-धीरे पनप पा रहे थे। शिक्षक और छात्र दोबारा स्कूलों में जाने लगे। इसी तरह वकील भी अपने काम पर लौटने लगे।
प्रश्न:6 साइमन कमीशन बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: इस कमीशन को भारत में संवैधानिक सिस्टम के कार्य का मूल्यांकन करने और जरूरी बदलाव के सुझाव देने के लिए बनाया गया था।

प्रश्न:7साइमन कमीशन का विरोध क्यों हुआ?

उत्तर: इस कमीशन में केवल अंग्रेज सदस्य ही थे, एक भी भारतीय सदस्य नहीं था। इसलिए भारतीय नेताओं ने इसका विरोध किया।

प्रश्न:8 दांडी मार्च का देश में क्या असर हुआ?

उत्तर: दांडी मार्च ने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। देश के विभिन्न भागों में हजारों लोगों ने नमक कानून को तोड़ा। लोगों ने सरकारी नमक कारखानों के सामने धरना प्रदर्शन किया। विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया। किसानों ने लगान देने से मना कर दिया। आदिवासियों ने जंगल संबंधी कानूनों का उल्लंघन किया।

प्रश्न:9 किसानों के लिये स्वराज की लड़ाई का क्या मतलब था?

उत्तर: किसानों के लिए स्वराज की लड़ाई का मतलब था अधिक लगान के विरुद्ध लड़ाई। जब 1931 में लगान दरों में सुधार के बगैर ही आंदोलन बंद कर दिया गया तो किसान अत्यधिक निराश थे। जब 1932 में आंदोलन को दोबारा शुरु किया गया तो अधिकांश किसानों ने इसमें भाग लेने से मना कर दिया।
प्रश्न:a) उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई क्यों थी?

उत्तर: उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन ने लोगों को एक प्रबल मुद्दा दिया जिससे वे आसानी से जुड़ सके और एक ही प्लेटफॉर्म पर आ सके। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि उपनिवेशों में राष्ट्रवाद के उदय की प्रक्रिया उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी हुई थी।

प्रश्न:b) पहले विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में किस प्रकार योगदान दिया?

उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने भारत के लोगों के लिए भारी आर्थिक समस्या खड़ी कर दी। इसके अलावा, भारतीय लोगों की ब्रिटिश सेना में जबरन भर्ती ने भी लोगों को उपनिवेशी शासकों के खिलाफ कर दिया। यह राष्ट्रवादी नेताओं के लिए बड़ा ही अनुकूल समय था जब वे लोगों को उपनिवेशी शासकों के विरोध में जाने के लिए उकसा सकते थे। इस तरह से प्रथम विश्व युद्ध ने भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास में अच्छा योगदान किया।

प्रश्न:c) भारत के लोग रॉलट एक्ट के विरोध में क्यों थे?

उत्तर: रॉलट एक्ट ने उपनिवेशी शासकों अकूत ताकत प्रदान की। यह कानून राजनीतिक दलों के निर्माण और विरोध के खिलाफ काम करने वाला था। इसलिए भारत के लोग रॉलट एक्ट के खिलाफ थे।

प्रश्न:d) गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला क्यों लिया?

उत्तर: 1921 आते आते यह आंदोलन कई जगह हिंसक होने लगा था। गांधीजी किसी भी प्रकार की हिंसा के सख्त खिलाफ थे, इसलिए उन्होंने असहयोग आंदोलन को वापस लेने का फैसला लिया।

प्रश्न:2 सत्याग्रह के विचार का क्या मतलब है?

उत्तर: महात्मा गांधी ने जन आंदोलन का एक नायाब तरीका निकाला जिसे सत्याग्रह का नाम दिया गया। यह इस सिद्धांत पर आधारित था कि यदि कोई सही मुद्दे के लिए लड़ रहा है तो फिर उस लड़ाई के लिए लाठी या गोली की ताकत की जरूरत नहीं है। गांधीजी का मानना था कि एक सत्याग्रही किसी भी लड़ाई को अहिंसा से जीत सकता है। इसके लिए बदले की भावना या हिंसा की भावना की कोई जरूरत नहीं है।

प्रश्न:3 निम्नलिखित पर अखबार के लिए रिपोर्ट लिखें:

प्रश्न:a) जलियाँवाला बाग हत्याकांड

उत्तर: अमृतसर, 13 अप्रैल 1919: अंग्रेजी जेनरल डायर ने जलियाँवाला बाग में मेला देखने आये निर्दोष लोगों पर गोली चलाने के आदेश दिये। बाहर जाने के सारे रास्ते बंद कर दिये गये थे ताकि अंग्रेजी ताकत के गुस्से से कोई न बच सके। इस गोलीकांड में कई लोगों की जान चली गई और उनसे कई गुना अधिक लोग घायल हो गये।

प्रश्न:b) साइमन कमिशन

उत्तर: लंदन 1928: भारत में संवैधानिक सिस्टम की कार्यप्रणाली को सुचारु करने के लिए अंग्रेजी सरकार ने साइमन कमीशन का गठन किया है। ऐसा कहा गया है कि यह कमीशन कुछ नये बदलाव लेकर आयेगी ताकि भारत में एक नये प्रशासनिक तंत्र को बनाया जाएगा। इस कमीशन की सबसे बड़ी विडंबना है कि इसमें एक भी भारतीय नहीं है। ज्यादातर विचारकों को यह बात समझ में नहीं आ रही है कि केवल अंग्रेजों से भरी हुई यह टीम भारत के मामलों में सही निर्णय कैसे लेगी। कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने इस कमिशन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

प्रश्न:4 इस अध्याय में दी गई भारत माता की छवि और अध्याय 1 में दी गई जर्मेनिया की छवि की तुलना कीजिए।

उत्तर: दोनों मामलों में मातृभूमि को एक महिला के रूप में दिखाया गया है। दोनों आकृतियो6 को पारंपरिक परिधानों से सजाया गया है और उनके हाथों में कुछ रूपक तत्व दिये गये हैं। ये रूपक स्वतंत्रता, उदारवाद, शांति और ऊर्जा के प्रतीक हैं।

प्रश्न:5 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल होने वाले सभी सामाजिक समूहों की सूची बनाइए। इसके बाद उनमें से किन्हीं तीन को चुन कर उनकी आशाओं और संघर्षों के बारे में लिखए हुए यह दर्शाइए कि वे आंदोलन में शामिल क्यों हुए।

उत्तर: असहयोग आंदोलन में किसान, आदिवासी, बागान मजदूर, छात्र, वकील, सरकारी कर्मचारी, महिलाएँ, आदि शामिल हुई थीं। इनमे से तीन का विवरण नीचे दिया गया है:

किसान: किसानों का विरोध अधिक मालगुजारी और तालुकदार और जमींदारों द्वारा लगाये गये अन्य शुल्कों के खिलाफ था। किसानों की माँग थी कि मालगुजारी को कम किया जाए, बेगार को समाप्त किया जाए और जमींदारों का बहिष्कार किया जाए।

आदिवासी: आदिवासियों ने महात्मा गांधी के स्वराज का अपना ही अर्थ निकाला था। आदिवासियों को जंगल में पशु चराने और वहाँ से फल और जलावन लेने की मनाही थी। इस तरह से जंगल के नए कानून उनकी आजीविका के लिए खतरा साबित हो रहे थे। सरकार उन्हें सड़क निर्माण में बेगार करने के लिए बाधित कर रही थी। आदिवासी मानते थे कि इस आंदोलन से उन्हें उन सब समस्याओं से छुटकारा मिल जाएगा।

बागान मजदूर: इंडियन एमिग्रेशन एक्ट 1859 के अनुसार बागान में काम करने वाले मजदूरों को बिना अनुमति के बागान छोड़ने की मनाही थी। जब असहयोग आंदोलन की खबर चारों ओर फैलने लगी तो बादान के कई मजदूरों ने वहाँ के अफसरों की आज्ञा मानने से इनकार कर दिया।

प्रश्न:6 नमक यात्रा की चर्चा करते हुए स्पष्ट करें कि यह उपनिवेशव्बाद के खिलाफ प्रतिरोध का एक असरदार प्रतीक था।

उत्तर: नमक एक शक्तिशाली प्रतीक था जिसे हर व्यक्ति से जोड़ा जा सकता था। नमक का इस्तेमाल हर तबके का आदमी समान रूप से करता था। गरीबों के लिए नमक कर को समाप्त करने का मतलब था दाम में गिरावट। किसी व्यवसायी के लिए इसका मतलब था कि वे ऐसे कई अन्य करों की समाप्ति की उम्मीद कर सकते थे जिससे उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा था।

प्रश्न:7 कल्पना कीजिए कि आप सिविल नाफरमानी आंदोलन में हिस्सा लेने वाली महिला हैं। बताइए कि इस अनुभव का आपके जीवन में क्या अर्थ होता।

उत्तर: पारंपरिक तौर पर एक महिला की भूमिका घर चलाने की मानी जाती है। लेकिन असहयोग आंदोलन में भाग लेकर मैं राष्ट्र निर्माण में भागीदारी कर सकूंगी। यह मेरे लिए किसी प्रोत्साहन से कम नहीं था। जब मैंने लाठी चार्ज में घायल व्यक्तियों की सेवा की तो मेरा हृदय उल्लास से भर गया। ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपने ही भाई बंधुओं की सेवा कर रही थी।

प्रश्न:8 राजनीतिक नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर क्यों बँटे हुए थे?

उत्तर: जिन्ना जैसे कई नेता मानते थे कि हिंदु बहुल देश में मुसलमानों का भविष्य सुरक्षित नहीं रहेगा। वह अपने समुदाय के लिए अधिक शक्ति की इच्छा रखते थे। अंबेदकर जैसे दलित नेताओं की स्थिति भी कमोबेश वैसी ही थी। दलितों के खिलाफ उत्पीड़न के एक लंबे इतिहास के कारण उन्हें यह डर था कि सवर्णों के हाथों में राजनीतिक सत्ता आने से दलितों की स्थिति और भी खराब हो जाएगी। दूसरी ओर, महात्मा गांधी का मानना था कि पृथक निर्वाचिका बनाने से वैसे लोग मुख्य धारा से और भी दूर चले जाएँगे। उन्हें लगता था कि पृथक निर्वाचिका बनाने से हाशिए पर रहने वाले लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना और भी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए विभिन्न नेता पृथक निर्वाचिका के सवाल पर बँटे हुए थे।
प्रश्न:1 सत्रहवीं सदी से पहले होने वाले आदान प्रदान के दो उदाहरण दीजिए। एक उदाहरण एशिया से और एक उदाहरण अमेरिका महाद्वीपों के बारे में चुनें।

उत्तर: सत्रहवीं सदी से पहले होने वाले आदान प्रदान के दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:

एशिया से उदाहरण: नूडल चीन से आया है और भारत, इटली और दुनिया के अन्य देशों तक पहुँचा है।

अमेरिका से उदाहरण: आलू अमेरिका से आया है और आयरलैंड तक पहुँचा।

प्रश्न:2 बताएँ कि पूर्व आधुनिक विश्व में बीमारियों के वैश्विक प्रसार ने अमेरिकी भूभागों के उपनिवेशीकरण में किस प्रकार मदद की।

उत्तर: सोलहवीं सदी के मध्य तक अमेरिका में पुर्तगाली और स्पैनिश उपनिवेशों की शुरुआत ठोस रूप से हो चुकी थी। लेकिन यह जीत हथियारों की बदौलत नहीं हुई बल्कि बीमारियों की वजह से हुई। यूरोप के लोग पहले ही चेचक से प्रभावित हो चुके थे इसलिए उनमे इस बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधन क्षमता विकसित हो चुकी थी। लेकिन अमेरिकी लोग दुनिया के अन्य भागों से कटे हुए थे इसलिए उनमें इस बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधन क्षमता नहीं थी। जब यूरोप के लोग अमेरिका पहुँचे तो अपने साथ इस बीमारी के रोगाणु भी लेकर आए। अमेरिका के कुछ हिस्सों में इस बीमारी ने पूरी आबादी को नष्ट कर दिया। इस प्रकार से यूरोपियन आसानी से अमेरिका पर कब्जा कर सके।

प्रश्न:3 निम्नलिखित के प्रभावों की व्याख्या करते हुए संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखें:

प्रश्न:a) कॉर्न लॉ के समाप्त करने के बारे में ब्रिटिश सरकार का फैसला।

उत्तर: कॉर्न लॉ समाप्त होने के निम्नलिखित प्रभाव पड़े:

ब्रिटेन में उपजने वाले खाद्य पदार्थों के मुकाबले आयात होने वाले खाद्य पदार्थ सस्ते हो गये।
इस कारण से जमीन का एक बड़ा हिस्सा कृषि से विहीन हो गया और लोग भारी संख्या में बेरोजगार हो गये। काम की तलाश में लोग बड़ी संख्या में शहरों की ओर पलायन करने लगे। कई लोग देश के बाहर भी पलायन कर गये।
खाद्य पदार्थों की घटी हुई कीमतों के कारण ब्रिटेन में उनकी मांग तेजी से बढ़ी। इस माँग को पूरा करने के लिए पूर्वी यूरोप, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर जमीन को साफ किया गया ताकि खेती हो सके।
खाद्यान्नों को बंदरगाहों तक ले जाने की जरूरत भी महसूस हुई। इसके लिए रेल लाइनें बिछाई गईं ताकि कृषि उत्पादन के क्षेत्रों को बंदरगाहों से जोड़ा जा सके। कृषि उत्पादन क्षेत्रों में नई आबादी भी बसने लगी। इन सब कामों के लिए लंदन जैसे वित्तीय केंद्रों से पूँजी का प्रवाह होने लगा।
प्रश्न:b) अफ्रीका में रिंडरपेस्ट का आना।

उत्तर: रिंडरपेस्ट का अफ्रिका में आगमन 1880 के दशक के आखिर में हुआ था। यह बीमारी उन घो‌ड़ों के साथ आई थी जो ब्रिटिश एशिया से लाए गए थे। ऐसा उन इटैलियन सैनिकों की मदद के लिए किया गया था जो पूर्वी अफ्रिका में एरिट्रिया पर आक्रमण कर रहे थे। रिंडरपेस्ट पूरे अफ्रिका में किसी जंगल की आग की तरह फैल गई। 1892 आते आते यह बीमारी अफ्रिका के पश्चिमी तट तक पहुँच चुकी थी। इस दौरान रिंडरपेस्ट ने अफ्रिका के मवेशियों की आबादी का 90% हिस्सा साफ कर दिया।

अफ्रिकियों के लिए मवेशियों का नुकसान होने का मतलब था रोजी रोटी पर खतरा। अब उनके पास खानों और बागानों में मजदूरी करने के अलावा और कोई चारा नहीं था। इस तरह से मवेशियों की एक बीमारी ने यूरोपियन को अफ्रिका में अपना उपनिवेश फैलाने में मदद की।

प्रश्न:c) विश्वयुद्ध के कारण यूरोप में कामकाजी उम्र के पुरुषों की मौत।

उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने पूरी दुनिया को कई मायनों में झकझोर कर रख दिया था। लगभग 90 लाख लोग मारे गए और 2 करोड़ लोग घायल हो गये।

मरने वाले या अपाहिज होने वालों में ज्यादातर लोग उस उम्र के थे जब आदमी आर्थिक उत्पादन करता है। इससे यूरोप में सक्षम शरीर वाले कामगारों की भारी कमी हो गई। परिवारों में कमाने वालों की संख्या कम हो जाने के कारण पूरे यूरोप में लोगों की आमदनी घट गई।

ज्यादातर पुरुषों को युद्ध में शामिल होने के लिए बाध्य होना पड़ा लिहाजा कारखानों में महिलाएँ काम करने लगीं। जो काम पारंपरिक रूप से पुरुषों के काम माने जाते थे उन्हें अब महिलाएँ कर रहीं थीं।

प्रश्न:d) भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामंदी का प्रभाव।

उत्तर: आर्थिक मंदी से भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा। 1928 से 1934 के बीच भारत का आयात और निर्यात घटकर आधा हो गया। इसी दौरान भारत में गेहूँ की कीमतों में 50% की कमी आई।

कृषि उत्पादों की घटती कीमतों के बावजूद सरकार किसानों से पहले दर पर ही लगान वसूलना चाहती थी। इस तरह से इस स्थिति में किसानों की हालत सबसे ज्यादा खराब थी। कई किसानों को अपनी जमापूँजी निकालना पड़ा और जमीन और जेवर भी बेचने पड़े। इस तरह से भारत महँगी धातुओं का निर्यातक बन गया।

भारत के शहरी क्षेत्रों में आर्थिक मंदी का उतना असर नहीं पड़ा। कीमतें घटने के कारण शहर में रहने वाले लोगों का जीवन पहले से आसान हो गया था। भारत के राष्ट्रवादी नेताओं के दवाब के कारण उद्योगों को अधिक संरक्षण मिलने लगा जिससे उद्योग में अधिक निवेश हुआ।

प्रश्न:e) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानांतरित करने का फैसला।

उत्तर: पिछले दो दशकों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने अपने उत्पादन को एशियाई देशों में स्थानांतरित कर लिया है। इसका मुख्य कारण है इन देशों में कम मजदूरी दर का होना। इस नये प्रचलन के कारण भारत, चीन, ब्राजी, फिलिपींस और मलेशिया जैसे देशों में रोजगार के नये अवसर पैदा हुए हैं। इससे इन देशों के लोगों की आमदनी भी बढ़ी है और चीजों की माँग भी बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप भारत, चीन और जापान जैसे देश विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्तियों के रूप में उभरे हैं।

प्रश्न:4 खाद्य उपाब्धता पर तकनीक के प्रभाव को दर्शाने के लिए इतिहास से दो उदाहरण दें।

उत्तर: रेल के प्रसार के कारण विभिन्न देशों से यूरोप तक खाद्यान्न पहुँचाना आसान हो गया। खाद्य पदार्थों के ब‌ड़े पैमाने पर ढ़ुलाई के कारण भोजन सस्ता और सुलभ हो गया। इससे यूरोप में खाना अच्छी क्वालिटी का हो गया और लोगों की जेब की पहुँच में आ गया।

स्टीम से चलने वाले जहाजों और रेफ्रिजरेशन टेक्नॉलोजी के कारण मीट को तैयार करके अमेरिका से यूरोप तक ले जाना संभव हो गया। अब ब्रिटेन के लोगों के लिए मीट सस्ता हो गया जिससे उनका खान पान बेहतर हो सका।

प्रश्न:5 ब्रेटन वुड्स समझौते का क्या अर्थ है।

उत्तर: 1944 की जुलाई में अमेरिका के न्यू हैंपशायर के ब्रेटन वुड्स नामक जगह पर यूनाइटेड नेशंस मॉनिटरी ऐंड फिनांशियल कॉन्फ्रेंस हुआ। इस कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड की स्थापना हुई। आइएमएफ और वर्ल्ड बैंक को ब्रेटन वुड्स इंस्टिच्यूशन भी कहा जाता है।

प्रश्न:6 कल्पना कीजिए कि आप कैरीबियाई क्षेत्र में काम करने वाले गिरमिटिया मजदूर हैं। इस अध्यय में दिए गए विवरणों के आधार पर अपने हालात और अपनी भावनाओं का वर्णन करते हुए अपने परिवार के नाम एक पत्र लिखें।

उत्तर: इस चिट्ठी के कुछ अंश इस तरह से हो सकते हैं:

हमें लगातार कई घंटों तक काम करना पड़ता है जिससे कठिनाई होती है। हमें यहाँ से वापस जाने की इजाजत भी नहीं मिलती है। कोई थोड़ा भी विरोध करे तो उसके साथ लोग सख्ती से पेश आते हैं। हमलोगों ने इस जिंदगी से समझौता करना सीख लिया है और सारी तकलीफों के बीच खुशी के कुछ पल ढ़ूँढ़ ही लेते हैं। हमलोग होली और मुहर्रम मिलजुलकर मनाते हैं। हम नई नई चीजें पकाने की कोशिश भी करते हैं। हममें से कई तो अपने गाँव की बोली तक भूल चुके हैं।

प्रश्न:7 अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन तरह की गतियों या प्रवाहों की व्याख्या करें। तीनों प्रकार की गतियों के भारत और भारतीयों से संबंधित एक एक उदाहरण दें और उनके बारे में संक्षेप में लिखें।

उत्तर: अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक विनिमयों में तीन तरह के प्रवाह निम्नलिखित हैं:

व्यापार का आदान प्रदान: भारत सदियों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का अभिन्न हिस्सा रहा है। अंग्रेजी शासन शुरु होने के पहले भारते के मसाले सुदूर देशों तक जाते थे और बाहर से जवाहरात यहाँ आते थे।

श्रम का आदान प्रदान: आधुनिक भारत से सॉफ्टवेयर के ज्ञाता अमेरिका में जाकर काम करते हैं।

पूँजी का आदान प्रदान: आयात और निर्यात के कारण पूँजी का प्रवाह दोनों दिशाओं में होता रहता है।

प्रश्न:8 महामंदी के कारणों की व्याख्या करें।

उत्तर: महामंदी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

जरूरत से ज्यादा कृषि उत्पादन: 1920 के दशक में कृषि क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा उत्पादन एक अहम समस्या थी। कृषि उत्पादों की अत्यधिक सप्लाई के कारण कीमतें गिर रही थीं। किसानों ने इसकी भरपाई के लिए और भी अधिक उत्पादन करना शुरु किया। इसके कारण बाजार में कृषि उत्पादों की बाढ़ आ गई; जिससे कीमतें और नीचे गिरीं। खरीददारों की कमी के कारण कृषि उत्पाद सड़ने लगे।

अमेरिका द्वारा कर्ज में कमी: कई यूरोपीय देश कर्जे के लिए अमेरिका पर बुरी तरह से निर्भर थे। लेकिन अमेरिका के साहूकार थोड़ी ही बात पर घबराहट दिखाने लगते थे। 1928 के शुरुआती छ: महीने में अमेरिका द्वारा दिये गये कर्ज की राशि थी 100 करोड़ डॉलर। लेकिन एक साल के भीतर यह राशि घटकर 24 करोड़ रह गई। अमेरिका द्वारा हाथ खींच लिए जाने के कारण कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा।

प्रश्न:9 जी-77 देशों से आप क्या समझते हैं? जी-77 को किस आधार पर ब्रेटन वुड्स की जुड़वाँ संतानों की प्रतिक्रिया कहा जा सकता है, व्याख्या करें।

उत्तर: ये संस्थाएँ पुरानी उपनिवेशी ताकतों के नियंत्रण में थी। इसलिए ज्यादातर विकासशील देशों पर अभी भी इस बात का खतरा था कि पुरानी उपनिवेशी ताकतें उनका शोषण कर सकती हैं। एक नए आर्थिक ढ़ाँचे की माँग रखने के लिए इन देशों ने G – 77 (77 देशों का समूह) बनाया। चूँकि इस संगठन का निर्माण उन देशों द्वारा किया गया था जो ब्रेटन वुड्स के संस्थापक देशों में से कुछ के गुलाम थे इसलिए जी-77 को ब्रेटन वुड्स की जुड़वा संतानों की प्रतिक्रिया कहा जा सकता है।
प्रश्न:1 सिल्क रूट का क्या मतलब है?

उत्तर: जो व्यापार मार्ग चीन को पश्चिमी देशों और अन्य देशों से जोड़ता था उसे सिल्क रूट कहते हैं। उस जमाने में कई सिल्क रूट थे। सिल्क रूट ईसा युग की शुरुआत के पहले से ही अस्तित्व में था और पंद्रहवीं सदी तक बरकरार था।

प्रश्न:2 किस तरह चेचक की बीमारी ने यूरोपीय लोगों के लिये अमेरिका में रास्ता आसान बना दिया?

उत्तर: चेचक की बीमारी ने यूरोप के लोगों पर पहले ही आक्रमण किया था। इसलिये यूरोप के लोगों के शरीर में इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधन क्षमता विकसित हो चुकी थी। लेकिन तब तक अमेरिका दुनिया के अन्य भागों से अलग थलग था। इसलिये अमेरिकी लोगों के शरीर में चेचक से लड़ने के लिये प्रतिरोधन क्षमता विकसित नहीं हुई थी। जब यूरोप के लोग अमेरिका पहुँचे तो वे अपने साथ चेचक के जीवाणु भी ले गये। इससे अमेरिका के लोगों में चेचक की बीमारी फैलने लगी। इस बीमारी ने अमेरिका के कुछ भागों की पूरी आबादी साफ कर दी। इस तरह से यूरोपियन लोगों को अमेरिका पर आसानी से जीत हासिल हो गई।

प्रश्न:3 उन्नीसवीं सदी के आखिरी दशक तक किस तरह से कृषि क्षेत्र में एक वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण हो गया?

उत्तर: औद्योगीकरण के कारण ब्रिटेन में भोजन की माँग बढ़ने लगी थी। इस माँग को पूरा करने के लिये पूर्वी यूरोप, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया में जोर शोर से खेती होने लगी। कृषि कार्य में मजदूरों की माँग को पूरा करने के लिये लोगों का भारी संख्या में पलायन हुआ। रेल लाइनें बिछाकर खेतों को बंदरगाहों से जोड़ा गया। इस तरह से अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में उन्नीसवीं सदी के अंत तक कृषि क्षेत्र में एक वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण हो गया।

प्रश्न:4 उन्नीसवीं सदी की मुख्य तकनीकी खोजें क्या हैं? इन खोजों ने किस तरह से अर्थव्यवस्था के भूमंडलीकरण में मदद की?

उत्तर: इस युग के कुछ मुख्य तकनीकी खोज हैं रेलवे, स्टीम शिप और टेलिग्राफ।

रेलवे ने बंदरगाहों और आंतरिक भूभागों को आपस में जोड़ दिया।
स्टीम शिप के कारण माल को भारी मात्रा में अतलांतिक के पार ले जाना आसान हो गया।
टेलीग्राफ की मदद से संचार व्यवस्था में तेजी आई और इससे आर्थिक लेन देन बेहतर रूप से होने लगे।
प्रश्न:5 बंधुआ मजदूर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे मजदूर जो किसी खास मालिक के लिए किसी खास अवधि के लिए काम करने को प्रतिबद्ध होते हैं बंधुआ मजदूर कहलाते हैं।

प्रश्न:6 उन्नीसवीं सदी में औद्योगीकरण का भारतीय व्यापार पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: भारत से उम्दा कॉटन के कपड़े वर्षों से यूरोप निर्यात हो रहे थे। लेकिन औद्योगीकरण के बाद स्थानीय उत्पादकों ने ब्रिटिश सरकार को भारत से आने वाले कॉटन के कपड़ों पर प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य किया। इससे ब्रिटेन में बने कपड़े भारत के बाजारों में भारी मात्रा में आने लगे। 1800 में भारत के निर्यात में 30% हिस्सा कॉटन के कपड़ों का था। 1815 में यह गिरकर 15% हो गया और 1870 आते आते यह 3% ही रह गया। लेकिन 1812 से 1871 तक कच्चे कॉटन का निर्यात 5% से बढ़कर 35% हो गया। इस दौरान निर्यात किए गए सामानों में नील (इंडिगो) में तेजी से बढ़ोतरी हुई। भारत से सबसे ज्यादा निर्यात होने वाला सामान था अफीम जो मुख्य रूप से चीन जाता था।

प्रश्न:7 आर्थिक मंदी का भारत के शहरों पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: भारत के शहरी क्षेत्रों में आर्थिक मंदी का उतना असर नहीं पड़ा। कीमतें घटने के कारण शहर में रहने वाले लोगों का जीवन पहले से आसान हो गया था।

प्रश्न:8 आइएएफ और वर्ल्ड बैंक को ब्रेटन वुड्स इंस्टिच्यूशन क्यों कहते हैं?

उत्तर: दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1944 की जुलाई में अमेरिका के न्यू हैंपशायर के बेटन वुड्स नामक जगह पर यूनाइटेड नेशंस मॉनिटरी ऐंड फिनांशियल कॉन्फ्रेंस हुआ था। इस कॉन्फ्रेंस में इंटरनेशन मॉनिटरी फंड की स्थापना हुई। उसके बाद इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन ऐंड डेवलपमेंट की स्थापना हुई जिसे वर्ल्ड बैंक के नाम से भी जाना जाता है। इसलिये इन दो संस्थानों को ब्रेटन वुड्स इंस्टिच्यूशन भी कहते हैं।
प्रश्न:1 निम्नलिखित की व्याख्या करें:

प्रश्न:a) ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किये।

उत्तर: स्पिनिंग जेनी के आविष्कार के बाद ब्रिटेन के हथकरघा कारीगरों को लगने लगा कि इस नई मशीन से उनका रोजगार छिन जायेगा। इस मशीन को वे अपने अस्तित्व के लिये खतरा समझने लगे। इसलिए ब्रिटेन की महिला कामगारों ने स्पिनिंग जेनी मशीनों पर हमले किये और तोड़-फोड़ किया।

प्रश्न:b) सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय शहरों के सौदागर गाँवों में किसानों और कारीगरों से काम करवाने लगे।

उत्तर: शहरी क्षेत्रों में गिल्ड हुआ करते थे जो बहुत प्रभावशाली थे। उनके कारण किसी भी नये व्यवसायी के लिए व्यवसाय में शुरुआत करना बहुत मुश्किल होता था। ऐसे गिल्ड किसी भी क्षेत्र में उत्पादन और कीमत दोनों को नियंत्रित करने का काम करते थे। इसलिए जो व्यापारी अपनी शुरुआत करना चाहते थे उन्होंने गाँवों से सामान बनवाना बेहतर समझा। इसलिए सत्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय शहरों के सौदागर गाँवों में किसानों और कारीगरों से काम करवाने लगे।

प्रश्न:c) सूरत बंदरगाह अठारहवीं सदी के अंत तक हाशिये पर पहुँच गया था।

उत्तर: इस अवधि में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने कई अन्य शहरों में अपने व्यापार का केंद्र विकसित कर लिया था। इसके कारण सूरत का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ था और अठारहवीं सदी के अंत तक सूरत हाशिये पर पहुँच चुका था।

प्रश्न:d) ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारत में बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए गुमाश्तों को नियुक्त किया था।

उत्तर: ईस्ट इंडिया कम्पनी परंपरागत बिचौलियों और व्यवसायियों को समाप्त करना चाहती थी। इसके पीछे कम्पनी का उद्देश्य था कि व्यापार पर सीधा नियंत्रण बनाया जा सके। इसलिए कम्पनी ने भारत में बुनकरों पर निगरानी रखने के लिए गुमाश्तों को नियुक्त किया था।

प्रश्न:2 प्रत्येक के आगे ‘सही’ या ‘गलत’ लिखें:

प्रश्न:a) उन्नीसवीं सदी के आखिर में यूरोप की कुल श्रम शक्ति का 80 प्रतिशत तकनीकी रूप से विकसित औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रहा था।

उत्तर: गलत

प्रश्न:b) अठारहवीं सदी तक महीन कपड़े के अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर भारत का दबदबा था।

उत्तर: सही

प्रश्न:c) अमेरिकी गृहयुद्ध के फलस्वरूप भारत के कपास निर्यात में कमी आई।

उत्तर: गलत

प्रश्न:d) फ्लाई शटल के आने से हथकरघा कामगारों की उत्पादकता में सुधार हुआ।

उत्तर: सही

प्रश्न:3 पूर्व औद्योगीकरण का मतलब बताएँ।

उत्तर: ब्रिटेन में औद्योगीकरण से ठीक पहले के दौर को पूर्व औद्योगीकरण कहते हैं। यह वह समय था जब ब्रिटेन में कारखाने नहीं खुले थे। इस अवधि के व्यवसाय का नेटवर्क अनूठे किस्म का था जिसे व्यापारी नियंत्रित करते थे। व्यापारी गाँव के लोगों से चीजें बनवाते थे। लोग अपने गाँव में रहते हुए ही काम किया करते थे। उन उत्पादों को गाँवों से लंदन जैसे शहरों तक लाया जाता था और फिर वहाँ से दुनिया के अन्य भागों में निर्यात किया जाता था।

प्रश्न:4 उन्नीसवीं सदी के यूरोप में कुछ उद्योगपति मशीनों की बजाय हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता क्यों देते थे?

उत्तर: इस अवधि में मजदूरों की कोई कमी नहीं थी। मजदूरों की प्रचुर संख्या होने के कारण मजदूरों की कमी का डर नहीं था और अधिक मजदूरी देने की चिंता भी नहीं थी। नई मशीनों को खरीदने के लिए अधिक खर्च करने की बजाय उद्योगपतियों ने हाथ से काम करने वाले श्रमिकों को प्राथमिकता दी।

प्रश्न:5 ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारतीय बुनकरों से सूती और रेशमी कपड़े की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या किया?

उत्तर: ईस्ट इंडिया कम्पनी ने भारतीय बुनकरों से सूती और रेशमी कपड़े की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाये। कम्पनी ने बुनकरों पर सीधा नियंत्रण बनाना शुरु किया। ऐसा करने के लिए एडवांस का सिस्टम शुरु किया गया। बुनकरों को एडवांस पैसे दिये जाते थे ताकि वे कच्चा माल और उपकरण खरीद सकें। लेकिन जो बुनकर एडवांस ले लेता था उसे किसी अन्य को अपने उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं दी जाती थी।

प्रश्न:6 पहले विश्व युद्ध के समय भारत का औद्योगिक उत्पादन क्यों बढ़ा?

उत्तर: पहले विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन की मिलें सेना की जरूरतों का सामान बनाने में व्यस्त हो गईं। इससे ब्रिटेन से भारत को आने वाला आयात घट गया। इसके कारण घरेलू बाजार की माँग को पूरा करने के लिए भारत के उद्योगों को अधिक उत्पादन करना पड़ा। भारत के उद्योगों से भी ब्रिटेन की सेना के लिए सामान बनाने के लिये कहा गया। इस तरह से भारत के उत्पादों की माँग बढ़ गई और भारत का औद्योगिक उत्पादन बढ़ गया।
प्रश्न:1 पूर्व औद्योगीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: यूरोप में औद्योगीकरण के पहले के काल को पूर्व औद्योगीकरण का काल कहते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाये तो यूरोप में सबसे पहले कारखाने लगने के पहले के काल को पूर्व औद्योगीकरण का काल कहते हैं।

प्रश्न:2 पूर्व औद्योगीकरण के दौरान व्यापारियों ने गाँव पर अधिक ध्यान क्यों दिया?

उत्तर: शहरों में ट्रेड और क्राफ्ट गिल्ड बहुत शक्तिशाली होते थे। इस प्रकार के संगठन प्रतिस्पर्धा और कीमतों पर अपना नियंत्रण रखते थे। वे नये लोगों को बाजार में काम शुरु करने से भी रोकते थे। इसलिये किसी भी व्यापारी के लिये शहर में नया व्यवसाय शुरु करना मुश्किल होता था। इसलिये वे गाँवों की ओर मुँह करना पसंद करते थे।

प्रश्न:3 कारखाने खुलने से क्या लाभ हुए?

उत्तर: कारखानों के खुलने से कई फायदे हुए। श्रमिकों की कार्यकुशलता बढ़ गई। अब नई मशीनों की सहायता से प्रति श्रमिक आधिक मात्रा में और बेहतर उत्पाद बनने लगे। औद्योगीकरण की शुरुआत मुख्य रूप से सूती कपड़ा उद्योग में हुई। कारखानों में श्रमिकों की निगरानी और उनसे काम लेना अधिक आसान हो गया।

प्रश्न:4 औद्योगीकरण के शुरुआती दौर में व्यापारी मशीनों से दूर ही रहना पसंद करते थे। क्यों?

उत्तर: औद्योगीकरण के शुरुआती दौर में व्यापारी मशीनों से दूर ही रहना पसंद करते थे। इसके कारण निम्नलिखित हैं:

मशीनें महंगी होती थीं और उनके मरम्मत में भी काफी खर्च लगता था।
आविष्कारकों या निर्माताओं के दावों के विपरीत नई मशीनें बहुत कुशल भी नहीं थीं।
उस जमाने में श्रमिकों की किल्लत या अधिक पारिश्रमिक जैसी कोई समस्या नहीं थी।
मशीनों से बनि चीजें हाथ से बनी चीजों की गुणवत्ता और सुंदरता का मुकाबला नहीं कर पाती थीं।
प्रश्न:5 औद्योगीकरण के शुरुआती दौर में शहर में आने वाले श्रमिकों का जीवन कैसा होता था?

उत्तर: शहर में नौकरी मिलना बहुत कठिन होता था। अधिकतर लोगों को साल के कुछ महीने ही काम मिल पाता था। ऐसे लोगों को अक्सर रैन बसेरों या फुटपाथ पर रात गुजारनी होती थी।

प्रश्न:6 महिलाओं ने स्पिनिंग जेनी का विरोध क्यों किया?

उत्तर: महिलाएँ हाथ से कपड़े बुनती थीं। उन्हें डर था कि स्पिनिंग जेनी के आने से उनका रोजगार छिन जायेगा। इसलिये महिलाओं ने स्पिनिंग जेनी का विरोध किया।

प्रश्न:7 गुमाश्ता कौन थे?

उत्तर: गुमाश्ता ईस्ट इंडिया कम्पनी के एजेंट होते थे। गुमाश्ता का काम होता था बुनकरों के काम की निगरानी करना, आने वाले माल का संग्रहण करना और कपड़े की क्वालिटी की जाँच करना। गुमाश्ता किसी भी गाँव के लिये बाहरी आदमी होता था जो सिपाहियों और चपरासियों के साथ आता था और अपनी अकड़ दिखाता था। गुमाश्ता और बुनकरों के बीच अक्सर टकराव होते रहते थे।

प्रश्न:8 जॉबर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: उद्योगपति अक्सर लोगों को काम पर रखने के लिए जॉबर की मदद लेते थे जो किसी प्लेसमेंट कंसल्टेंट की तरह काम करता था। अक्सर कोई पुराना और भरोसेमंद मजदूर जॉबर बन जाता था। जॉबर अक्सर अपने गाँव के लोगों को प्रश्रय देता था। वह उन्हें शहर में बसने में मदद करता था और जरूरत के समय कर्ज भी देता था। इस तरह से जॉबर एक प्रभावशाली व्यक्ति बन गया था। वह लोगों से बदले में पैसे और उपहार माँगता था और मजदूरों के जीवन में भी दखल देता था।

प्रश्न:9 भारत के व्यवसायी सूत के मोटे कपड़े ही क्यों बनाते थे?

उत्तर: भारत के व्यवसायी यहाँ के बाजार में मैनचेस्टर के सामानों से प्रतिस्पर्धा से बचना चाहते थे। इसलिये वे सूत के मोटे कपड़े ही बनाते थे।

प्रश्न:10 पहले विश्व युद्ध का भारत के व्यवसाय पर क्या असर पड़ा?

उत्तर: पहले विश्व युद्ध ने स्थिति बदल दी। ब्रिटेन की मिलें सेना की जरूरतें पूरा करने में व्यस्त हो गईं। इससे भारत में आयात घट गया। भारत की मिलों के सामने एक बड़ा घरेलू बाजार तैयार था। भारत की मिलों को ब्रिटेन की सेना के लिए सामान बनाने के लिए भी कहा गया। इस तरह से घरेलू और विदेशी बाजारों में माँग बढ़ गई। इससे उद्योग धंधे में तेजी आ गई।
प्रश्न:1 अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी क्यों फैलने लगी? कारण बताइए।

उत्तर: लंदन में कोई बड़ी फैक्टरी न होने के बावजूद यह शहर पलायन करने वालों की मुख्य मंजिल हुआ करता था। लंदन के डॉकयार्ड में रोजगार के काफी अवसर थे। इसके अलावा कपड़ा, जूते, लकड़ी, फर्नीचर, मेटल, इंजीनियरिंग, प्रिंटिंग और प्रेसिजन इंस्ट्रूमेंट में काफी लोगों को काम मिलता था। इसलिए अठारहवीं सदी के मध्य से लंदन की आबादी बढ़ने लगी।

प्रश्न:2 उन्नीसवीं और बीसवीं सदी के बीच लंदन में औरतों के लिए उपलब्ध कामों में किस तरह के बदलाव आए? ये बदलाव किन कारणों से आए?

उत्तर: युद्ध के दौरान अधिकतर पुरुष युद्ध लड़ने चले गये। इसलिए महिलाओं को कारखानों में काम मिलने लगा। जैसे ही युद्ध समाप्त हुआ, महिलाओं की नौकरियाँ जाने लगीं। अब अधिकाँश महिलाओं को घरों में काम करना पड़ा। इनमें से कई महिलाओं ने कपड़े सिलने, कपड़े धोने और माचिस बनाने का काम भी शुरु कर दिया।

प्रश्न:3 विशाल शहरी आबादी के होने से निम्नलिखित पर क्या असर पड़ता है? ऐतिहासिक उदाहरणों के साथ समझाइए।

प्रश्न:a) जमींदार

उत्तर: एक जमींदार मकान को किराये पर लगा कर अपनी आय बढ़ा सकता है। उन्नीसवीं सदी के आखिर और बीसवीं सदी की शुरुआत में लंदन में ऐसी ही स्थिति थी। बीसवीं सदी के शुरु में बम्बई में भी यही हुआ था।

प्रश्न:b) कानून व्यवस्था सँभालने वाला पुलिस अधीक्षक

उत्तर: शहर में जब आबादी बढ़ जाती है तो समाज में कई विसंगतियाँ आती हैं। जिन लोगों को सही रोजगार नहीं मिल पाता है वे छोटे मोटे अपराध करना शुरु कर देते हैं। आवास की किल्लत के कारण भी लोगों में रोष जमा होने लगता है। इससे अपराध में वृद्धि होती है। किसी पुलिस अधीक्षक के लिए यह एक चुनौतीभरा अवसर होता है क्योंकि उसे अपराध को नियंत्रण में रखना होता है।

प्रश्न:c) राजनीतिक दल का नेता

उत्तर: किसी राजनीतिक दल के नेता के लिए एक बड़ी आबादी से चुनौती भी मिलती है और उसके लिए अवसर भी होते हैं। एक बड़ी आबादी में रोष की भावना को रोकना एक चुनौती होती है। लेकिन यदि कोई नेता इसका सही हल निकाल लेता है तो फिर उसके लिए अपार जन समर्थन तैयार हो जाता है।

प्रश्न:4 निम्नलिखित की व्याख्या करें:

प्रश्न:a) उन्नीसवीं सदी में धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की जरूरत का समर्थन क्यों किया?

उत्तर: एक कमरे के मकानों में व्याप्त गंदगी से महामारी फैलने का खतरा रहता था। ऐसे घरों में आग का खतरा भी बना रहता था। अपराध के बढ़ने की भी आशंका रहती थी। इन सब दुष्परिणामों को रोकने के लिए धनी लंदनवासियों ने गरीबों के लिए मकान बनाने की जरूरत का समर्थन किया।

प्रश्न:b) बंबई की बहुत सारी फिल्में शहर में बाहर से आने वाली जिंदगी पर आधारित क्यों होती थीं?

उत्तर: बम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर लोग बाहर से पलायन करके आये थे। इसलिए वे उन आप्रवासियों की समस्या को बेहतर ढ़ंग से समझते थे। इसलिए बंबई की बहुत सारी फिल्में शहर में बाहर से आने वाली जिंदगी पर आधारित होती थीं।

प्रश्न:c) उन्नीसवीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि क्यों हुई?

उत्तर: उन्नीसवीं सदी के मध्य में बंबई की आबादी में भारी वृद्धि के कारण निम्नलिखित हैं:

अफीम और कपास के व्यापार में वृद्धि
कपड़ा मिलों का बड़ी संख्या में शुरु होना
रेल का विस्तार
प्रश्न:5 लोगों को मनोरंजन के अवसर उपलब्ध करने के लिए इंग्लैंड में उन्नीसवीं सदी में मनोरंजन के कौन कौन से साधन सामने आए।

उत्तर: लोगों को मनोरंजन के अवसर उपलब्ध करने के लिए इंग्लैंड में उन्नीसवीं सदी में मनोरंजन के निम्नलिखित साधन सामने आए:

लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी और म्यूजियम
प्रश्न:6 लंदन में आए उन सामाजिक परिवर्तनों की व्याख्या करें जिनके कारण भूमिगत रेलवे की जरूरत पैदा हुई। भूमिगत रेलवे के निर्माण की आलोचना क्यों हुई?

उत्तर: जब शहर का विस्तार होने लगा तो लोग काम की जगह से दूर रहने लगे। शहर से भीड़भाड़ कम करने के लिए भी यह जरूरी था कि आबादी के एक बड़े हिस्से को शहर से दूर भेज दिया जाये। लेकिन इसके लिए यातायात के एक ऐसे साधन की जरूरत थी जिससे लोग कम समय में अपने घर से काम करने की जगह तक पहुँच सकें। इसलिए लंदन में भूमिगत रेलवे की जरूरत महसूस हुई। शुरु शुरु में भूमिगत रेलवे के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया नकारात्मक थी। कई लोग इस बात से दुखी थे कि भूमिगत रेलवे के निर्माण के लिए कई मकानों को गिरा दिया गया था। कई लोगों को धुँए से भरे भूमिगत रेल में सफर करने में परेशानी होती थी।

प्रश्न:7 पेरिस के हॉसमानीकरण का क्या अर्थ है? इस तरह के विकास को आप किस हद तक सही या गलत मानते हैं? इस बात का समर्थन या विरोध करते हुए अखबार के संपादक को पत्र लिखिए और उसमें अपने दृष्टिकोण के पक्ष में कारण दीजिए।

उत्तर: बैरन हॉसमैन एक टाउन प्लानर थे जिन्होंने पेरिस को एक आदर्श शहर बनाने की कोशिश की। इस प्रक्रिया में लोगों को भारी संख्या में विस्थापित किया गया। इसके बाद एक सुंदर शहर तो बनकर तैयार हो गया लेकिन इससे ज्यादातर लोग परेशान हो गये।

कोई भी शहर सिर्फ आलीशान भवनों और यातायात की दक्ष व्यवस्था से ही विकसित नहीं होता है। एक शहर अपने लोगों के कारण भी विकसित होता है। हर शहर नाना प्रकार के लोगों का एक सुंदर मिश्रण होता है जिसमें हर व्यक्ति का अपना योगदान होता है। लोगों से ही शहर की आत्मा बनती है। हॉसमानीकरण के बाद पेरिस में हर सड़क, हर गली और हर भवन एक ही जैसा दिखता था। वह बिलकुल कृत्रिम शहर लगता था। किसी भी मुहल्ले की अपनी अलग पहचान ही नहीं थी।

प्रश्न:8 सरकारी नियमन और नए कानूनों ने प्रदूषण की समस्या को किस हद तक हल किया? निम्नलिखित के स्तर में परिवर्तन के लिए बने कानूनों की सफलता और विफलता का एक एक उदाहरण दीजिए:

प्रश्न:a) सार्वजनिक जीवन

उत्तर: दिल्ली में पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सीएनजी के इस्तेमाल पर कोर्ट का आदेश इसका एक अच्छा उदाहरण हो सकता है। जब से दिल्ली में सीएनजी का इस्तेमाल होने लगा है तब से यहाँ की हवा बेहतर हुई है। इससे आम जन जीवन की जिंदगी बेहतर हुई है।

प्रश्न:b) निजी जीवन

उत्तर: निजी जीवन को ठीक करने के लिए सरकार को कानून के साथ साथ नागरिकों को अधिकार और सुविधाएँ भी देनी पड़ती हैं। हम सभी जानते हैं कि कोयले या उपले की तुलना में एलपीजी एक बेहतर ईंधन है। ज्यादातर शहरी इलाकों में सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता को बेहतर किया है। इससे लोगों को भी इस स्वच्छ ईंधन को अपनाने में मदद मिली है। इससे गृहिणियों का जीवन पहले से बेहतर हुआ है। इससे वायु प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिली है।
प्रश्न:1 शहर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: शहर उस स्थान को कहते हैं जहाँ प्रमुख आर्थिक क्रियाओं में कृषि का कोई स्थान नहीं होता है। जब भोजन का उत्पादन इतना अधिक होने लगा कि उससे अन्य आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलने लगा तो शहरों का विकास हुआ।

प्रश्न:2 अठारहवीं सदी में अधिकतर लोग लंदन की तरफ पलायन क्यों करते थे?

उत्तर: लंदन में कोई बड़ी फैक्टरी नहीं थी। इसके बावजूद लंदन पलायन करने वालों की मुख्य मंजिल हुआ करता था। लंदन के डॉकयार्ड में रोजगार के काफी अवसर थे। इसके अलावा लोगों को कपड़ा, जूते, लकड़ी, फर्नीचर, मेटल, इंजीनियरिंग, प्रिंटिंग और प्रेसिजन इंस्ट्रूमेंट में भी काम मिलता था। इसलिये अठारहवीं सदी में अधिकतर लोग लंदन की तरफ पलायन करते थे।

प्रश्न:3 छोटे बच्चों को लंदन के कारखानों में काम करने से रोकने के लिये ब्रिटिश सरकार ने क्या कदम उठाये?

उत्तर: 1870 में कम्पल्सरी एजुकेशन एक्ट पास हुआ और 1902 में फैक्टरी एक्ट पास हुआ। इन कानूनों की मदद से यह सुनिश्चित किया गया कि छोटे बच्चों को कारखानों में काम न करना पड़े।

प्रश्न:4 लंदन में गरीब लोग किस तरह के मकान में रहते थे? इससे क्या समस्या थी?

उत्तर: गरीब लोग एक कमरे के मकानों में रहते थे। ऐसे मकानों की अधिक संख्या को जनता के स्वास्थ्य के लिये खतरा माना जाने लगा। ऐसे मकानों हवा आने जाने की समुचित व्यवस्था नहीं थी। ऐसे मकानों में सफाई का प्रावधान भी नहीं था। इन मकानों में हमेशा आग लगने का खतरा भी बना रहता था। कठिन परिस्थिति में रहने वाले लोग समाज में लड़ाई झगड़े के लिये अनुकूल परिस्थिति प्रदान करते थे।

प्रश्न:5 औद्योगीकरण से शहर में किस तरह के सामाजिक बदलाव हुए?

उत्तर: औद्योगीकरण के कारण शहर में सामाजिक बदलाव भी हुए। परिवार का आकार छोटा होता जा रहा था और व्यक्तिवाद बढ़ता जा रहा था। कामगार वर्ग में शादियाँ टूटने भी लगीं थीं। उच्च मध्य वर्ग की महिलाओं का अकेलापन बढ़ने लगा था।

प्रश्न:6 ब्रिटेन में श्रमिक वर्ग के लोग मनोरंजन के लिये क्या करते थे?

उत्तर: श्रमिक वर्ग के लोग पब में मिलते थे। उनके लिये एक दूसरे की खबर जानने और विचारों का आदान प्रदान करने के लिये पब एक अच्छी जगह थी। उन्नीसवीं सदी में लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी और म्यूजियम बनाये गये ताकि लोग ब्रिटेन के इतिहास और उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर सकें। म्यूजिक हॉल निम्न वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय थे। बीसवीं सदी की शुरुआत से ही सिनेमा हर वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय हो चुका था।

प्रश्न:7 बम्बई कैसे ब्रिटिश हुकूमत के कब्जे में आया?

उत्तर: सत्रहवीं सदी में बम्बई पुर्तगाल के अधीन था। यह सात द्वीपों का एक समूह था। 1661 में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय की शादी पुर्तगाल की राजकुमारी के साथ हुई और बम्बई शहर को उपहार स्वरूप चार्ल्स द्वितीय को दे दिया गया। इस तरह से बम्बई का नियंत्रण ब्रिटिश हुकूमत के हाथों में आ गया।

प्रश्न:8 बम्बई की चाल का वर्णन करें।

उत्तर: एक चाल एक बहुमंजिला इमारत होती थी। इस तरह के मकान निजी मालिकों की संपत्ति हुआ करते थे। हर चाल में एक कमरे के कई मकान होते थे। इनमें कोई प्राइवेट टॉयलेट नहीं होता था और कई लोगों को एक ही टॉयलेट से काम चलाना पड़ता था। किराया इतना अधिक होता था कि लोगों को किसी रिश्तेदार या स्वजातीय लोगों के साथ एक कमरा शेअर करना पड़ता था।
प्रश्न:1 निम्नलिखित के कारण दें:

प्रश्न:a) वुडब्लॉक प्रिंट या तख्ती की छ्पाई यूरोप में 1295 के बाद आई।

उत्तर: मार्को पोलो 1295 में जब चीन से वापस लौटा तो अपने साथ वुडब्लॉक प्रिंटिंग की जानकारी लेकर आया। इसलिए यूरोप में वुडब्लॉक प्रिंटिंग 1295 के बाद आई।

प्रश्न:b) मार्टिन लूथर मुद्रण के पक्ष में था और उसने इसकी खुलेआम प्रशंसा की।

उत्तर: मार्टिन लूथर ने रोमन कैथलिक चर्च की जो आलोचना की थी वह प्रिंट के जरिये ही जनमानस के एक बड़े हिस्से तक पहुँच पाई। इसलिए मार्टिन लूथर मुद्रण के पक्ष में था और उसने इसकी खुलेआम प्रशंसा की।

प्रश्न:c) रोमन कैथलिक चर्च ने सोलहवीं सदी के मध्य से प्रतिबंधित किताबों की सूची रखनी शुरु कर दी।

उत्तर: प्रिंट के कारण बाइबिल की नई व्याख्या लोगों तक पहुँची और लोग चर्च की शक्ति पर सवाल उठाने लगे। इसलिए रोमन कैथलिक चर्च ने सोलहवीं सदी के मध्य से प्रतिबंधित किताबों की सूची रखनी शुरु कर दी।

प्रश्न:d) महात्मा गांधी ने कहा कि स्वराज की लड़ाई दरअसल अभिव्यक्ति, प्रेस, और सामूहिकता के लिए लड़ाई है।

उत्तर: सरकारें जिस तरह से प्रिंट को नियंत्रित करने और कुचलने की कोशिश करती हैं उससे प्रिंट की शक्ति का अंदाजा हो जाता है। अंग्रेजी हुकूमत ने भारत में छपने वाली किताबों और अखबारों पर लगातार नजर रखनी शुरु कर दी और प्रेस को नियंत्रण में लाने के लिए कई कानून भी बनाए। इसलिए गांधी जी ने कहा कि स्वराज की लड़ाई दरअसल अभिव्यक्ति, प्रेस, और सामूहिकता के लिए लड़ाई है।

प्रश्न:2 छोटी टिप्पणी में इनके बारे में बताएँ:

प्रश्न:a) गुटेंबर्ग प्रेस

उत्तर: गुटेनबर्ग किसी व्यापारी के बेटे थे। अपने बचपन से ही उन्होंने जैतून और शराब की प्रेस देखी थी। उसने पत्थरों पर पॉलिस करने की कला भी सीखी थी। उसे सोने के जेवर बनाने में भी महारत हासिल थी और वह लेड के साँचे भी बनाता था जिनका इस्तेमाल सस्ते जेवरों को ढ़ालने के लिए किया जाता था।

इस तरह से गुटेनबर्ग के पास हर वह जरूरी ज्ञान था जिसका इस्तेमाल करके उसने प्रिंटिंग टेक्नॉलोजी को और बेहतर बनाया। उसने जैतून के प्रेस को अपने प्रिंटिंग प्रेस का मॉडल बनाया और अपने साँचों का इस्तेमाल करके छापने के लिए अक्षर बनाये। 1448 इसवी तक गुटेनबर्ग ने अपने प्रिंटिंग प्रेस को दुरुस्त बना लिया था। उसने अपने प्रेस में सबसे पहले बाइबिल को छापा।

प्रश्न:b) छपी किताब को लेकर इरैस्मस के विचार

उत्तर: इरैस्मस का मानना था कि बौद्धिक ज्ञान की अस्मिता के लिए किताबों का छपना अच्छी बात नहीं थी। उसका सोचना था कि प्रिंट के कारण बाजार में घटिया किताबें भर जाएँगी जिससे समाज को लाभ के स्थान पर घाटा अधिक होगा। घटिया किताबों की भीड़ में अच्छी रचना का अस्तित्व ही मिट जायेगा।

प्रश्न:c) वर्नाकुलर या देसी प्रेस एक्ट

उत्तर: वर्नाकुलर प्रेस एक्ट को 1878 में पारित किया गया। इस कानून ने सरकार को वर्नाकुलर प्रेस में समाचार और संपादकीय पर सेंसर लगाने के लिए अकूत शक्ति प्रदान की। राजद्रोही रिपोर्ट छपने पर अखबार को चेतावनी दी जाती थी। यदि उस चेतावनी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता हा तो फिर ऐसी भी संभावना होती थी कि प्रेस को बंद कर दिया जाये और प्रिंटिंग मशीनों को जब्त कर लिया जाये।

प्रश्न:3 उन्नीसवीं सदी में भारत में मुद्रण संस्कृति के प्रसार का इनके लिए क्या मतलब था:

प्रश्न:a) महिलाएँ

उत्तर: महिलाओं के जीवन और संवेदनाओं पर कई लेखकों ने लिखना शुरु किया। इसके कारण मध्यम वर्ग की महिलाओं में पढ़ने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी। कई ऐसे पिता या पति आगे आये जो स्त्री शिक्षा पर जोर देते थे। कुछ महिलाओं ने घर पर रहकर ही शिक्षा प्राप्त की, जबकि कुछ अन्य महिलाओं ने स्कूल जाना भी शुरु किया।

लेकिन पुरातनपंथी हिंदू और मुसलमान अभी भी स्त्री शिक्षा के खिलाफ थे। उनका मानना था कि शिक्षा से लड़कियों के दिमाग पर बुरे प्रभाव पड़ेंगे। लोग चाहते थे कि उनकी बेटियाँ धार्मिक ग्रंथ पढ़ें लेकिन उसके अलावा और कुछ न पढ़ें।

प्रश्न:b) गरीब जनता

उत्तर: मद्रास के शहरों में उन्नीसवीं सदी में सस्ती और छोटी किताबें आ चुकी थीं। इन किताबों को चौराहों पर बेचा जाता था ताकि गरीब लोग भी उन्हें खरीद सकें। बीसवीं सदी के शुरुआत से सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना शुरु हुई जिसके कारण लोगों तक किताबों की पहुँच बढ़ने लगी। कई अमीर लोग अपने क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के उद्देश्य से पुस्तकालय बनाने लगे। इससे गरीब लोग भी किताबें पढ़ने लगे और बदलती दुनिया के बारे में जानने लगे। इससे इतना फायदा हुआ कि कई मजदूरों ने भी किताबें लिखीं।

प्रश्न:c) सुधारक

उत्तर: प्रिंट ने समाज सुधारकों का काम आसान कर दिया। उनके नये विचार अब आसानी से जन मानस तक पहुँच सकते थे। पुरानी मान्यताओं पर खुल कर बहस संभव हो गया। इससे समाज को काफी फायदा हुआ।

प्रश्न:4अठारहवीं सदी के यूरोप में कुछ लोगों को क्यों ऐसा लगता था कि मुद्रण संस्कृति से निरंकुशवाद का अंत, और ज्ञानोदय होगा?

उत्तर: प्रिंट के कारण ज्ञानोदय के विचारकों के विचार लोकप्रिय हुए। इन विचारकों ने परंपरा, अंधविश्वास और निरंकुशवाद की कड़ी आलोचना की। प्रिंट के कारण संवाद और वाद-विवाद की नई संस्कृति का जन्म हुआ। अब आम आदमी भी मूल्यों, संस्थाओं और प्रचलनों पर विवाद करने लगा और स्थापित मान्यताओं पर सवाल करने लगा। इन सब बदलावों से कुछ लोगों को लगने लगा त्था कि मुद्रण संस्कृति से निरंकुशवाद का अंत, और ज्ञानोदय होगा।

प्रश्न:5 कुछ लोग किताबों की सुलभता को लेकर चिंतित क्यों थे? यूरोप और भारत से एक एक उदाहरण लेकर समझाएँ।

उत्तर: रूढ़िवादी लोगों को लगता था कि किताबें पढ़ने से लोगों के दिमाग फिर जाएँगे। यूरोप के कैथलिक चर्च को लगता था कि लोग उसकी अवहेलना करना शुरु कर देंगे। भारत के रूढ़िवादियों को लगता था कि लोग पारंपरिक मान्यताओं को तोड़ने लगेंगे और उससे सामाजिक विध्वंस हो जायेगा। इसलिए ऐसे लोग किताबों की सुलभता को लेकर चिंतित थे।

प्रश्न:6 उन्नीसवीं सदी में भारत में गरीब जनता पर मुद्रण संस्कृति का क्या असर हुआ?

उत्तर: मद्रास के शहरों में उन्नीसवीं सदी में सस्ती और छोटी किताबें आ चुकी थीं। इन किताबों को चौराहों पर बेचा जाता था ताकि गरीब लोग भी उन्हें खरीद सकें। बीसवीं सदी के शुरुआत से सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना शुरु हुई जिसके कारण लोगों तक किताबों की पहुँच बढ़ने लगी। कई अमीर लोग अपने क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने के उद्देश्य से पुस्तकालय बनाने लगे। इससे गरीब लोग भी किताबें पढ़ने लगे और बदलती दुनिया के बारे में जानने लगे। इससे इतना फायदा हुआ कि कई मजदूरों ने भी किताबें लिखीं।

प्रश्न:7 मुद्रण संस्कृति ने भारत में राष्ट्रवाद के विकास में क्या मदद की?

उत्तर: प्रिंट संस्कृति से लोगों में संवाद की संस्कृति का विकास हुआ। समाज सुधार के नये विचारों को अब बेहतर तरीके से लोगों तक पहुँचाया जा सकता था। गांधीजी ने अखबारों के माध्यम से स्वदेशी के अर्थ को अधिक शक्तिशाली तरीके से व्यक्त करना शुरु किया। भारत में स्थानीय बोलचाल की भाषाओं में कई अखबार प्रकाशित होने लगे। इससे भारत के जनमानस में राष्ट्रवाद की भावना को फैलाने में काफी मदद मिली। कई दमनकारी नीतियों के बावजूद प्रिंट संस्कृति एक ऐसा आंदोलन था जिसे रोका नहीं जा सकता था।
प्रश्न:1 प्रिंट टेक्नॉलोजी का विकास सबसे पहले कहाँ हुआ था?

उत्तर: प्रिंट टेक्नॉलोजी का विकास सबसे पहले चीन, जापान और कोरिया में हुआ।

प्रश्न:2 एकॉर्डियन बुक से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: शुरुआत में कागज पतले और झिर्रीदार होते थे। ऐसे कागज पर दोनों तरफ छपाई करना संभव नहीं था। कागज के दोनों सिरों को टाँके लगाकर फिर बाकी कागज को मोड़कर एकॉर्डियन बुक बनाई जाती थी।

प्रश्न:3 यूरोप में प्रिंट टेक्नॉलोजी कैसे आई?

उत्तर: मार्को पोलो जब 1295 में चीन से लौटा तो अपने साथ ब्लॉक प्रिंटिंग की जानकारी लेकर आया। इस तरह इटली में प्रिंटिंग की शुरुआत हुई। उसके बाद प्रिंट टेक्नॉलोजी यूरोप के अन्य भागों में भी फैल गई।

प्रश्न:4 गुटेनबर्ग में क्या विशेषता थी कि उसने प्रिंटिंग प्रेस बनाया?

उत्तर: गुटेनबर्ग किसी व्यापारी के बेटे थे। अपने बचपन से ही उन्होंने जैतून और शराब की प्रेस देखी थी। उसने पत्थरों पर पॉलिस करने की कला भी सीखी थी। उसे सोने के जेवर बनाने में भी महारत हासिल थी और वह लेड के साँचे भी बनाता था जिनका इस्तेमाल सस्ते जेवरों को ढ़ालने के लिए किया जाता था। इस तरह से गुटेनबर्ग के पास हर वह जरूरी ज्ञान था जिसका इस्तेमाल करके उसने प्रिंटिंग टेक्नॉलोजी को और बेहतर बनाया।

प्रश्न:5 प्रिंट टेक्नॉलोजी ने किस तरह से धार्मिक विवाद को जन्म दिया?

उत्तर: प्रिंट के आने से नये तरह के बहस और विवाद को अवसर मिलने लगे। धर्म के कुछ स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठने लगे। पुरातनपंथी लोगों को लगता था कि इससे पुरानी व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी हो रही थी। ईसाई धर्म की प्रोटेस्टैंट क्राँति भी प्रिंट संस्कृति के कारण ही संभव हो पाई थी। धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठाने वाले नये विचारों से रोम के चर्च को परेशानी होने लगी।

प्रश्न:6 प्रिंट टेक्नॉलोजी आने से भारत में क्या असर हुआ?

उत्तर: प्रिंट संस्कृति से भारत में धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक मुद्दों पर बहस शुरु करने में मदद मिली। लोग कई धार्मिक रिवाजों के प्रचलन की आलोचना करने लगे। इससे नई राजनैतिक बहस की रूपरेखा निर्धारित होने लगी। प्रिंट के कारण भारत के एक हिस्से का समाचार दूसरे हिस्से के लोगों तक भी पहुँचने लगा। इससे लोग एक दूसरे के करीब भी आने लगे।

प्रश्न:7 भारतीय उपन्यासकारों का उदय कैसे हुआ?

उत्तर: शुरु शुरु में भारत के लोगों को यूरोप के लेखकों के उपन्यास ही पढ़ने को मिलते थे। वे उपन्यास यूरोप के परिवेश में लिखे होते थे। इसलिए यहाँ के लोग उन उपन्यासों से तारतम्य नहीं बिठा पाते थे। बाद में भारतीय परिवेश पर लिखने वाले लेखक भी उदित हुए। ऐसे उपन्यासों के चरित्र और भाव से पाठक बेहतर ढ़ंग से अपने आप को जोड़ सकते थे।

प्रश्न:8 भारत में सेंसर की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर: 1857 के विद्रोह के बाद प्रेस की स्वतंत्रत के प्रति अंग्रेजी हुकूमत का रवैया बदलने लगा। वर्नाकुलर प्रेस एक्ट को 1878 में पारित किया गया। इस कानून ने सरकार को वर्नाकुलर प्रेस में समाचार और संपादकीय पर सेंसर लगाने के लिए अकूत शक्ति प्रदान की। राजद्रोही रिपोर्ट छपने पर अखबार को चेतावनी दी जाती थी। यदि उस चेतावनी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था तो फिर ऐसी भी संभावना होती थी कि प्रेस को बंद कर दिया जाये और प्रिंटिंग मशीनों को जब्त कर लिया जाये।
प्रश्न:1 इनकी व्याख्या करें:

प्रश्न:a) ब्रिटेन में आए सामाजिक बदलावों से पाठिकाओं की संख्या में इजाफा हुआ।

उत्तर: औद्योगिक क्राँति के बाद ब्रिटेन की महिलाओं के पास खाली समय बचने लगा। इस दौरान महिलाओं में साक्षरता भी बढ़ गई। इसलिए अब अधिक से अधिक महिलाएँ अपने खाली समय का उपयोग पढ़ने के लिए करती थीं। इसलिए पाठिकाओं की संख्या में इजाफा हुआ।

प्रश्न:b) राबिंसन क्रूसो के वे कौन से कृत्य हैं, जिनके कारण वह हमें ठेठ उपनिवेशकार दिखाई देने लगता है।

उत्तर: राबिंसन क्रूसो ने अश्वेत लोगों को मनुष्यों की तरह नहीं बल्कि नीच प्राणियों की तरह चित्रित किया है। वह उन्हें गुलाम बना लेता है। वह उनके नाम नहीं पूछता बल्कि किसी का नाम फ्राइडे रख देता है। उसकी इन हरकतों से पता चलता है कि रॉबिन्सन क्रूसो एक ठेठ उपनिवेशकार था।

प्रश्न:c) 1740 के बाद गरीब लोग भी उपन्यास पढ़ने लगे।

उत्तर: उस जमाने में उपन्यास महंगे हुआ करते थे। 1740 के बाद किराये पर किताबें देने वाले पुस्तकालयों का प्रचलन शुरु हुआ। इसलिए उसके बाद गरीब लोग भी उपन्यास पढ़ने लगे।

प्रश्न:d) औपनिवेशिक भारत के उपन्यासकार एक राजनैतिक उद्देश्य के लिए लिख रहे थे।

उत्तर: जिस तरीके से औपनिवेशी शासक भारत के इतिहास और वर्तमान की व्याख्या करते थे उससे कई उपन्यासकार सहमत नहीं थे। वह भारत की अपनी एक अलग तसवीर बनाना चाहते थे। कई उपन्यासकार भारतीय साहित्य और भारतीय जनता को अन्य से बेहतर दिखाना चाहते थे। इसलिए औपनिवेशिक भारत के उपन्यासकार एक राजनैतिक उद्देश्य के लिए लिख रहे थे।

प्रश्न:2 तकनीक और समाज में आए उन बदलावों के बारे में बतलाइए जिनके चलते अठारहवीं सदी के यूरोप में उपन्यास पढ़ने वालों की संख्या में वृद्धि हुई।

उत्तर: प्रिंट टेक्नॉलोजी में कई ऐसे सुधार आये जिनके किसी किताब की असंख्य कॉपियाँ छापना संभव हो गया था। इस दौरान यूरोप में साक्षरता दर भी बढ़ गई थी। लोग पहले अधिक अमीर हो चुके थे और उनके पास खाली समय भी रहने लगा था। प्रकाशकों की सटीक मार्केटिंग से भी उपन्यासों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिली। अब लेखक किसी रईस के संरक्षण से स्वतंत्र हो चुके थे और अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता का भरपूर इस्तेमाल कर सकते थे। इन सब कारणों से अठारहवीं सदी के यूरोप में उपन्यास पढ़ने वालों की संख्या में वृद्धि हुई।

प्रश्न:3 निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखें:

प्रश्न:a) उड़िया उपन्यास

उत्तर: नाटककार रामाशंकर रे ने 1877 – 78 में पहले उड़िया उपन्यास को धारावाहिक के रूप में पेश करना शुरु किया। लेकिन वह इस काम को पूरा नहीं कर पाये। उसके तीस साल के भीतर उड़ीसा से एक प्रमुख उपन्यासकार उभरा जिसका नाम था फकीर मोहन सेनापति (1843 – 1918)। उनके उपन्यास का शीर्षक है छ: माणौ आठौ गुंठो (1902)(1902) जिसका मतलब है छ: एकड़ और बत्तीस गट्ठे जमीन। इस उपन्यास में जमीन हड़पने की समस्या का जिक्र है।

प्रश्न:b) जेन ऑस्टिन द्वारा औरतों का चित्रण

उत्तर: जेन ऑस्टिन ने अपने जमाने की ग्रामीण औरतों के बारे में लिखा था। उनके उपन्यास की ग्रामीण महिला हमेशा अपने लिए एक योग्य वर की तलाश में लगी रहती है और कोई धनी आदमी ही योग्य वर हो सकता है।

प्रश्न:c) उपन्यास परीक्षा गुरु में दर्शाई गई नए मध्यवर्ग की तसवीर

उत्तर: उपन्यास ‘परीक्षा गुरु’ में मध्यवर्ग को ऐसी स्थिति में दिखाया गया है जहाँ परंपरा और आधुनिक जीवन शैली के बीच होने वाले टकराव को दिखाया गया है। इस उपन्यास के पात्र अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हैं फिर भी संस्कृत के अच्छे जानकार हैं। वे पाश्चात्य ड्रेस पहनते हैं लेकिन लंबे बाल भी रखते हैं। यह उपन्यास पाश्चात्य संस्कृति की अंधी नकल की समस्या को उजागर करता है।

प्रश्न:4 उन्नीसवीं सदी के ब्रिटेन में आए ऐसे कुछ सामाजिक बदलावों की चर्चा करें जिनके बारे में टॉमस हार्डी और चार्ल्स डिकेंस ने लिखा है।

उत्तर: उन्नीसवीं सदी में यूरोप में औद्योगिक युग आ चुका था। औद्योगीकरण से एक ओर नई उम्मीदें जगी थीं वहीं दूसरी ओर मजदूरों और शहरी जीवन की समस्याएँ भी खड़ी हुई थीं। मुनाफे की होड़ में हमेशा साधारण मजदूर ही मार खाता था। कई उपन्यासकारों ने नये शहरों में रहने वाले साधारण लोगों के इर्द गिर्द कहानी बुनी थी।

प्रश्न:5 उन्नीसवीं सदी के यूरोप और भारत दोनों जगह उपन्यास पढ़ने वाली औरतों के बारे में जो चिंता पैदा हुई उसे संक्षेप में लिखें।

उत्तर: महिलाएँ अक्सर चारदीवारी के अंदर रहती थीं। उपन्यास ने उनके लिए बाहरी दुनिया की ओर खुलने वाली खिड़की का काम किया। उपन्यास ने उन्हें अपने निजी दुनिया में पढ़ने का आनंद उठाने की आजादी दी। लेकिन महिलाओं को पढ़ने की आजादी नहीं थी। यह बात भारत में खासकर से लागू होती थी। इससे महिलाओं के प्रति भेदभाव का पता चलता है।

प्रश्न:6 औपनिवेशिक भारत में उपन्यास किस तरह उपनिवेशकारों और राष्ट्रवादियों, दोनों के लिए लाभदायक था?

उत्तर: उपनिवेशकारों के लिये उपन्यास से भारत के समाज और संस्कृति के बारे में अच्छी जानकारी मिल जाती थी। इससे भारत के बारे में उनकी समझ बेहतर हो पाती थी। उपन्यास के जरिये राष्ट्रवादी लोगों में राष्ट्रवादी भावनाओं का संचार कर सकते थे। कई राष्ट्रवादी नेता स्वयं भी कई उपन्यासों से गहरे तौर पर प्रभावित हुए थे।

प्रश्न:7 इस बारे में बताएँ कि हमारे देश में उपन्यासों में जाति के मुद्दे को किस तरह उठाया गया। किन्हीं दो उपन्यासों का उदाहरण दें और बताएँ कि उन्होंने पाठकों को मौजूदा सामाजिक मुद्दों के बारे में सोचने को प्रेरित करने के लिए क्या प्रयास किए।

उत्तर: कई लेखकों ने नीची जाति के लोगों के बारे में लिखना शुरु किया। उदाहरण के लिए सरस्वतीविजयम एक उपन्यास है जिसमें नम्बूदिरी और नायर जाति के बीच के टकराव को दिखाया गया है। केरल में नम्बूदिरी जाति के लोग जमींदार होते थे और उनके खेतों में नायर जाति के लोग काश्तकारी करते थे। इस उपन्यास में एक नायर लड़की की कहानी है। इस कहानी में वह एक रईस लेकिन मूर्ख नम्बूदिरी से शादी करने से मना कर देती है और बदले में एक पढ़े लिखे नायर से शादी करती है। फिर नव दंपति मद्रास चले जाते हैं जहाँ पति सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर लेता है। इस उपन्यास में इस बात के महत्व को बताया गया है कि कैसे शिक्षा के सहारे कोई सामाजिक व्यवस्था में ऊपर उठ सकता है। इसी तरह बंगाली उपन्यास तीताश एकटी नदीर नाम में मल्लाहों के जीवन के बारे में लिखा गया है।

प्रश्न:8 बताइए कि भारतीय उपन्यासों में एक अखिल भारतीय जुड़ाव का अहसास पैदा करने के लिए किस तरह की कोशिशें की गई।

उत्तर: जीवन के हर क्षेत्र के लोग उपन्यास पढ़ सकते थे। इससे किसी की भाषा के आधार पर लोगों में साझा पहचान की भावना घर करने लगी। उपन्यास से लोगों को देश के दूसरे हिस्सों की संस्कृति को समझने का मौका भी मिला। इस तरह से उपन्यास से एक अखिल भारतीय जुड़ाव का अहसास पैदा करने में काफी मदद मिली।
प्रश्न:1 उपन्यासों के आने से लेखकों को क्या फायदा हुआ?

उत्तर: पाठकों की बढ़ती संख्या के साथ लेखकों की आमदनी भी बढ़ने लगी। इससे लेखकों को अभिजात और कुलीन वर्ग के संरक्षण से आजादी मिली। लेखक अब अधिक स्वतंत्र होकर लिखने लगे। अब लेखक को इस बात की पूरी छूट थी कि वह अपनी लेखन शैली में मनचाहे बदलाव कर सकता था।

प्रश्न:2 उपन्यासों की लोकप्रियता क्यों बढ़ी?

उत्तर: उपन्यासों में चित्रित दुनिया अधिक वास्तविक होती थी और इसलिए विश्वसनीयता की सीमा में आती थी। उपन्यास पढ़ते समय पाठक आसानी से उपन्यास के पात्रों की दुनिया में चला जाता था। उपन्यास ने लोगों को एकांत में पढ़ने की आजादी दी। उपन्यास ने लोगों को इस बात की आजादी भी दी कि वे सार्वजनिक परिवेश में पढ़ सकें और कहानी पर चर्चा कर सकें। लोग अक्सर उपन्यास के चरित्रों के जीवन से अपने आप को आत्मसात कर लेते थे। इसलिये उपन्यास लोकप्रिय होने लगे।

प्रश्न:3 उपन्यासकारों ने महिलाओं के जीवन पर लिखना क्यों शुरु किया?

उत्तर: अठारहवीं सदी में मध्यम वर्ग अधिक संपन्न हो चुका था। महिलाओं को अब खाली समय मिलने लगा जिसका इस्तेमाल वे उपन्यास पढ़ने या लिखने में कर सकती थीं। इसलिये उपन्यासकारों ने महिलाओं के जीवन पर लिखना शुरु किया।

प्रश्न:4 हिंदी में उपन्यास की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर: भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का अग्रणी लेखक माना जाता है। उन्होंने अपने संपर्क में रहने वाले कई लेखकों और कवियों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया था कि वे अन्य भाषाओं के उपन्यासों का अनुवाद करें। देवकी नंदन खत्री की रचनाओं ने हिंदी में पाठकों का एक बड़ा वर्ग तैयार कर दिया। प्रेमचंद की रचनाओं के साथ ही हिंदी उपन्यास अपने सबसे अच्छे दौर में पहुँच चुका था। प्रेमचंद ने उर्दू में लिखना शुरु किया था और बाद में वे हिंदी पर आ गये।

प्रश्न:5 भारत में महिलाओं और युवाओं को उपन्यास पढ़ने से क्यों रोका जाता था?

उत्तर: कई लोग ऐसा मानते थे कि उपन्यास से लोगों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसलिये महिलाओं और बच्चों को अक्सर उपन्यास पढ़ने से रोका जाता था। कई लोग उपन्यास को छुपा कर रखते थे ताकि वे बच्चों के हाथों में न पड़ जाएँ। युवाओं को उपन्यास छुपकर पढ़ना पड़ता था। बूढ़ी औरतें अपने नाती पोतों की मदद से उपन्यास को सुनने का मजा लेती थीं।

Geography

प्रश्न:1संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु संसाधन कहलाती है जिसका इस्तेमाल हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये कर सकते हैं, जिसे बनाने के लिये हमारे पास प्रौद्योगिकी है और जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से मान्य है।

प्रश्न:2उत्पत्ति के आधार पर संसाधन के कौन कौन से प्रकार हैं?

उत्तर: जैव संसाधन और अजैव संसाधन

प्रश्न:3जैव संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन जैव संसाधन कहलाते हैं जो जैव मंडल से मिलते हैं। उदाहरण: मनुष्य, वनस्पति, मछलियाँ, प्राणिजात, पशुधन, आदि।

प्रश्न:4अजैव संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन अजैव संसाधन कहलाते है जो निर्जीव पदार्थों से मिलते हैं। उदाहरण: मिट्टी, हवा, पानी, धातु, पत्थर, आदि।

प्रश्न:5नवीकरण योग्य संसाधन का क्या मतलब है?

उत्तर: कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रिया द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को नवीकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, जीव जंतु, आदि।

प्रश्न:6अनवीकरण योग्य संसाधन का क्या मतलब है?

उत्तर: कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम किसी भी तरीके से नवीकृत या पुन: उत्पन्न नहीं कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को अनीवकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: जीवाष्म ईंधन, धातु, आदि।

प्रश्न:7अंतर्राष्ट्रीय संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन अंतर्राष्ट्रीय संसाधन कहलाते हैं जिनका नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है। इसे समझने के लिये समुद्री क्षेत्र का उदाहरण लेते हैं। किसी भी देश की तट रेखा से 200 किमी तक के समुद्री क्षेत्र पर ही उस देश का नियंत्रण होता है। उसके आगे के समुद्री क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय संसाधन की श्रेणी में आता है।

प्रश्न:8संभावी संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी भी देश या क्षेत्र में कुछ ऐसे संसाधन होते हैं जिनका उपयोग वर्तमान में नहीं हो रहा होता है। इन्हें संभावी संसाधन कहते हैं। उदाहरण: गुजरात और राजस्थान में उपलब्ध सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा।

प्रश्न:9भंडार से क्या समझते हैं?

उत्तर: कुछ ऐसे संसाधन होते हैं जो उपलब्ध तो हैं लेकिन उनके सही इस्तेमाल के लिये हमारे पास उचित टेक्नॉलोजी का अभाव है। ऐसे संसाधन को भंडार कहते हैं। उदाहरण: हाइड्रोजन ईंधन। अभी हमारे पास हाईड्रोजन ईंधन के इस्तेमाल लिये उचित टेक्नॉलोजी नहीं है।

प्रश्न:10सतत पोषणीय विकास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब विकास होने के क्रम में पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे और भविष्य की जरूरतों की अनदेखी न हो तो ऐसे विकास को सतत पोषणीय विकास कहते हैं।

प्रश्न:11भारत में संसाधन नियोजन के मुख्य बिंदु क्या हैं?

उत्तर: भारत में संसाधन नियोजन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

पूरे देश के विभिन्न प्रदेशों के संसाधनों की पहचान कर उनकी तालिका बनाना।
उपयुक कौशल, टेक्नॉलोजी और संस्थागत ढाँचे का सही इस्तेमाल करते हुए नियोजन ढ़ाँचा तैयार करना।
संसाधन नियोजन और विकास नियोजन के बीच सही तालमेल बैठाना।
प्रश्न:12संसाधनों का संरक्षण क्यों जरूरी है?

उत्तर: पृथ्वी पर संसाधन सीमित मात्रा में ही हैं। यदि उनके अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक नहीं लगती है तो भविष्य में मानव जाति के लिये कुछ भी नहीं बचेगा। फिर हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि हम संसाधनों का संरक्षण करें।

प्रश्न:13भू संसाधन के तौर पर पहाड़ पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भारत की कुल भूमि का 30% पहाड़ों के रूप में है। भारत की कई नदियों का उद्गम इन्हीं पहाड़ों में है। पहाड़ों के कारण ही बारहमासी नदियों में जल का प्रवाह बना रहता है। ये नदियाँ अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लाती हैं और मैदानों का निर्माण करती हैं। इन नदियों से मिलने वाला पानी हमारे खेतों की सिंचाई करता है। इन्हीं नदियों से हमें पीने का पानी भी मिलता है।

प्रश्न:14भू संसाधन के रूप में मैदान पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भारत की कुल भूमि का 43% मैदान के रूप में है। मैदान की भूमि समतल होती है और इसलिए अधिकतर आर्थिक क्रियाओं के लिये अनुकूल होती है। मैदान की जमीन खेती के लायक होती है इसलिये मैदानों में घनी आबादी होती है। मकान और कल कारखाने भी समतल भूमि में आसानी से बनाये जा सकते हैं।

प्रश्न:15भू उपयोग के प्रारूप को प्रभावित करने वाले भौतिक कारण कौन कौन से हैं?

उत्तर: जलवायु, भू आकृति, मृदा के प्रकार, आदि।

प्रश्न:16भू निम्नीकरण के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: भू निम्नीकरण के कुछ मुख्य कारण हैं, वनोन्मूलन, अति पशुचारण, खनन, जमीन का छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजन, आदि।

प्रश्न:17जलोढ़ मृदा के गुणों का वर्णन करें।

उत्तर: जलोढ़ मृदा में सिल्ट, रेत और मृत्तिका विभिन्न अनुपातों में पाई जाती है। जब हम नदी के मुहाने से ऊपर घाटी की ओर बढ़ते हैं तो जलोढ़ मृदा के कणों का आकार बढ़ता जाता है। जलोढ़ मृदा बहुत उपजाऊ होती है।

प्रश्न:18काली मृदा के गुणों का वर्णन करें।

उत्तर: काली मृदा में सूक्ष्म कणों की प्रचुरता होती है। इसलिए इस मृदा में नमी को लम्बे समय तक रोकने की क्षमता होती है। इस मृदा में कैल्सियम, पोटाशियम, मैग्नीशियम और चूना होता है। काली मृदा कपास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त होती है। इस मृदा में कई अन्य फसल भी उगाये जा सकते हैं।

प्रश्न:19मृदा अपरदन क्या है? यह किन कारणों से होता है?

उत्तर: मृदा के कटाव और उसके बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहते हैं। मृदा अपरदन के मुख्य कारण हैं; वनोन्मूलन, सघन कृषि, अति पशुचारण, भवन निर्माण और अन्य मानव क्रियाएँ।

प्रश्न:20मृदा अपरदन की रोकथाम कैसे हो सकती है?

उत्तर: मृदा अपरदन को रोकने के लिए मृदा संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए कई उपाय किये जा सकते हैं। पेड़ों की जड़ें मृदा की ऊपरी परत को बचाए रखती हैं। इसलिये वनरोपण से मृदा संरक्षण किया जा सकता है। ढ़ाल वाली जगहों पर समोच्च जुताई से मृदा के अपरदन को रोका जा सकता है। पेड़ों को लगाकर रक्षक मेखला बनाने से भी मृदा अपरदन की रोकथाम हो सकती है।
प्रश्न:1भारत में भूमि उपयोग के प्रारूप का वर्णन करें। वर्ष 1960 – 61 से वन के अंतर्गत क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि नहीं हुई, इसका क्या कारण है?

उत्तर:भारत में भू उपयोग का प्रारूप:

स्थाई चारागाहों के अंतर्गत भूमि कम हो रही है, जिससे पशुओं के चरने में समस्या उत्पन्न होगी। शुद्ध बोये गये क्षेत्र का हिस्सा 54% से अधिक नहीं; यदि हम परती भूमि के अलावे भी अन्य भूमि शामिल कर लें।

शुद्ध बोये जाने वाले क्षेत्र का प्रारूप एक राज्य से दूसरे राज्य में बदल जाता है। पंजाब में 80% क्षेत्र शुद्ध बोये जाने वाले क्षेत्र के अंतर्गत आता है, वहीं अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और अंदमान निकोबार द्वीप समूह में यह घटकर 10% रह जाता है।

गैरकानूनी ढ़ंग से जंगल की कटाई और अन्य गतिविधियों (सड़क और भवन निर्माण), आदि के कारण वन क्षेत्र बढ़ने की बजाय कम हो रहा है। दूसरी ओर जंगल के आस पास एक बड़ी आबादी रहती है जो वन संपदा पर निर्भर रहती है। इन सब कारणों से वनों में ह्रास हो रहा है।

प्रश्न:22. प्रौद्योगिक और आर्थिक विकास के कारण संसाधनों का अधिक उपभोग कैसे हुआ है?

उत्तर: प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास के कारण भारत के लोगों की आमदनी बढ़ी है। इससे हर चीज की मांग भी बढ़ी है। उत्पादों की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए और भी अधिक संसाधनों की जरूरत पड़ती है। इसलिए संसाधनों की मांग भी बढ़ी है।
प्रश्न:11. जैव विविधता क्या है? यह मानव जीवन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाले जंतुओं और पादपों की विविधता को उस क्षेत्र की जैव विविधता कहते हैं। जैव विविधता किसी भी पारितंत्र को बनाए रखने के लिए बहुत आवश्यक होती है। स्वस्थ पारितंत्र के अभाव में मानव जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसलिए जैव विविधता मानव जीवन के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रश्न:2विस्तारपूर्वक बताएँ कि मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास के कारक हैं?

उत्तर: मनुष्यों ने कृषि के प्रसार के लिए तेजी से जंगलों को कम किया है। इससे वनों का ह्रास हुआ है। संवर्धन वृक्षारोपण से एक ही तरह की प्रजाति को बढ़ावा दिया गया है जो पारितंत्र के लिए ठीक नहीं है। विकास परियोजनाओं के कारण भी वनों का ह्रास हुआ है। वनों के ह्रास होने से प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात की संख्या में भारी कमी आई है।
प्रश्न:1जैव विविधता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी भी क्षेत्र में पाए जाने वाले जंतुओं और पादपों की विविधता को उस क्षेत्र की जैव विविधता कहते हैं।

प्रश्न:2सामान्य प्रजाति किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस प्रजाति की जनसंख्या जीवित रहने के लिये सामान्य हो तो उस प्रजाति को सामान्य प्रजाति कहते हैं।

प्रश्न:3संकटग्रस्त प्रजाति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो प्रजाति लुप्त होने के कगार पर हो उसे संकटग्रस्त प्रजाति कहते हैं। उदाहरण: काला हिरण, मगरमच्छ, भारतीय जंगली गधा, भारतीय गैंडा, शेर-पूँछ वाला बंदर, संगाई (मणिपुरी हिरण), आदि।

प्रश्न:4सुभेद्य प्रजाति का क्या मतलब है?

उत्तर: जब किसी प्रजाति की जनसंख्या इतनी कम हो जाये कि उसके लुप्त होने की प्रबल संभावना हो जाये तो उसे सुभेद्य प्रजाति कहते हैं। उदाहरण: नीली भेड़, एशियाई हाथी, गंगा की डॉल्फिन, आदि।

प्रश्न:5संवर्धन वृक्षारोपण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब व्यावसायिक महत्व के किसी एक प्रजाति के पादपों का वृक्षारोपण किया जाता है तो इसे संवर्धन वृक्षारोपण कहते हैं।

प्रश्न:6संसाधनों के कम होने से समाज पर क्या प्रभाव पड़ते हैं?

उत्तर: संसाधनों के कम होने से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। कुछ चीजें इकट्ठा करने के लिये महिलाओं पर अधिक बोझ होता है; जैसे ईंधन, चारा, पेयजल और अन्य मूलभूत चीजें। इन संसाधनों की कमी होने से महिलाओं को अधिक काम करना पड़ता है। कुछ गाँवों में पीने का पानी लाने के लिये महिलाओं को कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना होता है।

प्रश्न:7भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: सरकार ने भारतीय वन्यजीवन (रक्षण) अधिनियम 1972 को लागू किया। इस अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों की एक अखिल भारतीय सूची तैयार की गई। बची हुई संकटग्रस्त प्रजातियों के शिकार पर पाबंदी लगा दी गई। वन्यजीवन के व्यापार पर रोक लगाया गया। वन्यजीवन के आवास को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई। कई राज्य सरकारों और केंद्र सरकारों ने नेशनल पार्क और वन्यजीवन अभयारण्य बनाए। कुछ खास जानवरों की सुरक्षा के लिए कई प्रोजेक्ट शुरु किये गये, जैसे प्रोजेक्ट टाइगर।

प्रश्न:8आरक्षित वन से क्या समझते हैं?

उत्तर: जिस वन में शिकार और मानव गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध हो उसे आरक्षित वन कहते हैं।

प्रश्न:9रक्षित वन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जिस वन में शिकार और मानव गतिविधियों पर प्रतिबंध हो लेकिन उस वन पर निर्भर रहने वाले आदिवासियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होती हो ऐसे वन को रक्षित वन कहते हैं।

प्रश्न:10ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: स्थानीय समुदाय द्वारा संरक्षण में भागीदारी का एक और उदाहरण है ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट। यह कार्यक्रम उड़ीसा में 1988 से चल रहा है। इस कार्यक्रम के तहत गाँव के लोग अपनी संस्था का निर्माण करते हैं और संरक्षण संबंधी क्रियाकलापों पर काम करते हैं। उसके बदले में सरकार द्वारा उन्हें कुछ वन संसाधनों के इस्तेमाल का अधिकार मिल जाता है।
प्रश्न:1नीचे दी गई सूचना के आधार पर स्थितियों को ‘जल की कमी से प्रभावित’ या ‘जल की कमी से अप्रभावित’ में वर्गीकृत कीजिए।

प्रश्न:a)अधिक वर्षा वाले क्षेत्र

उत्तर: जल की कमी से अप्रभावित

प्रश्न:b)अधिक वर्षा और अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र

उत्तर:जल की कमी से अप्रभावित

प्रश्न:c)अधिक वर्षा वाले परंतु अत्यधिक प्रदूषित जल क्षेत्र

उत्तर: जल की कमी से प्रभावित

प्रश्न:d)कम वर्षा और कम जनसंख्या वाले क्षेत्र

उत्तर: जल की कमी से प्रभावित

प्रश्न:2निम्नलिखित में से कौन सा वक्तव्य बहुउद्देशीय नदी परियोजनाओं के पक्ष में दिया गया तर्क नहीं है?

बहुउद्देशीय परियोजनाएँ उन क्षेत्रों में जल लाती हैं जहाँ जल की कमी होती है।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जल बहाव को नियंत्रित करके बाढ़ पर काबू पाती है।
बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।
बहुउद्देशीय परियोजनाएँ हमारे उद्योग और घरों के लिए विद्युत पैदा करती हैं।
उत्तर:बहुउद्देशीय परियोजनाओं से बृहत स्तर पर विस्थापन होता है और आजीविका खत्म होती है।

प्रश्न:3यहाँ कुछ गलत वक्तव्य दिए गए हैं। इसमें गलती पहचानें और दोबारा लिखें।

प्रश्न:a)शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों के सही उपयोग में मदद की है।

उत्तर: शहरों की बढ़ती संख्या, उनकी विशालता और सघन जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली ने जल संसाधनों का दोहन किया है।

प्रश्न:b)नदियों पर बाँध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछ्ट बहाव प्रभावित नहीं होता।

उत्तर:नदियों पर बांध बनाने और उनको नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक बहाव और तलछट बहाव बुरे तरीके से प्रभावित होता है।

प्रश्न:c)गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर भी किसान नहीं भड़के।

उत्तर: गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे के दौरान शहरी क्षेत्रों में अधिक जल आपूर्ति करने पर किसान भड़क गये।

प्रश्न:d)आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के बावजूद छत वर्षा जल संग्रहण लोकप्रिय हो रहा है।

उत्तर:आज राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर से उपलब्ध पेयजल के कारण छत वर्षा जल संग्रहण की लोकप्रियता घट रही है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न:1व्याख्या करें कि जल किस प्रकार नवीकरण योग्य संसाधन है?

उत्तर:जल अपने तीन रूपों; ठोस, द्रव और गैस; में बदलता रहता है। इसलिए जो जल भाप बनकर उड़ जाता है वही फिर वर्षा के रूप में वापस आ जाता है। इस प्रकार से जल एक नवीकरण योग्य संसाधन है।

प्रश्न:2जल दुर्लभता क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: किसी स्थान पर लंबे समय तक जल की कमी को जल दुर्लभता कहते हैं। बढ़ती हुई जनसंख्या, अतिदोहन और असमान वितरण जल दुर्लभता के मुख्य कारण हैं।
प्रश्न:2परंपरागत वर्षा जल संग्रहण की पद्धतियों को आधुनिक काल में अपना कर जल संरक्षण एवं भंडारण किस प्रकार किया जा रहा है।

उत्तर:आधुनिक काल में छत वर्षा जल संग्रहण काफी लोकप्रिय हो रहा है। छत की नालियों को जमीन पर या जमीन के नीचे रखी टंकी से जोड़ा जाता है। इससे वर्षा का जल नालियों द्वारा टंकियों में जमा होता है। टंकी के जल को परिष्कृत करने का बाद इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग टंकी के जल को जमीन में रिसने देते हैं ताकि भौमजल का नवीकरण हो सके। इस तरह से सालों भर जल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलती है।
प्रश्न:1जल की दुर्लभता के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: जल का अत्यधिक दोहन, अत्यधिक इस्तेमाल और विभिन्न सामाजिक समूहों में असमान वितरण।

प्रश्न:2आज अधिकांश नदियों और तालाबों का पानी प्रदूषित क्यों हो गया है?

उत्तर: नाले का पानी अक्सर बिना सुचारु उपचार किये ही नदियों और तालाबों में बहा दिया जाता है। इससे नदियों और तालाबों का पानी प्रदूषित हो चुका है।

प्रश्न:3बहुद्देशीय बांध परियोजनाओं से क्या लाभ हैं?

उत्तर: इस तरह की परियोजनाएँ कई जरूरतों को पूरा करती हैं। ये पानी के बहाव को काबू में करती हैं और बाढ़ की रोकथाम करती हैं। इन बांधों के पानी को नहरों के तंत्र के द्वारा दूर दराज के गांवों में भेजा जाता है ताकि वहाँ खेतों की सिंचाई हो सके। इनसे पीने के पानी की आपूर्ति भी की जाती है।

प्रश्न:4बहुद्देशीय बांध परियोजनाओं से क्या हानि है?

उत्तर: बड़े बांध बनाने के लिये कई एकड़ जमीन खाली करानी पड़ती है। बांध के बहाव क्षेत्र में आने वाली जमीन का एक बडा हिस्सा डूब जाता है। ऐसे क्षेत्र के लोगों को अपने जमीन से बेदखल होने को बाध्य होना पड़ता है। जमीन के जलमग्न होने से पर्यावरण पर भीषण समस्या आ जाती है।

प्रश्न:5वर्षाजल संग्रहण से जमा हुए जल से क्या किया जा सकता है?

उत्तर: वर्षाजल संग्रहण से जमा हुए जल को भविष्य में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे भूमिगत जल को रिचार्ज करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रश्न:1एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।

उत्तर: चाय एक पेय फसल है। चाय की पैदावार उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में अच्छी होती है और इसके लिए गहरी मिट्टी और सुगम जल निकास वाले ढ़लुवा क्षेत्रों की जरूरत पड़ती है। चाय के उत्पादन में गहन श्रम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न:2भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें।

उत्तर: गेहूँ एक खाद्य फसल है। पश्चिम उत्तर के गंगा सतलज के मैदान और दक्कन के काली मृदा वाले क्षेत्र भारत के मुख्य गेहूँ उत्पादक क्षेत्र हैं। गेहूँ के मुख्य उत्पादक हैं पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ भाग।

प्रश्न:3सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ।

उत्तर: सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:

हरित क्रांति
श्वेत क्रांति
भूमि सुधार
प्रश्न:4दिन प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम हो रही है। क्या आप इसके परिणामों की कल्पना कर सकते हैं?

उत्तर: दिन प्रतिदिन कृषि के अंतर्गत भूमि कम होने से खाद्यान्न की कमी हो जाएगी। भोजन एक मूलभूत आवश्यकता है जिसके बिना हमारी उत्तरजीविता संकट में पड़ जाएगी। भोजन की कमी से समाज और अर्थव्यवस्था पर बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए।
प्रश्न:1कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइए।

उत्तर: कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार को निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

पूरे देश में भूमि सुधार करना चाहिए।
वैज्ञानिकों को अधिक यील्ड वाले बीज विकसित करने चाहिए।
नहरों, सड़कों और कोल्ड स्टोरेज को अच्छी तरह से विकसित करना चाहिए।
मोबाइल फोन के जरिए किसानों तक समय रहते मौसम की जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रश्न:22. भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर: वर्तमान में पश्चिमी देशों के किसानों को अत्यधिक सहायिकी मिलने के कारण भारत के किसान उनसे प्रतिस्पर्धा करने में अक्षम साबित हो रहे हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत के कृषि उत्पाद की मांग बहुत कम है। साथ में रासायनिक उर्वरक और सिंचाई के अत्यधिक इस्तेमाल ने नई समस्याएँ खड़ी कर दी है जिससे कृषि उत्पाद घट रहा है। भारत में कृषि पर बहुत अधिक लोग निर्भर हैं इसलिए प्रति व्यक्ति कृषि उत्पाद और भी कम होने वाली है। कई विशेषज्ञों की राय में कार्बनिक कृषि से इस समस्या से निदान पाया जा सकता है।

प्रश्न:3चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

उत्तर: धान की खेती के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक की सालाना वर्षा की जरूरत होती है। लेकिन कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी इसे सिंचाई की समुचित व्यवस्था करके उगाया जा सकता है। चावल की खेती उत्तर के मैदानों, पूर्वोत्तर भारत, तटीय इलाकों और डेल्टा के क्षेत्रों में होती है। जलोढ़ मृदा वाले क्षेत्रों में चावल की पैदावार अच्छी होती है। लेकिन सिंचाई की समुचित व्यवस्था विकसित करने से चावल की खेती अन्य भागों में भी संभव है।


प्रश्न:1प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस प्रकार की खेती से केवल इतनी उपज होती हो कि उससे परिवार का पेट भर सके तो उसे प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि कहते हैं।

प्रश्न:2कर्तन दहन खेती से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि को कर्तन दहन खेती भी कहते हैं। ऐसा करने के लिये सबसे पहले जमीन के किसी टुकड़े की वनस्पति को काटा जाता और फिर उसे जला दिया जाता है। वनस्पति के जलाने से राख बनती है उसे मिट्टी में मिला दिया जाता है। उसके बाद फसल उगाई जाती है।

प्रश्न:3गहन जीविका कृषि क्या है?

उत्तर: जब कृषि बड़े भूभाग पर होती है और सघन आबादी वाले क्षेत्रों में होती है तो उसे गहन जीविका कृषि कहते हैं। इस प्रकार की कृषि में जैव रासायनिक निवेशों और सिंचाई का अत्यधिक इस्तेमाल होता है।

प्रश्न:4वाणिज्यिक कृषि क्या है?

उत्तर: जब खेती का मुख्य उद्देश्य पैदावार की बिक्री करना हो तो उसे वाणिज्यिक कृषि कहते हैं।

प्रश्न:5रोपण कृषि क्या है?

उत्तर: जब किसी एक फसल को एक बड़े क्षेत्र में उपजाया जाता है तो उसे रोपण कृषि कहते हैं।

प्रश्न:6भारत की मुख्य शस्य ऋतुओं के नाम लिखें।

उत्तर: भारत में तीन शस्य ऋतुएँ हैं; रबी, खरीफ और जायद।

प्रश्न:7रबी की फसल पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: रबी की फसल जाड़े में उगायी जाती है इसलिये इसे जा‌ड़े की फसल भी कहते हैं। रबी की बुआई अक्तूबर से दिसंबर की बीच होती है। इसकी कटाई अप्रिल से जून के बीच होती है। रबी की मुख्य फसलें हैं गेहूँ, बार्ली, मटर, चना और सरसों। पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश रबी की फसल के मुख्य उत्पादक हैं।

प्रश्न:8खरीफ की फसल पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: खरीफ की फसल गरमी में उगायी जाती है इसलिये इसे गरमी की फसल भी कहते हैं। खरीफ की बुआई जुलाई में होती है और कटाई सितंबर अक्तूबर में होती है। खरीफ की मुख्य फसलें हैं धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुअर, मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीं। धान के मुख्य उत्पादक हैं असम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा के तटवर्ती इलाके, आंध्र प्रदेश, तमिल नाडु, केरल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार। असम, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में एक साल में धान की तीन फसलें उगाई जाती हैं; जिन्हें ऑस, अमन और बोरो कहते हैं।

प्रश्न:9चावल की खेती के लिये कैसी जलवायु की आवश्यक्ता होती है?

उत्तर: धान की खेती के लिए जरूरी होते हैं उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक की सालाना वर्षा।

प्रश्न:10गन्ने की फसल के लिये कैसी जलवायु की जरूरत होती है।

उत्तर: गन्ने की फसल के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु, 21°-27°C के बीच का तापमान और 75 cm से 100 cm की वर्षा की जरूरत होती है।

प्रश्न:11भारत में रबर की खेती पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भूमध्यरेखीय क्षेत्र रबर की फसल के लिये सबसे उपयुक्त है। लेकिन उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में भी रबर की खेती होती है। रबर की खेती के लिए आर्द्र और नम जलवायु की जरूरत होती है जहाँ 200 सेमी से अधिक वर्षा होती हो और 25°C से अधिक तापमान रहता हो। भारत में रबर की खेती मुख्य रूप से केरल, तमिल नाडु, कर्णाटक, अंदमान निकोबार द्वीप समूह और मेघालय की गारो पहाड़ियों में होती है। रबर के उत्पादन में भारत का विश्व में पाँचवां स्थान है।

प्रश्न:12भूमि सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

उत्तर: जब जोत छोटी होती है तो कृषि प्रबंधन सही ढ़ंग से नहीं हो पाता है। पीढ़ी दर पीढ़ी जमीन के बँटवारे के कारण किसानों की जमीन छोटी होती चली गई। इसलिये भूमि सुधार की जरूरत महसूस की गई।

प्रश्न:13हरित क्रांति पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: हरित क्रांति की शुरुआत 1960 और 1970 के दशक में हुई। इस क्रांति का मुख्य उद्देश्य था कृषि उपज को बढ़ाना। इस क्रांति में नई टेक्नॉलोजी और अधिक उपज देने वाली बीजों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। हरित क्रांति के परिणाम सुखद आये; खासकर पंजाब और हरियाणा में।
प्रश्न:1लौह और अलौह खनिज में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: वैसे धात्विक खनिज जिनमें लोहा होता है लौह खनिज कहलाते हैं। उदाहरण: लौह अयस्क, मैगनीज, निकेल, कोबाल्ट, आदि। जिन धात्विक खनिजों में लोहा नहीं होता है उन्हें अलौह खनिज कहते हैं। उदाहरण: ताँबा, बॉक्साइट, टिन, आदि।

प्रश्न:2परंपरागत तथा गैर परंपरागत ऊर्जा साधन में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: ऊर्जा के जिन साधनों का इस्तेमाल लंबे समय से हो रहा है उन्हें परंपरागत ऊर्जा साधन कहते हैं। उदाहरण: कोयला, जलावन की लकड़ी, पेट्रोलियम, पनबिजली, आदि। ऊर्जा के जिन साधनों का इस्तेमाल अभी हाल ही में शुरु हुआ है उन्हें गैर परंपरागत ऊर्जा साधन कहते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, आदि।

प्रश्न:3खनिज क्या है?

उत्तर: खनिज एक प्राकृतिक रूप से विद्यमान समरूप पदार्थ है जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है।

प्रश्न:4आग्नेय तथा कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर: आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में छोटे जमाव शिराओं के रूप में और बड़े जमाव परत के रूप में पाये जाते हैं। इन शैलों में खनिजों का निर्माण तब होता है जब खनिज पिघली हुई अवस्था या गैसीय अवस्था में होता है। ऐसे में खनिज दरारों से होकर भूमि की ऊपरी सतह तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण: टिन, जस्ता, लेड, आदि।

प्रश्न:5हमें खनिजों के संरक्षण की क्यों आवश्यकता है?

उत्तर: खनिजों के बनने में करोड़ों वर्ष लग जाते हैं। जिस तेजी से हम खनिजों का इस्तेमाल कर रहे हैं उसकी तुलना में खनिजों का पुनर्रभरण की प्रक्रिया अत्यंत धीमी होती है। इसलिए खनिज संसाधन सीमित हैं और अनवीकरण योग्य हैं। इसलिए खनिजों का संरक्षन महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रश्न:1भारत में कोयले के वितरण का वर्णन कीजिए।

उत्तर: भारत में पाया जाने वाला कोयला दो मुख्य भूगर्भी युगों की चट्टानों की परतों में मिलता है। गोंडवाना कोयले का निर्माण बीस करोड़ साल पहले हुआ था। टरशियरी निक्षेप के कोयले का निर्माण लगभग साढ़े पाँच करोड़ साल पहले हुआ था। गोंडवाना कोयले के मुख्य स्रोत दामोदर घाटी में हैं। इस बेल्ट में झरिया, रानीगंज और बोकारो में कोयले की मुख्य खदाने हैं। गोदावरी, महानदी, सोन और वर्धा की घाटियों में भी कोयले के भंडार हैं। टरशियरी कोयला पूर्वोत्तर के मेघालय, असम, अरुणाचल और नागालैंड में पाया जाता है।

प्रश्न:2भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्जवल है। क्यों?

उत्तर: सौर ऊर्जा भविष्य के लिए नई उम्मीदें जगाता है। इससे ग्रामीण इलाकों में जलावन और उपलों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे जीवाष्म ईंधन के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। भारत दुनिया के उन देशों में से है जहाँ साल के अधिकतर महीनों में प्रचुर मात्रा में धूप मिलती है। इसलिए भारत में सौर ऊर्जा से बिजली का निर्माण आसानी से संभव हो सकता है। जब टेक्नॉलोजी सस्ती हो जाएगी तो यह संभव है कि सौर ऊर्जा ही हमारे लिए ऊर्जा का मुख्य साधन बन जाए।
प्रश्न:1 खनिज की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: प्राकृतिक रूप में उपलब्ध एक समरूप पदार्थ जिसकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है उसे खनिज कहते हैं।

प्रश्न:2 धात्विक खनिज से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जिन खनिजों से धातु प्राप्त होती है उन्हें धात्विक खनिज कहते हैं; जैसे लौह अयस्क, बॉक्साइट, आदि।

प्रश्न:3 अधात्विक खनिज से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:जिन खनिजों से अधातु प्राप्त होते हैं उन्हें अधात्विक खनिज कहते हैं; जैसे अभ्रक, चूना पत्थर, आदि।

प्रश्न:4 आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में खनिज किस रूप में मौजूद रहते हैं?

उत्तर: आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में खनिजों के छोटे जमाव शिराओं के रूप में पाये जाते हैं। इन चट्टानों में खनिजों के बड़े जमाव परत के रूप में पाये जाते हैं। जब खनिज पिघली हुई अवस्था या गैसीय अवस्था में होती है तो खनिजों का निर्माण आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में होता है। इस अवस्था में खनिज दरारों से होते हुए भूमि की ऊपरी सतह तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण: टिन, जस्ता, लेड, आदि।

प्रश्न:5 अवसादी चट्टानों में खनिज किस रूप में पाये जाते हैं?

उत्तर: इस प्रकार की चट्टानों में खनिज परतों में पाये जाते है। उदाहरण: कोयला, लौह अयस्क, जिप्सम, पोटाश लवण और सोडियम लवण, आदि।

प्रश्न:6 कुछ ऐसे खनिज के उदाहरण दें जो जलोढ़ जमाव के रूप में पाये जाते हैं।

उत्तर: सोना, चाँदी, टिन, प्लैटिनम, आदि।

प्रश्न:7 लौह अयस्क के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: अच्छी क्वालिटी के लौह अयस्क में लोहे की अच्छी मात्रा होती है। मैग्नेटाइट में 70% लोहा होता है इसलिए इसे सबसे अच्छी क्वालिटी का लौह अयस्क माना जाता है। अपने उत्तम चुम्बकीय गुण के कारण यह लोहा विद्युत उद्योग के लिये अच्छा माना जाता है। हेमाटाइट में 50 से 60% लोहा होता है। इसे मुख्य औद्योगिक लौह अयस्क माना जाता है।
प्रश्न:9 तांबा अयस्क पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: तांबा एक महत्वपूर्ण अयस्क है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली के तार, इलेक्ट्रॉनिक और रसायन उद्योग में होता है। मध्यप्रदेश की बालाघाट की खानों में भारत का 52% तांबा निकलता है। 48% शेअर के साथ राजास्थान तांबे का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। तांबे का उत्पादन झारखंड के सिंहभूम जिले में भी होता है।

प्रश्न:10 अलमुनियम अयस्क पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: अलमुनियम का इस्तेमाल कई चीजें बनाने में किया जाता है क्योंकि यह हल्का और मजबूत होता है। अलमुनियम के अयस्क को बॉक्साइट कहते हैं। बॉक्साइट के मुख्य भंडार अमरकंटक के पठार, मैकाल पहाड़ी और बिलासपुर कटनी के पठारी क्षेत्रों में हैं। बॉक्साइट का मुख्य उत्पादक उड़ीसा है जहाँ 45% बॉक्साइट का उत्पादन होता है। उड़ीसा में बॉक्साइट के मुख्य भंडार पंचपतमाली और कोरापुट जिले में हैं।

प्रश्न:11 खनन के दुष्प्रभाव का वर्णन करें।

उत्तर: खानों में काम करने वाले मजदूरों और आस पास रहेन वाले लोगों के लिये खनन एक घातक उद्योग है। खनिकों को कठिन परिस्थिति में काम करना पड़ता है। खान के अंदर नैसर्गित रोशनी नहीं मिल पाती है। खानों में हमेशा खान की छत गिरने, पानी भरने और आग लगने का खतरा रहता है। खान के आस पास के इलाकों में धूल की भारी समस्या होती है। खान से निकलने वाली स्लरी से सड़कों और खेतों को नुकसान पहुँचता है। इन इलाकों में घर और कपड़े ज्यादा जल्दी गंदे हो जाते हैं। खनिकों को सांस की बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। खनन वाले क्षेत्रों में सांस की बीमारी के केस अधिक होते हैं।

प्रश्न:12 बिटुमिनस कोयले पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: जो कोयला उच्च तापमान के कारण बना था और अधिक गहराई में दब गया था उसे बिटुमिनस कोयला कहते हैं। वाणिज्यिक इस्तेमाल के दृष्टिकोण से यह सबसे लोकप्रिय कोयला माना जाता है। बिटुमिनस कोयले को लोहा उद्योग के लिये आदर्श माना जाता है।

प्रश्न:13 पेट्रोलियम के क्या इस्तेमाल हैं?

उत्तर: कोयले के बाद, भारत का मुख्य ऊर्ज संसाधन है पेट्रोलियम। पेट्रोलियम का इस्तेमाल कई कार्यों में ऊर्जा के स्रोत के रूप में होता है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल कच्चे माल के रूप में कई उद्योगों में होता है। उदाहरण: प्लास्टिक, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आदि।

प्रश्न:14 परमाणु ऊर्जा से बिजली कैसे बनाई जाती है?

उत्तर: परमाणु की संरचना में बदलाव करके परमाणु ऊर्जा प्राप्त की जाती है। जब किसी परमाणु की संरचना में बदलाव किया जाता है तो इससे बहुत भारी मात्रा में ताप ऊर्जा निकलती है। इस ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली पैदा करने में किया जाता है। इस ऊर्जा से भाप बनाई जाती है जिससे टरबाइन चलाकर बिजली पैदा की जाती है।
प्रश्न:1 विनिर्माण क्या है?

उत्तर: कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद में बनाकर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहते हैं।

प्रश्न:2 उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन भौतिक कारक बताएँ।

उत्तर: आधारभूत ढ़ाँचा, कच्चा माल और जल की उपलब्धता

प्रश्न:3 औद्योगिक अवस्थिति को प्रभावित करने वाले तीन मानवीय कारक बताएँ।

उत्तर: श्रम, पूँजी और बाजार

प्रश्न:4 आधारभूत उद्योग क्या है? उदाहरण देकर बताएँ।

उत्तर: ये उद्योग दूसरे उद्योगों को कच्चे माल और अन्य सामान की आपूर्ति करते हैं। उदाहरण: लोहा इस्पात, तांबा प्रगलन, अलमुनियम प्रगलन, आदि।
प्रश्न:2 उद्योग पर्यावरण को कैसे प्रदूषित करते हैं?

उत्तर: उद्योग पर्यावरण को निम्न तरीकों से प्रदूषित करते हैं:

वायु प्रदूषण: कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के बढ़ते स्तर के कारण वायु प्रदूषण होता है। वायु में निलंबित कणनुमा पदार्थों से भी समस्या होती है। कारखानों की चिमनियों से धुँआ निकलता है। कुछ उद्योगों से हानिकारक रसायन भी निकलने का खतरा रहता है।

जल प्रदूषण: उद्योग से निकलने वाला कार्बनिक और अकार्बनिक कचरा और अपशिष्ट से जल प्रदूषण होता है। जल प्रदूषण के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार उद्योग हैं; कागज, लुगदी, रसायन, कपड़ा, डाई, पेट्रोलियम रिफाइनरी, चमड़ा उद्योग, आदि।

जल का तापीय प्रदूषण: जब थर्मल प्लांट से गरम पानी सीधा नदियों और तालाबों में छोड़ दिया जाता है तो जल का तापीय प्रदूषण होता है। इससे जल में रहने वाले सजीवों को बहुत नुकसान होता है।

रेडियोऐक्टिव अपशिष्ट: परमाणु ऊर्जा संयंत्र से निकलने वाले अपशिष्ट में रेडियोऐक्टिव पदार्थ होते हैं जिन्हें सही ढ़ंग से रखने की जरूरत होती है। रेडियोऐक्टिव पदार्थों में हल्की सी भी लीकेज होने से इंसानों और अन्य सजीवों को होने वाले नुकसान दूरगामी होते हैं।

ध्वनि प्रदूषण: ध्वनि प्रदूषण से बेचैनी, उच्च रक्तचाप और बहरापन की समस्या होती है। कारखाने के मशीन, जेनरेटर, इलेक्ट्रिक ड्रिल, आदि से काफी ध्वनि प्रदूषण होता है।
प्रश्न:1 विनिर्माण उद्योग क्या है?

उत्तर: जब कच्चे माल को मूल्यवान उत्पाद में बनाकर अधिक मात्रा में वस्तुओं का उत्पादन किया जाता है तो उस प्रक्रिया को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहते हैं।

प्रश्न:2 विनिर्माण उद्योग के महत्व क्या क्या हैं?

उत्तर: विनिर्माण उद्योग के महत्व निम्नलिखित हैं:

विनिर्माण उद्योग से कृषि को आधुनिक बनाने में मदद मिलती है।
विनिर्माण उद्योग से लोगों की आय के लिये कृषि पर से निर्भरता कम होती है।
विनिर्माण से प्राइमरी और सेकंडरी सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलती है।
इससे बेरोजगारी और गरीबी दूर करने में मदद मिलती है।
विनिर्माण द्वारा उत्पादित वस्तुओं से निर्यात बढ़ता है जिससे विदेशी मुद्रा देश में आती है।
किसी देश में बड़े पैमाने पर विनिर्माण होने से देश में संपन्नता आती है।
प्रश्न:3 उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक कौन कौन से हैं?

उत्तर: उद्योग की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कुछ कारक निम्नलिखित हैं:

कच्चे माल की उपलब्धता
श्रम की उपलब्धता
पूंजी की उपलब्धता
ऊर्जा की उपलब्धता
बाजार की उपलब्धता
आधारभूत ढ़ाँचे की उपलब्धता
प्रश्न:4 कृषि पर आधारित उद्योगों के उदाहरण दें।

उत्तर: कपास, ऊन, जूट, सिल्क, रबर, चीनी, चाय, कॉफी, आदि।

प्रश्न:5 खनिज पर आधारित उद्योगों के उदाहरण दें।

उत्तर: लोहा इस्पात, सीमेंट, अलमुनियम, पेट्रोकेमिकल्स, आदि।

प्रश्न:6 आधारभूत उद्योग से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो उद्योग अन्य उद्योगों को कच्चे माल और अन्य सामान की आपूर्ति करते हैं उन्हें आधारभूत उद्योग कहते हैं। उदाहरण: लोहा इस्पात, तांबा प्रगलन, अलमुनियम प्रगलन, आदि।

प्रश्न:7 सार्वजनिक उद्योग से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो उद्योग सरकारी एजेंसियों द्वारा प्रबंधित होते हैं उन्हें पब्लिक सेक्टर कहते हैं। उदाहरण: SAIL, BHEL, ONGC, आदि।

प्रश्न:8 को-ऑपरेटिव सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जिन उद्योगों का प्रबंधन कच्चे माल के निर्माता या सप्लायर या कामगार या दोनों द्वारा किया जाता है उन्हें को-ऑपरेटिव सेक्टर कहते हैं। इस प्रकार के उद्योग में संसाधनों को संयुक्त रूप से इकट्ठा किया जाता। इस सिस्टम में लाभ या हानि को अनुपातिक रूप से वितरित किया जाता है। मशहूर दूध को‌-ऑपरेटिव अमूल इसका बेहतरीन उदाहरण है। महाराष्ट्र का चीनी उद्योग इसका एक और उदाहरण है। लिज्जत पापड़ भी को-ऑपरेटिव सेक्टर का एक अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न:9 सूती कपड़ा उद्योग की क्या समस्याएँ हैं?

उत्तर: इस उद्योग की मुख्य समस्याएँ हैं बिजली की अनियमित सप्लाई और पुरानी मशीनें। इसके अलावा अन्य समस्याएँ हैं; श्रमिकों की कम उत्पादकता और सिंथेटिक रेशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा।

प्रश्न:10 जूट उद्योग मुख्य रूप से हुगली नदी के आस पास ही क्यों स्थित है?

उत्तर: हुगली घाटी के मुख्य गुण हैं; जूट उत्पादक क्षेत्रों से निकटता, सस्ता जल यातायात, रेल और सड़क का अच्छा जाल, जूट के परिष्करण के लिये प्रचुर मात्रा में जल और पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश से मिलने वाले सस्ते मजदूर। इसलिये जूट उद्योग मुख्य रूप से हुगली नदी के आस पास स्थित है।

प्रश्न:11 भारत का चीनी उद्योग दक्षिण की तरफ क्यों शिफ्ट कर रहा है?

उत्तर: हाल के वर्षों में चीनी उद्योग दक्षिण की ओर शिफ्ट कर रहा है। ऐसा विशेष रूप से महाराष्ट्र में हो रहा है। इस क्षेत्र में पैदा होने वाले गन्ने में शर्करा की मात्रा अधिक होती है। इस क्षेत्र की ठंडी जलवायु से गन्ने की पेराई के लिये अधिक समय मिल जाता है।

प्रश्न:12 स्टील के उत्पादन और खपत को किसी देश के विकास के सूचक के रूप में क्यों लिया जाता है?

उत्तर: लोहा इस्त्पात उद्योग एक आधारभूत उद्योग है क्योंकि लोहे का इस्तेमाल मशीनों को बनाने में होता है। इस कारण से स्टील के उत्पादन और खपत को किसी भी देश के विकास के सूचक के रूप में लिया जाता है।

प्रश्न:13 भारत के मोटरगाड़ी उद्योग पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: आज भारत में लगभग हर प्रकार की मोटरगाड़ी बनती है। 1991 की उदारवादी नीतियों के बाद कई मोटरगाड़ी कम्पनियों ने भारत में काम शुरु कर दिया। आज का भारत मोटरगाड़ी के लिए अच्छा बाजार बन गया है। अभी भारत में कार और मल्टी यूटिलिटी वेहिकल के 15 निर्माता, कॉमर्सियल वेहिकल के 9 निर्माता और दोपहिया वाहन के 15 निर्माता हैं। मोटरगाड़ी उद्योग के मुख्य केंद्र हैं दिल्ली, गुड़गाँव, मुम्बई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर, हैदराबाद, जमशेदपुर, बंगलोर, सानंद, पंतनगर, आदि।
प्रश्न:2 रेल परिवहन कहाँ पर अत्यधिक सुविधाजनक परिवहन साधन है तथा क्यों?

उत्तर: रेल परिवहन पूरे देश के लिये परिवहन का सुविधाजनक साधन है। लम्बी दूरी की यात्रा और बड़ी मात्रा में माल ढ़ोने के लिए रेल परिवहन बहुत उपयुक्त साबित होता है। एक रेलगाड़ी से एक ही बार में हजारों लोगों और भारी मात्रा में सामान को ढ़ोया जा सकता है। इससे प्रति इकाई संवहन का खर्च भी कम आता है।

प्रश्न:3 सीमांत सड़कों का महत्व बताएँ।

उत्तर: भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों के दुर्गम इलाकों को जोड़ने में सीमांत सड़के अहम भूमिका निभाती हैं। सीमांत सड़कों का सामरिक महत्व भी होता है क्योंकि इनके द्वारा सैनिकों और आयुधों को जरूरत पड़ने पर सीमा तक पहुँचाया जाता है।

प्रश्न:4 व्यापार से आप क्या समझते हैं? स्थानीय व अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अंतर स्पष्ट करें।

उत्तर: दो या अधिक पक्षों के बीच के व्यावसायिक गतिविधियों को व्यापार कहते हैं। देश के अंदर होने वाले व्यापार को स्थानीय व्यापार कहते हैं। दो देशों के बीच के व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कहते हैं।
प्रश्न:3 राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: राष्ट्रीय राजमार्ग भारत के सुदूर हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग देश की मुख्य सड़क प्रणाली बनाते हैं। इन्हें सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट द्वारा बनाया और मेंटेन किया जाता है।

प्रश्न:4 पाइपलाइन से क्या क्या सप्लाई हो सकता है?

उत्तर: पानी, पेट्रोलियम उत्पाद, प्राकृतिक गैस, स्लरी

प्रश्न:5 जल परिवहन किस तरह से लाभदायक है?

उत्तर: यह परिवहन का सबसे सस्ता साधन है। जल परिवहन भारी और विशाल सामान को ले जाने के लिये अत्यंत उपयुक्त है। इसमें ईंधन की कम खपत होती है और यह पर्यावरण हितैषी भी है।

प्रश्न:6 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को किसी देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाता है। क्यों?

उत्तर: किसी भी देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से उस देश की समृद्धि का आकलन किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को देश की अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर भी माना जाता है।

प्रश्न:7 व्यापार संतुलन से क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी भी देश के निर्यात और आयात में अंतर को व्यापार संतुलन कहते हैं। व्यापार संतुलन अनुकूल होने की स्थिति में आयात की तुलना में निर्यात अधिक होता है। व्यापार संतुलन प्रतिकूल होने की स्थिति में निर्यात की तुलना में आयात अधिक होता है।

Rajnnitik shashtra
प्रश्न 8: निम्नलिखित में किस देश को धार्मिक और जातीय पहचान के आधार पर विखंडन का सामना करना पड़ा? (बेल्जियम, भारत, यूगोस्लाविया, नीदरलैंड)

उत्तर: यूगोस्लाविया
प्रश्न 1: सामाजिक विभाजनों की राजनीति के परिणाम तय करने वाले तीन कारकों की चर्चा करें।

उत्तर: सामाजिक विभाजनों की राजनीति के परिणाम तीन कारकों पर निर्भर करते हैं जो निम्नलिखित हैं:

यह इस बात पर निर्भर करता है कि लोग अपनी सामाजिक पहचान को किस रूप में लेते हैं। यदि लोग अपने आप को विशिष्ट मानने लगते हैं तो ऐसे में सामाजिक विविधता को पचा पाना मुश्किल हो जाता है।

राजनेता किसी समुदाय की मांगों को किस तरह से पेश करते हैं।

किसी समुदाय की मांग पर सरकार की कैसी प्रतिक्रिया होती है। यदि किसी समुदाय की मांग को सही तरीके से माना जाता है तो इससे राजनीति सबल बनती है।

प्रश्न 2: सामाजिक अंतर कब और कैसे सामाजिक विभाजनों का रूप ले लेते हैं?

उत्तर: जब सामाजिक अंतर से लोगों में विशेष होने की भावना भरने लगती है तो इससे सामाजिक विभाजन का जन्म होता है। भारत में पुराने समय से ही सभी संसाधनों पर ऊँची जाति के लोगों का नियंत्रण रहा है। इसके अलावा सवर्णों ने दलितों और पिछड़ी जाति के लोगों को आर्थिक विकास का फायदा उठाने से रोक कर रखा। इससे देश में सामाजिक विभाजन बढ़ता चला गया।
प्रश्न 1: सामाजिक विविधता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी भी समाज में विविधता तभी आती है जब उस समाज में विभिन्न आर्थिक तबके, धार्मिक समुदायों, विभिन्न भाषाई समूहों, विभिन्न संस्कृतियों और जातियों के लोग रहते हैं।

प्रश्न 2: भारत एक विविधतापूर्ण देश है। स्पष्ट करें।

उत्तर: भारत देश विविधताओं का एक जीता जागता उदाहरण है। इस देश में दुनिया के लगभग सभी मुख्य धर्मों के अनुयायी रहते हैं। यहाँ हजारों भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग खान पान है, अलग-अलग पोशाक और तरह तरह की संस्कृति दिखाई देती है।

प्रश्न 3: यदि किसी सामाजिक समूह के लोग अपने आप को विशिष्ट मानने लगें तो इसका क्या परिणाम होता है?

उत्तर: लोग अपनी सामाजिक पहचान को किस रूप में लेते हैं इससे सामाजिक विविधता का राजनीति पर परिणाम तय होता है। यदि किसी खास समूह के लोग अपने को विशिष्ट मानने लगते हैं तो फिर वे सामाजिक विविधता को गले नहीं उतार पाते हैं।

प्रश्न 4: किसी समुदाय की मांग पर सरकार की प्रतिक्रिया का राजनीति पर क्या असर होता है?

उत्तर: यह इस पर भी निर्भर करता है कि किसी समुदाय की मांग पर सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है। यदि सरकार किसी समुदाय की मांग को उचित तरीके से मान लेती है तो फिर उस समुदाय की राजनीति सबल हो जाती है।
प्रश्न 1: आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के अलग अलग तरीके क्या हैं? इनमें से प्रत्येक का एक उदाहरण भी दें।

उत्तर:आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के निम्न तरीके हैं”

सरकार विभिन्न अंगों के बीच सत्ता की साझेदारी: उदाहरण: विधायिका और कार्यपालिका के बीच सत्ता की साझेदारी।
सरकार के विभिन्न स्तरों में सत्ता की साझेदारी: उदाहरण: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सत्ता की साझेदारी।
सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी: उदाहरण: सरकारी नौकरियों में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षण।
दबाव समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी: नये श्रम कानून के निर्माण के समय ट्रेड यूनियन के रिप्रेजेंटेटिव से सलाह लेना।
प्रश्न 2: भारतीय संदर्भ में सत्ता की हिस्सेदारी का एक उदाहरण देते हुए इसका एक युक्तिपरक और एक नैतिक कारण बताएँ।

उत्तर:युक्तिपरक कारण: सत्ता की साझेदारी से विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव कम करने में मदद मिलती है। इसलिये सामाजिक सौहार्द्र और शांति बनाए रखने के लिए सत्ता की साझेदारी जरूरी है। नैतिक कारण: लोकतंत्र की आत्मा को अक्षुण्ण रखना।
प्रश्न 1: सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब किसी शासन व्यवस्था में हर सामाजिक समूह और समुदाय की भागीदारी सरकार में होती है तो इसे सत्ता की साझेदारी कहते हैं।

प्रश्न 2: लोकतंत्र का मूलमंत्र क्या है?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी

प्रश्न 3: भारत में सरकार का चुनाव कैसे होता है?

उत्तर: भारत के नागरिक सीधे मताधिकार के माध्यम से अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं। लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि एक सरकार को चुनते हैं।

प्रश्न 4: भारत में चुनी हुई सरकार के मुख्य कार्य क्या होते हैं?

उत्तर: भारत में एक चुनी हुई सरकार रोजमर्रा का शासन चलाती है और नये नियम बनाती है या पुराने नियमों और कानूनों में संशोधन करती है।

प्रश्न 5: लोकतंत्र में यह क्यों आवश्यक होता है कि सत्ता का बँटवारा अधिक से अधिक लोगों के बीच हो?

उत्तर: किसी भी लोकतंत्र में हर प्रकार की राजनैतिक शक्ति का स्रोत प्रजा होती है। यह लोकतंत्र का एक मूलभूत सिद्धांत है। ऐसी शासन व्यवस्था में लोग स्वराज की संस्थाओं के माध्यम से अपने आप पर शासन करते हैं। एक समुचित लोकतांत्रिक सरकार में समाज के विविध समूहों और मतों को उचित सम्मान दिया जाता है। जन नीतियों के निर्माण में हर नागरिक की आवाज सुनी जाती है। इसलिए लोकतंत्र में यह जरूरी हो जाता है कि राजनैतिक सत्ता का बँटवारा अधिक से अधिक नागरिकों के बीच हो।

प्रश्न 6: समाज में सौहार्द्र और शांति बनाये रखने में सत्ता की साझेदारी की क्या भूमिका है?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी से विभिन्न सामाजिक समूहों में टकराव को कम करने में मदद मिलती है।

प्रश्न 7: सत्ता की साझेदारी के दो कारण कौन कौन से हैं?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी के दो कारण होते हैं। एक है समझदारी भरा कारण और दूसरा है नैतिक कारण।

प्रश्न 8: सत्ता की साझेदारी के मुख्य रूप क्या हैं?

उत्तर: सत्ता की साझेदारी के मुख्य रूप निम्नलिखित हैं:

शासन के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बँटवारा
शासन के विभिन्न स्तरों पर सत्ता का बँटवारा
सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा
विभिन्न प्रकार के दबाव समूहों के बीच सत्ता का बँटवारा
प्रश्न 9: न्यायपालिका का मुख्य कार्य क्या होता है?

उत्तर: न्यायपालिका का काम होता है यह देखना कि विधायिका और कार्यपालिका सभी नियमों का सही ढ़ंग से पालन कर रही है या नहीं।

प्रश्न 10: संसद का मुख्य काम क्या होता है?

उत्तर: नये कानून बनाना और पुराने कानूनों में संशोधन करना
प्रश्न 1: भारत की संघीय व्यवस्था में बेल्जियम से मिलती जुलती एक विशेषता और उससे अलग एक विशेषता को बताएँ।
उत्तर: बेल्जियम से मिलती जुलती विशेषता: सबको जोड़कर संघ बनाना।

बेल्जियम से अलग विशेषता: भारतीय संघ में राज्यों को कम स्वायत्तता मिली हुई है।

प्रश्न 2: शासन के संघीय और एकात्मक स्वरूपों में क्या-क्या मुख्य अंतर है? इसे उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करें।

उत्तर: शासन के एकात्मक स्वरूप में केंद्र सरकार बहुत शक्तिशाली होती है और शासन के निचले स्तरों को सही मायने में शक्ति नहीं मिलती। इस तरह के उदाहरण कई तानाशाही शासनों और राजतंत्रों में देखे जा सकते हैं; जैसे लीबिया, सउदी अरब, आदि।

प्रश्न 3: 1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के दो महत्वपूर्ण अंतरों को बताएँ।

उत्तर: 1992 के संविधान संशोधन के पहले स्थानीय शासन निकायों के पास संवैधानिक शक्ति नहीं होती थी। उस समय स्थानीय निकायों के चुनाव भी नियमित रूप से नहीं हो पाते थे। लेकिन 1992 के संशोधन के बाद चीजें बदल गई हैं।
प्रश्न 1: संघवाद किसे कहते हैं?

उत्तर: शासन की वह व्यवस्था जिसमें किसी देश की अवयव इकाइयों और एक केंद्रीय शक्ति के बीच सत्ता की साझेदारी हो उसे संघवाद कहते हैं।

प्रश्न 2: किसी भी संघीय व्यवस्था में सामान्य तौर पर सरकार के कितने स्तर होते हैं?

उत्तर: किसी भी संघीय व्यवस्था में सामान्य तौर पर सरकार के दो स्तर होते हैं। एक स्तर पर पूरे देश के लिये एक सरकार होती है और दूसरे स्तर पर राज्य की सरकारें होती हैं।

प्रश्न 3: संघीय व्यवस्था के मुख्य लक्षण क्या हैं?

उत्तर: संघीय व्यवस्था के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

इस प्रकार की शासन व्यवस्था में दो या दो से अधिक स्तर होते हैं।

शासन के विभिन्न स्तरों द्वारा नागरिकों के एक ही समूह पर शासन किया जाता है। हर स्तर का अधिकार क्षेत्र अलग होता है।

संविधान में सरकार के विभिन्न स्तरों के अधिकार क्षेत्रों के बारे में साफ साफ उल्लेख किया गया है। हर स्तर की सरकार का अस्तित्व और अधिकार क्षेत्र को संविधान से गारंटी मिली होती है।

प्रश्न 4: संघीय ढ़ाँचे के उद्देश्य क्या हैं?

उत्तर: संघीय ढ़ाँचे के दो उद्देश्य होते हैं। पहला उद्देश्य है देश की एकता को बल देना। दूसरा उद्देश्य है क्षेत्रीय विविधता को सम्मान देना।

प्रश्न 5: किसी आदर्श संघीय व्यवस्था के दो पहलू क्या हैं?

उत्तर: किसी भी आदर्श संघीय व्यवस्था के दो पहलू होते हैं; पारस्परिक विश्वास और साथ रहने पर सहमति।

प्रश्न 6: सबको साथ लाकर संघ बनाने से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: इस प्रकार की व्यवस्था में स्वतंत्र राज्य स्वत: एक दूसरे से मिलकर एक संघ का निर्माण करते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है कि वैसे राज्य अपनी स्वायत्तता बनाये रखने के साथ साथ अपनी सुरक्षा बढ़ा सकें। इस प्रकार की व्यवस्था में केंद्र की तुलना में राज्यों के पास अधिक शक्ति होती है। इस प्रकार की संघीय व्यवस्था के उदाहरण हैं; संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया।

प्रश्न 7: सबको जोड़कर संघ बनाने से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: इस प्रकार की संघीय व्यवस्था में एक बहुत बड़ी विविधता वाले क्षेत्रों को एक साथ रखने के लिए सत्ता की साझेदारी होती है। इस प्रकार की व्यवस्था में राज्यों की तुलना में केंद्र अधिक शक्तिशाली होता है। हो सकता है कुछ इकाइयों को अन्यों के मुकाबले अधिक शक्ति मिली हुई हो। उदाहरण के लिए; भारत में जम्मू कश्मीर को अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक शक्ति मिली हुई है। इस प्रकार की संघीय व्यवस्था के उदाहरण हैं: भारत, स्पेन, बेल्जियम, आदि।

प्रश्न 8: यूनियन लिस्ट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: इस लिस्ट में राष्ट्रीय महत्व के विषय आते हैं। कुछ विषयों पर पूरे देश में एक जैसी नीति की जरूरत होती है, इसलिए उन्हें यूनियन लिस्ट में रखा जाता है। ऐसे विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास होता है। यूनियन लिस्ट के कुछ विषय हैं; देश की सुरक्षा, विदेश नीति, बैंकिंग, सूचना प्रसारण और मुद्रा।

प्रश्न 9: स्टेट लिस्ट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जो विषय स्थानीय महत्व के होते हैं उन्हें स्टेट लिस्ट में रखा जाता है। ऐसे विषयों पर कानून बनाने का अधिकार राज्य के पास होता है। उदाहरण; पुलिस, व्यापार, वाणिज्य, कृषि और सिंचाई।

प्रश्न 10: साझा लिस्ट से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: इस लिस्ट को कॉनकरेंट लिस्ट भी कहते हैं। वैसे विषय जो साझा महत्व के होते हैं, इस लिस्ट में आते हैं। साझा लिस्ट के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र और राज्य दोनों के पास होता है। यदि केंद्र और राज्य द्वारा बनाये गये नियमों में टकराव की स्थिति होती है तो केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होता है। उदाहरण; शिक्षा, वन, ट्रेड यूनियन, विवाह, दत्तक अभिग्रहण, उत्तराधिकार, आदि।

प्रश्न 11: केंद्र शासित प्रदेश का मतलब समझाएँ।

उत्तर: भारतीय गणराज्य की कुछ इकाइयों का क्षेत्रफल इतना कम है कि उन्हें एक राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। कुछ अन्य कारणों से इन्हें किसी अन्य राज्य में मिलाया भी नहीं जा सकता है। इन इकाइयों के पास बहुत ही कम शक्ति होती है। इन्हें केंद्र शाषित प्रदेश कहते हैं। ऐसे क्षेत्रों के प्रशासन के लिए केंद्र सरकार के पास विशेष अधिकार होते हैं। उदाहरण; दिल्ली, चंडीगढ़, अंडमान निकोबार, आदि।

प्रश्न 1: एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें।

उत्तर: चाय एक पेय फसल है। चाय की पैदावार उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु में अच्छी होती है और इसके लिए गहरी मिट्टी और सुगम जल निकास वाले ढ़लुवा क्षेत्रों की जरूरत पड़ती है। चाय के उत्पादन में गहन श्रम की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 2: भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें।

>उत्तर: गेहूँ एक खाद्य फसल है। पश्चिम उत्तर के गंगा सतलज के मैदान और दक्कन के काली मृदा वाले क्षेत्र भारत के मुख्य गेहूँ उत्पादक क्षेत्र हैं। गेहूँ के मुख्य उत्पादक हैं पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ भाग।
प्रश्न 2: भारतीय कृषि पर वैश्वीकरण के प्रभाव पर टिप्पणी लिखें।

उत्तर: वर्तमान में पश्चिमी देशों के किसानों को अत्यधिक सहायिकी मिलने के कारण भारत के किसान उनसे प्रतिस्पर्धा करने में अक्षम साबित हो रहे हैं। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत के कृषि उत्पाद की मांग बहुत कम है। साथ में रासायनिक उर्वरक और सिंचाई के अत्यधिक इस्तेमाल ने नई समस्याएँ खड़ी कर दी है जिससे कृषि उत्पाद घट रहा है। भारत में कृषि पर बहुत अधिक लोग निर्भर हैं इसलिए प्रति व्यक्ति कृषि उत्पाद और भी कम होने वाली है। कई विशेषज्ञों की राय में कार्बनिक कृषि से इस समस्या से निदान पाया जा सकता है।

प्रश्न 3: चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

उत्तर: धान की खेती के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), अधिक आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक की सालाना वर्षा की जरूरत होती है। लेकिन कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी इसे सिंचाई की समुचित व्यवस्था करके उगाया जा सकता है। चावल की खेती उत्तर के मैदानों, पूर्वोत्तर भारत, तटीय इलाकों और डेल्टा के क्षेत्रों में होती है। जलोढ़ मृदा वाले क्षेत्रों में चावल की पैदावार अच्छी होती है। लेकिन सिंचाई की समुचित व्यवस्था विकसित करने से चावल की खेती अन्य भागों में भी संभव है।
प्रश्न 1: श्रम के लैंगिक विभाजन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब ऐसा माना जाता है कि कुछ कार्य महिलाओं के लिये और कुछ पुरुषों के लिये ही बने हैं तो ऐसी स्थिति को श्रम का लैंगिक विभाजन कहते हैं।

प्रश्न 2: नारीवादी आंदोलन का क्या मतलब है?

उत्तर: महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के उद्देश्य से होने वाले आंदोलन को नारीवादी आंदोलन कहते हैं।

प्रश्न 3: आधुनिक भारत में नौकरियों में महिलाओं की क्या स्थिति है?

उत्तर: आधुनिक भारत में नौकरियों में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। ऊँचे पदों पर महिलाओं की संख्या काफी कम है। कई मामलों में ये भी देखा गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कम वेतन मिलता है। जबकि पुरुषों की तुलना में महिलाएँ प्रतिदिन अधिक घंटे काम करती हैं।

प्रश्न 4: भारत की राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कैसा है?

उत्तर: भारत की राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। विधायिकाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत खराब है। महिला मंत्रियों की संख्या भी बहुत कम है।

प्रश्न 5: सांप्रदायिकता से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब राजनैतिक वर्ग द्वारा एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़वाया जाता है तो इसे सांप्रदायिकता या सांप्रदायिक राजनीति कहते हैं।

प्रश्न 6: धर्मनिरपेक्ष शासन का क्या मतलब है?

उत्तर: जिस शासन व्यवस्था में सभी धर्म को समान दर्जा दिया जाता है उसे धर्मनिरपेक्ष शासन कहते हैं।

प्रश्न 7: भारत सरकार किस स्थिति में धार्मिक मुद्दों में हस्तक्षेप करती है?

उत्तर: भारत का संविधान सरकार को धार्मिक मुद्दों में तब हस्तक्षेप करने की इजाजत देता है जब विभिन्न समुदायों में समानता बनाये रखने के लिये यह जरूरी हो जाये।

प्रश्न 8: जातिगत विभाजन किन कारणों से कम होते जा रहे हैं?

उत्तर: कई सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के कारण जातिगत विभाजन धूमिल पड़ते जा रहे हैं। आर्थिक विकास, तेजी से होता शहरीकरण, साक्षरता, पेशा चुनने की आजादी और गाँवों में जमींदारों की कमजोर स्थिति के कारण जातिगत विभाजन कम होते जा रहे हैं।

प्रश्न 9: भारत की राजनीति में जाति का क्या महत्व है?

उत्तर: भारत की राजनीति में जाति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है। किसी भी चुनाव क्षेत्र में उम्मीदवार का चयन उस क्षेत्र की जातीय समीकरण के आधार पर होता है।

प्रश्न 10: जाति के आधार पर आर्थिक विषमता पर टिप्पणी करें।

उत्तर: जाति के आधार पर आर्थिक विषमता अभी भी देखने को मिलती है। उँची जाति के लोग सामन्यतया संपन्न होते है। पिछड़ी जाति के लोग बीच में आते हैं, और दलित तथा आदिवासी सबसे नीचे आते हैं। सबसे निम्न जातियों में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक है।
प्रश्न 1:दबाव समूह और आंदोलन राजनीति को किस तरह प्रभावित करते हैं?

उत्तर: दबाव समूह और आंदोलन निम्न तरीकों से राजनीति को प्रभावित करते हैं:

अपने मुद्दे के लिए जन समर्थन जुटाकर।
विरोध प्रदर्शन द्वारा सरकार पर दबाव बनाकर।
लॉबी बनाकर।
प्रश्न 2:दबाव समूहों और राजनीतिक दलों के आपसी संबंधों का स्वरूप कैसा होता है, वर्णन करें।

उत्तर: सामान्यतया दबाव समूहों और राजनीतिक दलों के बीच कोई प्रत्यक्ष रिश्ता नहीं होता है। वे अक्सर एक दूसरे के विपरीत मान्यता रखते हैं। लेकिन दोनों के बीच संवाद और मोलभाव चलता रहता है। राजनीतिक दलों के कई नए नेता दबाव समूहों से आते हैं।

प्रश्न 3:दबाव समूहों कि गतिविधियाँ लोकतांत्रिक सरकार के कामकाज में कैसे उपयोगी होती हैं?

उत्तर: दबाव समूहों की गतिविधियों से लोकतंत्र की जड़े मजबूत करने में मदद मिलती है। ऐसे समूह शक्तिशाली बिजनेस लॉबी के खिलाफ आम जनता की आवाज बुलंद करने में मदद करते हैं। कई बार दबाव समूहों का क्रियाकलाप विध्वंसकारी लगता है लेकिन इन क्रियाकलापों से शक्तिशाली शासक वर्ग और व्यवसायी वर्ग तथा शक्तिहीन आम नागरिक के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलती है।

प्रश्न 4:दबाव समूह क्या हैं? कुछ उदाहरण बताइए।

उत्तर: वैसे संगठन जो सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं उन्हें हम दबाव समूह कहते हैं। एक दबाव समूह किसी राजनीतिक दल से भिन्न होता है क्योंकि यह जनता के लिए जवाबदेह नहीं होता। दबाव समूह की शासन में कोई भागीदारी नहीं होती है। नर्मदा बचाओ आंदोलन, ट्रेड यूनियन, वकीलों का संगठन, आदि दबाव समूह के उदाहरण हैं।

प्रश्न 5:दबाव समूह और राजनीतिक दल में क्या अंतर है?

उत्तर: राजनीतिक दल सीधे रूप से जनता के लिए जवाबदेह होते हैं जबकि दबाव समूह के साथ ऐसा नहीं है। एक राजनीतिक दल या तो सत्ता में होता है या सत्ता हासिल करने के लिए काम करता है, लेकिन दबाव समूह के साथ ऐसा नहीं है।

प्रश्न 6:जो संगठन विशिष्ट सामाजिक वर्ग जैसे मजदूर, कर्मचारी, शिक्षक और वकील आदि के हितों को बढ़ावा देने की गतिविधियाँ चलाते हैं उन्हें ..................कहा जाता है।

उत्तर: वर्ग विशेष के हित समूह
प्रश्न 1:राजनैतिक पार्टी से क्या समझते हैं?

उत्तर: जो संगठन राजनैतिक प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी करते हैं उन्हें राजनैतिक पार्टी कहते हैं। राजनैतिक पार्टियाँ चुनाव लड़ती हैं ताकि सरकार बना सकें।

प्रश्न 2:दबाव समूह की परिभाषा बतायें।

उत्तर: जो संगठन राजनैतिक प्रक्रिया में परोक्ष रूप से भागीदारी करते हैं उन्हें दबाव समूह कहते हैं। सरकार बनाना या सरकार चलाना कभी भी दबाव समूह का लक्ष्य नहीं होता है।

प्रश्न 3:दबाव समूह का निर्माण कैसे होता है?

उत्तर: दबाव समूह का निर्माण तब होता है जब समान पेशे, रुचि, महात्वाकांछा या मतों वाले लोग किसी समान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये एक मंच पर आते हैं।

प्रश्न 4:जन आंदोलन के कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तर: नर्मदा बचाओ आंदोलन, सूचना के अधिकार के लिये आंदोलन, शराबबंदी के लिये आंदोलन, नारी आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन।

प्रश्न 5:वर्ग विशेष के हित समूह पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: जो दबाव समूह किसी खास वर्ग या समूह के हितों के लिये काम करते हैं उन्हें वर्ग विशेष के समूह कहते हैं। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, बिजनेस एसोसियेशन, प्रोफेशनल (वकील, डॉक्टर, शिक्षक, आदि) के एसोसियेशन। ऐसे समूह किसी खास वर्ग की बात करते हैं; जैसे मजदूर, शिक्षक, कामगार, व्यवसायी, उद्योगपति, किसी धर्म के अनुयायी, आदि। ऐसे समूहों का मुख्य उद्देश्य होता है अपने सदस्यों के हितों को बढ़ावा देना और उनके हितों की रक्षा करना।

प्रश्न 6:जन सामान्य के हित समूह पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: जो दबाव समूह सर्व सामान्य जन के हितों की रक्षा करते हैं उन्हें जन सामान्य के हित समूह कहते हैं। ऐसे दबाव समूह का उद्देश्य होता है पूरे समाज के हितों की रक्षा करना। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, स्टूडेंट यूनियन, एक्स आर्मीमेन एसोसियेशन, आदि।

प्रश्न 7:दबाव समूह अपने लिये जन समर्थन जुटाने के लिये क्या-क्या करते हैं?

उत्तर: इसके लिये वे तरह तरह के रास्ते अपनाते हैं, जैसे कि जागरूकता अभियान, जनसभा, पेटीशन, आदि। कई दबाव समूह जनता का ध्यान खींचने के लिए मीडिया को भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 8:दबाव समूह का राजनैतिक पार्टियों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: दबाव समूह और आंदोलन राजनैतिक पार्टियों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। किसी भी ज्वलंत मुद्दे पर उनका एक खास राजनैतिक मत और सिद्धांत होता है। हो सकता है कि कोई दबाव समूह किसी राजनैतिक पार्टी से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भी जुड़ा हुआ हो।

प्रश्न 9:दबाव समूह के समर्थन में कुछ तर्क लिखिए।

उत्तर: कुछ विचारकों का मानना है कि लोकतंत्र की जड़ें जमाने के लिये सरकार पार दबाव डालना उचित होता है। ऐसा माना जाता है कि राजनैतिक पार्टियाँ सत्ता हथियाने के चक्कर में अक्सर जनता के असली मुद्दों की अवहेलना करती हैं। उनको नींद से जगाने का काम दबाव समूह का ही होता है।

प्रश्न 10:दबाव समूह के विरोध में तर्क लिखिए।

उत्तर: कई विचारक ऐसा मानते हैं कि दबाव समूह को सुनने में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ऐसे समूह समाज के एक छोटे से वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि लोकतंत्र किसी छोटे वर्ग के संकीर्ण हितों के लिये काम नहीं करता बल्कि पूरे समाज के हितों के लिये काम करता है। राजनैतिक पार्टी को तो जनता को जवाब देना होता है लेकिन दबाव समूह पर यह बात लागू नहीं होती है। इसलिए कुछ विचारकों का मानना है कि दबाव समूह की सोच का दायरा बड़ा नहीं हो सकता है।

part 4 economics
प्रश्न:4 विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिये किस प्रमुख मापदण्ड का प्रयोग करता है? इस मापदण्ड की, अगर कोई हैं, तो सीमाएँ क्या हैं?

उत्तर: विश्व बैंक विभिन्न वर्गों का वर्गीकरण करने के लिये प्रति व्यक्ति आय का प्रयोग करता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जीवन के स्तर को ऊँचा उठाने के लिये केवल आय ही काफी नहीं है। कई अन्य कारक विकास को प्रभावित करते हैं; जैसे शिशु मृत्यु दर, साक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाएँ, आदि। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि विश्व बैंक द्वारा प्रयोग किये गये मापदण्ड की अपनी सीमाएँ हैं।

प्रश्न:5 विकास मापने का यू.एन.डी.पी. का मापदण्ड किन पहलुओं में विश्व बैंक के मापदण्ड से अलग है?

उत्तर: यू.एन.डी.पी. जीवन स्तर को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों का प्रयोग भी करता है। यह अन्य कारको; जैसे शिशु मृत्यु दर, स्वास्थ्य सेवाएँ, स्कूल में नामांकण, आदि को उनका महत्व देता है। इस तरह से यू.एन.डी.पी. उन सभी कारकों की विवेचना करता है जिससे लोगों के जीवन स्तर पर प्रभाव पड़ता है और लोगों की उत्पादकता बढ़ती है।

प्रश्न:6 हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं? इनके प्रयोग करने की क्या कोई सीमाएँ हैं? विकास से जुड़े अपने उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जब भी हमें एक बड़े सैम्पल का आकलन करना होता है तो एक एक आँकड़े का आकलन मुश्किल होता है। इसलिए ऐसी स्थिति में औसत का प्रयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। औसत की अपनी सीमाएँ भी होती हैं। कई बार औसत से सही चित्र सामने नहीं आता है। उदाहरण के लिए; प्रति व्यक्ति आय से आय के वितरण का पता नहीं चल पाता है। इससे जनसंख्या में गरीबों के अनुपात का पता नहीं चलता है। भारत में पिछले दो दशकों में प्रति व्यक्ति आय में जबरदस्त वृद्धि हुई है लेकिन इसके साथ ही गरीबों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है।

प्रश्न:7 प्रतिव्यक्ति आय कम होने पर भी केरल का मानव विकास क्रमांक पंजाब से ऊँचा है। इसलिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिलकुल नहीं है। राज्यों की तुलना के लिये इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए।

उत्तर: सबसे धनी राज्य होने के बावजूद पंजाब में केरल की तुलना में शिशु मृत्यु दर अधिक है। पंजाब की तुलना में केरल में कक्षा 1 से 4 में निवल उपस्थिति दर अधिक है। इससे पता चलता है कि मानव विकास सूचकांक में केरल एक बेहतर राज्य है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिलकुल नहीं है। राज्यों की तुलना के लिये इसका उपयोग करना चाहिए लेकिन इसे अन्य मापदण्डों के परिप्रेक्ष्य में देखना जरूरी है।

प्रश्न:8 भारत के लोगों द्वारा ऊर्जा के किन स्रोतों का प्रयोग किया जाता है? ज्ञात कीजिए। अब से 50 वर्ष पश्चात क्या संभावनाएँ हो सकती हैं?

उत्तर: ग्रामीण क्षेत्रों में जलावन की लकड़ी ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। शहरी क्षेत्रों में रसोई के ईंधन के रूप में एलपीजी का इस्तेमाल अधिकतर घरों में होता है। इसके अलावा वाहनों के लिये पेट्रोलियम उत्पादों का इस्तेमाल होता है। आज से पचास वर्ष बाद जलावन की लकड़ी मिलना कठिन हो जायेगा क्योंकि तेजी से वनोन्मूलन हो रहा है। जीवाश्म ईंधन भी तेजी से घट रहा है। इसलिए हमें किसी वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत को जल्दी ही विकसित करना होगा। गाँवों में गोबर गैस इसका एक अच्छा समाधान हो सकता है। सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा से पूरे देश की ऊर्जा की जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

प्रश्न:9 धारणीयता का विषय विकास के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: विकास का मतलब केवल वर्तमान को खुशहाल बनाना ही नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिये एक बेहतर भविष्य बनाना भी है। धारणीयता का मतलब होता है ऐसा विकास करना जो आने वाले कई वर्षों तक सतत चलता रहे। यह तभी संभव होता है जब हम संसाधन का दोहन करने की बजाय उनका विवेकपूर्ण इस्तेमाल करते हैं।

प्रश्न:10 धरती के पास सब लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन एक भी व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह कथन विकास की चर्चा में कैसे प्रासंगिक है? चर्चा कीजिए।

उत्तर: यह मशहूर कथन महात्मा गांधी का है। हम जानते हैं कि धरती के पास इतने संसाधन हैं कि वे हमारे जीवन में कम नहीं पड़ने वाले। लेकिन हमें अपनी जिंदगी के आगे भी सोचना होगा और भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिये सोचना होगा। यदि हम प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करते रहेंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिये कुछ नहीं बचेगा। इसलिए हमें अपने लोभ पर काबू पाना होगा और प्रकृति से केवल उतना ही लेने की आदत डालनी होगी जितना जरूरी है।

प्रश्न:11 पर्यावरण में गिरावट के कुछ ऐसे उदाहरणों की सूची बनाइए जो आपने अपने आसपास देखे हों।

उत्तर: मेरे शहर में हरियाली का नामोनिशान नहीं है। यहाँ की हवा इतनी प्रदूषित है कि मेरे आस पड़ोस में रहने वाले अधिकतर लोगों को सांस की बीमारी है। मेरे शहर से होकर बहने वाली नदी किसी गंदे नाले की तरह लगती है। इससे पता चलता है कि मेरे शहर के पर्यावरण में कितनी गिरावट आई है।
प्रश्न:1 विकास के लक्ष्य भिन्न भिन्न लोगों के लिये कैसे भिन्न भिन्न हो सकते हैं?

उत्तर: विकास के लक्ष्य विभिन्न लोगों के लिये विभिन्न हो सकते हैं। हो सकता है कि कोई बात किसी एक व्यक्ति के लिये विकास हो लेकिन दूसरे के लिये नहीं। उदाहरण के लिये किसी नये हाइवे का निर्माण कई लोगों के लिये विकास हो सकता है। लेकिन जिस किसान की जमीन उस हाइवे निर्माण के लिये छिन गई हो उसके लिये तो वह विकास कतई नहीं हो सकता।

प्रश्न:2 प्रति व्यक्ति आय से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्रति व्यक्ति आय: जब देश की कुल आय को उस देश की जनसंख्या से भाग दिया जाता है तो जो राशि मिलती है उसे हम प्रति व्यक्ति आय कहते हैं।

प्रश्न:3 सकल राष्ट्रीय उत्पाद का क्या मतलब है?

उत्तर: किसी देश में उत्पादित कुल आय को सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहते हैं। सकल राष्ट्रीय उत्पाद में हर प्रकार की आर्थिक क्रिया से होने वाली आय की गणना की जाती है।

प्रश्न:4 सकल घरेलू उत्पाद का क्या मतलब है?

उत्तर: किसी देश में उत्पादित कुल आय में से निर्यात से होने वाली आय को घटाने के बाद जो बचता है उसे सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी कहते हैं।

प्रश्न:5 शिशु मृत्यु दर से आप क्या समझते हैं? इसे विकास के लक्ष्य में क्यों रखा जाता है?

उत्तर: हर 1000 जन्म में एक साल की उम्र से पहले मरने वाले बच्चों की संख्या को शिशु मृत्यु दर कहते हैं। यह आँकड़ा जितना कम होगा वह विकास के दृष्टिकोण से उतना ही बेहतर माना जायेगा। शिशु मृत्यु दर एक महत्वपूर्ण पैमाना है। इससे किसी भी क्षेत्र में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता का पता चलता है।

प्रश्न:6 प्रच्छन्न बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं? शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से उदाहरण देकर व्याख्या कीजिए।

उत्तर: जब एक श्रमिक काम तो कर रहा होता है लेकिन उसकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति को प्रच्छन्न बेरोजगारी कहते हैं। ऐसी स्थिति में एक श्रमिक किसी खास काम में इसलिये लगा रहता है क्योंकि उसके पास उससे बेहतर करने को कुछ भी नहीं होता। इस स्थिति में श्रमिक के पास कोई विकल्प नहीं होता बल्कि किसी खास काम को करने की मजबूरी होती है। गाँवों में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि जिस खेत पर काम करने के लिए एक दो लोग काफी होते हैं उसी खेत पर कई लोग काम करते रहते हैं। अतिरिक्त लोग उस खेत पर इसलिए काम कर रहे होते हैं क्योंकि उनके पास करने को कोई बेहतर विकल्प नहीं होता है। यह छुपी हुई बेरोजगारी का एक जीवंत उदाहरण है। शहरी क्षेत्रों में किसी दुकान पर आपको कई भाई काम करते मिल जाएँगे। उनको अलग अलग दुकान चलाना चाहिए लेकिन सही अवसर के अभाव में उन्हें एक ही दुकान पर काम करने को बाध्य होना पड़ता है।

प्रश्न:7 खुली बेरोजगारी और प्रच्छन्न बेरोजगारी के बीच विभेद कीजिए।

उत्तर: जब किसी आदमी के पास कोई काम नहीं होता है तो इसे बेरोजगारी कहते हैं। जब कोई आदमी काम तो कर रहा होता है लेकिन अपनी क्षमता का सदुपयोग नहीं कर पाता है तो इसे प्रच्छन्न बेरोजगारी कहते हैं। लेकिन जब किसी आदमी को काम बिल्कुल भी नहीं मिलता तो इसे खुली बेरोजगारी कहते हैं।

प्रश्न:8 “भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में तृतीयक क्षेत्रक कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभा रहा है।“ क्या आप इससे सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।

उत्तर: यह कथन आंशिक रूप से सही है। जब हम 1973 से 2000 तक तृतीय सेक्टर की वृद्धि को देखते हैं तो कह सकते हैं कि इस सेक्टर में वृद्धि हुई है। 2003 के जीडीपी में तृतीयक सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक है; जो इस सेक्टर के अच्छे पहलू को दिखाता है। लेकिन जब हम रोजगार के अवसरों के आँकड़े देखते हैं तो पता चलता है कि तृतीयक सेक्टर ने रोजगार के उतने अवसर नहीं बनाए जो जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी से मैच कर पाये। इसलिए हम कह सकते हैं कि रोजगार मुहैया कराने के मामले में तृतीयक सेक्टर में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

प्रश्न:9 “भारत में सेवा क्षेत्रक दो विभिन्न प्रकार के लोग नियोजित करते हैं।“ ये लोग कौन हैं?

उत्तर: सर्विस सेक्टर में नियमित और अनियमित श्रमिक काम करते हैं। जो श्रमिक अपने हुनर और मानसिक क्षमताओं का प्रयोग करता है और सामान्यत: सीधे रूप से नियोजित होता है उसे नियमित श्रमिक कहते हैं। जो श्रमिक ऐसी सेवा प्रदान करता है जिसमें मानसिक क्षमताओं की खास भूमिका न हो उसे अनियमित या अनौपचारिक श्रमिक कहते हैं। अंशकालीन रूप से नियोजित श्रमिकों को भी अनियमित श्रमिक की श्रेणी में रखा जाता है। उदाहरण: एक ठेले का मालिक जो किसी प्रकाशक के यहाँ कागज पहुँचाता है एक अनियमित श्रमिक होता है।

प्रश्न:10 “असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का शोषण किया जाता है।“ क्या आप इस विचार से सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।

उत्तर: यह सही है कि असंगठित क्षेत्रक में श्रमिकों का शोषण किया जाता है। असंगठत क्षेत्रक में काम करने वालों को कम मेहनताना मिलता है और उन्हें लंबे समय के लिये काम करना पड़ता है। उन्हें छुट्टियाँ शायद ही मिलती हैं। उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी नहीं मिलती है।

प्रश्न:11 आर्थिक गतिविधियाँ रोजगार की परिस्थितियों के आधार पर कैसे वर्गीकृत की जाती हैं?

उत्तर: रोजगार की परिस्थितियों के आधार पर आर्थिक गतिविधियों को संगठित और असंगठित क्षेत्रक में बाँटा गया है।
प्रश्न:13 नरेगा 2005 के उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: ‘काम के अधिकार’ के लक्ष्यों को पूरा करने के उद्देश्य से नरेगा 2005 को लागू किया गया था। इस प्रोग्राम के तहत ग्रामीण क्षेत्र के हर परिवार के एक व्यक्ति को साल में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है। यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन के लिये प्रतिबद्ध है। इस कार्यक्रम का एक और उद्देश्य है गाँवों से महानगरों की ओर होने वाले भारी पलायन को रोकना।
प्रश्न:1 किसी भी अर्थव्यवस्था को किन किन क्षेत्रक या सेक्टर में बाँटा जाता है?

उत्तर: किसी भी अर्थव्यवस्था को तीन सेक्टर में बाँटा जाता है:

प्राथमिक या प्राइमरी सेक्टर
द्वितीयक या सेकंडरी सेक्टर
तृतीयक या टरशियरी सेक्टर
प्रश्न:2 प्राइमरी सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: प्राइमरी सेक्टर में होने वाली आर्थिक क्रियाओं में मुख्य रूप से प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से उत्पादन किया जाता है। उदाहरण: कृषि और कृषि से संबंधित क्रियाकलाप, खनन, आदि।

प्रश्न:3 सेकंडरी सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: सेकंडरी सेक्टर में प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण प्रणाली के द्वारा अन्य रूपों में बदला जाता है। उदाहरण: लोहा इस्पात उद्योग, ऑटोमोबाइल, आदि।

प्रश्न:4 टरशियरी सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: टरशियरी सेक्टर में होने वाली आर्थिक क्रियाओं के द्वारा अमूर्त वस्तुएँ प्रदान की जाती हैं। उदाहरण: यातायात, वित्तीय सेवाएँ, प्रबंधन सलाह, सूचना प्रौद्योगिकी, आदि।

प्रश्न:5 विभिन्न सेक्टर की पारस्परिक निर्भरता को समझाइए।

उत्तर: इस पारस्परिक निर्भरता को समझने के लिए बिस्किट का उदाहरण लेते हैं। एक बिस्किट का निर्माण मैदा, पानी, चीनी और कृत्रिम फ्लेवर से होता है। मैदा के उत्पादन के लिये गेहूँ की खेती जरूरी है। चीनी के लिये गन्ने का उत्पादन जरूरी है। मैदा और चीनी को बिस्किट फैक्ट्री तक पहुँचाने के लिये ट्रकों की जरूरत पड़ती है। खेतों और कारखानों में मजदूरों और मैनेजरों की जरूरत होती है। किसान को गेहूँ और गन्ना उपजाने के लिये खाद और बीज की जरूरत पड़ती है। इस उत्पादन के हर चरण पर पैसे का लेनदेन होता है। उस लेनदेन का हिसाब रखने के लिये एकाउंटेंट की जरूरत होती है। इस उदाहरण से विभिन्न सेक्टर की पारस्परिक निर्भरता का पता चलता है।

प्रश्न:6 संगठित सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: संगठित सेक्टर में सारी गतिविधियाँ एक सिस्टम से होती हैं, और यहाँ कानून का पालन होता है। संगठित सेक्टर में श्रमिकों के अधिकारों को महत्व दिया जाता है।

प्रश्न:7 श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता क्यों है?

उत्तर: सामाजिक सुरक्षा की जरूरत को समझने के लिये एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए कि किसी परिवार के कमाने वाले मुखिया की मृत्यु हो जाती है या वह काम करने में अक्षम हो जाता है। ऐसे में उसके परिवार पर यह संकट आ जाता है कि उसका आगे का गुजारा कैसे होगा। यदि ऐसे श्रमिक के परिवार को सरकार की नीतियों के अनुसार प्रोविडेंट फंड और बीमे की रकम मिल जाती है तो फिर उस परिवार को इतना सहारा मिल जाता है कि वह दोबारा अपनी जिंदगी शुरु कर सके। यदि ऐसे श्रमिक के परिवार को उसके हाल पर छोड़ दिया जाये तो उसका भविष्य अंधेरे में पड़ जायेगा।

प्रश्न:8 असंगठित सेक्टर से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: असंगठित सेक्टर में कोई सिस्टम नहीं होता है और ज्यादातर कानून की अवहेलना की जाती है। छोटे दुकानदार, छोटे कारखाने वाले अक्सर इस श्रेणी में आते हैं। ऐसे संस्थानों में काम करने वाले श्रमिकों को मूलभूत अधिकार भी नहीं मिलते हैं।

प्रश्न:9 पब्लिक सेक्टर का क्या मतलब है?

उत्तर: जो कम्पनियाँ सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चलाई जाती हैं वे सार्वजनिक सेक्टर या पब्लिक सेक्टर में आती हैं।

प्रश्न:10 प्राइवेट सेक्टर का क्या मतलब है?

उत्तर: जिन कम्पनियों को निजी लोगों द्वारा चलाया जाता है वे प्राइवेट सेक्टर में आती हैं। उदाहरण: टाटा, इंफोसिस, गोदरेज, मारुति, आदि।
प्रश्न:9 विकास में ऋण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: विकास में ऋण की अहम भूमिका होती है। ज्यादातर व्यवसायों को आगे बढ़ाने के लिये कभी न कभी ऋण की आवश्यकता पड़ती है। ऋण के बिना किसी छोटी कम्पनी को एक बड़ी कम्पनी में नहीं बदला जा सकता है। ऋण के अभाव में किसान खेती को बड़े पैमाने पर नहीं कर सकते हैं। ज्यादातर लोग ऋण के बिना घर या कार नहीं खरीद सकते हैं। घर और कार की मांग का अर्थव्यवस्था के विकास पर बड़ा असर पड़ता है।
प्रश्न:1 वस्तु विनिमय प्रणाली से क्या समझते हैं?

उत्तर: विनिमय की वह प्रणाली जिसमें लोग एक चीज के बदले दूसरी चीज की लेन देन करते हैं, वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाती है।

प्रश्न:2 वस्तु विनिमय प्रणाली के लिये जरूरी शर्त क्या होती है? समझाईए।

उत्तर: वस्तु विनिमय के लिये जरूरी शर्त है ‘आवश्यकताओं का दोहरा संयोग’। यह वस्तु विनिमय प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी भी होती है। मान लीजिए कि आप अपने गिटार के बदले एक बैंजो चाहते हैं। ऐसी स्थिति में आपको किसी ऐसे व्यक्ति को ढ़ूँढ़ना होगा जिसे अपने बैंजो के बदले एक गिटार चाहिए। ऐसे दो लोगों को ढ़ूँढ़ना; जो एक दूसरे की चीज की अदल बदल करना चाहते हैं; आसान काम नहीं है।

प्रश्न:3 मुद्रा से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: मुद्रा एक माध्यम है जिसके जरिये हम किसी भी चीज को विनिमय द्वारा प्राप्त कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में मुद्रा के बदले में हम जो चाहें खरीद सकते हैं।

प्रश्न:4 भारत में करेंसी नोट कौन सी संस्था जारी करती है?

उत्तर: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

प्रश्न:5 मुद्रा से क्या लाभ हैं?

उत्तर: मुद्रा के लाभ निम्नलिखित हैं:

यह आवश्यकताओं के दोहरे संयोग से छुटकारा दिलाती है।
यह कम जगह लेती है और इसे कहीं भी लाना ले जाना आसान होता है।
मुद्रा को आसानी से कहीं भी और कभी भी विनिमय के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्रश्न:6 बैंक में जमा को डिमांड डिपॉजिट क्यों कहते हैं?

उत्तर: बैंक खाते में जमा राशि को जरूरत (डिमांड) के हिसाब से निकाला जा सकता है इसलिए इन खातों के निक्षेप (डिपॉजिट) को डिमांड डिपॉजिट कहते हैं।

प्रश्न:7 चेक पर क्या क्या लिखा होता है?

उत्तर: चेक पर भुगतान पाने वाले व्यक्ति या संस्था का नाम और भुगतान की जाने वाली राशि को लिखना होता है। उसके बाद चेक जारी करने वाले व्यक्ति को चेक के नीचे हस्ताक्षर करना होता है।

प्रश्न:8 केडिट का क्या मतलब होता है?

उत्तर: बैंक द्वारा कर्ज में जो राशि दी जाती है उसे क्रेडिट कहते हैं।

प्रश्न:9 डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तर: क्रेडिट और डेबिट कार्ड आधुनिक जमाने में काफी प्रचलित हैं। डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड एक जैसे दिखते हैं। डेबिट कार्ड द्वारा कोई भी व्यक्ति अपने खाते में जमा राशि में पेमेंट कर सकता है। क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करते समय आप बैंक से कर्ज लेते हैं। दोनों तरह के कार्डों से भुगतान इलेक्ट्रानिक रूप में होता है और किसी को कैश ढ़ोने की जरूरत नहीं होती है।

प्रश्न:10 कोलैटरल या समर्थक ऋणाधार से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: अधिकतर मामलों में कर्ज लेने के लिये किसी चल या अचल सम्पत्ति को बैंक के पास गिरवी रखना होता है। इसे कोलैटरल कहते हैं। कोलैटरल के कुछ उदाहरण हैं; जमीन, घर, गाड़ी, मवेशी, बैंक में जमा राहि, बीमा पॉलिसी, सोना, आदि। यदि कोई व्यक्ति कर्ज का भुगतान समय पर नहीं कर पाता है तो कर्ज देने वाले संस्थान को यह अधिकार होता है कि वह कोलैटरल को बेचकर कर्ज की राशि वसूल ले।

प्रश्न:11 कर्ज के मुख्य स्रोत कौन कौन से हैं?

उत्तर: कर्ज के दो मुख्य स्रोत हैं:

औपचारिक सेक्टर: इस सेक्टर में बैंक और को-ऑपरेटिव सोसाइटी आती है।
अनौपचारिक सेक्टर: इस सेक्टर में साहुकार, दोस्त, रिश्तेदार, व्यापारी और जमींदार आते हैं।
प्रश्न:12 सेल्फ हेल्प ग्रुप पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: सेल्फ हेल्प ग्रुप का प्रचलन अभी नया नया है। इस प्रकार के ग्रुप में लोगों का एक छोटा समूह होता है; जैसे 15 से 20 सदस्य। सभी सदस्य अपने जमा किये हुए पैसे को इकट्ठा करते हैं। उस जमा रकम में से किसी भी सदस्य को छोटी राशि का कर्ज दिया जाता है। फिर वह सेल्फ हेल्प ग्रुप उस राशि पर ब्याज लेता है। इस तरह के कर्ज के सिस्टम को माइक्रोफिनांस कहते हैं।
प्रश्न:1 वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: आधुनिक काल में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था जिस तरह आपस में जुड़ी हुई हैं उसे वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन कहते हैं। उदाहरण के लिये माइक्रोसॉफ्ट को लीजिए। माइक्रोसॉफ्ट का हेडक्वार्टर अमेरिका में है। इस कंपनी के सॉफ्टवेअर के कुछ अंश भारत और अन्य कई देशों में बनते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेअर पूरी दुनिया में इस्तेमाल किये जाते हैं।

प्रश्न:2 भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?

उत्तर: जब भारत आजाद हुआ था तब यह एक गरीब देश था और यहाँ पर निजी पूँजी न के बराबर थी। उस समय स्थानीय उद्योग को संरक्षण की जरूरत थी ताकि वह पनप सके। इसलिए भारत में विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाये गये थे। जब स्थितियों में सुधार हुआ और भारत एक अच्छे बाजार में बदल गया तब सरकार ने अवरोधकों को हटाने का निर्णय लिया।

प्रश्न:3 श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को कैसे मदद करेगा?

उत्तर: श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को श्रमिकों की संख्या पर नियंत्रण रखने में मदद करेगा। फिर कोई भी कम्पनी श्रमिकों की मौसमी माँग के हिसाब से नियोजन कर सकती है या उन्हें काम से हटा सकती है। कम माँग की स्थिति में किसी भी कम्पनी को अतिरिक्त श्रमिकों को ढ़ोने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे कम्पनियों के मुनाफे में भी सुधार होगा।
प्रश्न:4 वैश्वीकरण ने किस तरह रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद की है?

उत्तर: वैश्वीकरण से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। नई नई कम्पनियों के आने से रोजगार के नये नये अवसर उत्पन्न हुए हैं। इसके कारण कई नये आर्थिक केंद्रों का विकास हुआ है, जैसे; गुड़गाँव, चंडीगढ़, पुणे, हैदराबाद, आदि।

प्रश्न:5 वैश्वीकरण से हमारी जीवनशैली पर क्या असर पड़ा है?

उत्तर: वैश्वीकरण का प्रभाव लोगों की जीवनशैली पर भी पड़ा है। 1990 के पहले तक लोग दो जोड़ी पैंट शर्ट में गुजारा कर लेते थे। अब तो लोगों के पास हर मौके के लिये अलग अलग ड्रेस होते हैं। पहले जींस की पैंट बहुत कम लोगों के पास हुआ करती थी। अब अधिकांश लोग जींस की पैंट का इस्तेमाल करने लगे हैं। लोगों का खान पान भी बदल गया है। अब मैगी के नूडल्स इस तरह से खरीदे जाते हैं जैसे महीने का राशन खरीदा जाता हो।
प्रश्न:1 वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: आधुनिक समय में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था आपस में जुड़ी हुई है। विश्व की अर्थव्यवस्था के इस परस्पर जुड़ाव को वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन कहते हैं।

प्रश्न:2 सिल्क रूट क्या है?

उत्तर: चीन का रेशम जिस रास्ते से अरब और फिर पश्चिम के देशों और अन्य देशों में जाता था उस रास्ते को सिल्क रूट कहा जाता था।
प्रश्न 1: बाजार में नियमों तथा विनियमों की आवश्यकता क्यों पड़ती है? कुछ उदाहरणों के द्वारा समझाएँ।

उत्तर: नियमों तथा विनियमों की मदद से बाजार सही ढ़ंग से काम करता है। किसी भी व्यवसाय का मुख्य लक्ष्य होता है मुनाफे को अधिक से अधिक करना। नियम और कानून से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मुनाफे के फेर में ग्राहक के जीवन स्तर से कोई समझौता न हो। हम अपने चारों ओर खाने की चीजों में मिलावट के कई उदाहरण देख सकते हैं। दूधवाला, मिठाईवाला, आदि अक्सर मिलावटी सामान बेचते हैं। सही नियम को लागू करके ही इस गलत आदत को रोका जा सकता है।

प्रश्न 2: भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत किन कारणों से हुई? इसके विकास के बारे में पता लगाएँ।

उत्तर: भारत के व्यवसायियों में गलत काम करने की पुरानी परंपरा रही है; जैसे मिलावट करना, जमाखोरी और कम वजन तौलना। 1960 के दशक से ही कई उपभोक्ता संघों का जन्म हुआ। उन्होंने जागरूकता अभियान चलाया और ग्राहकों की सुरक्षा के लिये लड़ाई लड़ी। इस लंबे संघर्ष के परिणामस्वरूप 1986 में कोपरा को लागू किया गया।

प्रश्न 3: दो उदाहरण देकर उपभोक्ता जागरूकता की जरूरत का वर्णन करें।

उत्तर: ज्यादातर लोग न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को देखने की जहमत भी नहीं उठाते और दुकानदार जितनी रकम माँगता है उतनी दे देते हैं। अपने पड़ोस के दुकानदार पर विश्वास करना एक अच्छी आदत हो सकती है लेकिन एमआरपी को चेक करना भी उतना ही जरूरी होता है। कई लोग तो दवा के पैक पर एक्सपायरी डेट भी नहीं देखते हैं। इससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट हो जाता है कि उपभोक्ता में जागरूकता की जरूरत है।
प्रश्न 5: उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 के निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी?

उत्तर: शोषण के खिलाफ उपभोक्ताओं की सुरक्षा के कारण ही कोपरा 1986 को लागू किया गया।

प्रश्न 6: अपने क्षेत्र के बाजार में जाने पर उपभोक्ता के रूप में अपने कुछ कर्तव्यों का वर्णन करें।

उत्तर: किसी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में जाने से पहले मुझे वहाँ यह देखना चाहिए कि पार्किंग की सुविधा है या नहीं। मुझे वहाँ पर अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता के बारे में भी पता करना चाहिए। मुझे यह देखना चाहिए कि एक्सपायरी डेट के बाद वाला कोई उत्पाद शेल्फ पर तो नहीं रखा है। बिल अदा करने से पहले उसके सही होने की जाँच करनी चाहिए।

प्रश्न 7: मान लीजिए, आप शहद की एक बोतल और बिस्किट का एक पैकेट खरीदते हैं। खरीदते समय आप कौन सा लोगो या शब्द चिह्न देखेंगे और क्यों?

उत्तर: शहद की बोतल पर मैं एगमार्क का लोगो देखूँगा। इस निशान से यह पता चलता है कि शहद को पैक करने से पहले खाद्य पदार्थ से संबंधित सुरक्षा के नियमों का पालन किया गया था।

प्रश्न 8: भारत में उपभोक्ताओं को समर्थ बनाने के लिये सरकार द्वारा किन कानूनी मानदंडों को लागू करना चाहिए?

उत्तर: भारत में उपभोक्ताओं को समर्थ बनाने के लिये सरकार ने 1986 में कोपरा को लागू किया। उसके बाद भारत ने कई स्तरों पर उपभोक्ता कोर्ट की स्थापना की ताकि लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।



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